असम बोर्ड (ASSEB) की कक्षा 8 की हिंदी ऐच्छिक पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-3 का ग्यारहवाँ पाठ “भारत की भाषिक एकता” एक विचारपूर्ण निबंध है जो भारत की विविध भाषाओं में निहित एकता के सूत्रों को उजागर करता है। इस पाठ में बताया गया है कि भारत में भले ही डेढ़ हजार से अधिक भाषाएँ बोली जाती हों, किंतु संस्कृत की साझी विरासत, ब्राह्मी लिपि की समान जड़ें और साहित्यिक आदान-प्रदान के कारण इन सभी भाषाओं में एकता का भाव परिलक्षित होता है। यहाँ इस पाठ के पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर और अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न दिए गए हैं।
पाठ-परिचय (Summary)
“भारत की भाषिक एकता” एक ज्ञानवर्धक और विचारोत्तेजक निबंध है जो भारत की भाषायी विविधता के पीछे छिपी गहरी एकता को प्रकट करता है। भारत एक विशाल देश है जहाँ विभिन्न जाति, धर्म और संस्कृति के लोग निवास करते हैं। यहाँ डेढ़ हजार से अधिक भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं। इनमें से 22 भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिया गया है। ये भाषाएँ मूलतः चार भाषा-परिवारों से संबंधित हैं — आर्य, द्रविड़, ऑस्ट्रिक और तिब्बती-बर्मी (मंगोलियन)। आर्य मूल की भाषाओं में हिंदी, असमिया, बांग्ला, पंजाबी आदि हैं, जबकि द्रविड़ मूल में तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम प्रमुख हैं। असम की मिसिंग, बोड़ो, कार्बी आदि भाषाएँ तिब्बती-बर्मी परिवार से संबंधित हैं।
पाठ में बताया गया है कि भारत की लगभग सभी भाषाओं की लिपियाँ प्राचीन ब्राह्मी लिपि से उद्भूत हुई हैं। हिंदी भाषा की लिपि देवनागरी कहलाती है, जो उसी ब्राह्मी से विकसित हुई है। इस साझी लिपि-विरासत ने भारतीय भाषाओं को एक अदृश्य सूत्र में बाँधे रखा है। इसके अतिरिक्त, भारत की सभी भाषाओं में संस्कृत के तत्सम शब्दों की भरमार है। यहाँ तक कि द्रविड़ और तिब्बती-बर्मी परिवार की भाषाओं में भी संस्कृत के शब्द बड़ी संख्या में मिलते हैं। संसार का सबसे पहला ग्रंथ वेद है, जो संस्कृत में लिखा गया है। कालिदास, भवभूति जैसे महान कवियों ने संस्कृत में अपनी अमर रचनाएँ लिखीं, जो भारत की समस्त भाषाओं की साझी धरोहर हैं।
भाषाओं के बीच साहित्यिक आदान-प्रदान ने भी एकता को सुदृढ़ किया है। रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों का आधुनिक भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ। तमिल में कंबन ने, असमिया में माधव कंडाली ने रामायण का अनुवाद किया, जबकि हिंदी में तुलसीदास ने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना की। इसी प्रकार भारत की विभिन्न भाषाओं में रचित उत्कृष्ट साहित्य को ज्ञानपीठ पुरस्कार और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है, जो सभी भाषाओं की समान गरिमा का प्रतीक है।
हिंदी को 14 सितंबर 1949 को देवनागरी लिपि में भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकृति दी गई। इसी दिन को प्रतिवर्ष हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हिंदी भाषा में अरबी, फारसी, अंग्रेजी, तुर्की आदि विदेशी भाषाओं के शब्द भी आत्मसात हो गए हैं, जो उसकी समावेशी प्रकृति को दर्शाता है। पाठ का संदेश है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मातृभाषा से प्रेम करना चाहिए तथा अन्य भाषाओं का भी आदर करना चाहिए। भाषा की उपेक्षा करने से वह मृत भाषा बन सकती है — इसलिए भाषाओं को जीवित और समृद्ध रखना हमारा कर्तव्य है।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (Textbook Questions and Answers)
बोध और विचार
1. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो
(क) संसार का सबसे पहला ग्रंथ कौन-सा है?
उत्तरः संसार का सबसे पहला ग्रंथ वेद है।
(ख) कालिदास ने किस भाषा में रचना की थी?
उत्तरः कालिदास ने संस्कृत भाषा में रचना की थी।
(ग) हिंदी भाषा की लिपि को क्या कहते हैं?
उत्तरः हिंदी भाषा की लिपि को देवनागरी कहते हैं। इस लिपि का विकास प्राचीन ब्राह्मी लिपि से माना जाता है।
(घ) तमिल में रामायण का अनुवाद किसने किया?
उत्तरः तमिल में रामायण का अनुवाद कंबन ने किया।
(ङ) असमिया में रामायण का अनुवाद किसने किया?
उत्तरः असमिया में रामायण का अनुवाद माधव कंडाली ने किया।
(च) हिंदी को राजभाषा के रूप में कब स्वीकृति दी गई?
उत्तरः 14 सितंबर 1949 को देवनागरी लिपि में लिखित हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकृति दी गई।
(छ) संविधान की आठवीं अनुसूची में कितनी भाषाओं को स्थान दिया गया है?
उत्तरः संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को स्थान दिया गया है।
2. संक्षेप में उत्तर दो
(क) भारत में भाषाओं के कितने परिवार हैं? उनके नाम लिखो।
उत्तरः भारत में भाषाओं के मुख्यतः चार परिवार हैं —
- आर्य परिवार — हिंदी, असमिया, बांग्ला, पंजाबी, उड़िया, मराठी आदि।
- द्रविड़ परिवार — तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम आदि।
- ऑस्ट्रिक परिवार — मुंडारी, संथाली आदि।
- तिब्बती-बर्मी (मंगोलियन) परिवार — बोड़ो, कार्बी, मिसिंग, नागा आदि।
(ख) आर्य मूल की भाषाओं और अनार्य मूल की भाषाओं के दो-दो उदाहरण दो।
उत्तरः
- आर्य मूल की भाषाएँ — असमिया और हिंदी।
- अनार्य मूल की भाषाएँ — तमिल और तेलुगु।
(ग) किन तत्वों के कारण भारतीय भाषाओं में एकता का भाव परिलक्षित होता है?
उत्तरः भारतीय भाषाओं में एकता का भाव निम्नलिखित तत्वों के कारण परिलक्षित होता है —
- भारत की लगभग सभी भाषाओं में संस्कृत के तत्सम शब्द बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं।
- अधिकांश भारतीय लिपियाँ प्राचीन ब्राह्मी लिपि से विकसित हुई हैं।
- कालिदास, भवभूति जैसे संस्कृत कवियों की रचनाएँ समस्त भारतीय भाषाओं की साझी धरोहर हैं।
- रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद और पुनर्सृजन हुआ है।
- विभिन्न भाषाओं में रचित साहित्य को ज्ञानपीठ और साहित्य अकादमी पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता है।
(घ) हिंदी में किन-किन विदेशी भाषाओं के शब्द मिलते हैं? उदाहरण सहित लिखो।
उत्तरः हिंदी में निम्नलिखित विदेशी भाषाओं के शब्द मिलते हैं —
| भाषा | हिंदी में प्रचलित शब्द |
|---|---|
| अंग्रेजी | फिल्म, स्टेशन, इंटरनेट, टेबल |
| अरबी | कुर्सी, फैसला, दुनिया, किताब |
| फारसी | आवाज़, कबूतर, उम्मीद, गुलाब |
| तुर्की | चाकू, तोप, बाबा, कैंची |
(ङ) भारत में भाषायी एकता बनाए रखने के लिए हमें क्या करना चाहिए?
उत्तरः भारत में भाषायी एकता बनाए रखने के लिए हमें निम्नलिखित बातें करनी चाहिए —
- अपनी मातृभाषा से प्रेम करना चाहिए और उसका उपयोग करना चाहिए।
- अन्य भारतीय भाषाओं का सम्मान करना चाहिए।
- भाषा की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि उपेक्षित भाषा मृत भाषा बन जाती है।
- विभिन्न भाषाओं के साहित्य को पढ़कर उनके बीच सांस्कृतिक संवाद बढ़ाना चाहिए।
3. शब्द-संपदा
(क) नीचे दिए गए तद्भव शब्दों के तत्सम रूप लिखो।
| तद्भव शब्द | तत्सम शब्द |
|---|---|
| पिता | पितृ |
| माता | माता |
| भाई | भ्राता |
| घर | गृह |
| हाथ | हस्त |
| पाँव | पाद |
| मोर | मयूर |
| साँप | सर्प |
(ख) पाठ से तत्सम शब्द खोजकर लिखो।
उत्तरः पाठ से कुछ प्रमुख तत्सम शब्द — सुगंध, प्रमुख, क्षेत्र, तत्सम, तद्भव, मिश्रण, महत्वपूर्ण, प्राप्त, उद्भव, पारस्परिक।
(ग) निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखो।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| फुलवारी | फूलों का बगीचा |
| तृप्त होना | संतुष्ट होना |
| अनोखा | अद्भुत, अनूठा |
| उद्भव | उत्पत्ति, जन्म |
| पारस्परिक | आपसी, एक-दूसरे से संबंधित |
| संवाद | बातचीत, वार्तालाप |
| राजभाषा | सरकारी कामकाज की भाषा |
| गृहभाषा | घर में बोली जाने वाली भाषा |
4. भाषा-अभ्यास (वाक्य परिवर्तन)
निर्देशानुसार वाक्य बदलो।
(क) मिश्र वाक्य को सरल वाक्य में बदलो: “जो लोग परिश्रम करते हैं उन्हें अधिक समय तक निराश नहीं होना पड़ता।”
उत्तरः परिश्रमी लोगों को अधिक समय तक निराश नहीं होना पड़ता।
(ख) सरल वाक्य को मिश्र वाक्य में बदलो: “मैंने एक दुबला-पतला व्यक्ति देखा।”
उत्तरः मैंने एक ऐसा व्यक्ति देखा जो दुबला-पतला था।
(ग) सरल वाक्य को संयुक्त वाक्य में बदलो: “वह खाना खाकर सो गया।”
उत्तरः उसने खाना खाया और सो गया।
(घ) मिश्र वाक्य को सरल वाक्य में बदलो: “जिनकी आय कम है, उन्हें मितव्ययी होना चाहिए।”
उत्तरः कम आय वाले लोगों को मितव्ययी होना चाहिए।
(ङ) सरल वाक्य को मिश्र वाक्य में बदलो: “मेरे घर पहुँचने पर पिताजी आए।”
उत्तरः जब मैं घर पहुँचा तब पिताजी आए।
(च) संयुक्त वाक्य को सरल वाक्य में बदलो: “बालिका गा और नाच रही है।”
उत्तरः बालिका नाचते-गाते हुए प्रस्तुति दे रही है।
अतिरिक्त प्रश्नोत्तर (Additional Questions and Answers)
प्रश्न 1: भारत में कितनी भाषाएँ बोली जाती हैं?
उत्तरः भारत में लगभग डेढ़ हजार (1500) भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं। इनमें से 22 भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता प्रदान की गई है।
प्रश्न 2: ब्राह्मी लिपि का क्या महत्व है?
उत्तरः ब्राह्मी लिपि प्राचीन भारत की सर्वाधिक प्रचलित लिपि थी। भारत की अधिकांश आधुनिक लिपियाँ — देवनागरी, बांग्ला, असमिया, गुजराती, उड़िया आदि — इसी ब्राह्मी लिपि से विकसित हुई हैं। इस प्रकार ब्राह्मी लिपि भारतीय भाषाओं की लिपि-एकता का आधार है।
प्रश्न 3: तुलसीदास ने किस भाषा में रामचरितमानस की रचना की?
उत्तरः तुलसीदास ने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना की। यह हिंदी साहित्य की एक अमर कृति है जो रामायण का पुनर्सृजन है।
प्रश्न 4: हिंदी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
उत्तरः प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। इसी दिन सन् 1949 में देवनागरी लिपि में लिखित हिंदी को भारतीय संविधान में राजभाषा के रूप में मान्यता दी गई थी।
प्रश्न 5: ज्ञानपीठ पुरस्कार का भारतीय भाषाओं की एकता में क्या योगदान है?
उत्तरः ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है जो किसी भी भारतीय भाषा में उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। इससे यह संदेश जाता है कि भारत की सभी भाषाएँ समान रूप से गरिमामयी हैं और उनकी साहित्यिक उपलब्धियाँ राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान की पात्र हैं।
प्रश्न 6: “भाषा की उपेक्षा उसे मृत बना देती है” — इस कथन को स्पष्ट करो।
उत्तरः जब कोई समाज अपनी भाषा का उपयोग करना बंद कर देता है, उसे बोलना-लिखना छोड़ देता है, तो धीरे-धीरे वह भाषा मृत भाषा बन जाती है — जैसे संस्कृत आज अधिकांश लोगों की दैनिक बोलचाल की भाषा नहीं रही। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह अपनी मातृभाषा का नियमित प्रयोग करे और उसे समृद्ध बनाए।
प्रश्न 7: असम की किन्हीं तीन भाषाओं के नाम और उनके भाषा-परिवार लिखो।
उत्तरः
| भाषा | भाषा-परिवार |
|---|---|
| असमिया | आर्य परिवार |
| बोड़ो | तिब्बती-बर्मी (मंगोलियन) परिवार |
| मिसिंग (मिरि) | तिब्बती-बर्मी (मंगोलियन) परिवार |
प्रश्न 8: भारत को “अनेकता में एकता” का देश क्यों कहा जाता है?
उत्तरः भारत में विभिन्न जाति, धर्म, भाषा और संस्कृति के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। यहाँ डेढ़ हजार से अधिक भाषाएँ, अनेक धर्म और अनगिनत परंपराएँ हैं, फिर भी सभी भारतीय एक राष्ट्र के रूप में एकजुट हैं। साझी सांस्कृतिक विरासत, संस्कृत का प्रभाव, ब्राह्मी लिपि की समान जड़ें और साहित्यिक आदान-प्रदान ने इस विविधता के बावजूद राष्ट्रीय एकता को बनाए रखा है। इसीलिए भारत को “अनेकता में एकता” का देश कहा जाता है।