असम बोर्ड (ASSEB) की कक्षा 9 की हिंदी ऐच्छिक पाठ्यपुस्तक आलोक भाग-1 का पाँचवाँ पाठ “आप भले तो जग भला” प्रसिद्ध हिंदी लेखक श्रीमन्नारायण द्वारा रचित एक प्रेरणादायक गद्य-निबंध है। इस पाठ में लेखक ने काँच के महल की रोचक कहानी और महान विभूतियों के उदाहरणों के माध्यम से यह समझाया है कि दुनिया हमारे अपने स्वभाव और व्यवहार का दर्पण होती है। यहाँ इस पाठ के पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर और अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न दिए गए हैं।
पाठ-परिचय (Summary)
“आप भले तो जग भला” श्रीमन्नारायण द्वारा लिखा गया एक विचारपूर्ण और प्रेरणादायक निबंध है। लेखक ने इस पाठ में काँच के महल का एक मर्मस्पर्शी किस्सा सुनाया है। एक विशाल काँच के महल में एक कुत्ता घुस गया। उसे हर दिशा में अपना ही प्रतिबिम्ब दिखाई दिया, किंतु उसने उन हजारों प्रतिबिम्बों को शत्रु समझकर उन पर भौकना और झपटना शुरू कर दिया। अंततः वह गश खाकर गिर पड़ा। कुछ देर बाद उसी महल में एक दूसरा कुत्ता आया — उसने प्रेम से अपनी दुम हिलाई, तो सभी प्रतिबिम्ब भी दुम हिलाते दिखाई दिए। वह खुश होकर चला गया। इस किस्से के माध्यम से लेखक ने स्पष्ट किया है कि संसार काँच के महल जैसा है — हम जैसा व्यवहार दूसरों के साथ करते हैं, दुनिया वैसा ही व्यवहार हमारे साथ करती है।
लेखक ने अपने एक मित्र की परेशानी का वर्णन किया है जो यह मानता था कि उसके नौकर, पड़ोसी और संसार के सभी लोग उसके साथ बुरा व्यवहार करते हैं। लेकिन लेखक समझाते हैं कि वास्तव में यह मित्र स्वयं अपनी नुक्ताचीनी और आलोचना की आदत के कारण परेशान है। उनके रसोइए ने भी सुबह से शाम तक की आलोचना से तंग आकर बिना बताए नौकरी छोड़ दी। लेखक का कहना है कि जो व्यक्ति सदा दूसरों के दोष देखता रहता है, वह संसार की खुशियों से वंचित रहता है। ऐसे व्यक्ति के लिए किसी जंगल में चले जाना बेहतर है, क्योंकि संसार उसे प्रेम नहीं दे सकता।
लेखक ने महात्मा गांधी और सरदार पृथ्वीसिंह के उदाहरण से यह सिद्ध किया है कि प्रेम और सहानुभूति से किसी को भी अपने वश में किया जा सकता है। गांधीजी ने पृथ्वीसिंह को अपने प्रेम से ही हिंसा का मार्ग छुड़वाया। इसी प्रकार अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की सफलता का रहस्य भी यही था कि वे दूसरों की अनावश्यक आलोचना नहीं करते थे। इमर्सन के बछड़े वाले उदाहरण से भी यही सीख मिलती है कि बल प्रयोग से नहीं, बल्कि प्रेम और सहानुभूति से ही दूसरों को सही दिशा में ले जाया जा सकता है। पाठ का मूल संदेश है कि आदमी प्रेम का भूखा होता है — यदि हम दूसरों से प्रेम करें, उनकी प्रशंसा करें और उनकी गलतियों को क्षमा करें, तो दुनिया भी हमसे नम्रता और प्रेम से पेश आएगी।
Summary (English)
The chapter “Aap Bhale to Jag Bhala” (If You Are Good, the World Is Good) is an inspirational prose essay by Srimannarayan. The author uses the allegory of a glass palace to convey a timeless moral lesson. Two dogs enter a glass palace at different times. The first dog sees thousands of reflections of itself but mistakes them for enemies, barks and attacks them furiously, and eventually collapses in exhaustion. The second dog wags its tail in friendliness and finds all reflections responding in kind, and leaves happily. Through this story, the author illustrates that the world is like a glass palace — it mirrors our own nature back at us.
The author then shares the example of a friend who constantly criticizes and finds fault with everyone around him — his servants, neighbors, and the world at large. His cook, unable to endure endless fault-finding from sunrise to sunset, quietly leaves without notice. The author argues that those who perpetually complain and criticize will always receive coldness from the world in return, while those who approach others with love, compassion, and praise will find the world warm and welcoming. Citing Mahatma Gandhi, Abraham Lincoln, and Ralph Waldo Emerson, the author demonstrates that love and sympathy are more powerful than force or criticism. Gandhi won over the violent Sardar Prithvisingh through love alone. The central message of this chapter is: a human being is always hungry for love — if we treat others with kindness and respect, the world will treat us the same way.
लेखक-परिचय (About the Author)
श्रीमन्नारायण का जन्म 15 जून 1912 को हुआ था। वे एक प्रतिष्ठित हिंदी साहित्यकार, समाजसेवी और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के परिचायक थे। उन्होंने अपने लेखन और सामाजिक कार्यों के माध्यम से मानवीय मूल्यों और नैतिकता का प्रचार-प्रसार किया। उनका साहित्य सरल, सजीव और भावपूर्ण भाषा में होता था, जिसमें आम जनमानस की भावनाएँ स्पष्ट रूप से झलकती थीं।
श्रीमन्नारायण ने अपने लेखों में नैतिकता, परोपकार और आत्म-सुधार को विशेष महत्व दिया। उनके जीवन और लेखन में संत-महात्माओं की शिक्षाओं का गहरा प्रभाव देखा जाता है। “आप भले तो जग भला” जैसे निबंधों में उन्होंने प्रेम, सहानुभूति और सकारात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से जीवन में सुख और सफलता पाने का मार्ग दिखाया है। उनकी रचनाएँ न केवल साहित्यिक दृष्टिकोण से, बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (Textbook Questions and Answers)
बोध एवं विचार
1. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो
(क) श्रीमन्नारायण का जन्म कब हुआ था?
उत्तरः श्रीमन्नारायण का जन्म 15 जून 1912 को हुआ था।
(ख) काँच का महल किसका प्रतीक है?
उत्तरः काँच का महल इस संसार का प्रतीक है।
(ग) काँच के महल में कितने कुत्ते घुसे थे?
उत्तरः काँच के महल में दो कुत्ते घुसे थे।
(घ) पहले कुत्ते को काँच के महल में कितने कुत्ते दिखाई दिए?
उत्तरः पहले कुत्ते को काँच के महल में हजारों कुत्ते दिखाई दिए।
(ङ) लेखक के मित्र के रसोइए ने नौकरी क्यों छोड़ी?
उत्तरः लेखक के मित्र की निरंतर आलोचना और नुक्ताचीनी से तंग आकर रसोइए ने बिना खबर दिए नौकरी छोड़ दी।
(च) आदमी किसका भूखा रहता है?
उत्तरः आदमी प्रेम का भूखा रहता है।
(छ) अब्राहम लिंकन कहाँ के थे?
उत्तरः अब्राहम लिंकन अमेरिका के थे।
(ज) सरदार पृथ्वीसिंह ने कौन-सा मार्ग छोड़ा?
उत्तरः सरदार पृथ्वीसिंह ने गांधीजी के प्रेम और सहानुभूति से प्रभावित होकर हिंसा का मार्ग छोड़ दिया।
(झ) अगर आप हँसेंगे तो दुनिया क्या करेगी?
उत्तरः अगर आप हँसेंगे तो दुनिया भी हँसेगी।
2. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (लगभग 25 शब्दों में)
(क) लेखक ने संसार की तुलना काँच के महल से क्यों की है?
उत्तरः लेखक ने संसार की तुलना काँच के महल से इसलिए की है क्योंकि काँच के महल में जैसा स्वभाव लेकर जाओगे, वैसा ही प्रतिबिम्ब दिखाई देगा। उसी प्रकार संसार में भी हमारे अपने स्वभाव और व्यवहार की छाया ही हमें दिखाई देती है — आप भले तो जग भला, आप बुरे तो जग बुरा।
(ख) दो कुत्तों की घटना का वर्णन करके लेखक क्या सीख देना चाहते हैं?
उत्तरः दो कुत्तों की घटना के माध्यम से लेखक यह सीख देना चाहते हैं कि हमें सदैव दूसरों की अच्छाई को देखना चाहिए और अपने व्यवहार में प्रेम तथा नम्रता लानी चाहिए। जो व्यक्ति दूसरों के प्रति प्रेम से पेश आता है, संसार भी उसके प्रति वैसा ही व्यवहार करता है।
(ग) अब्राहम लिंकन की सफलता का सबसे बड़ा रहस्य क्या था?
उत्तरः अब्राहम लिंकन की सफलता का सबसे बड़ा रहस्य यह था कि वे दूसरों की अनावश्यक आलोचना और नुक्ताचीनी नहीं करते थे। वे किसी की भावनाओं को बिना कारण आहत नहीं करते थे, जिससे सभी लोग उनसे प्रेम करते थे।
(घ) रसोइए ने बिना खबर दिए लेखक के मित्र की नौकरी क्यों छोड़ दी?
उत्तरः लेखक के मित्र की आदत थी कि वे सुबह से शाम तक रसोइए की आलोचना करते रहते थे — खाने में नमक कम है, रोटी जली है, सब्जी ठीक नहीं बनी। इस निरंतर आलोचना और अपमान से तंग आकर रसोइए ने बिना खबर दिए नौकरी छोड़ दी।
(ङ) लेखक ने गांधीजी और सरदार पृथ्वीसिंह का उदाहरण क्यों दिया है?
उत्तरः लेखक ने यह सिद्ध करने के लिए कि प्रेम और सहानुभूति से किसी को भी अपने वश में किया जा सकता है। गांधीजी ने अपने प्रेम और अहिंसा के बल पर हिंसा के मार्ग पर चल रहे सरदार पृथ्वीसिंह को बदल दिया, जो किसी जोर-जबरदस्ती से संभव नहीं था।
3. लघु उत्तरीय प्रश्न (लगभग 50 शब्दों में)
(क) अपने मित्र को परेशान देखकर लेखक को किस किस्से का स्मरण हो आता है?
उत्तरः अपने मित्र को परेशान देखकर लेखक को काँच के महल का किस्सा याद आता है। एक काँच के महल में एक कुत्ता घुसा, जिसने हजारों प्रतिबिम्बों को शत्रु समझकर उन पर झपटा और भौंकता रहा। अंत में गश खाकर गिर पड़ा। बाद में दूसरा कुत्ता आया, उसने प्रेम से दुम हिलाई तो सभी प्रतिबिम्ब भी दुम हिलाते दिखे और वह खुश हुआ। इस किस्से के माध्यम से लेखक यह बताना चाहते हैं कि मित्र का स्वभाव ही उनकी परेशानी का कारण है।
(ख) दुखड़ा रोते रहने वाले व्यक्ति का दुनिया से दूर जंगल में चले जाना क्यों बेहतर है?
उत्तरः लेखक का कहना है कि जो व्यक्ति सदा दुखड़ा रोता रहता है, दूसरों की बुराई करता है और खुद को दुखी समझता है, उसका स्वभाव ही ऐसा हो जाता है कि दुनिया भी उसे कड़वे जवाब देती है। संसार काँच के महल की तरह है — उसमें हमारे अपने स्वभाव की छाया दिखती है। ऐसे व्यक्ति को दुनिया में प्रेम नहीं मिल सकता, इसलिए उसके लिए जंगल में रहना ही बेहतर है।
(ग) ‘प्रेम और सहानुभूति से किसी को भी अपने वश में किया जा सकता है’ — इस कथन को उदाहरण सहित स्पष्ट करो।
उत्तरः लेखक ने इस कथन को सिद्ध करने के लिए दो प्रमुख उदाहरण दिए हैं। पहला — गांधीजी और सरदार पृथ्वीसिंह का: पृथ्वीसिंह हिंसा के मार्ग पर चलते थे, लेकिन गांधीजी के निर्मल प्रेम और सहानुभूति ने उनके हृदय को बदल दिया और वे अहिंसा के पथ पर आ गए। दूसरा — इमर्सन और बछड़े का: इमर्सन और उनके पुत्र मिलकर भी बछड़े को अंदर नहीं ले जा सके, लेकिन एक नौकरानी ने अपनी उँगली बछड़े के मुँह में दी और वह प्रेम से उसके साथ चला गया। इससे सिद्ध होता है कि प्रेम और सहानुभूति बड़े से बड़े हठी व्यक्ति को भी वश में कर सकती है।
(घ) लेखक ने अपने मित्र की किन गलतियों का वर्णन किया है?
उत्तरः लेखक के मित्र की प्रमुख गलतियाँ थीं — वे सदा दूसरों की आलोचना और नुक्ताचीनी करते रहते थे, नौकरों पर दिन-भर चिड़चिड़ाते थे, पड़ोसियों में दोष ढूँढते थे, किसी की तारीफ नहीं करते थे, दूसरों के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास नहीं करते थे और अपने विचारों को ही सर्वश्रेष्ठ मानते थे। वे यह नहीं समझते थे कि उनका अपना स्वभाव ही उनकी परेशानी का मूल कारण है।
(ङ) इस पाठ के आधार पर बताओ कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।
उत्तरः इस पाठ के अनुसार हमें निम्नलिखित बातें करनी चाहिए — दूसरों से प्रेम और सहानुभूति से पेश आना, दूसरों के कार्यों की प्रशंसा करना, गलतियों को क्षमा करना, और दूसरों के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करना। हमें निम्नलिखित बातें नहीं करनी चाहिए — दूसरों की अनावश्यक आलोचना और नुक्ताचीनी करना, किसी की भावनाओं को बिना कारण ठेस पहुँचाना, सदा दुखड़ा रोते रहना, और दूसरों पर बल-प्रयोग या दबाव डालना।
4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 100-150 शब्दों में)
(क) पाठ “आप भले तो जग भला” का सारांश अपने शब्दों में लिखो।
उत्तरः “आप भले तो जग भला” पाठ में लेखक श्रीमन्नारायण ने यह सिद्ध किया है कि इस संसार में जैसा हम व्यवहार करते हैं, दुनिया वैसा ही व्यवहार हमारे साथ करती है। लेखक ने काँच के महल का किस्सा सुनाया — जिसमें पहला कुत्ता अपने प्रतिबिम्बों को शत्रु समझकर मर गया और दूसरा कुत्ता प्रेम से व्यवहार कर खुश होकर लौटा। इसके बाद लेखक के एक मित्र की कहानी है जो सबकी आलोचना करते थे और इसीलिए सब उनसे दूर भागते थे। उनके रसोइए ने भी तंग होकर नौकरी छोड़ दी। लेखक ने गांधीजी, लिंकन और इमर्सन के उदाहरणों से सिद्ध किया कि प्रेम और सहानुभूति से ही दूसरों को जीता जा सकता है। पाठ का संदेश है कि आदमी प्रेम का भूखा होता है — दूसरों से प्रेम करें, उनकी प्रशंसा करें, तो दुनिया भी हमसे प्रेम करेगी।
(ख) काँच के महल में घुसे दोनों कुत्तों की घटनाओं का वर्णन करो और उससे मिलने वाली सीख बताओ।
उत्तरः एक विशाल काँच के महल में न जाने किधर से एक भटका हुआ कुत्ता घुस गया। वहाँ उसे चारों तरफ काँच में अपना ही प्रतिबिम्ब दिखाई दिया — हजारों कुत्ते। उसने उन सभी को शत्रु समझा और भौंकने लगा। उसकी भौंक की प्रतिध्वनि भी हजारों गुना होकर लौटी। वह उन पर झपटा, चिल्लाया, किंतु सभी दिशाओं से हजारों कुत्ते उस पर झपटते दिखाई दिए। अंत में वह थककर गश खाकर गिर पड़ा। कुछ समय बाद उसी महल में एक दूसरा कुत्ता आया। उसने प्रसन्नता से अपनी दुम हिलाई तो हजारों कुत्ते भी दुम हिलाते दिखाई दिए। वह खुशी-खुशी वापस चला गया। इस घटना से हमें यह सीख मिलती है कि संसार काँच के महल जैसा है। हमारा अपना स्वभाव, चरित्र और व्यवहार ही इस संसार में प्रतिबिम्बित होता है। यदि हम दूसरों से प्रेम और नम्रता से पेश आएँगे, तो दुनिया भी हमसे प्रेम और नम्रता से पेश आएगी। यदि हम क्रोधी और आलोचक बनेंगे, तो दुनिया भी हमें वैसा ही जवाब देगी।
(ग) लेखक के मित्र के स्वभाव और उनकी परेशानियों का वर्णन करते हुए बताओ कि उनकी समस्या का असली कारण क्या था?
उत्तरः लेखक के मित्र एक बहुत ही आलोचनाप्रिय व्यक्ति थे। वे सुबह उठते ही दूसरों की नुक्ताचीनी शुरू कर देते थे। रसोइए का खाना हमेशा उन्हें खराब लगता था — कभी नमक कम, कभी रोटी जली, कभी सब्जी बेस्वाद। पड़ोसियों के बारे में भी वे सदा शिकायत करते। संसार के हर व्यक्ति में उन्हें दोष दिखाई देते थे। उनका मानना था कि दुनिया के सब लोग उनके साथ बुरा व्यवहार करते हैं। उनके रसोइए ने आखिरकार इस निरंतर आलोचना से तंग आकर बिना बताए नौकरी छोड़ दी। लेखक समझाते हैं कि मित्र की समस्या का असली कारण बाहर नहीं, बल्कि उनके अपने स्वभाव में है। वे दूसरों में केवल दोष ढूँढते हैं, इसलिए दुनिया भी उनसे दूरी बनाती है। यदि वे दूसरों की अच्छाइयाँ देखना सीखें और प्रेम से व्यवहार करें, तो दुनिया भी उनसे प्रेम से पेश आएगी।
(घ) पाठ के शीर्षक “आप भले तो जग भला” का क्या आशय है? इस पाठ से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तरः “आप भले तो जग भला” का आशय है — यदि आप स्वयं अच्छे हैं, यदि आपका स्वभाव, व्यवहार और दृष्टिकोण अच्छा है, तो यह संसार भी आपको अच्छा लगेगा और दुनिया भी आपके साथ अच्छा व्यवहार करेगी। इसके विपरीत, यदि आप बुरे हैं, तो यह दुनिया भी आपको बुरी ही लगेगी। यह शीर्षक इस बात का प्रतीक है कि संसार एक दर्पण है — इसमें हमारा अपना चेहरा ही दिखाई देता है। इस पाठ से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें दूसरों को दोष देने की बजाय पहले स्वयं को सुधारना चाहिए। दूसरों से प्रेम करें, उनकी प्रशंसा करें, उनकी गलतियों को क्षमा करें और उनके साथ सहानुभूति रखें। जब हम दूसरों की भावनाओं का सम्मान करेंगे, तो दुनिया भी हमारा सम्मान करेगी। यही इस पाठ का मूल संदेश और प्रेरणा है।
भाषा-अध्ययन (Language Study)
शब्दार्थ (Vocabulary)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| काँच | शीशा / Glass |
| प्रतिबिम्ब | परछाईं, छाया / Reflection |
| प्रतिध्वनि | गूँज, इको / Echo |
| गश खाना | बेहोश हो जाना / To faint |
| नुक्ताचीनी | दोष निकालना, आलोचना / Fault-finding |
| बरताव | व्यवहार / Behavior, Treatment |
| ऐब | दोष, कमी / Fault, Defect |
| मिसाल | उदाहरण / Example |
| अमल | आचरण, व्यवहार में लाना / Practice |
| आग बबूला होना | अत्यंत क्रोधित होना / To be furious |
| सीमेंट का काम करना | जोड़े रखने का काम करना / To act as binding cement |
| सेवाग्राम | गांधीजी का आश्रम, वर्धा में / Gandhi’s ashram in Wardha |
| अहिंसा | हिंसा न करना / Non-violence |
| सहानुभूति | दूसरे के दुख को समझना / Sympathy |
मुहावरे और उनके अर्थ (Idioms)
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| आग बबूला होना | बहुत क्रोधित होना | गलती सुनते ही वह आग बबूला हो गया। |
| गश खाना | बेहोश हो जाना | तेज धूप में खड़े रहने से वह गश खा गया। |
| दुम हिलाना | प्रेम और खुशी दिखाना | कुत्ता मालिक को देखते ही दुम हिलाने लगा। |
| मुँह मोड़ना | उपेक्षा करना, दूर हो जाना | कठोर सत्य से मनुष्य मुँह मोड़ लेता है। |
अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Additional Important Questions)
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
1. “आप भले तो जग भला” पाठ के लेखक कौन हैं?
उत्तरः (ग) श्रीमन्नारायण
2. काँच के महल में घुसा पहला कुत्ता अंत में क्या हुआ?
उत्तरः (ख) गश खाकर गिर पड़ा
3. लेखक के अनुसार आदमी किसका भूखा रहता है?
उत्तरः (क) प्रेम का
4. इमर्सन के बछड़े को किसने प्रेम से अंदर ले जाया?
उत्तरः (घ) एक नौकरानी ने
5. अब्राहम लिंकन की सफलता का रहस्य क्या था?
उत्तरः (ख) दूसरों की अनावश्यक आलोचना न करना
अतिरिक्त लघु उत्तरीय प्रश्न
प्र. पाठ में इमर्सन और बछड़े का उदाहरण किस बात को सिद्ध करने के लिए दिया गया है?
उत्तरः इमर्सन और उनके पुत्र ने मिलकर बछड़े को जबरदस्ती खींचकर अंदर ले जाने की कोशिश की, किंतु वे असफल रहे। तब एक नौकरानी ने अपनी उँगली बछड़े के मुँह में दी और वह बछड़ा प्रेम से उसके पीछे चला गया। यह उदाहरण इस बात को सिद्ध करने के लिए दिया गया है कि बल-प्रयोग से नहीं, बल्कि प्रेम और सहानुभूति से किसी को भी वश में किया जा सकता है।
प्र. इस पाठ में लेखक ने दुनिया और काँच के महल में क्या समानता बताई है?
उत्तरः जिस प्रकार काँच के महल में जाने वाले व्यक्ति को अपना ही प्रतिबिम्ब हजारों काँचों में दिखाई देता है — यदि वह गुस्से में जाए तो हजारों क्रोधित चेहरे, यदि प्रेम से जाए तो हजारों प्रेमपूर्ण चेहरे — ठीक उसी प्रकार यह संसार भी हमारे स्वभाव का दर्पण है। दुनिया हमसे वैसा ही व्यवहार करती है जैसा हम दूसरों से करते हैं। यही काँच के महल और दुनिया के बीच समानता है।
प्र. लेखक ने प्रेम को “सीमेंट का काम” क्यों कहा है?
उत्तरः जिस प्रकार सीमेंट ईंटों और पत्थरों को जोड़कर एक मजबूत इमारत बनाता है, उसी प्रकार प्रेम और सहानुभूति लोगों के बीच के संबंधों को जोड़ती है और समाज को एकजुट रखती है। प्रेम एक ऐसी शक्ति है जो लोगों के बीच की दूरियाँ और दुश्मनियाँ मिटाकर उन्हें एक-दूसरे से बाँध देती है। इसीलिए लेखक ने प्रेम को “सीमेंट का काम” करने वाला कहा है।