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जलाशय के किनारे कुहरी थीं – Class 8 Hindi Elective Question Answer | ASSEB | पल्लव भाग-3

प्रस्तुत पाठ “जलाशय के किनारे कुहरी थीं” ASSEB (असम राज्य माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) कक्षा 8 की हिंदी वैकल्पिक पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-3 की चौथी कविता है। यह प्रकृति-चित्रण की एक सुंदर कविता है जिसमें कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने जलाशय के किनारे की रात्रिकालीन और भोर-पूर्व की छवियों को अत्यंत सजीव ढंग से प्रस्तुत किया है। इस पृष्ठ पर विद्यार्थियों को कविता का सारांश, कवि-परिचय, शब्दार्थ, पाठ्यपुस्तक के समस्त प्रश्नोत्तर और अतिरिक्त प्रश्नोत्तर प्राप्त होंगे।


पाठ-परिचय (Summary)

कविता-पाठ

जलाशय के किनारे कुहरी थीं,
हरी-नीली पत्तियों का घेरा था,
आम की लटकती डाल जल पर आई थी,
चारों ओर घना अँधेरा था।

जुगनुओं के दल यहाँ-वहाँ दमके,
वन का परिमल मलय में था,
नारियल के पेड़ क्रम से झुके,
ताड़ खड़ा निश्चल समय में था।

स्यार बन-बन विचरते थे,
ओट में छुप पपीहा गाता था,
सितारे धीरे-धीरे बुझ गए,
जलाशय में लहर उठाता था।

कविता का सारांश (Hindi Summary)

इस कविता में कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने एक जलाशय के किनारे की रात्रिकालीन प्रकृति का अत्यंत जीवंत और चित्रात्मक वर्णन किया है। कविता में रात के समय जलाशय के चारों ओर कुहरी (कोहरा) का घना आवरण छाया हुआ है। जलाशय को हरी-नीली पत्तियों का घेरा घिरे हुए है और आम की एक लटकती डाल जल की सतह तक झुकी हुई है। इन सब कारणों से जलाशय के किनारे घना अँधेरा व्याप्त है।

इसी अँधेरे में जुगनुओं के दल यहाँ-वहाँ अपनी चमक से टिमटिमाते हैं और उस निशा को जीवंत बनाते हैं। वायु में वन का परिमल (सुगंध) घुली हुई है जो मलय पवन के साथ फैल रही है। नारियल के पेड़ पंक्तिबद्ध होकर हवा में झुक रहे हैं, जबकि ताड़ का पेड़ निश्चल और स्थिर खड़ा है — मानो वह समय को थामे हुए हो।

वन में स्यार (सियार) निर्भय होकर इधर-उधर विचरण करते हैं। पेड़ों की ओट में छिपकर पपीहा अपने मधुर स्वर में गाता है। धीरे-धीरे भोर निकट आती है, तारे बुझने लगते हैं और जलाशय की सतह पर लहरें उठने लगती हैं। इस प्रकार कविता रात के सन्नाटे से प्रभात के आगमन तक प्रकृति के एक संपूर्ण चक्र को मनोरम ढंग से प्रस्तुत करती है।

Summary (English): In this poem, poet Sarveshwar Dayal Saxena paints a vivid nocturnal picture of a lake shore. The lake is enveloped in fog and surrounded by a circle of green and blue leaves, with a mango branch hanging over the water, creating deep darkness all around. Fireflies shimmer here and there, forest fragrance floats in the breeze, coconut trees sway in a row while a palm tree stands motionless. Jackals roam freely through the forest, a papiha (cuckoo-like bird) sings hidden behind the trees, and as dawn approaches, stars fade one by one and ripples begin to rise on the lake’s surface. The poem beautifully captures the transition from the stillness of night to the awakening of a new day.


कवि-परिचय (About the Poet)

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का जन्म 15 सितंबर 1927 को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हुआ था। उनकी उच्च शिक्षा काशी और इलाहाबाद में हुई। वे आकाशवाणी में सहायक निर्माता के पद पर कार्यरत रहे, उसके बाद ‘दिनमान’ पत्रिका के सह-संपादक बने तथा अंत में बाल पत्रिका ‘पराग’ के संपादक रहे।

सक्सेना जी हिंदी की ‘नई कविता’ आंदोलन के प्रमुख कवियों में से एक हैं। उनकी कविता में ग्रामीण जीवन की संवेदना, सामाजिक विसंगतियों पर व्यंग्य और प्रकृति के प्रति गहरा प्रेम झलकता है। उनकी काव्य-भाषा सरल, चित्रात्मक और प्रभावशाली है।

प्रमुख रचनाएँ:

  • काव्य-संग्रह: काठ की घंटियाँ, बाँस का पुल, एक सूनी नाव, गर्म हवाएँ, कुआनो नदी, खूँटियों पर टँगे लोग (साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1983)
  • उपन्यास: पागल कुत्तों का मसीहा, सोया हुआ जल
  • बाल साहित्य: लाख की नाक, बतूता का जूता
  • नाटक: बकरी, राजबाज बहादुर और रानी रूपमती

उनका निधन 25 सितंबर 1983 को हुआ। उन्हें 1983 में ‘खूँटियों पर टँगे लोग’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।


शब्दार्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
जलाशयतालाब, पोखर, जलकुंड (water body / pond / lake)
कुहरीकोहरा, धुंध (fog, mist)
घेराचारों ओर से घिरा हुआ दायरा (circle, enclosure)
परिमलसुगंध, खुशबू (fragrance, aroma)
मलयमलय पर्वत से आने वाली सुगंधित वायु; शीतल पवन (cool fragrant breeze)
जुगनूएक छोटा कीट जो रात में चमकता है (firefly)
दमकेचमके, झिलमिलाए (shone, glimmered)
नारियलनारियल का पेड़ (coconut tree)
ताड़एक लंबा और सीधा पेड़ (palm tree / Borassus tree)
निश्चलस्थिर, बिना हिले-डुले (motionless, still)
स्यारसियार (jackal)
विचरते थेघूम रहे थे, भ्रमण कर रहे थे (were roaming, wandering)
ओटआड़, छुपने की जगह (shelter, hiding place, behind)
पपीहाएक पक्षी जो मधुर स्वर में गाता है (papiha / pied cuckoo bird)
सितारेतारे (stars)
लहरतरंग, पानी में उठने वाली लहर (wave, ripple)

पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (Textbook Questions and Answers)

अभ्यास – 1 : एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दीजिए

(क) जल के ऊपर क्या आई थी?

उत्तर: जल के ऊपर आम की लटकती डाल आई थी।

(ख) यहाँ-वहाँ किसके दल दमक रहे थे?

उत्तर: यहाँ-वहाँ जुगनुओं के दल दमक रहे थे।

(ग) जलाशय में क्या उठ रहा था?

उत्तर: जलाशय में लहर उठ रही थी।

अभ्यास – 2 : एक या दो वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) जलाशय के किनारे कुहरी कहाँ फैली थी?

उत्तर: जलाशय के किनारों पर कुहरी (कोहरा) फैली हुई थी। चारों ओर हरी-नीली पत्तियों का घेरा था और आम की डाल जल पर लटक रही थी जिसके कारण घना अँधेरा और कोहरा जलाशय के समीप छाया हुआ था।

(ख) वायु में किसकी सुगंध थी?

उत्तर: वायु में वन का परिमल (सुगंध) मिली हुई थी। मलय पवन के साथ जंगल की खुशबू फैल रही थी।

(ग) पेड़ों की ओट में छुपकर कौन गा रहा था?

उत्तर: पेड़ों की ओट में छुपकर पपीहा अपने मधुर स्वर में गा रहा था।

(घ) सितारे कब बुझ गए?

उत्तर: भोर (प्रभात) आने पर, यानी उषाकाल में, सितारे धीरे-धीरे बुझ गए।

(ङ) ताड़ का पेड़ किस प्रकार खड़ा था?

उत्तर: ताड़ का पेड़ निश्चल होकर खड़ा था, अर्थात् वह बिल्कुल स्थिर था — मानो वह समय को थामे हुए हो।

अभ्यास – 3 : तीन-चार वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) जलाशय के किनारे घना अँधेरा क्यों छाया हुआ था?

उत्तर: जलाशय के किनारे घना अँधेरा कई कारणों से छाया हुआ था। सबसे पहले, उस समय रात का वातावरण था और जलाशय के चारों ओर कुहरी (कोहरा) फैली हुई थी जो प्रकाश को और कम कर देती थी। दूसरे, जलाशय के चारों ओर हरी-नीली पत्तियों का घना घेरा था जो आसमान की रोशनी को रोक रहा था। तीसरे, आम की एक लटकती डाल जल की सतह तक झुकी हुई थी, जिससे और भी अँधेरा हो रहा था। इन सभी कारणों — कुहरी, घना पत्तेदार घेरा और लटकती डाल — के कारण जलाशय के किनारे घोर अंधकार छाया था।

(ख) कविता में प्रभात का आगमन किस प्रकार दर्शाया गया है?

उत्तर: कविता में प्रभात के आगमन को बहुत सूक्ष्म और सुंदर ढंग से दर्शाया गया है। कवि कहते हैं कि आकाश के सितारे धीरे-धीरे बुझने लगते हैं — रात का अँधेरा कम होने का यह सबसे स्पष्ट संकेत है। साथ ही जलाशय की सतह पर लहरें उठने लगती हैं जो यह संकेत देती हैं कि प्रकृति जाग रही है। रात भर निश्चल और शांत रहने वाला जलाशय भोर होते-होते गतिशील हो उठता है। इस प्रकार तारों का बुझना और जलाशय में लहरों का उठना — दोनों मिलकर प्रभात के आगमन की सूचना देते हैं।

अभ्यास – 4 : भाव स्पष्ट कीजिए

“नारियल के पेड़ क्रम से झुके, ताड़ खड़ा निश्चल समय में था।”

उत्तर: इस पंक्ति में कवि ने दो भिन्न प्रकार के पेड़ों के माध्यम से दो विपरीत स्वभावों का चित्रण किया है। नारियल के पेड़ पंक्तिबद्ध होकर हवा के साथ झुकते-उठते हैं — वे लचीले और गतिशील हैं। इसके विपरीत ताड़ का पेड़ स्थिर और निश्चल खड़ा है — वह न हवा से झुकता है, न समय के साथ बदलता है। कवि यहाँ प्रकृति की इस विविधता को उकेरते हुए संकेत देते हैं कि जीवन में कुछ चीज़ें परिवर्तनशील होती हैं और कुछ अटल। ताड़ का निश्चल खड़े रहना समय की एकरसता और रात की गहरी शांति का भी प्रतीक है।

अभ्यास – 5 : भाषा-अध्ययन

(क) कविता में आए प्राकृतिक तत्त्वों की सूची बनाइए।

उत्तर: कविता में निम्नलिखित प्राकृतिक तत्त्व आए हैं:

  • जलाशय (तालाब/पोखर)
  • कुहरी (कोहरा)
  • हरी-नीली पत्तियाँ
  • आम की डाल
  • जुगनू
  • वन (जंगल)
  • परिमल (सुगंध)
  • मलय पवन
  • नारियल के पेड़
  • ताड़ का पेड़
  • स्यार (सियार)
  • पपीहा (पक्षी)
  • सितारे
  • लहर (जलाशय में)

(ख) कविता में आए क्रिया-विशेषण शब्द छाँटिए।

उत्तर: कविता में आए क्रिया-विशेषण शब्द हैं — यहाँ-वहाँ (स्थानवाचक), धीरे-धीरे (रीतिवाचक), क्रम से (रीतिवाचक)।

(ग) कविता में जुगनुओं की तुलना किससे की जा सकती है और क्यों?

उत्तर: जुगनुओं की तुलना छोटे-छोटे दीपकों या टिमटिमाते तारों से की जा सकती है, क्योंकि वे रात के घने अँधेरे में अपनी प्राकृतिक रोशनी से टिमटिमाते हैं और अँधकार में जीवन का संचार करते हैं — ठीक वैसे ही जैसे दीपक रात में प्रकाश बिखेरता है।


अतिरिक्त प्रश्नोत्तर (Additional Questions and Answers)

प्रश्न 1. “जलाशय के किनारे कुहरी थीं” कविता के कवि कौन हैं? उनका संक्षिप्त परिचय दीजिए।

उत्तर: इस कविता के कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना हैं। उनका जन्म 15 सितंबर 1927 को उत्तर प्रदेश के बस्ती में हुआ था। वे हिंदी की ‘नई कविता’ धारा के महत्त्वपूर्ण कवि हैं। उन्होंने आकाशवाणी और ‘दिनमान’ पत्रिका में कार्य किया तथा ‘पराग’ बाल पत्रिका का संपादन भी किया। उनके प्रमुख काव्य-संग्रह हैं — काठ की घंटियाँ, बाँस का पुल, खूँटियों पर टँगे लोग। उन्हें 1983 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। 25 सितंबर 1983 को उनका निधन हो गया।

प्रश्न 2. कविता में जलाशय के किनारे किन-किन प्राणियों का उल्लेख है?

उत्तर: कविता में जलाशय के किनारे और उसके आसपास के वन में तीन प्राणियों का उल्लेख है — (1) जुगनू — जो यहाँ-वहाँ अपनी रोशनी से दमकते हैं, (2) स्यार (सियार) — जो वन में निर्भय होकर विचरते हैं, और (3) पपीहा — जो पेड़ों की ओट में छुपकर मधुर स्वर में गाता है।

प्रश्न 3. कविता में कुहरी और अँधेरे का क्या महत्त्व है?

उत्तर: कविता में कुहरी और अँधेरा रात के एकांत और रहस्यमय वातावरण का निर्माण करते हैं। ये दोनों तत्त्व जलाशय के परिवेश को एक विशेष नाटकीयता प्रदान करते हैं। कुहरी के कारण दृश्यता कम हो जाती है, जिससे जुगनुओं की रोशनी और पपीहे का स्वर और अधिक प्रभावशाली और मर्मस्पर्शी बन जाते हैं। कुहरी और अँधेरा मिलकर रात की गहराई को व्यक्त करते हैं जो भोर होने पर धीरे-धीरे छँटती है।

प्रश्न 4. नारियल और ताड़ के पेड़ों में क्या अंतर दिखाया गया है?

उत्तर: कविता में नारियल और ताड़ के पेड़ों को विपरीत स्वभाव के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है। नारियल के पेड़ ‘क्रम से झुके’ हैं अर्थात् वे हवा के साथ एक के बाद एक झुकते हैं — वे लचीले और गतिशील हैं। इसके विपरीत ताड़ का पेड़ ‘निश्चल’ खड़ा है — वह अटल और स्थिर है, हवा से भी नहीं झुकता। इस प्रकार कवि ने प्रकृति की विविधता — लचीलेपन और दृढ़ता — को एक साथ चित्रित किया है।

प्रश्न 5. “स्यार बन-बन विचरते थे” — इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इस पंक्ति में कवि ने रात के समय सियारों के वन में निर्भय और स्वतंत्र विचरण का चित्रण किया है। रात के एकांत में, जब मनुष्य घरों में होते हैं, सियार वन में अपनी इच्छानुसार घूमते हैं। ‘बन-बन’ शब्द यह बताता है कि वे एक जगह नहीं रुकते बल्कि पूरे जंगल में घूमते रहते हैं। यह पंक्ति रात के उस वातावरण को प्रकट करती है जब वन्य प्राणी पूर्ण स्वतंत्रता से विचरण करते हैं।

प्रश्न 6. इस कविता की भाषा-शैली की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: इस कविता की भाषा-शैली की दो प्रमुख विशेषताएँ हैं — (1) चित्रात्मकता: कवि ने अपनी भाषा में इतने सजीव बिम्ब (images) प्रस्तुत किए हैं कि पाठक जलाशय के किनारे के दृश्य को जैसे साक्षात् देख लेता है। जुगनुओं का दमकना, नारियल के पेड़ों का क्रम से झुकना, ताड़ का निश्चल खड़ा रहना — ये सब दृश्य-बिम्ब अत्यंत प्रभावशाली हैं। (2) सरलता और प्रवाह: कविता की भाषा सरल, सहज और प्रवाहमयी है। तत्सम और तद्भव शब्दों का सुंदर सामंजस्य है जो कविता को पठनीय और श्रुतिमधुर बनाता है।

प्रश्न 7. कविता का केंद्रीय भाव क्या है?

उत्तर: इस कविता का केंद्रीय भाव रात्रिकालीन प्रकृति की सुंदरता और उसके भोर में बदलने की प्रक्रिया है। कवि ने जलाशय के किनारे की उस निशा को चित्रित किया है जहाँ कुहरी, अँधेरा, जुगनू, पपीहा, सियार और पेड़ सभी मिलकर एक रहस्यमय और सुंदर वातावरण बनाते हैं। कविता हमें यह संदेश देती है कि प्रकृति का हर क्षण — रात का अँधेरा हो या भोर का प्रकाश — अपनी विशेष सुंदरता से भरपूर है और हमें उसका आनंद लेना चाहिए।

प्रश्न 8. कविता में पपीहे का उल्लेख किस संदर्भ में हुआ है?

उत्तर: कविता में पपीहे का उल्लेख एक ऐसे पक्षी के रूप में हुआ है जो पेड़ों की ओट (आड़) में छुपकर अपना मधुर गान करता है। पपीहा अपनी मीठी आवाज़ के लिए प्रसिद्ध है। रात के शांत वातावरण में उसका छिप-छिपकर गाना एक रहस्यमय संगीत का आभास देता है। पपीहे का यह स्वर कविता में उस निशा के वातावरण को और अधिक मनोरम और जीवंत बना देता है।

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