HSLC Guru

Class 9 Hindi Elective Chapter 6 Question Answer | चिकित्सा का चक्कर | ASSEB

असम बोर्ड (ASSEB) की कक्षा 9 की हिंदी ऐच्छिक पाठ्यपुस्तक आलोक भाग-1 का छठा पाठ “चिकित्सा का चक्कर” हिंदी के प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य लेखक बेढब बनारसी द्वारा लिखा गया एक रोचक और मनोरंजक व्यंग्य निबंध है। इस पाठ में लेखक ने अपनी बीमारी के बहाने भारत में प्रचलित विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों और चिकित्सकों पर तीखा और बुद्धिमत्तापूर्ण व्यंग्य किया है। पाठ पढ़ते हुए पाठक हँसते-हँसते समाज की विसंगतियों से भी परिचित होते हैं। यहाँ इस पाठ के पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर और अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न दिए गए हैं।


पाठ-परिचय (Summary)

“चिकित्सा का चक्कर” बेढब बनारसी द्वारा लिखा गया एक हास्य-व्यंग्य प्रधान निबंध है। इस पाठ में लेखक ने अपनी पेट दर्द की बीमारी को केंद्र में रखकर भारत में प्रचलित विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों — एलोपैथिक, होमियोपैथिक, आयुर्वेदिक, यूनानी, प्राकृतिक और आध्यात्मिक — का हास्यपूर्ण वर्णन किया है। कहानी की शुरुआत होती है जब लेखक एक दिन अत्यधिक रसगुल्ले खाने के बाद रात को पेट दर्द से परेशान हो जाते हैं। वे अपने पास रखी अमृतधारा — जिसे वे “औषधियों का राजा और रोगों का रामबाण” मानते हैं — का सेवन करते हैं, परंतु कोई फायदा नहीं होता।

इसके बाद लेखक विभिन्न डॉक्टरों और चिकित्सकों के पास जाते हैं और हर जगह उन्हें एक अलग अनुभव होता है। सरकारी डॉक्टर चूहानाथ कातर जी पिचकारी से इंजेक्शन देते हैं। वैद्य जी पालकी में सवार होकर आते हैं और वायु प्रकोप बताते हुए गर्म तेल की मालिश और काढ़ा पीने की सलाह देते हैं। हकीम साहब नब्ज देखकर यूनानी दवाई देते हैं। प्राकृतिक चिकित्सक गीली मिट्टी का लेप करके धूप में बैठने की सलाह देते हैं। इन सबके अतिरिक्त लेखक के परिचित और रिश्तेदार भी तरह-तरह के नुस्खे सुझाते रहते हैं। अंततः लेखक दो सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, पर यह स्पष्ट नहीं होता कि किस इलाज से ठीक हुए।

इस पाठ का मुख्य उद्देश्य पाठकों का मनोरंजन करना और साथ ही चिकित्सकों, चिकित्सा पद्धतियों तथा बीमार व्यक्ति के आसपास जमा होने वाले तथाकथित शुभचिंतकों पर व्यंग्य करना है। “प्रेमियों को जो मजा प्रेमिकाओं की आँख देखने में आता है, शायद वैसा ही डॉक्टरों को मरीजों की जीभ देखने में आता है” — जैसे वाक्य इस पाठ की व्यंग्य-शैली के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। पूरा पाठ मध्यवर्गीय भारतीय जीवन का एक जीवंत चित्र प्रस्तुत करता है और हास्य के माध्यम से सामाजिक टिप्पणी करता है।

Summary in English: “Chikitsa Ka Chakkar” (The Medical Round-About) is a humorous satirical essay by Bedhab Banarasi. The author narrates how he falls ill with stomach pain after eating too many rasgullas and then goes through a series of encounters with various types of medical practitioners — an allopathic government doctor, an Ayurvedic vaidya, a Unani hakim, a naturopath, and even an ojha (faith healer). Each practitioner offers a different diagnosis and treatment, often with amusing results. Well-meaning friends and relatives add to the comic chaos by suggesting their own remedies. The author uses sharp wit and gentle satire to comment on the confused state of medical practice in India and the nature of the human beings who surround a sick person. The essay is a delightful blend of humour and social observation, reflecting the everyday reality of middle-class Indian life in the early twentieth century. The author recovers in two weeks, though it remains amusingly unclear which treatment actually worked.


लेखक-परिचय (About the Author)

बेढब बनारसी का वास्तविक नाम कृष्णदेव प्रसाद गौड़ था। उनका जन्म 11 नवंबर, 1885 को बनारस (वाराणसी), उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के बीसवीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध लेखक और व्यंग्यकार थे, जिन्होंने अपनी अनूठी हास्य-व्यंग्य शैली के लिए साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान बनाई। “बेढब बनारसी” उनका उपनाम था, जिसके अंतर्गत उन्होंने विनोदी और व्यंग्यपूर्ण हिंदी कविताएँ, निबंध और कहानियाँ लिखीं।

बेढब बनारसी की रचनाएँ समाज, प्रेम, आधुनिकता और राजनीति जैसे विषयों को आधार बनाती थीं। उनकी हास्य कविताएँ जीवन की विसंगतियों पर तीखी और व्यंग्यपूर्ण टिप्पणियाँ करती थीं। उन्होंने शहर और गाँव दोनों के मध्यवर्गीय जीवन को अपनी कहानियों में जीवंत रूप दिया। उनकी प्रमुख कृतियों में बेढब की बैठक (1940), काव्य कमल (1940), बनारसी इक्का, गांधी का भूत, तनटन, अभिनेता (नाटक) तथा लेफ्टिनेंट पिगसन की डायरी प्रमुख हैं। उन्होंने गद्य और कविता की लगभग एक दर्जन पुस्तकें प्रकाशित कीं। उनका निधन 6 मई, 1968 को हुआ। उनकी रचनाएँ आज भी हिंदी हास्य-व्यंग्य साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।


पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (Textbook Questions and Answers)

बोध एवं विचार

1. सही विकल्प का चयन करो

(क) लेखक बीमार पड़ने पर कौन-सा बिस्कुट खाना चाहता है?

उत्तरः (iv) हंटले

(ख) कहानी में औषधियों का राजा और रोगों का रामबाण किसे बताया गया है?

उत्तरः (iv) अमृत धारा

(ग) वैद्य जी लेखक को देखने किस सवारी से आए थे?

उत्तरः (iii) पालकी में

(घ) गीली मिट्टी पेट पर लेप करने और धूप में बैठने की सलाह किसने दी?

उत्तरः प्रकृति चिकित्सक ने


2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो

(क) लेखक की आयु कितनी है?

उत्तरः लेखक की आयु पैंतीस वर्ष है।

(ख) बाग बाजार का रसगुल्ला किसके यहाँ से आया था?

उत्तरः बाग बाजार का रसगुल्ला प्रसाद जी के यहाँ से आया था।

(ग) सरकारी डॉक्टर ने किस फार्मेसी से दवा मँगवाने की सलाह दी?

उत्तरः सरकारी डॉक्टर ने चंद्रकला फार्मेसी से दवा मँगवाने की सलाह दी।

(घ) डॉक्टर चूहानाथ कातर जी की फीस कितनी थी?

उत्तरः डॉक्टर चूहानाथ कातर जी की फीस अठारह आने थी।

(ङ) लेखक को ओझा से दिखाने की सलाह किसने दी?

उत्तरः लेखक को ओझा से दिखाने की सलाह उनकी नानी की मौसी ने दी।


3. संक्षेप में उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में)

(क) लेखक बीमार कैसे पड़ा?

उत्तरः प्रसाद जी के यहाँ से आए बाग बाजार के रसगुल्ले लेखक ने अत्यधिक खा लिए। रात को नींद खुली तो पेट में तीव्र दर्द अनुभव हुआ। इस प्रकार अत्यधिक मिठाई खाने के कारण लेखक बीमार पड़ गया।

(ख) पेट में दर्द होने पर लेखक ने कैसी दवा ली?

उत्तरः पेट में दर्द होने पर लेखक ने अमृतधारा की कुछ बूँदें पानी में मिलाकर पीं, जिसे वे “औषधियों का राजा और रोगों का रामबाण” मानते थे। उनके पास यह शीशी हमेशा रहती थी।

(ग) अपने देश में चिकित्सा की कौन-कौन-सी पद्धतियाँ प्रचलित हैं?

उत्तरः अपने देश में चिकित्सा की अनेक पद्धतियाँ प्रचलित हैं, जैसे — एलोपैथिक, होमियोपैथिक, आयुर्वेदिक, यूनानी, प्राकृतिक चिकित्सा, आध्यात्मिक चिकित्सा और घरेलू चिकित्सा आदि।

(घ) डॉ. चूहानाथ कातर जी ने लेखक का इलाज कैसे किया?

उत्तरः डॉ. चूहानाथ कातर जी ने थोड़ा पानी गरम करवाया और दो रुपये की दवा चंद्रकला फार्मेसी से मँगवाई। उस दवा को एक छोटी पिचकारी में भरकर, जिसके आगे लंबी सुई लगी थी, लेखक के पेट में इंजेक्शन दिया।

(ङ) वैद्य जी ने लेखक को दर्द का क्या कारण बताया?

उत्तरः वैद्य जी ने लेखक की नब्ज देखकर बताया कि उन्हें वायु का प्रकोप हुआ है। उन्होंने गर्म तेल की मालिश और विशेष काढ़ा पीने की सलाह दी तथा परहेज रखने को कहा।


4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 50 शब्दों में)

(क) वैद्य जी और हकीम साहब की पोशाकों पर पाठ में क्या व्यंग्य किया गया है?

उत्तरः लेखक ने वैद्य जी और हकीम साहब की पोशाकों पर तीखा व्यंग्य किया है। वैद्य जी पालकी में आते हैं, उनके कंधे पर सफेद दुपट्टा पड़ा है और शरीर पर जनेऊ है। उनकी वेशभूषा देखकर लेखक को लगता है मानो कोई कुश्ती लड़ने आया हो। हकीम साहब की पोशाक और ढंग भी उतने ही रहस्यमयी हैं। लेखक इन वर्णनों के माध्यम से यह व्यंग्य करता है कि पोशाक और बाहरी दिखावे पर ध्यान देने वाले ये चिकित्सक असल में कितने प्रभावी हैं, यह संदिग्ध है। पाठक को हँसाते हुए लेखक इन परंपरागत चिकित्सकों के आडंबर को उजागर करता है।

(ख) चिकित्सकों के अलावा लेखक ने और किन लोगों पर व्यंग्य किया है?

उत्तरः चिकित्सकों के अलावा लेखक ने उन मित्रों और रिश्तेदारों पर भी व्यंग्य किया है जो बीमार व्यक्ति के पास स्वास्थ्य पूछने के बहाने आते हैं और दिनभर गपशप करते हुए नए-नए नुस्खे सुझाते रहते हैं। लेखक की नानी की मौसी ओझा से दिखाने की सलाह देती हैं। पत्नी का व्यवहार भी व्यंग्य का विषय बनता है। इस प्रकार लेखक ने पूरे समाज का मजाकिया चित्रण किया है — जहाँ हर कोई खुद को बड़ा चिकित्सा-विशेषज्ञ समझता है और बिना माँगे सलाह देने से नहीं चूकता।

(ग) “दो खुराक पीते-पीते दर्द गायब हो जाएगा, जैसे हिंदुस्तान से सोना गायब हो रहा है” — इस वाक्य का भाव स्पष्ट करो।

उत्तरः यह वाक्य पाठ की व्यंग्य-शैली का सुंदर उदाहरण है। डॉक्टर ने दवा की प्रशंसा करते हुए कहा कि दो खुराक पीते-पीते दर्द उसी तरह गायब हो जाएगा जैसे हिंदुस्तान से सोना गायब हो रहा है। यहाँ डॉक्टर की बात में एक राष्ट्रीय चिंता छुपी है — भारत से सोने का खजाना धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। इसी से तुलना कर वह दर्द के जाने की बात करता है। यह व्यंग्य एक साथ डॉक्टर की बड़बोलेपन और देश की आर्थिक दशा दोनों पर टिप्पणी करता है, जो पाठक को हँसाता भी है और सोचने पर मजबूर भी करता है।


5. किसने, किससे और कब कहा?

(क) “अभी अस्पताल खुला न होगा, नहीं तो आपको दवा मँगवानी न पड़ती।”

उत्तरः यह वाक्य डॉक्टर साहब ने लेखक से प्रातःकाल कहा, जब वे लेखक को देखने उनके घर आए थे।

(ख) “यार! आप तो ऐसी बात करते हैं, गोया जिंदगी से बेजार हो गए हैं।”

उत्तरः यह वाक्य हकीम साहब ने लेखक से कहा, जब लेखक ने कहा था कि “अब यह जिंदगी आपके ही हाथों में है।”

(ग) “मैं तो पहले ही सोच रही थी कि यह कुछ ऊपरी खेल है।”

उत्तरः यह वाक्य नानी ने लेखक से कहा, जब वे लेखक की बीमारी को ऊपरी (भूत-प्रेत का प्रभाव) मानने लगी थीं।

(घ) “तुम्हारी बुद्धि कहीं घास चरने गयी है?”

उत्तरः यह वाक्य पत्नी ने लेखक से कहा, जब लेखक ने दाँत के इलाज के लिए पत्नी से रुपये माँगे।


भाषा एवं व्याकरण ज्ञान

1. निम्नलिखित संज्ञाओं के स्त्रीलिंग रूप लिखो

पुल्लिंगस्त्रीलिंग
डॉक्टरडॉक्टरनी
कविकवयित्री
विद्वानविदुषी
आचार्यआचार्या
पंडितपंडिताइन
श्रीमानश्रीमती
ससुरसास
नानानानी
मौसामौसी
भाग्यवानभाग्यवती

2. निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग करो

दिमाग चाटना — अर्थ: बेकार की बातों से परेशान करना।

वाक्य: राम हमेशा अपनी बेकार बातों से मेरा दिमाग चाटता रहता है।

कतर-व्योंत करना — अर्थ: काट-छाँट करना, तराशना।

वाक्य: दर्जी ने कपड़े की कतर-व्योंत करके उसे सुंदर पोशाक का आकार दे दिया।

पिण्ड छुड़ाना — अर्थ: किसी झंझट या व्यक्ति से छुटकारा पाना।

वाक्य: बहुत मुश्किल से उस बकवास करने वाले से पिंड छुड़ा पाया।

रफूचक्कर होना — अर्थ: चुपके से भाग जाना।

वाक्य: पुलिस को देखते ही चोर रफूचक्कर हो गया।

कान काटना — अर्थ: बहुत चालाक होना, बड़ों को भी चकमा दे देना।

वाक्य: यह बालक बड़े-बड़े होशियारों के भी कान काटता है।

हवा हो जाना — अर्थ: गायब हो जाना।

वाक्य: शरारती बच्चे खेल के मैदान से हवा हो गए।

करवटें बदलना — अर्थ: बेचैनी से इधर-उधर होते रहना, नींद न आना।

वाक्य: पेट दर्द के कारण लेखक सारी रात करवटें बदलता रहा।


3. शब्दार्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
बुलेटिनसमाचार सूची / रोगी की स्वास्थ्य-सूचना
रिफ्रेशमेंटजलपान
सूक्ष्ममहीन, बहुत छोटा
स्थूलमोटा, बड़ा
रामबाणतुरंत असर करने वाला, अचूक
एहतियातसावधानी
मंदाग्निपाचन शक्ति का कमजोर होना
शूलपेट का तेज दर्द
नब्जनाड़ी (pulse)
शिफाआराम, स्वास्थ्य-लाभ
ओझातांत्रिक, झाड़-फूँक करने वाला
पाइरियादाँत और मसूढ़ों की एक बीमारी
बेजारपरेशान, ऊब गया हुआ
गोयामानो, जैसे

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Additional Important Questions)

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1: “चिकित्सा का चक्कर” पाठ के लेखक कौन हैं?

उत्तरः “चिकित्सा का चक्कर” पाठ के लेखक बेढब बनारसी हैं।

प्रश्न 2: बेढब बनारसी का वास्तविक नाम क्या था?

उत्तरः बेढब बनारसी का वास्तविक नाम कृष्णदेव प्रसाद गौड़ था।

प्रश्न 3: लेखक के स्वस्थ होने में कितना समय लगा?

उत्तरः लेखक को स्वस्थ होने में दो सप्ताह (दो हफ्ते) का समय लगा।

प्रश्न 4: “चिकित्सा का चक्कर” किस विधा की रचना है?

उत्तरः “चिकित्सा का चक्कर” हास्य-व्यंग्य निबंध विधा की रचना है।

प्रश्न 5: लेखक को किस कारण पेट में दर्द हुआ?

उत्तरः लेखक ने अत्यधिक रसगुल्ले खाए जिसके कारण उन्हें रात में पेट में तीव्र दर्द हुआ।

प्रश्न 6: डॉक्टर साहब कहाँ के थे?

उत्तरः डॉक्टर साहब (चूहानाथ कातर जी) सरकारी अस्पताल के डॉक्टर थे।

प्रश्न 7: प्राकृतिक चिकित्सक ने लेखक को क्या सलाह दी?

उत्तरः प्राकृतिक चिकित्सक ने पेट पर गीली मिट्टी का लेप करके धूप में बैठने की सलाह दी।

प्रश्न 8: इस पाठ में कौन-कौन-सी चिकित्सा पद्धतियों का उल्लेख है?

उत्तरः इस पाठ में एलोपैथिक, आयुर्वेदिक, यूनानी, होमियोपैथिक, प्राकृतिक चिकित्सा और आध्यात्मिक (ओझा) पद्धतियों का उल्लेख है।


लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1: “प्रेमियों को जो मजा प्रेमिकाओं की आँख देखने में आता है, शायद वैसा ही डॉक्टरों को मरीजों की जीभ देखने में आता है” — इस वाक्य में क्या व्यंग्य है?

उत्तरः इस वाक्य में डॉक्टरों की एक खास आदत पर हास्यपूर्ण व्यंग्य किया गया है। डॉक्टर जब भी मरीज को देखते हैं तो सबसे पहले जीभ देखते हैं, मानो जीभ देखने में उन्हें बड़ा आनंद आता हो। लेखक ने इस आदत की तुलना प्रेमियों की प्रेमिकाओं की आँखें देखने की चाह से की है। यह तुलना एकदम अप्रत्याशित और हास्यास्पद है। इसके माध्यम से लेखक ने डॉक्टरों की यांत्रिक दिनचर्या और परीक्षण-पद्धति पर व्यंग्य किया है।

प्रश्न 2: लेखक ने बीमारी के समय परिचितों और रिश्तेदारों के व्यवहार का किस प्रकार वर्णन किया है?

उत्तरः लेखक ने बताया है कि बीमारी के समय परिचित और रिश्तेदार स्वास्थ्य पूछने के बहाने आते हैं, परंतु वे देखभाल कम और गपशप अधिक करते हैं। हर कोई अपना अलग नुस्खा सुझाता है। कोई ओझा के पास जाने की सलाह देता है, कोई किसी पुराने घरेलू इलाज की बात करता है। इस प्रकार बीमार व्यक्ति तरह-तरह की सलाहों और बकबक से और भी परेशान हो जाता है। लेखक ने यह वर्णन बड़े रोचक तरीके से किया है।

प्रश्न 3: हास्य-व्यंग्य साहित्य का क्या महत्व है? इस पाठ के आधार पर स्पष्ट करो।

उत्तरः हास्य-व्यंग्य साहित्य मनोरंजन के साथ-साथ समाज की कमियों और विसंगतियों को उजागर करता है। “चिकित्सा का चक्कर” पाठ में बेढब बनारसी ने हँसाते-हँसाते यह बताया है कि हमारे समाज में चिकित्सा पद्धतियों की भरमार है और हर चिकित्सक खुद को सर्वश्रेष्ठ मानता है। साथ ही, बीमार व्यक्ति के आसपास की भीड़ और अनचाही सलाहों की समस्या भी सामने आती है। इस प्रकार हास्य-व्यंग्य साहित्य पाठक को आनंद देते हुए जागरूक भी करता है।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1: “चिकित्सा का चक्कर” पाठ की कथावस्तु का संक्षिप्त वर्णन करो।

उत्तरः “चिकित्सा का चक्कर” बेढब बनारसी की एक हास्य-व्यंग्य प्रधान रचना है। इस पाठ में पैंतीस वर्षीय लेखक एक दिन प्रसाद जी के यहाँ से आए बाग बाजार के रसगुल्ले अत्यधिक खा लेता है। रात को पेट में तेज दर्द होता है। वह पहले अमृतधारा पीता है जो बेकार जाती है। फिर वह सरकारी डॉक्टर चूहानाथ कातर जी को बुलाता है जो पिचकारी से इंजेक्शन देते हैं। इसके बाद वैद्य जी पालकी में आकर वायु प्रकोप बताते हुए काढ़ा देते हैं। हकीम साहब नब्ज देखकर यूनानी दवा देते हैं। प्राकृतिक चिकित्सक गीली मिट्टी का लेप करने की सलाह देते हैं। नानी की मौसी ओझा के पास जाने की बात करती हैं। मित्र और परिचित भी तरह-तरह की सलाह देते हैं। अंततः दो सप्ताह बाद लेखक ठीक हो जाता है। पाठ में हर चरित्र का मजाकिया चित्रण है और पूरी कथा हास्य से भरपूर है।

प्रश्न 2: बेढब बनारसी की व्यंग्य-शैली की विशेषताओं का वर्णन इस पाठ के आधार पर करो।

उत्तरः बेढब बनारसी की व्यंग्य-शैली अत्यंत सरल, रोचक और प्रभावशाली है। इस पाठ में उनकी शैली की निम्नलिखित विशेषताएँ दिखती हैं — प्रथम, वे अप्रत्याशित और मजेदार तुलनाओं का प्रयोग करते हैं, जैसे डॉक्टर और जीभ की तुलना प्रेमी और प्रेमिका की आँखों से। द्वितीय, उनकी भाषा में आम बोलचाल के शब्द, मुहावरे और विदेशी भाषा के शब्द मिलते हैं। तृतीय, वे पात्रों के बाहरी स्वरूप — पोशाक, सवारी, बोलचाल — के माध्यम से उनकी आंतरिक विसंगतियाँ उजागर करते हैं। चतुर्थ, उनका व्यंग्य कभी कठोर नहीं होता — वे हँसाते-हँसाते बात करते हैं। पंचम, वे सामाजिक व्यवस्था की खामियों को मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत करते हैं, जिससे पाठक को बिना बोझिलपन के संदेश मिलता है।

Leave a Comment