ASSEB (Assam State Board of Secondary Education) की कक्षा 8 की हिंदी ऐच्छिक पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-3 के पाठ 5 में कर्तार सिंह दुग्गल द्वारा लिखित एकांकी “उससे न कहना” सम्मिलित है। यह एकांकी भारत-चीन युद्ध (1962) की पृष्ठभूमि पर आधारित है और देशभक्ति, मातृ-प्रेम तथा त्याग की भावना को बड़ी मार्मिकता से प्रस्तुत करती है। इस पृष्ठ पर पाठ का सारांश, लेखक-परिचय, पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्नों के उत्तर तथा अतिरिक्त प्रश्नोत्तर दिए गए हैं।
पाठ-परिचय (Summary)
“उससे न कहना” एक भावपूर्ण एकांकी है जो भारत-चीन युद्ध (1962) की पृष्ठभूमि में लिखी गई है। इस एकांकी में तीन पात्र हैं — बलवीर, लाजवंती और रुक्मिणी। लाजवंती एक वृद्ध माँ है जिसने अपने जीवन में अनेक कष्ट सहे हैं। उसके पति स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेज़ों के विरुद्ध लड़ते हुए शहीद हो गए थे — उनकी छाती में सात गोलियाँ लगी थीं। उसका बड़ा बेटा शमशेर (शम्मी) भी सेना में है और उससे काफी समय से कोई खबर नहीं आई है।
एकांकी का आरंभ बलवीर और लाजवंती के बीच बहस से होता है। बलवीर देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर सेना में भर्ती होना चाहता है। चीन ने भारत पर आक्रमण कर दिया है और बलवीर के सभी साथी सेना में जा रहे हैं। वह भी अपने देश की पवित्र धरती की रक्षा के लिए मोर्चे पर जाना चाहता है। किंतु लाजवंती उसे रोकती है — वह नहीं चाहती कि उसका दूसरा बेटा भी घर छोड़ जाए। उसे घर के काम में बलवीर की सहायता की भी आवश्यकता है।
बलवीर को रोकने के लिए लाजवंती ने मन में ठान लिया है कि वह उसकी शीघ्र शादी करा देगी। इसी बीच लाजवंती कुएँ पर पानी भरने जाती है और वापसी में गाँव के नंबरदार के पास जाकर बलवीर का नाम सेना की भर्ती सूची में लिखवा आती है — यह उसके मातृत्व और देशभक्ति का अद्भुत संयोग है। उसी समय पड़ोसन रुक्मिणी एक तारपत्र (तार/टेलीग्राम) लेकर आती है जो लाजवंती को रास्ते में तारवाले ने दिया था। यह तार शम्मी के युद्ध में शहीद होने की खबर लेकर आया है।
बलवीर यह खबर सुनकर स्तब्ध रह जाता है और रुक्मिणी से कहता है — “उससे न कहना” अर्थात् माँ को यह खबर मत देना। वह जानता है कि माँ यह आघात सहन नहीं कर पाएगी। अब बलवीर का इरादा बदल जाता है — बड़े भाई के शहीद होने के बाद वह अकेला है जो माँ की देखभाल कर सकता है। इस प्रकार यह एकांकी व्यक्तिगत कर्तव्य और राष्ट्रीय कर्तव्य के बीच के मार्मिक द्वंद्व को उभारती है। शीर्षक “उससे न कहना” इस रहस्य और संवेदना को प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त करता है।
लेखक-परिचय (About the Author)
करतार सिंह दुग्गल का जन्म 1 मार्च 1917 को अविभाजित पंजाब के रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उन्होंने लाहौर के फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज से अंग्रेज़ी में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। वे पंजाबी, हिंदी, उर्दू और अंग्रेज़ी — चार भाषाओं में समान अधिकार के साथ लिखने वाले बहुभाषी साहित्यकार थे।
दुग्गल जी ने 1942 से 1966 तक आकाशवाणी में केंद्र-निदेशक सहित विभिन्न पदों पर कार्य किया। 1966 से 1973 तक वे नेशनल बुक ट्रस्ट के निदेशक रहे और इसी कार्यकाल में उन्होंने विश्व पुस्तक मेले की नींव रखी। 1973 से 1976 तक वे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में सलाहकार रहे। उनकी प्रमुख रचनाओं में 24 कहानी संग्रह, 10 उपन्यास, 7 नाटक और 2 काव्य संग्रह शामिल हैं। ‘हाल मुरीदों का’, ‘ऊपर की मंजिल’ और ‘इंसानियत’ उनकी चर्चित कृतियाँ हैं। उनकी रचनाओं का भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ है। भारत सरकार ने 1988 में उन्हें पद्म भूषण से अलंकृत किया। 26 जनवरी 2012 को दिल्ली में उनका निधन हुआ।
शब्दार्थ (Word Meanings)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| चौका | रसोई, चूल्हे की जगह |
| ढोर | पालतू पशु (गाय, भैंस आदि) |
| जुल्म | अत्याचार |
| फौज | सेना |
| फिरंगी | अंग्रेज़ |
| सुरमा | योद्धा, वीर |
| बैर / बैरी | शत्रु, दुश्मन |
| रौंदना | पैरों से कुचलना |
| झेलना | कष्ट सहना, भुगतना |
| काबू | वश, अधिकार |
| हैरान | परेशान, चकित |
| गँवाना | खोना |
| टूट पड़ना | अचानक हमला करना |
| नंबरदार | गाँव का मुखिया या प्रतिनिधि |
| तारपत्र | तार, टेलीग्राम |
| शहीद | देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाला |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (Textbook Questions and Answers)
अभ्यास-माला
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो:
प्रश्न (क): प्रस्तुत एकांकी में कुल कितने पात्र हैं? उनके नाम बताओ।
उत्तरः प्रस्तुत एकांकी में कुल तीन पात्र हैं। उनके नाम हैं — बलवीर, लाजवंती और रुक्मिणी।
प्रश्न (ख): बलवीर और लाजवंती में किस बात पर बहस हो रही थी?
उत्तरः बलवीर और लाजवंती में घर के काम तथा फौज में भर्ती होने की बात को लेकर बहस हो रही थी। बलवीर सेना में जाना चाहता था, जबकि लाजवंती उसे घर पर रोकना चाहती थी।
प्रश्न (ग): लाजवंती बलवीर को फौज में भर्ती होने से क्यों रोक रही थी?
उत्तरः लाजवंती पहले ही अपने पति और बड़े बेटे शम्मी को खो चुकी थी। उसे घर के काम में सहायता की आवश्यकता थी और बड़े बेटे से भी कोई खबर नहीं आई थी। वह अपने दूसरे और अकेले बेटे बलवीर को भी खोना नहीं चाहती थी, इसलिए वह उसे फौज में भर्ती होने से रोक रही थी।
प्रश्न (घ): बलवीर के पिता की मृत्यु कैसे हुई थी?
उत्तरः बलवीर के पिता एक सिपाही थे। वे स्वतंत्रता की लड़ाई में फिरंगियों (अंग्रेज़ों) के विरुद्ध लड़ते हुए शहीद हुए थे। उनकी छाती में पूरी सात गोलियाँ लगी थीं।
प्रश्न (ङ): बलवीर फौज में किसलिए भर्ती होना चाहता था?
उत्तरः बलवीर अपने देश से बहुत प्यार करता था। चीनी आक्रमणकारियों ने हिंदुस्तान पर हमला बोल दिया था और वे भारत की पवित्र धरती को रौंदते चले जा रहे थे। बलवीर देश को दुश्मनों से बचाने के लिए तथा अपने साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मातृभूमि की रक्षा करने के लिए फौज में भर्ती होना चाहता था।
प्रश्न (च): हिंदुस्तान पर किसने हमला बोल दिया था?
उत्तरः हिंदुस्तान पर चीनी आक्रमणकारियों ने हमला बोल दिया था।
प्रश्न (छ): बलवीर को फौज में भर्ती होने से रोकने के लिए लाजवंती ने क्या सोच रखा था?
उत्तरः बलवीर को फौज में भर्ती होने से रोकने के लिए लाजवंती ने सोच रखा था कि वह अगले महीने ही उसका विवाह करा देगी। उसका विचार था कि विवाह के बाद बलवीर घर में बंध जाएगा और सेना में जाने का विचार छोड़ देगा।
प्रश्न (ज): रुक्मिणी ने बलवीर को क्या खबर दी थी?
उत्तरः रुक्मिणी ने बलवीर को यह खबर दी थी कि उसका बड़ा भाई शम्मी (शमशेर) युद्ध में शहीद हो गया है। यह दुखद समाचार एक तारपत्र (तार/टेलीग्राम) के द्वारा आया था।
प्रश्न (झ): बलवीर ने रुक्मिणी को बड़े भाई के शहीद होने की बात माँ से कहने से मना क्यों किया?
उत्तरः बलवीर को यह भय था कि उसकी माँ लाजवंती पहले ही बहुत दुख झेल चुकी है। उसके पति भी युद्ध में शहीद हो चुके थे। बड़े बेटे के शहीद होने की खबर सुनकर माँ इस आघात को सहन नहीं कर पाएगी। इसीलिए उसने रुक्मिणी से कहा — “उससे न कहना।”
प्रश्न (ञ): लाजवंती कुएँ पर पानी भरने जाकर क्या कर आई थी?
उत्तरः लाजवंती कुएँ पर पानी भरने जाकर गाँव के नंबरदार के पास अपने छोटे बेटे बलवीर का नाम सेना की भर्ती सूची में लिखवा आई थी। यह उसके मन में देशभक्ति और त्याग की गहरी भावना को दर्शाता है।
प्रश्न (ट): बलवीर ने फौज में भर्ती होने का इरादा क्यों बदल दिया?
उत्तरः जब बलवीर को पता चला कि उसका बड़ा भाई शम्मी युद्ध में शहीद हो गया है, तो उसने महसूस किया कि अब माँ की देखभाल करने वाला घर में कोई नहीं है। माँ पहले से ही बहुत अकेली और दुखी है। उसके सिवा माँ का और कोई सहारा नहीं बचा था। इसीलिए उसने सेना में भर्ती होने का इरादा बदल दिया।
प्रश्न (ठ): लाजवंती को बड़े बेटे के शहीद होने की खबर कैसे मिली?
उत्तरः लाजवंती कुएँ से पानी भरकर लौट रही थी, तभी रास्ते में तारवाले ने उन्हें एक तारपत्र (टेलीग्राम) दिया था। उस तारपत्र में ही बड़े बेटे शम्मी के युद्धभूमि में शहीद होने की सूचना थी। रुक्मिणी वही तारपत्र लेकर बलवीर के पास आई थी।
2. शीर्षक की सार्थकता पर विचार करो।
प्रश्न: क्या “उससे न कहना” शीर्षक इस एकांकी के लिए उचित है? अपने विचार बताओ।
उत्तरः हाँ, “उससे न कहना” शीर्षक इस एकांकी के लिए पूर्णतः सार्थक और उचित है। जब रुक्मिणी बलवीर को उसके बड़े भाई शम्मी के शहीद होने की खबर देती है, तो बलवीर तुरंत रुक्मिणी से कहता है — “उससे न कहना” अर्थात् माँ को यह खबर मत देना। यही वाक्य एकांकी की केंद्रीय संवेदना को व्यक्त करता है। यह शीर्षक पाठक के मन में जिज्ञासा और रहस्य जगाता है — “किससे न कहना है? क्या नहीं कहना है?” इसी जिज्ञासा के कारण पाठक एकांकी को अंत तक पढ़ता है। शीर्षक बलवीर के पुत्र-प्रेम, माँ की रक्षा की भावना और उसकी मानसिक पीड़ा को प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त करता है।
3. चारित्रिक विशेषताएँ बताओ।
प्रश्न: बलवीर और लाजवंती की चारित्रिक विशेषताएँ बताओ।
उत्तरः
बलवीर: बलवीर इस एकांकी का प्रमुख पुरुष पात्र है। वह एक उत्साही, देशभक्त और साहसी युवक है। वह अपनी मातृभूमि से गहरा प्रेम करता है और चीनी आक्रमण के समय देश की रक्षा के लिए सेना में जाना चाहता है। उसके पिता और बड़े भाई दोनों ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए हैं, जिससे उसे प्रेरणा मिलती है। साथ ही वह एक संवेदनशील पुत्र भी है — बड़े भाई के शहीद होने की खबर मिलने पर वह माँ की पीड़ा का ख्याल करते हुए सेना में जाने का इरादा छोड़ देता है।
लाजवंती: लाजवंती इस एकांकी की प्रमुख स्त्री पात्र है। वह एक साहसी, धैर्यवान, त्यागमयी और कर्तव्यपरायण माँ है। उसने अपने पति को स्वतंत्रता संग्राम में और बड़े बेटे को देश की सेवा में भेजकर अपार कष्ट सहे हैं। वह एक ओर माँ के रूप में बेटे को रोकना चाहती है, दूसरी ओर उसके भीतर देशभक्त का हृदय भी है — वह चुपचाप नंबरदार के पास जाकर बलवीर का नाम भर्ती सूची में लिखवा आती है। यही उसकी विशेषता है।
भाषा-अध्ययन
1. वचन बदलो (Change the number):
| मूल वाक्य | वचन-परिवर्तित वाक्य |
|---|---|
| लड़का चिंता में खोया हुआ था। | लड़के चिंता में खोये हुए थे। |
| बच्चा नारे लगाता है। | बच्चे नारे लगाते हैं। |
| यह इलाका वीरान पहाड़ी है। | ये इलाके वीरान पहाड़ियाँ हैं। |
| आज अखबार में अजीब खबर छपी है। | आज अखबारों में अजीब खबरें छपी हैं। |
| मेरे देश का बहादुर सिपाही जा रहा है। | मेरे देश के बहादुर सिपाही जा रहे हैं। |
2. रिक्त स्थानों में उचित विभक्ति-चिह्न (का / की / के / को) भरो:
प्रश्न: रिक्त स्थानों में उचित विभक्ति-चिह्न भरो।
उत्तरः
- (क) घर का काम थोड़ा है।
- (ख) मैंने बड़े बेटे को फौज में भेजा।
- (ग) हमारे देश की पवित्र धरती को बैरी रौंदता चला जा रहा है।
- (घ) मेरे देश के सूरज जा रहे हैं।
- (ङ) मैंने तुम्हारे लिए सरसों का साग बनाया है।
- (च) वह अपने देश के काम आने के लिए जान पर खेल गया।
- (छ) इनमें अनेक बहनों के भाई हैं।
पाठ के आस-पास
प्रश्न: भारत-चीन युद्ध (1962) के बारे में जानकारी इकट्ठी करो और कक्षा में चर्चा करो।
उत्तरः 1962 में चीन ने भारत पर अचानक आक्रमण किया था। चीन ने पहले तिब्बत पर कब्जा किया और फिर मैकमोहन रेखा का उल्लंघन करते हुए भारतीय सीमा में प्रवेश किया। यह युद्ध लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश (तत्कालीन NEFA) की सीमाओं पर लड़ा गया। इस युद्ध में भारत को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। हज़ारों भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए। अंततः चीन ने स्वयं युद्धविराम की घोषणा की। इस युद्ध ने भारत को अपनी रक्षा-व्यवस्था को मजबूत करने की प्रेरणा दी।
प्रश्न: इस एकांकी का मंचन अपनी कक्षा में करो।
उत्तरः छात्र-छात्री स्वयं कक्षा में तीन भूमिकाएँ (बलवीर, लाजवंती, रुक्मिणी) बाँटकर इस एकांकी का मंचन करें। संवादों को भावपूर्ण ढंग से बोलें और पात्रों के मनोभावों को अभिनय में उतारने का प्रयास करें।
अतिरिक्त प्रश्नोत्तर (Additional Questions)
प्रश्न 1: “उससे न कहना” एकांकी की पृष्ठभूमि क्या है?
उत्तरः यह एकांकी 1962 के भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है। उस समय चीनी सेना ने भारत की सीमाओं पर आक्रमण किया था और देश के युवाओं में मातृभूमि की रक्षा के लिए सेना में जाने का उत्साह था। इसी राष्ट्रीय संकट के समय में यह कहानी घटित होती है।
प्रश्न 2: लाजवंती के पति किस कारण शहीद हुए थे?
उत्तरः लाजवंती के पति भारत के स्वतंत्रता संग्राम में फिरंगियों (अंग्रेज़ों) के विरुद्ध लड़ते हुए शहीद हुए थे। उनकी छाती में सात गोलियाँ लगी थीं। वे एक सच्चे देशभक्त और वीर सिपाही थे।
प्रश्न 3: बलवीर के चरित्र से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तरः बलवीर के चरित्र से हमें देशभक्ति और पारिवारिक कर्तव्य दोनों की प्रेरणा मिलती है। एक ओर वह देश की रक्षा के लिए सेना में जाना चाहता है, दूसरी ओर वह माँ की पीड़ा को समझकर अपनी इच्छा का बलिदान कर देता है। यह हमें सिखाता है कि व्यक्तिगत कर्तव्य और राष्ट्रीय कर्तव्य दोनों का समान महत्व है।
प्रश्न 4: लाजवंती को एक आदर्श माँ क्यों कहा जा सकता है?
उत्तरः लाजवंती एक आदर्श माँ है क्योंकि वह एक ओर अपने पुत्र के प्रति ममता रखती है, दूसरी ओर उसके भीतर देशभक्ति की भावना भी प्रबल है। वह बाहर से बेटे को रोकती है किंतु उसी समय चुपचाप नंबरदार के पास जाकर उसका नाम सेना की भर्ती सूची में लिखवा आती है। उसने अपने पति और बड़े बेटे को देश के लिए समर्पित किया और यह सहन किया। यही उसकी महानता है।
प्रश्न 5: रुक्मिणी इस एकांकी में क्या भूमिका निभाती है?
उत्तरः रुक्मिणी इस एकांकी की तीसरी पात्र है जो एक पड़ोसन है। वह वह दुखद समाचार लेकर आती है जो एकांकी के नाटकीय चरमोत्कर्ष (climax) का निर्माण करता है — शम्मी के शहीद होने का तारपत्र। बलवीर उसी से कहता है “उससे न कहना।” रुक्मिणी कथानक में एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती है।
प्रश्न 6: इस एकांकी का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तरः इस एकांकी का मुख्य संदेश यह है कि देशभक्ति और पारिवारिक प्रेम में कोई विरोध नहीं है। लाजवंती जैसी माताएँ जो अपने पति और बेटों को देश के लिए समर्पित करती हैं, वे सच्ची वीरांगनाएँ हैं। साथ ही यह एकांकी हमें यह भी बताती है कि जब देश पर संकट आता है, तो घर-घर से बलवीर जैसे युवक उठ खड़े होते हैं। देश के लिए बलिदान देने वाले शहीद हमेशा अमर रहते हैं।
प्रश्न 7: “उससे न कहना” — यह वाक्य किसने, किससे और क्यों कहा?
उत्तरः यह वाक्य बलवीर ने रुक्मिणी से कहा। जब रुक्मिणी ने बताया कि बलवीर का बड़ा भाई शम्मी युद्ध में शहीद हो गया है, तो बलवीर ने तुरंत कहा — “उससे न कहना” अर्थात् माँ लाजवंती को यह खबर मत बताना। उसने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि माँ पहले ही बहुत दुख सह चुकी है और बड़े बेटे की मृत्यु का समाचार सुनकर वह टूट जाएगी। बलवीर माँ को इस आघात से बचाना चाहता था।
प्रश्न 8: शम्मी ने बलवीर को जाते समय क्या संदेश दिया था?
उत्तरः शम्मी ने बलवीर को जाते समय कहा था — “बल्ली, माँ का दिल कभी मत दुखाना। यह माँ हमारे पिता की अमानत है, इसके दिल को कभी ठेस मत पहुँचाना।” यह संदेश बलवीर के मन में गहराई से बसा हुआ है और वह इसी कारण माँ को शम्मी के शहीद होने की खबर नहीं देना चाहता।