असम बोर्ड (ASSEB) की कक्षा 8 की हिंदी ऐच्छिक पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-3 का छठा पाठ “भारतीय संगीत की एक झलक” एक ज्ञानवर्धक निबंध है जो भारतीय संगीत की समृद्ध और प्राचीन परंपरा का परिचय देता है। इस पाठ में नेहा और स्नेहा नामक दो सहेलियों के संवाद के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, नृत्य तथा प्रमुख संगीतकारों के बारे में रोचक जानकारी प्रस्तुत की गई है। यहाँ इस पाठ के पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर और अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न दिए गए हैं।
पाठ-परिचय (Summary)
“भारतीय संगीत की एक झलक” पाठ में दो सहेलियों — नेहा और स्नेहा — के बीच की बातचीत के रूप में भारतीय संगीत की विशाल और गौरवशाली परंपरा का वर्णन किया गया है। पाठ की शुरुआत होती है जब स्नेहा, भूपेन हाजरिका के प्रसिद्ध गीत “दिल हुम हुम करे घबराए” की धुन गुनगुनाते हुए आती है। नेहा उसे इस गीत के बारे में बताती है और फिर भारतीय संगीत की विस्तृत जानकारी देती है। नेहा बताती है कि आचार्य शारंगदेव ने संगीत की परिभाषा दी है — “गीतं, वाद्यं तथा नृत्यं, त्रयं संगीतमुच्यते” — अर्थात् गीत, वाद्य और नृत्य — इन तीनों कलाओं के समन्वय को संगीत कहते हैं।
पाठ में बताया गया है कि भारतीय संगीत की उत्पत्ति वैदिक युग से हुई है। सामवेद को संगीत का आदि स्रोत माना जाता है। मध्यकाल में तानसेन जैसे महान संगीतज्ञ अकबर के दरबार की शोभा बढ़ाते थे। भारतीय शास्त्रीय संगीत की मुख्यतः दो धाराएँ हैं — हिंदुस्तानी (उत्तर भारतीय) और कर्नाटकी (दक्षिण भारतीय)। हिंदुस्तानी संगीत असम, बंगाल, बिहार, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात आदि में प्रचलित है, जबकि कर्नाटकी संगीत तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में प्रचलित है।
पाठ में प्रमुख वाद्य यंत्रों और उनके कलाकारों की भी चर्चा है। तबला वादन में पं. समता प्रसाद, पं. जाकिर हुसैन; सितार में पं. रवि शंकर; सरोद में उस्ताद अली अकबर खाँ और उस्ताद अमजद अली खाँ; शहनाई में उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ; तथा बाँसुरी में पं. हरिप्रसाद चौरासिया विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसके अलावा भारतीय शास्त्रीय नृत्य — सत्रीया, भरतनाट्यम, कथक, कथकली, ओडिसी, मणिपुरी और मोहिनीअट्टम — का भी परिचय दिया गया है। पाठ के अंत में नेहा यह निश्चय करती है कि वह शास्त्रीय संगीत सीखेगी क्योंकि यह भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है।
Summary in English: “Bharatiya Sangeet Ki Ek Jhalak” (A Glimpse of Indian Music) is an informative essay presented as a dialogue between two friends, Neha and Sneha. The essay traces the rich and ancient tradition of Indian music from its Vedic origins, noting that the Samaveda is considered the earliest source of Indian music. It explains the famous definition of music by Acharya Sharangdev — that music comprises three elements: song (geet), instrument (vadya), and dance (nritya). The essay describes the two main streams of Indian classical music: Hindustani (North Indian) and Carnatic (South Indian). It introduces celebrated musicians such as Tansen (in Akbar’s court), Pt. Ravi Shankar (sitar), Ustad Bismillah Khan (shehnai), Pt. Hariprasad Chaurasia (flute), Ustad Ali Akbar Khan (sarod), and Pt. Zakir Hussain (tabla). The essay also covers classical dance forms — Sattriya, Bharatanatyam, Kathak, Kathakali, Odissi, Manipuri, and Mohiniyattam — and their prominent exponents. The lesson concludes with Neha deciding to learn classical music, inspired by the richness of India’s musical heritage.
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (Textbook Questions and Answers)
अभ्यास-माला
1. सही विकल्प का चयन करो
(क) ‘दिल हुम हुम करे घबराए ……… बरसाए’ गीत के रचयिता कौन हैं?
उत्तरः (ii) भूपेन हाजरिका
(ख) अकबर के राजदरबार के प्रसिद्ध संगीतज्ञ थे?
उत्तरः (iii) तानसेन
(ग) भारतीय संगीत की शुरुआत किस युग से हुई?
उत्तरः (i) वैदिक युग से
(घ) पं. रवि शंकर किस वाद्य के श्रेष्ठ कलाकार हैं?
उत्तरः (iii) सितार
(ङ) भारतीय शास्त्रीय संगीत की कितनी प्रचलित धाराएँ हैं?
उत्तरः (ii) दो
2. अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(क) आचार्य शारंगदेव के अनुसार संगीत की परिभाषा क्या है?
उत्तरः आचार्य शारंगदेव के अनुसार संगीत की परिभाषा है — “गीतं, वाद्यं तथा नृत्यं, त्रयं संगीतमुच्यते।” अर्थात् गीत, वाद्य और नृत्य — इन तीनों कलाओं को मिलाकर संगीत कहा जाता है।
(ख) भारतीय शास्त्रीय संगीत की कितनी धाराएँ हैं? ये क्या-क्या हैं?
उत्तरः भारतीय शास्त्रीय संगीत की दो धाराएँ हैं — (१) हिंदुस्तानी अथवा उत्तर भारतीय संगीत की धारा और (२) कर्नाटकी अथवा दक्षिण भारतीय संगीत की धारा।
(ग) हिंदुस्तानी संगीत की धारा का प्रचलन कहाँ-कहाँ है?
उत्तरः हिंदुस्तानी संगीत की धारा का प्रचलन असम, बंगाल, बिहार, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्यों में है।
(घ) दक्षिण भारतीय संगीत क्या है? इस धारा का संगीत कहाँ-कहाँ प्रचलित है?
उत्तरः दक्षिण भारतीय संगीत को कर्नाटकी संगीत कहते हैं। इसके स्वरों का उच्चारण हिंदुस्तानी संगीत से भिन्न होता है। इसकी गीतों की भाषाएँ मुख्यतः तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ हैं। यह धारा तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में प्रचलित है।
(ङ) नेहा ने शास्त्रीय संगीत सीखने का निश्चय क्यों किया?
उत्तरः नेहा ने शास्त्रीय संगीत सीखने का निश्चय इसलिए किया क्योंकि उसे भारतीय संगीत की प्राचीन एवं समृद्ध परंपरा की जानकारी मिली। उसे मालूम हो गया कि शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति का अभिन्न और अमूल्य अंग है। इस ज्ञान से प्रेरित होकर उसने शास्त्रीय संगीत सीखने का निश्चय किया।
(च) सत्रीया नृत्य के प्रवर्तक कौन हैं? इसे लोकप्रिय बनाने में किन-किन का योगदान है?
उत्तरः सत्रीया नृत्य के प्रवर्तक महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव हैं। इसे लोकप्रिय बनाने में नृत्यकार मणिराम बायन मुक्तियार, रखेश्वर शइकीया ‘बरबायन’ और नृत्याचार्य यतीन गोश्वामी का विशेष योगदान है।
3. लघु उत्तरीय प्रश्न
(क) भारतीय संगीत की उत्पत्ति कब और कहाँ से हुई?
उत्तरः भारतीय संगीत की उत्पत्ति वैदिक युग से हुई है। सामवेद को भारतीय संगीत का आदि स्रोत माना जाता है। वेदों में गायन की एक विशेष परंपरा थी, जिसे ‘सामगान’ कहते थे। इस प्रकार भारतीय संगीत का इतिहास कम से कम तीन-चार हजार वर्ष पुराना है।
(ख) संगीत में वाद्य का क्या महत्व है?
उत्तरः संगीत में वाद्य का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। वाद्य यंत्र ही गीत के राग और लय को मधुर तथा प्रभावशाली बनाते हैं। वाद्यों के बिना संगीत और नृत्य दोनों अधूरे हैं। वाद्य यंत्र संगीत की भावनाओं को और गहराई से श्रोताओं तक पहुँचाते हैं। तबला, सितार, सरोद, शहनाई, बाँसुरी आदि वाद्य यंत्र भारतीय संगीत की पहचान हैं।
(ग) डॉ. भूपेन हाजरिका के बारे में संक्षेप में लिखो।
उत्तरः डॉ. भूपेन हाजरिका असम के विश्वप्रसिद्ध संगीतकार, गायक, कवि और फिल्मकार थे। उन्हें “सुधाकंठ” की उपाधि से सम्मानित किया गया था। उनके गीत असमिया, बंगाली, हिंदी सहित अनेक भाषाओं में लिखे और गाए गए। उनका गीत “दिल हुम हुम करे घबराए” बहुत प्रसिद्ध है। वे पद्मश्री, पद्मभूषण और भारत रत्न जैसे सर्वोच्च पुरस्कारों से सम्मानित हुए।
(घ) हिंदुस्तानी और कर्नाटकी संगीत में क्या अंतर है?
उत्तरः हिंदुस्तानी और कर्नाटकी संगीत में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं — हिंदुस्तानी संगीत उत्तर भारत में प्रचलित है जबकि कर्नाटकी संगीत दक्षिण भारत में। हिंदुस्तानी संगीत में ईरान, फारस और अरब के संगीत का प्रभाव है, जबकि कर्नाटकी संगीत वैदिक परंपरा के अधिक निकट है। दोनों में स्वरों के उच्चारण की शैली भिन्न होती है। हिंदुस्तानी संगीत की गायन भाषाएँ मुख्यतः हिंदी, उर्दू और ब्रजभाषा हैं, जबकि कर्नाटकी संगीत में तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ का प्रयोग होता है।
4. निम्नलिखित तालिका को पूरा करो
(वाद्य कलाकार तालिका)
| वाद्य यंत्र | प्रमुख कलाकार |
|---|---|
| तबला | पं. समता प्रसाद, पं. जाकिर हुसैन, पवन बरदल |
| सितार | पं. रवि शंकर, पं. सुनील शास्त्री |
| सरोद | उस्ताद अली अकबर खाँ, उस्ताद अमजद अली खाँ |
| शहनाई | उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ, बाँगाश खाँ |
| बाँसुरी | पं. हरिप्रसाद चौरासिया, प्रभात शर्मा |
(शास्त्रीय नृत्य और प्रवर्तक/कलाकार तालिका)
| नृत्य शैली | प्रदेश / क्षेत्र | प्रमुख कलाकार / प्रवर्तक |
|---|---|---|
| सत्रीया | असम | महापुरुष शंकरदेव, मणिराम बायन मुक्तियार, यतीन गोश्वामी |
| भरतनाट्यम | तमिलनाडु | रुक्मिणी देवी अरुंडेल, लीला सैमसन |
| कथक | उत्तर भारत | पं. शंभू महाराज, पं. बिरजू महाराज |
| कथकली | केरल | गुरु शंकर, शांता राव |
| ओडिसी | उड़ीसा | इलम एंद्रदाई, झावेरी बहनें |
| मणिपुरी | मणिपुर | चिन्नामू अम्मा, कल्याणी अम्मा |
| मोहिनीअट्टम | केरल | पद्म सुब्रह्मण्यम, अलारमेल वल्ली |
5. भाषा-अध्ययन (व्याकरण)
(क) निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग करो
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| श्रीगणेश करना | आरंभ करना | आज हमने नई परियोजना का श्रीगणेश किया। |
| तय करना | निश्चय करना | नेहा ने संगीत सीखने का मन तय कर लिया। |
| गले लगाना | अपनाना / स्नेह से मिलना | माँ ने लौटे बेटे को गले लगाया। |
| हाथ बँटाना | सहायता करना | स्नेहा ने घर के काम में माँ का हाथ बँटाया। |
| फूला न समाना | अत्यधिक प्रसन्न होना | प्रतियोगिता में प्रथम आने पर राहुल फूला न समाया। |
| आँखों का तारा | अत्यंत प्रिय होना | यह बच्चा अपने माता-पिता का आँखों का तारा है। |
(ख) कर्तृवाच्य को कर्मवाच्य में बदलो
- मैं गीत गाता हूँ। → मुझसे गीत गाया जाता है।
- राजू गेंद खेलता है। → राजू से गेंद खेली जाती है।
- रीमा चिट्ठी लिखती है। → रीमा से चिट्ठी लिखी जाती है।
- माँ दोनों के लिए चाय लाई। → माँ से दोनों के लिए चाय लाई गई।
- नेहा संगीत सीखती है। → नेहा से संगीत सीखा जाता है।
(ग) निम्नलिखित वाक्यों को भूतकाल में बदलो
- दोपहर का समय है। → दोपहर का समय था।
- नेहा स्नेहा की सहेली है। → नेहा स्नेहा की सहेली थी।
- राजू गेंद खेलता है। → राजू गेंद खेलता था।
- रेहना खत लिख रही है। → रेहना खत लिख रही थी।
- स्नेहा गीत गुनगुनाती है। → स्नेहा गीत गुनगुनाती थी।
(घ) निम्नलिखित वाक्यों की अशुद्धियाँ सुधारो
- यह तुमने बहुत अच्छा सवाल पूछी है। → यह तुमने बहुत अच्छा सवाल पूछा है।
- रोहन ने पुस्तक पढ़ा। → रोहन ने पुस्तक पढ़ी।
- अयन ने रोटी खाया। → अयन ने रोटी खाई।
- नेहा गाना गाई। → नेहा ने गाना गाया।
6. शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| धुन | सुर, सुरीली ध्वनि |
| मशहूर | विख्यात, प्रसिद्ध |
| शुरुआत | आरंभ, प्रारंभ |
| श्रीगणेश | आरंभ, शुभारंभ |
| रोशन | चमकना, प्रसिद्ध करना |
| पहचान | परिचय, ख्याति |
| दौरान | समय के भीतर, के समय |
| अलावा | सिवाय, इसके अतिरिक्त |
| देन | अवदान, योगदान |
| प्रवर्तक | आरंभ करने वाला, संस्थापक |
| त्रयं | तीनों, तीन का समूह |
| अभिन्न | अलग न होने वाला, अविभाज्य |
अतिरिक्त प्रश्नोत्तर (Additional Questions and Answers)
प्रश्न 1: पाठ में किसका गीत “दिल हुम हुम करे घबराए” का उल्लेख किया गया है? वे किस राज्य से संबंधित हैं?
उत्तरः पाठ में डॉ. भूपेन हाजरिका के गीत “दिल हुम हुम करे घबराए” का उल्लेख किया गया है। वे असम राज्य से संबंधित थे और असम के महान संगीत महापुरुषों में उनकी गिनती होती है। उन्हें “सुधाकंठ” कहकर पुकारा जाता था।
प्रश्न 2: भारतीय संगीत पर किन-किन विदेशी संगीत परंपराओं का प्रभाव पड़ा?
उत्तरः भारतीय संगीत पर ईरान, फारस (पर्शिया) और अरब देशों की संगीत परंपराओं का प्रभाव पड़ा। मुगल काल में यह प्रभाव विशेष रूप से हिंदुस्तानी संगीत में देखा जा सकता है। इसी मिश्रण से ठुमरी, गजल, खयाल जैसी गायन शैलियाँ विकसित हुईं।
प्रश्न 3: तानसेन कौन थे? उनका भारतीय संगीत में क्या योगदान है?
उत्तरः तानसेन मुगल सम्राट अकबर के दरबार के नवरत्नों में से एक और महान संगीतज्ञ थे। उनका वास्तविक नाम रामतनु पांडे था। वे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान गायक और वादक थे। उन्होंने कई नए रागों की रचना की, जिनमें ‘दरबारी कान्हड़ा’ राग अत्यंत प्रसिद्ध है। उन्हें संगीत सम्राट की उपाधि दी जाती है।
प्रश्न 4: सत्रीया नृत्य को राष्ट्रीय मान्यता कब मिली? इसकी क्या विशेषता है?
उत्तरः सत्रीया नृत्य को सन् 2000 में भारत के शास्त्रीय नृत्यों में राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई। इसकी विशेषता यह है कि यह असम के वैष्णव सत्रों में महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव द्वारा प्रवर्तित किया गया। यह नृत्य आध्यात्मिक भक्ति और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का अनूठा संगम है। इसमें भाव, ताल और अभिनय का सुंदर समन्वय होता है।
प्रश्न 5: उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ किस वाद्य यंत्र के लिए प्रसिद्ध थे? उनके बारे में संक्षेप में लिखो।
उत्तरः उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ शहनाई वादन के लिए विश्वविख्यात थे। वे बिहार के डुमराँव में जन्मे थे और अपना अधिकांश जीवन वाराणसी में बिताया। उन्होंने शहनाई को एक सामान्य लोक वाद्य से उठाकर शास्त्रीय मंच पर प्रतिष्ठित किया। उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनकी शहनाई की मधुर तान आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में गूँजती है।
प्रश्न 6: “संगीत एक सार्वभौमिक भाषा है” — इस कथन को पाठ के आधार पर समझाइए।
उत्तरः संगीत को सार्वभौमिक भाषा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह भाषा, जाति, धर्म और देश की सीमाओं को पार करता है। पाठ में देखा गया है कि भारतीय संगीत पर ईरान, अरब और फारस के संगीत का प्रभाव पड़ा और इसके बावजूद भारतीय संगीत अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखता है। डॉ. भूपेन हाजरिका के गीत असमिया से आरंभ होकर हिंदी और बंगाली में भी समान रूप से लोकप्रिय हुए। इस प्रकार संगीत मनुष्यों के बीच भाई-चारे और प्रेम का सेतु बनाता है।
प्रश्न 7: पल्लव भाग-3 के इस पाठ से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तरः “भारतीय संगीत की एक झलक” पाठ से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को पहचानें और उसे सहेजें। भारतीय संगीत, नृत्य और कला की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी और अत्यंत समृद्ध है। नेहा की तरह हमें भी अपनी कला परंपरा को सीखने और आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। संगीत न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह मन की शांति, भावनाओं की अभिव्यक्ति और राष्ट्रीय एकता का भी माध्यम है।
प्रश्न 8: पाठ में किन-किन शास्त्रीय नृत्य शैलियों का उल्लेख है? इनमें से किसी एक का परिचय दो।
उत्तरः पाठ में सत्रीया, भरतनाट्यम, कथक, कथकली, ओडिसी, मणिपुरी और मोहिनीअट्टम शास्त्रीय नृत्य शैलियों का उल्लेख है। कथक उत्तर भारत की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैली है। इसमें तीव्र गति, पदताल और भाव-अभिनय का अद्भुत समन्वय होता है। पं. शंभू महाराज और पं. बिरजू महाराज इसके सर्वश्रेष्ठ कलाकार माने जाते हैं। कथक शैली में हिंदू पौराणिक कथाओं के साथ-साथ मुगलकालीन दरबारी परंपराओं का भी प्रभाव दिखता है।