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Class 9 Hindi Elective Chapter 2 Question Answer | परीक्षा | ASSEB

असम बोर्ड (ASSEB) की कक्षा 9 की हिंदी ऐच्छिक पाठ्यपुस्तक आलोक भाग-1 का दूसरा पाठ “परीक्षा” हिंदी साहित्य के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गई एक प्रेरणादायक कहानी है। इस कहानी में लेखक ने एक दीवान के चुनाव की अनोखी परीक्षा के माध्यम से सच्चे नेतृत्व के गुणों — दया, साहस और निःस्वार्थ सेवा — को उजागर किया है। यह पाठ छात्रों को सिखाता है कि वास्तविक योग्यता केवल शैक्षिक उपाधियों से नहीं, बल्कि चरित्र और करुणा से मापी जाती है। यहाँ इस पाठ के पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर और अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न दिए गए हैं।


पाठ-परिचय (Summary)

“परीक्षा” मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गई एक विचारोत्तेजक कहानी है जो सन् 1914 में पहली बार प्रकाशित हुई थी। कहानी में देवगढ़ रियासत के दीवान सरदार सुजान सिंह की कथा है, जो चालीस वर्षों की सेवा के बाद वृद्धावस्था और अशक्तता के कारण पद से मुक्त होना चाहते हैं। वे राजा साहब से अनुरोध करते हैं कि उन्हें अवकाश दिया जाए। राजा साहब एक शर्त रखते हैं — सुजान सिंह स्वयं अपने योग्य उत्तराधिकारी का चुनाव करें, तभी उन्हें मुक्ति मिलेगी।

इस पर देश के प्रमुख अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित किया जाता है जिसमें कहा जाता है — “देवगढ़ रियासत के लिए दीवान का चुनाव होगा। आवेदक का स्नातक होना आवश्यक नहीं, परंतु शारीरिक रूप से बलिष्ठ होना अनिवार्य है। उम्मीदवार एक माह तक रियासत में रहेंगे और उनके आचार-व्यवहार की जाँच की जाएगी।” इस विज्ञापन पर अनेक उम्मीदवार आते हैं — कोई डिग्रीधारी है, कोई पुजारी, कोई व्यापारी। सभी चुने जाने की चाह में अपने स्वभाव और आदतों को कृत्रिम रूप से बदलने लगते हैं।

एक दिन सभी उम्मीदवार हॉकी खेल रहे होते हैं। तभी एक किसान की अनाज से भरी गाड़ी कीचड़ में धँस जाती है। अधिकांश उम्मीदवार खेल में व्यस्त रहते हैं और किसान की परेशानी की ओर ध्यान नहीं देते। किंतु एक युवा खिलाड़ी पंडित जानकीनाथ, जो खेलते हुए चोटिल हो चुके थे, अपनी चोट की परवाह किए बिना उठते हैं और किसान की गाड़ी को कीचड़ से निकालने में मदद करते हैं। वे बिना किसी पुरस्कार की अपेक्षा के यह काम करते हैं।

इस पूरे दृश्य को वह किसान स्वयं देख रहा था, जो वास्तव में सुजान सिंह ही थे — एक परीक्षा के रूप में। वे घोषणा करते हैं कि पंडित जानकीनाथ ही नए दीवान के पद के सच्चे अधिकारी हैं। उनका तर्क था — “जो व्यक्ति चोटिल होने पर भी एक गरीब किसान की सहायता करे, वह कभी निर्धनों पर अत्याचार नहीं करेगा। उसमें दया, साहस और उदारता है — ये ही एक सच्चे दीवान के गुण हैं।” कहानी का संदेश है कि “गहरे पानी में उतरने पर ही मोती मिलता है” — अर्थात सच्चा चरित्र विपरीत परिस्थितियों में ही प्रकट होता है।


Summary (English)

“Pariksha” (The Test) is a thought-provoking short story by Munshi Premchand, first published in 1914. It centres on Sardar Sujan Singh, the ageing Diwan (chief minister) of the princely state of Devgarh, who seeks retirement after forty years of loyal service. The king agrees on one condition: Sujan Singh must personally select his worthy successor. An unconventional advertisement is placed in newspapers across the country, asking not for academic credentials but for strong character and physical fitness. Dozens of candidates arrive, each putting on an artificial display of virtue in the hope of being chosen.

The true test comes unexpectedly during a hockey game near a canal, when a farmer’s heavily loaded cart sinks into the mud. Most candidates ignore the struggling farmer and continue playing. Only one injured player, Pandit Janakinath, sets aside his own pain and works alongside the farmer to pull the cart free — asking for nothing in return. It is then revealed that the “farmer” was Sujan Singh himself, observing in disguise. He announces Janakinath as the new Diwan, explaining that a man who helps the poor despite personal suffering will never oppress them. The story teaches that authentic character reveals itself through selfless action, not through rehearsed behaviour, and that “one finds pearls only by diving into deep waters.”


लेखक-परिचय (About the Author)

मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 ई. को वाराणसी (काशी) के निकट लमही नामक गाँव में हुआ था। उनकी माता का निधन बचपन में ही हो गया था, जिससे उनका बचपन अनेक कठिनाइयों में बीता। शिक्षा के प्रति गहरी रुचि होने के बावजूद उन्हें अभावों के कारण अनेक संघर्ष करने पड़े।

प्रेमचंद ने अपना लेखन-कार्य उर्दू में “नवाब राय” नाम से आरंभ किया। उनकी पहली कहानी संग्रह ‘सोज़-ए-वतन’ (1907) को अंग्रेजी सरकार ने जब्त कर लिया। इसके बाद उन्होंने “प्रेमचंद” नाम अपनाया और हिंदी में लिखना शुरू किया। वे हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं के अग्रणी साहित्यकार माने जाते हैं। उन्होंने ग्रामीण जीवन, किसानों की पीड़ा, स्त्री-उत्पीड़न और सामाजिक भेदभाव को अपनी कहानियों का विषय बनाया।

उनकी प्रमुख रचनाओं में उपन्यास गोदान, गबन, कर्मभूमि, निर्मला, रंगभूमि और कहानी संग्रह मानसरोवर (8 भाग) विशेष उल्लेखनीय हैं। उन्होंने लगभग 300 से अधिक कहानियाँ और एक दर्जन से अधिक उपन्यास लिखे। उनकी भाषा सरल, स्वाभाविक और जीवंत है। उन्हें “उपन्यास सम्राट” की उपाधि दी जाती है। 8 अक्टूबर 1936 ई. को उनका निधन हुआ।


पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (Textbook Questions and Answers)

बोध एवं विचार

1. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो

(क) परीक्षा किस पद के लिए हुई थी?

उत्तरः परीक्षा दीवान के पद के लिए हुई थी।

(ख) दीवान साहब के सामने क्या शर्त रखी गई थी?

उत्तरः दीवान साहब के सामने यह शर्त रखी गई थी कि वे स्वयं योग्य उम्मीदवार का चुनाव करें।

(ग) उम्मीदवारों ने कौन-सा सामूहिक खेल खेला?

उत्तरः उम्मीदवारों ने हॉकी खेला।

(घ) दीवान के पद के लिए किसे चुना गया?

उत्तरः दीवान के पद के लिए पंडित जानकीनाथ को चुना गया।

2. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में)

(क) दीवान सुजान सिंह पद छोड़ना क्यों चाहते थे?

उत्तरः दीवान सुजान सिंह चालीस वर्षों की सेवा के बाद वृद्ध हो चुके थे। वे शारीरिक रूप से अशक्त हो गए थे और शेष जीवन ईश्वर-भजन और आत्म-चिंतन में बिताना चाहते थे, इसलिए पद छोड़ना चाहते थे।

(ख) उम्मीदवार दीवान के पद पर चुने जाने के लिए किस प्रकार कृत्रिम आचरण करते थे?

उत्तरः उम्मीदवार प्रभाव डालने के लिए अपने स्वाभाविक आचरण को बदल लेते थे। जो लोग पहले माँसाहारी थे वे शाकाहारी बनने का नाटक करते, जो अधार्मिक थे वे प्रार्थना करने लगते और सभी बनावटी नम्रता और सेवाभाव दिखाते थे।

(ग) पंडित जानकीनाथ ने गाड़ीवान की किस प्रकार सहायता की?

उत्तरः हॉकी खेलते समय चोट लगने के बावजूद पंडित जानकीनाथ उठे और कीचड़ में धँसी किसान की भारी गाड़ी को बाहर निकालने में अपनी पूरी शक्ति लगा दी। उन्होंने बिना किसी इनाम की उम्मीद किए यह काम किया।

(घ) “गहरे पानी में उतरने पर ही मोती मिलता है” — किसान ने यह बात क्यों कही?

उत्तरः किसान (जो वास्तव में सुजान सिंह थे) ने यह बात इसलिए कही क्योंकि जानकीनाथ ने कठिन परिस्थिति में, चोट लगे होने पर भी, बिना किसी अपेक्षा के सहायता की। उनका तात्पर्य था कि सच्ची योग्यता और चरित्र केवल विपरीत परिस्थितियों में परीक्षित होने पर ही प्रकट होता है।

(ङ) सुजान सिंह ने उम्मीदवारों की परीक्षा किस प्रकार ली?

उत्तरः सुजान सिंह ने किसान का वेश धारण करके अपनी गाड़ी को जानबूझकर कीचड़ में फँसाया। उन्होंने देखा कि उम्मीदवारों में से कौन स्वेच्छा से, बिना किसी लाभ की अपेक्षा किए, एक साधारण किसान की सहायता के लिए आगे आता है। यह उनकी वास्तविक परीक्षा थी।

(च) पंडित जानकीनाथ में कौन-से गुण थे जो उन्हें दीवान के पद के योग्य बनाते थे?

उत्तरः पंडित जानकीनाथ में दया, साहस, आत्मविश्वास और उदारता के गुण थे। वे चोटिल होने पर भी दूसरों की मदद के लिए आगे आए। उनमें निःस्वार्थ सेवा की भावना थी और वे गरीबों के प्रति करुणा रखते थे — ये ही एक सच्चे और न्यायप्रिय प्रशासक के आवश्यक गुण हैं।

(छ) एक योग्य दीवान में कौन-से गुण होने चाहिए?

उत्तरः एक योग्य दीवान में दया, साहस, उदारता, न्यायप्रियता और निःस्वार्थ सेवा-भाव होने चाहिए। उसे गरीबों और कमजोरों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए तथा विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और विवेक से काम लेना चाहिए।

3. सप्रसंग व्याख्या करो

(क) “लेकिन वह बूढ़ा जौहरी बगुलों में हंस ढूँढने के लिए बैठा था।”

उत्तरः प्रसंग: यह पंक्ति मुंशी प्रेमचंद की कहानी “परीक्षा” से ली गई है। जब उम्मीदवार देवगढ़ रियासत में आकर बनावटी सदाचार का प्रदर्शन कर रहे थे, तब इस पंक्ति का प्रयोग हुआ है।

व्याख्या: “बूढ़ा जौहरी” से तात्पर्य वृद्ध दीवान सुजान सिंह से है, जो अनुभवी और विवेकशील हैं। “बगुलों में हंस ढूँढना” एक रूपक है जिसका अर्थ है — दिखावे और पाखंड में डूबे कृत्रिम लोगों के बीच एक सच्चे, गुणवान और ईमानदार व्यक्ति को पहचानना। जिस प्रकार एक अनुभवी जौहरी नकली पत्थरों के बीच असली हीरे को पहचान लेता है, उसी प्रकार सुजान सिंह ढोंगी उम्मीदवारों के बीच एक सच्चे और योग्य व्यक्ति की तलाश में थे। यह पंक्ति सुजान सिंह की विवेक-शक्ति और अनुभव को दर्शाती है।

(ख) “गहरे पानी में उतरने पर ही मोती मिलता है।”

उत्तरः प्रसंग: यह उक्ति कहानी के अंत में सुजान सिंह (किसान के वेश में) द्वारा कही गई है, जब जानकीनाथ ने उनकी गाड़ी कीचड़ से निकाली।

व्याख्या: इस लोकोक्ति का शाब्दिक अर्थ है कि समुद्र की गहराई में उतरे बिना मोती नहीं मिलते। लाक्षणिक अर्थ में इसका तात्पर्य यह है कि वास्तविक सफलता, सच्चा परिचय और असली गुण तभी सामने आते हैं जब व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना करता है। जानकीनाथ ने चोट के बावजूद साहस और करुणा का परिचय दिया — यह उनके सच्चे चरित्र का “मोती” था जो कठिनाई की गहराई में उतरने पर मिला। यह पंक्ति कहानी के मूल संदेश को व्यक्त करती है।

(ग) “उन आँखों में श्रद्धा थी, इन आँखों में ईर्ष्या।”

उत्तरः प्रसंग: यह पंक्ति उस दृश्य की है जब जानकीनाथ किसान की गाड़ी निकालकर वापस आते हैं और अन्य उम्मीदवार तथा किसान उन्हें देखते हैं।

व्याख्या: “उन आँखों” से तात्पर्य किसान (सुजान सिंह) की आँखों से है, जिनमें जानकीनाथ के प्रति श्रद्धा और आदर का भाव था — क्योंकि उन्होंने एक निःस्वार्थ और साहसी काम किया था। “इन आँखों” से तात्पर्य अन्य उम्मीदवारों की आँखों से है, जिनमें ईर्ष्या और जलन थी — क्योंकि वे समझ गए थे कि जानकीनाथ ने जो कर दिखाया वह वे नहीं कर सके। यह विरोधाभास दो प्रकार के लोगों — सच्चे मूल्यांकनकर्ता और स्वार्थी प्रतिस्पर्धियों — के दृष्टिकोण को उजागर करता है।


भाषा एवं व्याकरण

4. निम्नलिखित शब्दों को उचित भेद में बाँटो

प्रश्नः जातिवाचक, व्यक्तिवाचक और भाववाचक संज्ञाओं में वर्गीकृत करो — रियासत, सुजान सिंह, दया, उम्मीदवार, जानकीनाथ, साहस, नदी, ईर्ष्या।

संज्ञा-भेदशब्द
जातिवाचक संज्ञारियासत, उम्मीदवार, नदी
व्यक्तिवाचक संज्ञासुजान सिंह, जानकीनाथ
भाववाचक संज्ञादया, साहस, ईर्ष्या

5. “शील” प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाओ

मूल शब्द“शील” प्रत्यय से बना शब्द
दयादयाशील
कर्मकर्मशील
सहनसहनशील
परिवर्तनपरिवर्तनशील
सेवासेवाशील

6. निम्नलिखित वाक्यों को काल-परिवर्तन करके लिखो

(क) वर्तमान काल → भूतकाल:

  • वर्तमान: सुजान सिंह दीवान हैं। → भूतकाल: सुजान सिंह दीवान थे।
  • वर्तमान: जानकीनाथ गाड़ी निकालते हैं। → भूतकाल: जानकीनाथ ने गाड़ी निकाली।

(ख) भूतकाल → भविष्यकाल:

  • भूतकाल: उम्मीदवार आए। → भविष्यकाल: उम्मीदवार आएँगे।
  • भूतकाल: किसान की गाड़ी कीचड़ में फँसी। → भविष्यकाल: किसान की गाड़ी कीचड़ में फँसेगी।

7. निम्नलिखित संधियों को जोड़ो (संधि विच्छेद)

संधि विच्छेदसंधि शब्द
देव + ईश्वरदेवेश्वर
महा + आत्मामहात्मा
परम + आनंदपरमानंद
राज + इंद्रराजेंद्र
सत् + आचारसदाचार

8. निम्नलिखित शब्दों के विलोम लिखो

शब्दविलोम
साहसकायरता
दयानिर्दयता / क्रूरता
योग्यअयोग्य
सेवास्वार्थ
श्रद्धाघृणा
उदारताकंजूसी / कृपणता

शब्दार्थ (Vocabulary)

शब्दअर्थ
रियासतराज्य / राजघराना / रजवाड़ा
दीवानप्रधानमंत्री / मुख्य मंत्री (रियासत का)
उम्मीदवारआवेदक / प्रत्याशी
नास्तिकईश्वर में विश्वास न रखने वाला
घृणानफ़रत / अरुचि
निर्णयफैसला
जौहरीरत्न-परखी / आभूषण व्यापारी
श्रद्धाआदर / सम्मान / भक्ति
ईर्ष्याजलन / डाह
पाखंडढोंग / दिखावा
उदारदानशील / मुक्तहस्त
अवकाशछुट्टी / विराम / सेवानिवृत्ति
कृत्रिमबनावटी / नकली
करुणादया / सहानुभूति

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Extra Important Questions)

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

प्रश्न 1: “परीक्षा” कहानी के लेखक कौन हैं?

उत्तरः “परीक्षा” कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं।

प्रश्न 2: मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम क्या था?

उत्तरः मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था।

प्रश्न 3: देवगढ़ रियासत के दीवान का नाम क्या था?

उत्तरः देवगढ़ रियासत के दीवान का नाम सरदार सुजान सिंह था।

प्रश्न 4: दीवान पद के लिए विज्ञापन में क्या शर्त रखी गई थी?

उत्तरः विज्ञापन में कहा गया था कि उम्मीदवार का स्नातक होना आवश्यक नहीं, परंतु शारीरिक रूप से बलिष्ठ होना जरूरी है।

प्रश्न 5: सुजान सिंह ने किसका वेश धारण किया था?

उत्तरः सुजान सिंह ने किसान का वेश धारण किया था।

प्रश्न 6: जानकीनाथ ने किसान की सहायता किस अवस्था में की?

उत्तरः जानकीनाथ ने चोटिल (घायल) अवस्था में, खेलते समय चोट लगने के बावजूद, किसान की सहायता की।

प्रश्न 7: “परीक्षा” कहानी पहली बार कब प्रकाशित हुई?

उत्तरः “परीक्षा” कहानी पहली बार सन् 1914 में प्रकाशित हुई।

प्रश्न 8: प्रेमचंद को किस उपाधि से जाना जाता है?

उत्तरः प्रेमचंद को “उपन्यास सम्राट” की उपाधि से जाना जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 1: “परीक्षा” कहानी में किस प्रकार के उम्मीदवारों का वर्णन है?

उत्तरः कहानी में विभिन्न पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों का वर्णन है — कोई डिग्रीधारी, कोई व्यापारी, कोई पुजारी। सभी उम्मीदवार दीवान के पद पाने के लिए अपने वास्तविक स्वभाव को छिपाकर कृत्रिम सदाचार का दिखावा करते थे। जो माँसाहारी थे वे शाकाहारी बनने का नाटक करते, जो अधर्मी थे वे धर्मपरायण दिखते। यह सब बनावट थी, वास्तविक परिवर्तन नहीं।

प्रश्न 2: सुजान सिंह ने परीक्षा की योजना कैसे बनाई?

उत्तरः सुजान सिंह यह जानते थे कि बनावटी माहौल में सच्चे चरित्र की पहचान नहीं हो सकती। इसलिए उन्होंने एक अप्रत्यक्ष परीक्षा की योजना बनाई। उन्होंने किसान का भेष धारण किया और जानबूझकर अपनी गाड़ी कीचड़ में फँसाई। वे देखना चाहते थे कि उम्मीदवारों में से कौन स्वाभाविक रूप से, बिना किसी लाभ की आशा किए, एक असहाय किसान की सहायता के लिए आगे आता है।

प्रश्न 3: मुंशी प्रेमचंद की भाषा-शैली की कोई दो विशेषताएँ लिखो।

उत्तरः मुंशी प्रेमचंद की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषताएँ हैं — (1) उनकी भाषा सरल, स्वाभाविक और बोधगम्य है। वे जटिल विचारों को भी सहज शब्दों में व्यक्त करते हैं। (2) वे लोकोक्तियों और मुहावरों का सटीक प्रयोग करते हैं, जैसे “बगुलों में हंस ढूँढना” और “गहरे पानी में मोती मिलना”, जो पाठक के मन पर गहरी छाप छोड़ते हैं।

प्रश्न 4: इस कहानी में बाल-मनोविज्ञान का क्या महत्व है?

उत्तरः यह कहानी बाल-मनोविज्ञान पर नहीं बल्कि वयस्क नेतृत्व और नैतिक मूल्यों पर केंद्रित है। इसमें यह दिखाया गया है कि मनुष्य के वास्तविक चरित्र का परीक्षण केवल विपरीत और अप्रत्याशित परिस्थितियों में ही किया जा सकता है। जब लोगों को पता होता है कि उन्हें देखा जा रहा है, तब वे बनावटी व्यवहार करते हैं; परंतु जब वे यह नहीं जानते कि उनकी परीक्षा हो रही है, तभी उनका सच्चा स्वभाव सामने आता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 1: “परीक्षा” कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखो।

उत्तरः “परीक्षा” मुंशी प्रेमचंद की एक प्रेरणादायक कहानी है। देवगढ़ रियासत के दीवान सरदार सुजान सिंह वृद्धावस्था के कारण पद छोड़ना चाहते हैं। राजा उनके सामने शर्त रखता है कि वे स्वयं अपना उत्तराधिकारी चुनें। अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित होता है और अनेक उम्मीदवार आते हैं। सभी एक माह तक रियासत में रहकर कृत्रिम सदाचार का प्रदर्शन करते हैं।

एक दिन हॉकी खेल के दौरान एक किसान की गाड़ी कीचड़ में फँस जाती है। बाकी उम्मीदवार ध्यान नहीं देते, किंतु चोटिल पंडित जानकीनाथ उठकर किसान की सहायता करते हैं। बाद में पता चलता है कि वह किसान स्वयं सुजान सिंह थे। वे जानकीनाथ को दीवान चुनते हैं क्योंकि उन्होंने करुणा, साहस और निःस्वार्थ सेवा का परिचय दिया। कहानी का संदेश है कि वास्तविक चरित्र विपरीत परिस्थितियों में ही परखा जाता है।

प्रश्न 2: पंडित जानकीनाथ के चरित्र की विशेषताएँ लिखो।

उत्तरः पंडित जानकीनाथ कहानी के नायक हैं और उनके चरित्र में निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:

  • साहसी: वे शारीरिक चोट की परवाह किए बिना कठिन काम करने के लिए आगे आए।
  • दयालु: उनके हृदय में गरीब किसान के प्रति सहज करुणा थी।
  • निःस्वार्थ: उन्होंने बिना किसी पुरस्कार या प्रशंसा की आशा के सहायता की।
  • ईमानदार: उन्होंने दिखावा नहीं किया — उनका स्वभाव ही ऐसा था।
  • जिम्मेदार: वे किसी के कष्ट को देखकर उदासीन नहीं रह सके।

ये सभी गुण उन्हें एक आदर्श प्रशासक और सच्चे मानव बनाते हैं।

प्रश्न 3: “परीक्षा” कहानी से हमें क्या नैतिक शिक्षा मिलती है?

उत्तरः “परीक्षा” कहानी से हमें अनेक महत्वपूर्ण नैतिक शिक्षाएँ मिलती हैं। सबसे पहली शिक्षा यह है कि वास्तविक योग्यता शैक्षिक उपाधियों से नहीं, बल्कि चरित्र और मूल्यों से मापी जाती है। दूसरी शिक्षा यह है कि सच्चा चरित्र तभी प्रकट होता है जब हम यह न जानते हों कि हमें देखा जा रहा है। जो व्यक्ति दिखावे के बिना भी दूसरों की सहायता करता है, वही सच्चे अर्थों में महान है।

तीसरी शिक्षा यह है कि कठिन परिस्थितियों में ही व्यक्ति की वास्तविक परीक्षा होती है — “गहरे पानी में उतरने पर ही मोती मिलता है।” और चौथी शिक्षा यह है कि एक अच्छे नेता या प्रशासक में दया, साहस और गरीबों के प्रति संवेदनशीलता होनी चाहिए। यह कहानी हमें प्रेरित करती है कि हम दिखावे से बचें और सच्चे मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में उतारें।

प्रश्न 4: सरदार सुजान सिंह के चरित्र की विशेषताएँ बताओ।

उत्तरः सरदार सुजान सिंह एक अनुभवी, विवेकशील और न्यायप्रिय प्रशासक हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ हैं:

  • विवेकशीलता: वे जानते थे कि कृत्रिम परिस्थिति में सच्चे चरित्र की परख नहीं हो सकती, इसलिए उन्होंने अप्रत्यक्ष परीक्षा की।
  • अनुभव: चालीस वर्षों के अनुभव ने उन्हें “जौहरी” बना दिया था — वे असली और नकली गुणों में फर्क कर सकते थे।
  • ईमानदारी: उन्होंने उत्तराधिकारी चुनने में पक्षपात नहीं किया।
  • दूरदर्शिता: वे एक ऐसे दीवान की तलाश में थे जो गरीबों का शोषण नहीं करे।

सुजान सिंह का चरित्र यह सिखाता है कि एक योग्य मूल्यांकनकर्ता वही होता है जो दिखावे से परे देख सके।


पाठ का संदेश (Moral of the Story)

“परीक्षा” कहानी का केंद्रीय संदेश यह है कि सच्चा नेतृत्व दिखावे में नहीं, बल्कि निःस्वार्थ सेवा और मानवीय करुणा में निहित है। प्रेमचंद ने यह स्थापित किया है कि शैक्षिक योग्यता और बाहरी आडंबर से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है — एक ऐसा हृदय जो दूसरों के दुख में स्वयं को भूलकर सहायता के लिए आगे आए। इस कहानी के माध्यम से ASSEB कक्षा 9 के छात्रों को यह प्रेरणा मिलती है कि वे अपने जीवन में सच्चे मूल्यों को अपनाएँ, दिखावे से बचें और करुणा तथा साहस के साथ जीना सीखें।

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