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Class 9 Hindi Elective Chapter 4 Question Answer | चिड़िया की बच्ची | ASSEB

ASSEB (Assam State Board of Secondary Education) की कक्षा 9 की हिंदी ऐच्छिक पाठ्यपुस्तक आलोक भाग-1 का चौथा पाठ “चिड़िया की बच्ची” हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार जैनेंद्र कुमार द्वारा लिखी गई एक मार्मिक कहानी है। इस कहानी में एक धनी सेठ माधवदास और एक नन्ही-सी चिड़िया के बीच हुए संवाद के माध्यम से लेखक ने माँ के प्रेम की सर्वोच्चता और भौतिक सुख-सुविधाओं की निरर्थकता को बड़ी सुंदरता से उजागर किया है। यहाँ इस पाठ के पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर और अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न दिए गए हैं।


पाठ-परिचय (Summary)

सेठ माधवदास एक अत्यंत संपन्न व्यक्ति हैं। उनके पास संगमरमर की भव्य कोठी, रंग-बिरंगे फूलों से सजा सुंदर बगीचा, अपार धन-संपत्ति और अनेक नौकर-चाकर हैं। इतनी संपन्नता के बावजूद उनका मन एकाकी और उदास रहता है। उनकी कोठी में कोई चहल-पहल नहीं, कोई हँसी-खुशी नहीं। एक शाम वे अपने बगीचे में तख्त पर बैठकर हुक्का पीते हुए प्रकृति का आनंद ले रहे थे कि तभी एक अत्यंत सुंदर चिड़िया गुलाब की डाली पर आकर बैठ गई। उसकी गुलाबी गरदन, चमकदार स्याह पंख और चित्र-विचित्र शरीर देखकर सेठ मुग्ध हो गए।

सेठ ने चिड़िया को प्रलोभन देते हुए कहा कि यह बगीचा उसी का है और वे उसके लिए सोने का घर बनवाएंगे, मोतियों की झालर लगाएंगे, सुंदर पिंजरा बनवाएंगे और उसे हर प्रकार का सुख देंगे। परंतु चिड़िया ने बड़ी समझदारी से उत्तर दिया — “माँ मेरी बाट देखती होगी।” सेठ ने अपने प्रलोभनों की झड़ी लगा दी, परंतु चिड़िया का एकमात्र उत्तर यही रहा कि उसकी माँ उसकी प्रतीक्षा कर रही है। अंत में सेठ ने नौकर को इशारा किया, परंतु जैसे ही नौकर ने चिड़िया को पकड़ने की कोशिश की, चिड़िया उसके कठोर स्पर्श से घबराकर सुबकते हुए सीधी अपनी माँ की गोद में जा पहुँची।

यह कहानी हमें सिखाती है कि माँ का प्रेम किसी भी भौतिक सुख-सुविधा से बढ़कर है। धन-दौलत, सोने के घर और मोतियों की झालर किसी के लिए भी माँ की ममता का विकल्प नहीं बन सकते। वहीं दूसरी ओर माधवदास की एकाकीपन यह दर्शाती है कि जिस व्यक्ति के पास सब कुछ हो, परंतु स्नेह और अपनापन न हो, वह वास्तव में सुखी नहीं हो सकता। जैनेंद्र कुमार ने इस छोटी-सी कहानी में मनुष्य की भावनात्मक आवश्यकताओं और प्राकृतिक स्वतंत्रता के महत्व को बड़ी कुशलता से अभिव्यक्त किया है।


Summary (English)

“Chidiya ki Bachi” (The Little Bird) is a touching short story by renowned Hindi author Jainendra Kumar, included in the Class 9 Hindi Elective textbook Alok Bhag-1 prescribed by ASSEB. The story centres on Seth Madhavdas, a wealthy merchant who lives in a marble mansion surrounded by a beautiful garden, yet feels profoundly lonely and empty within. One evening, a strikingly beautiful little bird — with a rosy neck, shimmering dark wings, and a patterned body — lands on a rose branch in his garden. Captivated by her beauty, Madhavdas tries to entice her with promises of a golden home, pearl curtains, and every comfort imaginable, repeatedly telling her “this garden is yours.” But the little bird, innocent and untouched by his wealth, keeps saying simply, “My mother must be waiting for me.”

Madhavdas cannot understand why any creature would prefer a mother’s company over riches. Unable to persuade the bird, he signals his servant to catch her. The servant’s rough touch frightens the bird, and she breaks free, flying straight to her mother’s nest, sobbing softly. The story powerfully conveys that a mother’s love is irreplaceable — no amount of material wealth can substitute for the warmth of a mother’s embrace. It also reflects that true happiness lies not in possessions but in love, freedom, and natural bonds of affection. Madhavdas’s grand but empty mansion stands as a symbol of wealth without emotional fulfilment.


लेखक-परिचय (About the Author)

जैनेंद्र कुमार का जन्म 2 जनवरी, 1905 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के कौड़ियागंज नामक गाँव में हुआ था। उनका बचपन का नाम आनंदीलाल था। जन्म के दो वर्ष बाद ही उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उनका पालन-पोषण उनकी माँ और मामा ने किया। मामा ने हस्तिनापुर में एक गुरुकुल स्थापित किया था, जहाँ जैनेंद्र को प्रारंभिक शिक्षा मिली और वहीं उन्हें ‘जैनेंद्र’ नाम मिला।

जैनेंद्र कुमार हिंदी कथा साहित्य में मनोवैज्ञानिक उपन्यासों की परंपरा के प्रवर्तक माने जाते हैं। वे प्रेमचंद के बाद हिंदी के सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपन्यासकारों में गिने जाते हैं। उनकी कहानियाँ और उपन्यास पात्रों की मनःस्थिति, आंतरिक द्वंद्व और सूक्ष्म मनोभावों को अत्यंत कुशलता से चित्रित करते हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में उपन्यास परख, सुनीता, त्यागपत्र, कल्याणी और सुखदा तथा कहानी-संग्रह वातायन, एक रात और जय संधि विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया और दिल्ली विश्वविद्यालय तथा आगरा विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट् की मानद उपाधि प्रदान की। भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से भी अलंकृत किया। 24 दिसंबर, 1988 को उनका निधन हो गया।


शब्दार्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
संगमरमरएक प्रकार का चिकना, सफेद पत्थर (marble)
स्याहकाला (black)
प्रफुल्लितप्रसन्न, खिला हुआ (cheerful)
तृष्णातीव्र इच्छा, लालसा (craving, desire)
सुबकनाधीरे-धीरे रोना (to sob)
व्यसनबुरी आदत, लत (habit, addiction)
संध्याशाम का समय (evening)
झालरलटकती हुई सजावट (fringe, hanging decoration)
कठोरकड़ा, सख्त (harsh, hard)
स्पर्शछूना, स्पर्श करना (touch)
मालामालअत्यंत धनी (very wealthy)
तख्तलकड़ी का चौकोर आसन (wooden platform/seat)
प्रलोभनलालच देना (temptation, enticement)
मुग्धमोहित, आकर्षित (captivated, charmed)
वीरानसुनसान, खाली (desolate, empty)

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (Textbook Questions and Answers)

बोध एवं विचार

1. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो

(क) सेठ माधवदास ने किस चीज से कोठी बनवाई थी?

उत्तरः सेठ माधवदास ने संगमरमर से कोठी बनवाई थी।

(ख) चिड़िया किस डाली पर आकर बैठी?

उत्तरः चिड़िया गुलाब की डाली पर आकर बैठी।

(ग) चिड़िया के पंख कैसे थे?

उत्तरः चिड़िया के पंख ऊपर से चमकदार और स्याह (काले) थे।

(घ) सेठ बात करते समय क्या दबाते रहे?

उत्तरः सेठ बात करते समय हुक्का दबाते रहे।

(ङ) चिड़िया की बच्ची अंत में कहाँ उड़ गई?

उत्तरः चिड़िया की बच्ची अंत में अपनी माँ की गोद में उड़ गई।


2. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (लगभग 25 शब्दों में)

(क) सेठ माधवदास की अभिरुचियाँ क्या थीं?

उत्तरः सेठ माधवदास को कला और प्रकृति से प्रेम था। वे अपने धन से संगमरमर की सुंदर कोठी और रंग-बिरंगे फूलों का बगीचा बनवाते थे। शाम को बगीचे में बैठकर प्रकृति का आनंद लेना उनकी दिनचर्या थी।

(ख) चिड़िया का रंग-रूप कैसा था?

उत्तरः चिड़िया बहुत सुंदर थी। उसकी गरदन गुलाबी थी, पंख ऊपर से चमकदार और स्याह (काले) थे तथा उसका शरीर चित्र-विचित्र रंगों से सजा था।

(ग) चिड़िया को किस बात का डर था?

उत्तरः चिड़िया को यह डर था कि उसकी माँ उसकी प्रतीक्षा कर रही होगी और देर होने पर वह चिंतित हो जाएगी। इसके अलावा, उसे सेठ के नौकर का कठोर स्पर्श भी भयभीत कर गया।

(घ) “माँ मेरी बाट देखती होगी” — इस कथन का क्या अर्थ है?

उत्तरः इस कथन का अर्थ है कि चिड़िया की माँ उसकी राह देख रही होगी और उसकी चिंता कर रही होगी। यह कथन माँ के अटूट प्रेम और बच्चे के माँ के प्रति गहरे लगाव को व्यक्त करता है।


3. लघु उत्तरीय प्रश्न (लगभग 50 शब्दों में)

(क) सेठ माधवदास बार-बार “यह बगीचा तुम्हारा ही है” क्यों कहते रहे?

उत्तरः सेठ माधवदास की यह बात निःस्वार्थ नहीं थी। उनकी संपन्न कोठी खाली और सुनसान थी — वहाँ कोई चहल-पहल, कोई हँसी, कोई जीवंतता नहीं थी। चिड़िया की सुंदरता और चहचहाहट ने उनके एकाकी मन को क्षणिक आनंद दिया था। वे चाहते थे कि यह चिड़िया उनके बगीचे में रहे और उनके जीवन में रंग भरे। इसीलिए वे बार-बार उसे प्रलोभन देते हुए कहते रहे कि “यह बगीचा तुम्हारा ही है।”

(ख) सेठ ने चिड़िया को क्या-क्या प्रलोभन दिए?

उत्तरः सेठ माधवदास ने चिड़िया को अनेक प्रलोभन दिए — उन्होंने कहा कि वे चिड़िया के लिए सोने का सुंदर घर बनवाएंगे, मोतियों की झालर लगवाएंगे, एक सुंदर पिंजरा बनवाएंगे जिसमें वह आराम से रह सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास खूब धन है और चिड़िया को किसी चीज की कमी नहीं होगी। परंतु इन सभी प्रलोभनों के बावजूद चिड़िया ने माँ की गोद को ही प्राथमिकता दी।

(ग) माधवदास के जीवन में संपन्नता और असंतोष दोनों एक साथ क्यों थे?

उत्तरः माधवदास के पास संगमरमर की कोठी, सुंदर बगीचा, अपार धन-संपत्ति और अनेक नौकर-चाकर थे, अर्थात भौतिक दृष्टि से वे पूर्णतः संपन्न थे। परंतु उनके जीवन में स्नेह, अपनापन और जीवंतता का अभाव था। उनकी कोठी में कोई हँसी-खुशी नहीं थी, कोई प्रिय साथी नहीं था। धन से सब कुछ खरीदा जा सकता है, परंतु सच्चा प्रेम और भावनात्मक संतुष्टि नहीं — इसीलिए वे असंतुष्ट और एकाकी थे।


4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 100 शब्दों में)

(क) माधवदास और चिड़िया के मनोभावों में क्या अंतर था? स्पष्ट कीजिए।

उत्तरः माधवदास और चिड़िया के मनोभावों में मूलभूत अंतर था। माधवदास एक भौतिकवादी व्यक्ति थे — उनकी दृष्टि में धन से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है। वे सोचते थे कि यदि चिड़िया को सोने का घर, मोतियों की झालर और हर सुख-सुविधा दे दी जाए, तो वह अवश्य रह जाएगी। वे प्रेम को क्रय करने योग्य वस्तु मानते थे। इसके विपरीत, चिड़िया पूर्णतः भावनाप्रधान थी। उसके लिए माँ की गोद ही सबसे बड़ा सुख था। वह जानती थी कि सोना-चाँदी, पिंजरा और प्रलोभन माँ के निःस्वार्थ प्रेम का स्थान नहीं ले सकते। वह स्वतंत्रता और प्रेम को भौतिक सुख से ऊपर मानती थी। माधवदास अपनी संपन्नता के बावजूद भावनात्मक रूप से खोखले थे, जबकि चिड़िया निर्धन होते हुए भी अपनी माँ के प्रेम में संतुष्ट और पूर्ण थी।

(ख) “माँ मेरी बाट देखती होगी” — इस कथन से माँ की महत्ता किस प्रकार प्रकट होती है? विस्तार से लिखिए।

उत्तरः चिड़िया का यह कथन — “माँ मेरी बाट देखती होगी” — माँ के प्रेम की सार्वभौमिकता और श्रेष्ठता को बड़े सरल किंतु गहरे शब्दों में व्यक्त करता है। चिड़िया को माधवदास के प्रलोभन जरा भी नहीं लुभाते, चाहे वे कितने भी आकर्षक क्यों न हों — सोने का घर, मोती, धन-संपत्ति। उसका मन एक ही विचार में अटका है — माँ प्रतीक्षा कर रही होगी। यह कथन बार-बार दोहराया जाना इस बात का प्रमाण है कि बच्चे के लिए माँ की ममता सबसे बड़ा आश्रय होती है। माँ की प्रतीक्षा में एक गहरी चिंता है, एक अटूट लगाव है। यह केवल पक्षियों की बात नहीं — मनुष्य हो या पशु-पक्षी, सभी जीव अपनी माँ की गोद में ही सबसे अधिक सुरक्षित और सुखी अनुभव करते हैं। जैनेंद्र कुमार ने इस एक पंक्ति के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि माँ का प्रेम ऐसी अमूल्य निधि है जिसे किसी भी मूल्य पर नहीं खरीदा जा सकता।

(ग) कहानी के अंत में चिड़िया के भाग निकलने पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? क्या यह उचित था?

उत्तरः कहानी के अंत में चिड़िया का भाग निकलना अत्यंत स्वाभाविक और उचित था। नौकर के कठोर स्पर्श से चिड़िया भयभीत हो गई और वह सीधे अपनी माँ की गोद में जा पहुँची — यह दृश्य पाठक के मन में एक गहरी संतुष्टि और प्रसन्नता उत्पन्न करता है। यदि चिड़िया को बंदी बना लिया जाता, तो वह कहानी का दुखद अंत होता और चिड़िया की स्वतंत्रता तथा माँ के प्रेम का संदेश अधूरा रह जाता। चिड़िया का भाग जाना यह सिद्ध करता है कि प्रेम और स्वतंत्रता को बलपूर्वक बंधन में नहीं रखा जा सकता। सच्चा प्रेम बलात् नहीं, स्वेच्छा से आता है। माधवदास की विफलता यह संदेश देती है कि जो व्यक्ति धन के बल पर दूसरों के प्रेम और स्वतंत्रता को खरीदना चाहता है, वह कभी सफल नहीं होता। चिड़िया का माँ की गोद में लौटना प्रकृति के उस शाश्वत सत्य की पुष्टि करता है जिसमें माँ का प्रेम सर्वोपरि है।


5. सप्रसंग व्याख्या कीजिए

“इन कृतियों के बीच अपने को कितना भरा-भरा महसूस करता हूँ।” — (संदर्भ: चिड़िया के शब्दों के संदर्भ में माँ के प्रेम की व्याख्या)

उत्तरः यह भाव चिड़िया की उस अनुभूति से जुड़ा है जब वह अंततः अपनी माँ की गोद में पहुँचती है। माँ का प्रेम, उसकी ऊष्मा और आत्मीयता चिड़िया को पूर्ण और संतुष्ट बनाती है। माधवदास के सोने के घर और मोतियों की झालर उसे वह तृप्ति नहीं दे सकते थे जो माँ की गोद में मिली। यह कहानी हमें यह शिक्षा देती है कि भावनात्मक संपन्नता भौतिक संपन्नता से कहीं बढ़कर है। जिस प्रकार एक बच्चे को माँ की गोद में संसार का सर्वोत्तम सुख मिलता है, उसी प्रकार प्रकृति की प्रत्येक रचना अपने स्वाभाविक परिवेश में सबसे अधिक सुखी होती है।


अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Additional Important Questions)

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1: जैनेंद्र कुमार का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उत्तरः जैनेंद्र कुमार का जन्म 2 जनवरी, 1905 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के कौड़ियागंज गाँव में हुआ था।

प्रश्न 2: माधवदास की कोठी किस चीज से बनी थी?

उत्तरः माधवदास की कोठी संगमरमर से बनी थी।

प्रश्न 3: चिड़िया ने माधवदास के प्रस्ताव को क्यों अस्वीकार किया?

उत्तरः चिड़िया ने माधवदास का प्रस्ताव इसलिए अस्वीकार किया क्योंकि उसकी माँ उसकी प्रतीक्षा कर रही थी और उसे माँ की गोद ही सबसे बड़ा सुख लगती थी।

प्रश्न 4: कहानी में माधवदास का मन ‘वीरान’ क्यों था?

उत्तरः माधवदास के पास अपार संपत्ति थी, परंतु उनके जीवन में स्नेह, अपनापन और जीवंत साथी का अभाव था। उनकी कोठी में कोई हँसी-खुशी नहीं थी, इसलिए उनका मन वीरान था।

प्रश्न 5: चिड़िया को किसने पकड़ने की कोशिश की?

उत्तरः माधवदास के इशारे पर उनके नौकर ने चिड़िया को पकड़ने की कोशिश की।


लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 6: इस कहानी का वैकल्पिक शीर्षक क्या हो सकता है और क्यों?

उत्तरः इस कहानी का एक उपयुक्त वैकल्पिक शीर्षक हो सकता है — “माँ की गोद” या “उड़ गई चिड़िया”। “माँ की गोद” इसलिए उचित है क्योंकि पूरी कहानी माँ के प्रेम की सर्वोच्चता के इर्द-गिर्द घूमती है। चिड़िया माधवदास के सभी प्रलोभनों को ठुकराकर माँ की गोद को चुनती है — यही कहानी का केंद्रीय संदेश है। “उड़ गई चिड़िया” इसलिए भी उचित होगा क्योंकि अंत में चिड़िया का माधवदास के बंधन से मुक्त होकर उड़ जाना ही कहानी की पराकाष्ठा है।

प्रश्न 7: प्रकृति के स्वाभाविक अनुशासन के कौन-कौन से उदाहरण हमें जीवन में दिखते हैं?

उत्तरः प्रकृति में स्वाभाविक अनुशासन के अनेक उदाहरण मिलते हैं — पक्षी शाम होते ही अपने घोंसले की ओर लौट आते हैं; पशु अपने बच्चों को छोड़कर कहीं नहीं जाते; नदियाँ अपने स्वाभाविक मार्ग पर बहती रहती हैं; फूल अपने निश्चित समय पर खिलते और मुरझाते हैं। इन सभी में एक अदृश्य किंतु अटूट अनुशासन है जो बिना किसी बाहरी दबाव के स्वतः संचालित होता है। यह प्रकृति का सत्य है कि प्रत्येक जीव अपने स्वाभाविक परिवेश और अपनों के पास सबसे अधिक सुखी होता है।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 8: “चिड़िया की बच्ची” कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? विस्तार से लिखिए।

उत्तरः “चिड़िया की बच्ची” कहानी अनेक महत्वपूर्ण जीवन-मूल्यों की शिक्षा देती है। पहली और सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा यह है कि माँ का प्रेम अमूल्य और अपरिहार्य है। संसार की कोई भी भौतिक वस्तु — सोने का घर, मोती, धन-संपत्ति — माँ की ममता का स्थान नहीं ले सकती। दूसरी शिक्षा यह है कि स्वतंत्रता जीवन का मूलभूत अधिकार है। चिड़िया किसी भी बंधन को, चाहे वह सोने का ही क्यों न हो, स्वीकार करने को तैयार नहीं थी। तीसरी शिक्षा यह है कि धन से सच्चा प्रेम नहीं खरीदा जा सकता। माधवदास के पास अपार धन था, परंतु वे चिड़िया का प्रेम नहीं पा सके। चौथी शिक्षा यह है कि भौतिक संपन्नता भावनात्मक खालीपन को नहीं भर सकती। माधवदास सब कुछ होते हुए भी एकाकी और असंतुष्ट थे। यह कहानी हमें प्रेरित करती है कि हम जीवन में भौतिक सुखों के पीछे भागने की बजाय भावनात्मक संबंधों को महत्व दें और माता-पिता के स्नेह की कद्र करें।

प्रश्न 9: जैनेंद्र कुमार की कहानी-कला की विशेषताएँ “चिड़िया की बच्ची” के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तरः “चिड़िया की बच्ची” के आधार पर जैनेंद्र कुमार की कहानी-कला की निम्नलिखित विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं —

  • सरल किंतु प्रभावशाली भाषा: जैनेंद्र ने अत्यंत सहज और सरल भाषा में गहरे भावों को व्यक्त किया है। “माँ मेरी बाट देखती होगी” जैसा सरल वाक्य असाधारण भावनात्मक गहराई रखता है।
  • मनोवैज्ञानिक चरित्र-चित्रण: माधवदास और चिड़िया दोनों के मनोभावों का सूक्ष्म और यथार्थ चित्रण किया गया है। पात्रों की आंतरिक अवस्था को संवाद के माध्यम से स्पष्ट किया गया है।
  • संक्षिप्तता में व्यापकता: यह एक छोटी-सी कहानी है, परंतु इसमें माँ के प्रेम, स्वतंत्रता, भौतिकवाद और भावनात्मक खालीपन जैसे विशाल विषयों को समेटा गया है।
  • प्रतीकात्मकता: चिड़िया स्वतंत्रता और निश्छल प्रेम का प्रतीक है, जबकि माधवदास की संगमरमर की खाली कोठी भौतिक संपन्नता और आत्मिक रिक्तता का प्रतीक है।
  • सार्वभौमिक संदेश: कहानी का संदेश मनुष्यों के लिए उतना ही प्रासंगिक है जितना पशु-पक्षियों के लिए — माँ का प्रेम सर्वोपरि है।

भाषा-ज्ञान (Language Practice)

“पर” शब्द के विभिन्न अर्थों में वाक्य प्रयोग कीजिए।

  • पंख के अर्थ में: चिड़िया ने अपने पर फैलाए और उड़ गई।
  • स्थान के अर्थ में: चिड़िया गुलाब की डाली पर बैठी थी।
  • विरोधार्थक संयोजन के अर्थ में: माधवदास के पास सब कुछ था, पर उनका मन खाली था।

निम्नलिखित शब्दों के विलोम लिखिए।

शब्दविलोम
संपन्नविपन्न
स्वतंत्रपरतंत्र
कठोरकोमल
प्रसन्नउदास
सुंदरकुरूप
स्वार्थनिःस्वार्थ

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