यहाँ ASSEB (Assam State Board of Secondary Education) कक्षा 8 के हिंदी (तृतीय भाषा/ऐच्छिक) की पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-3 के पाठ 2 – कश्मीरी सेब के सभी प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं। यह पाठ हिंदी के महान कहानीकार मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गई एक प्रसिद्ध कहानी है। इस कहानी में लेखक ने एक बेईमान दुकानदार से सेब खरीदने के अपने अनुभव का वर्णन किया है और समाज में फैली बेईमानी पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
पाठ-परिचय (Summary)
लेखक मुंशी प्रेमचंद एक दिन बाजार में दो-चार चीजें खरीदने गए। वहाँ चौक के बाजार में एक मेवाफरोश की दुकान पर उन्होंने गुलाबी रंग के सुंदर कश्मीरी सेब सजे हुए देखे। आधुनिक युग में लोगों की खाद्य आदतें बदल गई हैं — अब लोग विटामिन और प्रोटीन युक्त भोजन पर ध्यान देने लगे हैं। टमाटर, गाजर, सेब जैसी चीजें जो पहले अपरिचित थीं, अब भोजन का अनिवार्य अंग बन गई हैं। अंग्रेजी में कहावत है — “An apple a day keeps the doctor away” अर्थात् रोज एक सेब खाने से डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
लेखक ने दुकानदार से आध सेर सेब माँगे। दुकानदार ने लेखक की तारीफ की और कहा — “बाबूजी, बड़े मजेदार सेब आए हैं।” लेखक ने अपना रूमाल देते हुए कहा — “सेब चुन-चुन कर रखना।” लड़के ने चार सेब लाकर तराजू में रखे। लेखक ने चार आने पैसे दिए और रूमाल में बँधे सेब लेकर घर आ गए। चूँकि रात को फल खाने का कायदा नहीं था, इसलिए उन्होंने सेब अगले दिन सुबह के लिए रख दिए।
अगले दिन प्रातःकाल जब लेखक ने पहला सेब निकाला तो उसमें रुपए के आकार का एक गला हुआ छिल्का था। उन्होंने सोचा — शायद दुकानदार की नजर से चूक गया। दूसरा सेब निकाला तो वह आधा सड़ा हुआ था। तीसरा सेब एक तरफ से पिचका हुआ था। चौथा सेब ऊपर से बेदाग दिखता था, लेकिन उसमें एक काला सुराख था और अंदर से जामुन जैसे काले धब्बे थे। एक भी सेब खाने लायक नहीं था।
लेखक को चार पैसों का उतना दुःख नहीं हुआ जितना समाज के इस चारित्रिक पतन का। उन्होंने सोचा — आदमी बेईमानी तभी करता है जब उसे अवसर मिलता है। उन्होंने खुद भी माना कि वे चौकस नहीं रहे। दुकानदार ने भाँप लिया था कि यह ग्राहक सतर्क नहीं है। लेखक ने एक खोमचेवाले की ईमानदारी की भी चर्चा की, जिसने गलती से मिली अठन्नी प्रसन्नचित्त होकर लौटा दी और क्षमा भी माँगी। कहानी का संदेश है — खरीदारी में सतर्कता जरूरी है और समाज में ईमानदारी की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए।
लेखक-परिचय (About the Author)
मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के लमही गाँव में हुआ था। उनका वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। उन्होंने पहले उर्दू में लिखना शुरू किया और बाद में हिंदी साहित्य के सर्वश्रेष्ठ कहानीकार व उपन्यासकार बने। उनके जीवन में बचपन से ही कठिनाइयाँ थीं — सात वर्ष की आयु में माता का और चौदह वर्ष की आयु में पिता का निधन हो गया था।
प्रेमचंद ने लगभग 300 से अधिक कहानियाँ और लगभग डेढ़ दर्जन उपन्यास लिखे। उनकी प्रमुख रचनाओं में गोदान, गबन, निर्मला, सेवासदन, रंगभूमि (उपन्यास) तथा पंच परमेश्वर, कफन, पूस की रात, बूढ़ी काकी, दो बैलों की कथा (कहानियाँ) शामिल हैं। उनके साहित्य में किसानों, मजदूरों और समाज के शोषित वर्गों की पीड़ा का यथार्थ चित्रण मिलता है। महान उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें “उपन्यास सम्राट” की उपाधि दी थी। 8 अक्टूबर 1936 को उनका निधन हुआ।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (Textbook Questions and Answers)
अभ्यास-माला
प्रश्न 1: कहानी को अपने शब्दों में सुनाओ।
उत्तरः लेखक मुंशी प्रेमचंद एक दिन बाजार गए और वहाँ एक दुकान पर सुंदर गुलाबी रंग के कश्मीरी सेब देखे। उन्होंने दुकानदार से आध सेर सेब माँगे और चार आने पैसे देकर रूमाल में बँधे सेब घर ले आए। अगले दिन सुबह जब उन्होंने सेब निकाले तो सभी खराब निकले — कोई सड़ा था, कोई पिचका था, कोई अंदर से गला हुआ था। एक भी खाने लायक नहीं था। लेखक को पैसों का नहीं बल्कि समाज में फैली बेईमानी का दुःख हुआ। उन्होंने माना कि आदमी बेईमानी तभी करता है जब उसे अवसर मिलता है, और उन्होंने खुद भी चौकस न रहने पर पछतावा किया।
प्रश्न 2: किसने कहा, किससे कहा?
(क) “बाबूजी, बड़े मजेदार सेब आए हैं।”
उत्तरः यह दुकानदार ने बाबूजी (लेखक) से कहा।
(ख) “सेब चुन-चुन कर रखना।”
उत्तरः यह बाबूजी (लेखक) ने दुकानदार से कहा।
प्रश्न 3: एक वाक्य में उत्तर लिखो।
(क) दुकान पर किस रंग के सेब सजे हुए थे?
उत्तरः दुकान पर गुलाबी रंग के सेब सजे हुए थे।
(ख) बनारस किस आम के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तरः बनारस लंगड़े आम के लिए प्रसिद्ध है।
(ग) लेखक ने दुकानदार से कितने सेब माँगे?
उत्तरः लेखक ने दुकानदार से आध सेर सेब माँगे।
(घ) लेखक ने दुकानदार को कितने पैसे दिए?
उत्तरः लेखक ने दुकानदार को चार आने पैसे दिए।
(ङ) फल खाने का उपयुक्त समय क्या है?
उत्तरः फल खाने का उपयुक्त समय प्रातःकाल है।
प्रश्न 4: संक्षेप में उत्तर लिखो।
(क) हमारे बदले हुए खाद्याभ्यास के बारे में लेखक का क्या विचार है?
उत्तरः लेखक का विचार है कि आधुनिक युग में लोगों के खान-पान की आदतें बदल गई हैं। अब लोग विटामिन और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की ओर ध्यान देने लगे हैं। टमाटर, गाजर जैसी चीजें जो पहले उच्च वर्ग ही खाता था या जिन्हें गरीबों का भोजन माना जाता था, वे अब भोजन का अनिवार्य अंग बन गई हैं। सेब जैसे फलों को अब स्वास्थ्य के लिए जरूरी माना जाने लगा है।
(ख) सेब खाने के क्या-क्या लाभ हैं?
उत्तरः सेब में विटामिन-सी और विटामिन-बी पाया जाता है। इसके बारे में एक अंग्रेजी कहावत प्रसिद्ध है — “An apple a day keeps the doctor away” अर्थात् रोज एक सेब खाने से डॉक्टर के पास जाने की नौबत नहीं आती। सेब शरीर को शक्ति देता है, रोगों से बचाता है और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।
(ग) लेखक ने प्रातःकाल खाने के लिए जब सेब निकाले तो वे किस हालत में मिले?
उत्तरः लेखक ने जब प्रातःकाल सेब निकाले तो सभी खराब निकले। पहले सेब में रुपए के आकार का गला हुआ छिल्का था। दूसरा सेब आधा सड़ा हुआ था। तीसरा एक तरफ से पिचका हुआ था। चौथा ऊपर से बेदाग दिखता था, परंतु उसमें एक काला सुराख था और अंदर जामुन जैसे काले धब्बे थे। एक भी सेब खाने लायक नहीं था।
(घ) दुकानदार को लेखक से बेईमानी करने का अवसर कैसे मिला?
उत्तरः लेखक ने दुकानदार से कहा था कि सेब चुन-चुन कर रखना, लेकिन उन्होंने स्वयं सेब देखे नहीं। उन्होंने अपना रूमाल दे दिया और दुकानदार पर भरोसा कर लिया। दुकानदार ने भाँप लिया कि यह ग्राहक सतर्क नहीं है और वह सेब जाँचेगा नहीं। इसी असावधानी का फायदा उठाकर दुकानदार ने सारे खराब सेब दे दिए।
(ङ) खोमचेवाले की ईमानदारी के बारे में लेखक ने क्या कहा है?
उत्तरः लेखक ने बताया कि एक बार उन्होंने एक खोमचेवाले से एक पैसे की रेवड़ियाँ लीं, लेकिन जेब से पैसे निकालते समय गलती से अठन्नी (आठ आने) उसके हाथ में रख गई। खोमचेवाले ने यह पैसे देखे और प्रसन्नचित्त होकर अठन्नी वापस कर दी और क्षमा भी माँगी। लेखक ने इस ईमानदारी की सराहना की और इसे एक उज्ज्वल उदाहरण बताया।
(च) इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तरः इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कोई भी वस्तु खरीदते समय उसे ध्यानपूर्वक जाँचना चाहिए। दुकानदार की मीठी-मीठी बातों में नहीं आना चाहिए। पैसे देते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए। इसके साथ ही यह भी शिक्षा मिलती है कि आदमी बेईमानी तभी करता है जब उसे अवसर मिलता है — इसलिए हमें स्वयं सतर्क रहना चाहिए।
प्रश्न 5: “चार पैसों का इतना गम न हुआ, जितना समाज के इस चारित्रिक पतन का।” — इस कथन का आशय स्पष्ट करो।
उत्तरः इस कथन का आशय यह है कि जब लेखक को पता चला कि दुकानदार ने उन्हें सड़े-गले सेब दे दिए हैं, तो उन्हें चार आने के नुकसान का दुःख नहीं हुआ। उनका दुःख बहुत बड़ा और गहरा था — वह यह था कि समाज में बेईमानी बढ़ती जा रही है। दुकानदार ग्राहकों को ठग रहे हैं और समाज की नैतिकता गिर रही है। लेखक को पैसे की चिंता नहीं, बल्कि समाज के चरित्र की चिंता थी।
प्रश्न 6: सत्य (✓) या असत्य (✗) का निशान लगाओ।
| कथन | उत्तर |
|---|---|
| गाजर में अधिक विटामिन पाया जाता है। | ✓ |
| अल्फांसो सेब की एक किस्म है। | ✗ |
| फल खाने का समय रात है। | ✗ |
| चौथे सेब में एक काला सुराख था। | ✓ |
| दुकानदार ने लेखक को बढ़िया सेब दिए। | ✗ |
| आदमी बेईमानी तभी करता है जब अवसर मिले। | ✓ |
| लेखक ने चार आने पैसे दिए। | ✓ |
| एक भी सेब खाने लायक नहीं था। | ✓ |
| सभी दुकानदार बेईमानी करते हैं। | ✗ |
| खोमचेवाले ने अठन्नी नहीं लौटाई। | ✗ |
पाठ के आस-पास (Beyond the Text)
प्रश्न: दुकानदार ग्राहकों को ठगने के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाते हैं?
उत्तरः दुकानदार ग्राहकों को ठगने के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाते हैं:
- ऊपर अच्छी चीज रखकर नीचे खराब चीज छुपा देते हैं।
- तराजू में वजन कम करके देते हैं।
- मीठी-मीठी बातों से ग्राहक का ध्यान बँटाते हैं।
- खराब और सड़ी हुई चीजें थैले या रूमाल में बंद करके दे देते हैं।
- नकली या मिलावटी सामान असली बताकर बेचते हैं।
- एक्सपायर हुई चीजें बेचते हैं।
प्रश्न: खरीदारी करते समय उपभोक्ता को कौन-कौन सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
उत्तरः खरीदारी करते समय उपभोक्ता को निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए:
- पैकेट पर वजन, निर्माण तिथि और समाप्ति तिथि अवश्य जाँचें।
- ताजे फल और सब्जियाँ खरीदते समय हाथ से छूकर देखें।
- दवाइयों पर बैच नंबर और अधिकतम खुदरा मूल्य जाँचें।
- दुकानदार की मीठी बातों में न आएँ।
- पैसे देने से पहले सामान की जाँच करें।
- तौल में कमी न हो, इसके लिए तराजू पर ध्यान दें।
भाषा-अध्ययन (Language Study)
संज्ञा (Noun) — तीन भेद
संज्ञा के तीन मुख्य भेद हैं:
| भेद | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| व्यक्तिवाचक संज्ञा | किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम | प्रेमचंद, गंगा, लमही, कश्मीर |
| जातिवाचक संज्ञा | एक ही जाति के सभी प्राणियों या वस्तुओं का नाम | नदी, शहर, आम, पेड़, दुकानदार |
| भाववाचक संज्ञा | किसी भाव, गुण या अवस्था का नाम | भूख, प्यास, मिठास, बेईमानी, ईमानदारी |
विशेषण (Adjective) — रिक्त स्थान भरो
दिए गए विशेषण शब्दों से रिक्त स्थान भरो: पाँच, घने, बड़े, छोटा, बहुत, थोड़ी, ऊँचे
- पांडव पाँच भाई थे।
- एक दिन बहुत गर्मी थी।
- घने जंगल में रास्ता खोजना मुश्किल था।
- बड़े झाड़ के कारण दूर तक देखना मुश्किल था।
- पहाड़ ऊँचे होते हैं।
- वह नदी थोड़ी दूर पर थी।
- वह घर छोटा था।
क्रिया — दोहराव वाली क्रियाएँ (Reduplicated Verbs)
दी गई क्रियाओं का दोहराव के साथ वाक्यों में प्रयोग करो:
- खा-खाकर: राम खा-खाकर मोटा हो गया।
- रो-रोकर: मीना ने रो-रोकर अपना हाल बताया।
- दौड़-दौड़कर: सीमा ने दौड़-दौड़कर प्रथम स्थान प्राप्त किया।
- चुन-चुनकर: माँ ने चुन-चुनकर सबसे अच्छे फल रखे।
- देख-देखकर: बच्चे ने देख-देखकर चित्र बनाया।
शब्द-भंडार (Vocabulary)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| चौक | चौराहा, बाजार का मुख्य स्थान |
| मेवाफरोश | सूखे या ताजे फल बेचने वाला |
| सेंत | मुफ्त, बिना पैसे के |
| आध | आधा |
| कायदा | नियम, व्यवस्था, परंपरा |
| सुराख | छेद |
| गम | दुःख |
| चौकस | सावधान, सतर्क |
| तराजू | वजन मापने का उपकरण, तुला |
| साख | श्रेय, प्रतिष्ठा, विश्वास |
| खोमचेवाला | फेरी लगाकर सामान बेचने वाला |
| अठन्नी | आठ आने का सिक्का |
| चारित्रिक पतन | नैतिकता की गिरावट |
| प्रात:काल | सुबह का समय |
अतिरिक्त प्रश्नोत्तर (Additional Questions)
प्रश्न 1: मुंशी प्रेमचंद का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तरः मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के लमही गाँव में हुआ था।
प्रश्न 2: लेखक बाजार क्यों गए थे?
उत्तरः लेखक बाजार दो-चार जरूरी चीजें खरीदने गए थे। वहाँ उनकी नजर एक मेवाफरोश की दुकान पर सजे सुंदर गुलाबी कश्मीरी सेबों पर पड़ी और उन्होंने सेब खरीदने का मन बना लिया।
प्रश्न 3: “आदमी बेईमानी तभी करता है जब उसे अवसर मिलता है।” — इस कथन का क्या अर्थ है?
उत्तरः इस कथन का अर्थ यह है कि बेईमानी करना किसी के स्वभाव में नहीं होता, बल्कि जब किसी को मौका मिलता है — जैसे कि ग्राहक असावधान हो — तभी वह बेईमानी करता है। इसीलिए हमें स्वयं सतर्क रहना चाहिए ताकि कोई हमें ठग न सके।
प्रश्न 4: लेखक ने सेब रात को क्यों नहीं खाए?
उत्तरः लेखक ने सेब रात को इसलिए नहीं खाए क्योंकि उनके अनुसार रात को फल खाने का कायदा (नियम) नहीं था। फल खाने का उचित समय प्रातःकाल होता है, इसीलिए उन्होंने सेब अगले दिन सुबह के लिए रख दिए।
प्रश्न 5: लेखक ने सेब खरीदते समय क्या गलती की?
उत्तरः लेखक ने सेब खरीदते समय यह गलती की कि उन्होंने सेबों को स्वयं ध्यान से नहीं जाँचा। उन्होंने केवल दुकानदार से कहा — “सेब चुन-चुन कर रखना” — और अपना रूमाल दे दिया। वे दुकानदार की मीठी बातों पर विश्वास कर बैठे और सेब बिना देखे ही ले आए।
प्रश्न 6: इस कहानी में कौन-सी दो प्रकार के दुकानदारों का चित्रण है? उनके बीच क्या अंतर है?
उत्तरः इस कहानी में दो प्रकार के दुकानदारों का चित्रण है। पहले हैं बेईमान दुकानदार — जो दुकानदार ने लेखक को सड़े-गले कश्मीरी सेब दिए और ग्राहक की असावधानी का फायदा उठाया। दूसरे हैं ईमानदार खोमचेवाले — जिसने लेखक की गलती से दी गई अठन्नी को खुशी से वापस कर दिया। इन दोनों के बीच नैतिकता और ईमानदारी का अंतर है।
प्रश्न 7: आधुनिक युग में गाजर और टमाटर को क्यों महत्व दिया जाने लगा है?
उत्तरः आधुनिक युग में लोगों को यह ज्ञान हो गया है कि गाजर और टमाटर में प्रचुर मात्रा में विटामिन पाए जाते हैं। गाजर में विटामिन-ए और टमाटर में विटामिन-सी होता है जो स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। इसीलिए ये चीजें जो पहले या तो केवल अमीरों के भोजन में थीं या गरीबों का खाना मानी जाती थीं, अब सभी के भोजन का अनिवार्य अंग बन गई हैं।
प्रश्न 8: इस पाठ से उपभोक्ता जागरूकता का क्या संदेश मिलता है?
उत्तरः इस पाठ से उपभोक्ता जागरूकता का यह संदेश मिलता है कि एक जागरूक उपभोक्ता बनना जरूरी है। कोई भी सामान खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, वजन और ताजगी जाँचनी चाहिए। किसी के झाँसे में नहीं आना चाहिए और न ही बिना सोचे-समझे भरोसा करना चाहिए। यदि उपभोक्ता सतर्क रहे तो व्यापारी को बेईमानी करने का अवसर ही नहीं मिलेगा।