असम बोर्ड (ASSEB) की कक्षा 9 की हिंदी ऐच्छिक पाठ्यपुस्तक आलोक भाग-1 का पहला पाठ “हिम्मत और जिंदगी” हिंदी के महान राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा लिखा गया एक प्रेरणादायक निबंध है। इस पाठ में लेखक ने साहस, हिम्मत और संघर्ष को जीवन की सच्ची नींव बताया है। वे यह स्पष्ट करते हैं कि जीवन का असली सुख उन्हीं को मिलता है जो कठिनाइयों का सामना करते हैं। यहाँ इस पाठ के पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर और अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न दिए गए हैं।
पाठ-परिचय (Summary)
“हिम्मत और जिंदगी” रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा रचित एक विचारोत्तेजक और प्रेरणादायक निबंध है। इस निबंध में लेखक ने यह सिद्ध किया है कि जीवन का असली आनंद संघर्ष और परिश्रम से प्राप्त होता है, न कि आराम और विलासिता से। जिंदगी का असली मज़ा उन लोगों को मिलता है जो दूर रेगिस्तान से चलकर आते हैं — जो धूप में तपते हैं, कठिनाइयाँ झेलते हैं और तब चाँदनी की शीतलता और भोजन के स्वाद का सच्चा आनंद ले पाते हैं। पानी में जो अमृत-तत्त्व है, उसे वही जान सकता है जो धूप में खूब सूख चुका हो।
लेखक कहते हैं कि संसार में बड़ी चीजें बड़े संकटों में ही विकसित होती हैं। अकबर ने तेरह वर्ष की उम्र में ही अपने पिता के शत्रु को परास्त कर दिया था। महाभारत में पांडवों ने लाक्षागृह की मुसीबत झेली, लंबे वनवास के कष्ट उठाए — और इसीलिए अपने से अधिक शक्तिशाली कौरवों को भी परास्त कर सके। साहसी मनुष्य जनमत की परवाह नहीं करता, तमाशा देखने वालों की ओर नहीं देखता। वह सपने उधार नहीं लेता बल्कि अपने विचारों में रमकर अपनी ही किताब पढ़ता है। भैंस और भेड़ झुंड में चलती हैं, परंतु सिंह अकेला होने पर भी मगन रहता है।
निबंध के अंत में लेखक ने महाभारत के एक प्रसंग के माध्यम से युधिष्ठिर को यह संदेश दिया है कि जीवन उन्हीं के लिए है जो समर (युद्ध) देखकर भी निडर होकर लड़ते हैं, भागते नहीं। विंस्टन चर्चिल के शब्दों में — जिंदगी की सबसे बड़ी विशेषता (सिफत) हिम्मत है और बाकी सभी गुण इसी से उत्पन्न होते हैं। साहस की जिंदगी सबसे श्रेष्ठ जिंदगी होती है — यही इस निबंध का केंद्रीय संदेश है।
लेखक-परिचय (About the Author)
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्म 23 सितंबर 1908 ई. को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया नामक गाँव में एक कृषक परिवार में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में हुई और उन्होंने सन् 1928 ई. में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके पश्चात उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से बी.ए. की डिग्री प्राप्त की। वे पहले अध्यापक बने, फिर बिहार सरकार में सब-रजिस्ट्रार के पद पर कार्य किया। सन् 1952 ई. से 1964 ई. तक वे भारत की राज्यसभा के सदस्य रहे। बाद में वे भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति भी नियुक्त हुए।
दिनकर जी हिंदी के महान राष्ट्रकवि और श्रेष्ठ निबंधकार थे। उनकी प्रमुख काव्य-रचनाओं में प्रणभंग, रेणुका, हुँकार, रसवंती, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी और उर्वशी विशेष उल्लेखनीय हैं। गद्य में उनकी रचना संस्कृति के चार अध्याय अत्यंत प्रसिद्ध है। सन् 1959 ई. में “संस्कृति के चार अध्याय” के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया। सन् 1972 ई. में “उर्वशी” काव्य के लिए उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ। 24 अप्रैल 1974 ई. को उनका देहांत हो गया। उनकी भाषा तत्सम-प्रधान, ओजस्वी और राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत है।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (Textbook Questions and Answers)
बोध एवं विचार
1. सही विकल्प का चयन करो
(क) किन व्यक्तियों को सुख का स्वाद अधिक मिलता है?
उत्तरः (ख) जो सुख का मूल्य पहले चुकाता है और उसका मज़ा बाद में लेता है।
(ख) पानी में जो अमृत-तत्त्व है, उसे कौन जानता है?
उत्तरः (ख) जो धूप में खूब सूख चुका है।
(ग) ‘गोधूलि वाली दुनिया के लोगों’ से अभिप्राय है?
उत्तरः (घ) जीवन को दाँव पर लगाने वाले लोग।
(घ) साहसी मनुष्य की पहली पहचान यह है कि वह —
उत्तरः (घ) बिलकुल निडर और बेखौफ होता है।
2. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में)
(क) चाँदनी की शीतलता का आनंद कैसा मनुष्य उठा पाता है?
उत्तरः चाँदनी की शीतलता का आनंद वह मनुष्य उठा पाता है जो दिन भर धूप में परिश्रम करके थक जाता है। उसके शरीर को शीतलता की सच्ची ज़रूरत होती है इसलिए उसे इसका वास्तविक आनंद मिलता है।
(ख) लेखक ने अकेले चलने वाले की तुलना सिंह से क्यों की है?
उत्तरः साहसी मनुष्य अपने विचारों में रमा रहता है, सपने उधार नहीं लेता। झुंड में चलना भेड़-भैंस का स्वभाव है। सिंह अकेला होने पर भी मगन रहता है — इसीलिए लेखक ने अकेले चलने वाले साहसी की तुलना सिंह से की है।
(ग) जिंदगी का भेद किसे मालूम है?
उत्तरः जिंदगी का भेद उसे मालूम है जो यह जानकर चलता है कि जिंदगी कभी खत्म होने वाली चीज नहीं है। जो संकटों का सामना करता है और जीवन की चुनौतियों से टकराता है, उसी को जिंदगी के असली रहस्य का पता चलता है।
(घ) लेखक ने जीवन के साधकों को क्या चुनौती दी है?
उत्तरः लेखक ने जीवन के साधकों को यह चुनौती दी है — “अगर किनारे की मरी हुई सीपियों से संतोष मिलता तो समुद्र के अंतराल में छिपे हुए मौक्तिक कोष को कौन बाहर लाएगा?” अर्थात् साहस के बिना जीवन के वास्तविक रत्न प्राप्त नहीं होते।
3. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में)
(क) नीति तथा भोजन का वास्तविक आनंद किन्हें मिलता है?
उत्तरः भोजन का असली स्वाद उसे मिलता है जो कुछ दिन बिना खाए रह सका हो। नींद का आनंद उसे मिलता है जो दिन भर धूप में परिश्रम करके थका हो। उसी प्रकार चाँदनी की शीतलता की सच्ची अनुभूति उसे होती है जो धूप में तपा हो। जिसने पहले कष्ट उठाया है, उसी को बाद में मिले सुख का वास्तविक आनंद प्राप्त होता है।
(ख) जीवन में असफलताएँ मिलने पर साहसी मनुष्य क्या करता है?
उत्तरः साहसी व्यक्ति असफलताओं से घबराकर अपने कदम पीछे नहीं हटाता, बल्कि आगे बढ़ने के लिए अपने साहस को और दृढ़ करता है। वह हार को अपनी नियति नहीं मानता। बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए आने वाली बाधाओं को वह अपनी परीक्षा समझकर उनका सामना करता है और अंततः विजयी होता है।
(ग) कायरता दिखाने वाले व्यक्ति का जीवन कैसा होता है?
उत्तरः कायरता दिखाने वाले व्यक्ति का जीवन सांसारिक सुखों से वंचित रहता है। जिस व्यक्ति ने जीवन के महत्वपूर्ण क्षण पर साहस नहीं दिखाया, उसकी अंतरात्मा उसे धिक्कारती है। वह न तो बड़ा लक्ष्य पा सकता है और न ही जीवन का सच्चा आनंद भोग सकता है। उसे जीवन भर अपनी कायरता की आवाज़ सुननी पड़ती है।
(घ) जिंदगी में जोखिम से बचने के कारण क्या हानि होती है?
उत्तरः जो आदमी जोखिम से हर जगह घेरा डालकर बचता रहता है, वह अपने ही घेरों के बीच कैद हो जाता है। जोखिम से बचने के प्रयास में वह वास्तव में अपनी जिंदगी को आगे बढ़ने से रोक लेता है। सुरक्षा की खोज में वह जीवन के सभी अवसर खो देता है और जीवन निरर्थक हो जाता है।
4. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में)
(क) लेखक ने जिंदगी की कौन-सी दो सूरतें बताई हैं? इनमें से किसे श्रेष्ठ माना है और क्यों?
उत्तरः लेखक रामधारी सिंह दिनकर ने जिंदगी की दो सूरतें (स्थितियाँ) बताई हैं। पहली — बड़े उद्देश्य के लिए कोशिश करना, जोखिम उठाना और जगमगाती जीत हासिल करना; या असफल होने पर भी गर्व के साथ हारना। दूसरी — उन गरीब आत्माओं के साथ शामिल होना जो न अधिक सुख जानती हैं और न अधिक दुख — जो थोड़े में गुज़ारा करती हैं और संसार में अपना कोई विशेष प्रभाव नहीं छोड़तीं।
लेखक ने पहली सूरत को श्रेष्ठ माना है। कारण यह है कि बड़े मकसद के लिए जोखिम उठाने वाला व्यक्ति, चाहे जीते या हारे, अपनी आत्मा से धिक्कार नहीं पाता। जबकि थोड़े में गुज़ारा करने वाली जिंदगी भी उन लोगों के लिए श्रेष्ठ है जो कम से कम बिना किसी बड़ी कायरता के जीते हैं। परंतु सबसे बड़ी पराजय वह है जब मनुष्य महत्वपूर्ण अवसर पर साहस न दिखाए और आत्मग्लानि में जीए।
(ख) सुख न मिलना और मौके पर साहस न दिखाना — इन दोनों में से लेखक ने किसे श्रेष्ठ माना है और क्यों?
उत्तरः लेखक ने जीवन में सुख न मिलना को साहस न दिखाने से श्रेष्ठ माना है। उनका मानना है कि सुख-भोग सभी को नहीं मिलता — यह कोई असाधारण बात नहीं है। परंतु जो व्यक्ति जीवन की चुनौती के महत्वपूर्ण क्षण पर हिम्मत नहीं दिखाता, उसे अपनी अंतरात्मा से धिक्कार भरी आवाज़ें सुननी पड़ती हैं।
सुख न मिलना तो प्रकृति की व्यवस्था हो सकती है, परंतु कायरता एक व्यक्तिगत दोष है जिसे मनुष्य की अंतरात्मा कभी क्षमा नहीं करती। इसीलिए लेखक का कहना है कि सुख न मिले तो चलेगा, परंतु जब भी जीवन में साहस दिखाने का अवसर आए, उससे कभी पीछे न हटो — यही सच्ची जिंदगी है।
(ग) इस पाठ में पांडवों का उल्लेख किस प्रसंग में किया गया है? इससे लेखक क्या सिद्ध करना चाहता है?
उत्तरः इस पाठ में लेखक ने पांडवों का उल्लेख यह सिद्ध करने के लिए किया है कि कठिनाइयाँ झेलने वाले ही अंततः विजयी होते हैं। पांडवों की संख्या कम थी और कौरव उनसे अधिक शक्तिशाली थे, फिर भी पांडव विजयी हुए। इसका कारण यह था कि पांडवों ने लाक्षागृह की मुसीबत झेली और वनवास के लंबे कष्ट सहे। इन संकटों ने उनके धैर्य, साहस और संकल्पशक्ति को और मजबूत कर दिया।
इस उदाहरण से लेखक यह सिद्ध करना चाहता है कि संसार में बड़े लोग बड़ी मुसीबतों में पलकर ही महान बनते हैं। जो व्यक्ति कठिनाइयों से भागता है, वह कभी महान नहीं बन सकता। संकटों का सामना करने से मनुष्य की आंतरिक शक्ति विकसित होती है और यही शक्ति उसे विजय दिलाती है।
5. सप्रसंग व्याख्या करो (लगभग 100 शब्दों में)
(क) “साहसी मनुष्य सपने उधार नहीं लेता, वह अपने विचारों में रमा हुआ अपनी ही किताब पढ़ता है।”
उत्तरः प्रसंग: यह पंक्ति रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के निबंध “हिम्मत और जिंदगी” से ली गई है। इसमें लेखक साहसी मनुष्य की विशेषताओं का वर्णन कर रहे हैं।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि साहसी मनुष्य की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वह दूसरों के विचारों, सपनों और आदर्शों की नकल नहीं करता। वह किसी के सपने उधार नहीं लेता बल्कि अपने स्वयं के विचारों में डूबा रहता है और अपनी ही सोच के अनुसार जीवन जीता है। लोकमत की परवाह किए बिना वह अपने रास्ते पर चलता है। जैसे भेड़-भैंस झुंड में चलती हैं, परंतु सिंह अकेला होने पर भी मगन रहता है — उसी प्रकार साहसी मनुष्य भी भीड़ से अलग होकर अपने आत्मविश्वास से भरपूर जीवन जीता है। यह पंक्ति स्वतंत्र चिंतन और आत्मनिर्भरता का संदेश देती है।
(ख) “कामना का अंचल छोटा मत करो, जिंदगी के फल को दोनों हाथों से दबाकर निचोड़ो।”
उत्तरः प्रसंग: यह पंक्ति रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के निबंध “हिम्मत और जिंदगी” से ली गई है। यहाँ लेखक पाठकों को जीवन में बड़े लक्ष्य रखने और उन्हें पूरी शक्ति से प्राप्त करने की प्रेरणा दे रहे हैं।
व्याख्या: लेखक का आशय है कि जीवन में अपनी इच्छाओं और लक्ष्यों को कभी सीमित मत करो। बड़े सपने देखना और उन्हें प्राप्त करने के लिए पूरी क्षमता से प्रयास करना ही सच्चे जीवन का प्रतीक है। जो व्यक्ति अपनी आकांक्षाओं को छोटा कर लेता है, वह जीवन के वास्तविक फल से वंचित रह जाता है। “दोनों हाथों से निचोड़ो” का अर्थ है — अपनी पूरी शक्ति और लगन से जीवन के अवसरों का उपयोग करो। परिश्रम और साहस के साथ किया गया प्रयास ही जीवन को सार्थक बनाता है।
भाषा एवं व्याकरण
(क) निम्नलिखित अरबी-फारसी शब्दों के हिंदी (तत्सम) समकक्ष शब्द लिखो:
उत्तरः
| अरबी-फारसी शब्द | हिंदी (तत्सम) समकक्ष |
|---|---|
| खौफ | भय, डर |
| जिंदगी | जीवन |
| सिफत | विशेषता, गुण |
| कोशिश | प्रयास, प्रयत्न |
| महसूस | अनुभव |
| जरूरत | आवश्यकता |
| जोखिम | खतरा, संकट |
| तरलाई | शीतलता |
(ख) संबंधवाचक सर्वनाम का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य बनाओ:
उत्तरः
- जिन्हें आराम का अभ्यास है, उनके लिए आराम ही मौत है।
- जो परिश्रमी हैं, वे सदा सफल होते हैं।
- जिस विद्यार्थी का लक्ष्य स्पष्ट है, वह अवश्य आगे बढ़ता है।
- जो सत्य बोलते हैं, उन्हें कभी शर्मिंदा नहीं होना पड़ता।
- जिन्होंने संघर्ष किया है, वे ही सच्चे जीवन का आनंद जानते हैं।
(ग) निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ बताकर वाक्यों में प्रयोग करो:
1. दाँव पर लगाना
उत्तरः अर्थ — किसी उद्देश्य के लिए सब कुछ जोखिम में डालना।
वाक्य — वीर सैनिक देश की रक्षा के लिए अपना जीवन दाँव पर लगा देते हैं।
2. पाँव बढ़ाना
उत्तरः अर्थ — आगे बढ़ना, प्रगति करना।
वाक्य — कठिनाइयों के बावजूद उसने अपने लक्ष्य की ओर पाँव बढ़ाए।
3. मगन रहना
उत्तरः अर्थ — अपने में मस्त और संतुष्ट रहना।
वाक्य — संत अपनी साधना में मगन रहते हैं, दुनिया की चिंता नहीं करते।
4. घेरा डालना
उत्तरः अर्थ — सीमा बाँध लेना, दायरे में बंद हो जाना।
वाक्य — जो व्यक्ति जोखिम के चारों ओर घेरा डालता है, वह स्वयं उसी घेरे में कैद हो जाता है।
अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Additional Important Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
प्रश्न 1: “हिम्मत और जिंदगी” के लेखक कौन हैं? उनके बारे में संक्षेप में बताइए।
उत्तरः “हिम्मत और जिंदगी” के लेखक रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हैं। उनका जन्म 1908 ई. में बिहार के सिमरिया गाँव में हुआ। वे हिंदी के महान राष्ट्रकवि और निबंधकार थे। राज्यसभा सदस्य और भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में भी उन्होंने कार्य किया। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्म विभूषण और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सन् 1974 ई. में उनका देहांत हुआ।
प्रश्न 2: लेखक के अनुसार जीवन के असली सुख का रहस्य क्या है?
उत्तरः लेखक के अनुसार जीवन के असली सुख का रहस्य यह है कि सुख का मूल्य पहले चुकाना पड़ता है। जो व्यक्ति पहले कठिनाइयाँ झेलता है, परिश्रम करता है और संकटों का सामना करता है — वही बाद में मिले सुख का वास्तविक आनंद उठा सकता है। जैसे धूप में तपा व्यक्ति ही चाँदनी की शीतलता का सच्चा आनंद पाता है, वैसे ही संघर्ष के बाद मिली सफलता का स्वाद सबसे मधुर होता है।
प्रश्न 3: अकबर का उदाहरण इस पाठ में किस संदर्भ में दिया गया है?
उत्तरः अकबर का उदाहरण इस पाठ में यह बताने के लिए दिया गया है कि बड़ी चीजें बड़े संकटों में ही विकसित होती हैं। अकबर ने मात्र तेरह वर्ष की उम्र में ही अपने पिता के शत्रु को परास्त कर दिया था। इतनी कम उम्र में इतना बड़ा कार्य उनके साहस और हिम्मत का प्रमाण है। यह उदाहरण सिद्ध करता है कि कठिन परिस्थितियाँ व्यक्ति की वास्तविक क्षमता को उभारती हैं।