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सुमन एक उपवन के – Class 7 Hindi Elective Question Answer | ASSEB | पल्लव भाग-2

ASSEB Class 7 Hindi Elective (पल्लव भाग-2) का पद्य 9 है — “सुमन एक उपवन के”। यह सुप्रसिद्ध बाल-कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी की रचना है। यह कविता “अनेकता में एकता” का अनुपम उदाहरण है। कवि ने इस कविता में मनुष्य को सुमन (फूल) और संसार/देश को उपवन (बगीचा) की उपमा देकर यह संदेश दिया है कि भले ही हमारे रंग-रूप, जाति, धर्म और भाषा अलग-अलग हों, परंतु हम सब एक ही धरती की संतान हैं और एक ही गगन के नीचे रहते हैं। ASSEB पाठ्यक्रम में यह कविता बच्चों के मन में राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव की भावना जगाने हेतु सम्मिलित की गई है।


पाठ-परिचय (Summary)

“सुमन एक उपवन के” कविता में कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ने मनुष्य और संसार के पारस्परिक संबंध को फूल और उपवन के सुंदर रूपक के द्वारा समझाया है। कवि कहते हैं कि हम सब एक ही धरती पर जन्मे हैं, एक ही धूप हम पर पड़ती है, एक ही जल से हम सब सींचे गए हैं और एक ही पवन के झूले में झूल कर हम सब पले-बढ़े हैं। हमारे रंग, रूप और क्यारियाँ भले ही अलग-अलग हों, परंतु इस उपवन की सारी शोभा हम सबके मिलने से ही है। हमारा माली एक है (भगवान) और हम सब एक ही गगन के नीचे रहते हैं। एक ही सूरज की किरणें हम सब की कलियाँ खिलाती हैं तथा एक ही चाँद की चाँदनी हम सब को नहलाती है। भ्रमरों के मीठे गुंजन हम सबके लिए एक से सुर हैं।

कविता के अंतिम भाग में कवि कहते हैं कि काँटों के बीच रहकर भी हमने हँस-हँस कर जीना सीखा है और एक ही सूत्र में बंधकर गले का हार बनना सीखा है। हमारी सुगंध सबके लिए समान है — हम धनी और निर्धन सबका शृंगार हैं। इस प्रकार यह कविता “अनेकता में एकता”, राष्ट्रीय एकात्मता और भाईचारे का अद्भुत संदेश देती है। यह बच्चों को सिखाती है कि विभिन्न जाति, धर्म, भाषा और संस्कृति के लोग मिलकर ही देश रूपी उपवन को सुंदर बनाते हैं।


कविता (Poem Text)

हम सब सुमन एक उपवन के
— द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

एक हमारी धरती सबकी,
जिसकी मिट्टी में जन्मे हम।
मिली एक ही धूप हमें है,
सींचे गए एक जल से हम।
पले हुए हैं झूल-झूल कर,
पलनों में हम एक पवन के —
हम सब सुमन एक उपवन के॥

रंग-रंग के रूप हमारे,
अलग-अलग है क्यारी-क्यारी।
लेकिन हम सबसे मिलकर ही,
इस उपवन की शोभा सारी।
एक हमारा माली, हम सब,
रहते नीचे एक गगन के —
हम सब सुमन एक उपवन के॥

सूरज एक हमारा, जिसकी,
किरणें उसकी कली खिलातीं।
एक हमारा चाँद, चाँदनी,
जिसकी हम सबको नहलाती।
मिले एक से स्वर हमको हैं,
भ्रमरों के मीठे गुंजन के —
हम सब सुमन एक उपवन के॥

काँटों में मिलकर हम सबने,
हँस-हँस कर है जीना सीखा।
एक सूत्र में बँधकर हमने,
हार गले का बनना सीखा।
सबके लिए सुगंध हमारी,
हम शृंगार धनी निर्धन के —
हम सब सुमन एक उपवन के॥


कवि-परिचय (About the Poet)

द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी हिंदी के सुप्रसिद्ध बाल-कवि और साहित्यकार थे। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, सहज भाव तथा बच्चों को नैतिक एवं देशभक्ति की प्रेरणा देने वाले संदेश मिलते हैं। उनकी कविताएँ अनेक पाठ्यपुस्तकों में संकलित हैं। “हम सब सुमन एक उपवन के” उनकी सर्वाधिक लोकप्रिय बाल-कविताओं में से एक है, जो अनेकता में एकता का संदेश देती है।


शब्दार्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
सुमनफूल, पुष्प (Flower)
उपवनबाग, बगीचा (Garden)
धरतीपृथ्वी, धरा (Earth)
मिट्टीमाटी, भूमि (Soil)
धूपसूर्य का प्रकाश (Sunlight)
सींचे गएपानी दिया गया (Watered, Nurtured)
पवनहवा, वायु (Wind, Air)
पलनाझूला (Cradle)
क्यारीबगीचे का छोटा भाग जहाँ पौधे लगाए जाते हैं (Flower-bed)
शोभासुंदरता, सजावट (Beauty, Splendour)
मालीबगीचे की देखभाल करने वाला (Gardener)
गगनआकाश, आसमान (Sky)
सूरजसूर्य, दिनकर (Sun)
किरणेंप्रकाश की रश्मियाँ (Rays)
कलीअविकसित फूल (Bud)
चाँदनीचाँद का प्रकाश (Moonlight)
नहलातीस्नान कराती है (Bathes)
स्वरआवाज़, सुर (Tune, Voice)
भ्रमरभौंरा (Bumblebee)
गुंजनमधुर ध्वनि, गूँज (Humming, Buzz)
काँटाकण्टक (Thorn)
सूत्रधागा (Thread, String)
हारमाला (Garland, Necklace)
सुगंधखुशबू, महक (Fragrance)
शृंगारसजावट, अलंकार (Adornment, Decoration)
धनीअमीर (Rich)
निर्धनगरीब (Poor)

अभ्यास (Question Answers)

अभ्यास-माला 1: संक्षेप में उत्तर दो

प्रश्न (क): कविता में ‘सुमन’ और ‘उपवन’ किन्हें कहा गया है?

उत्तरः कविता में ‘सुमन’ (फूल) मनुष्य को कहा गया है तथा ‘उपवन’ (बगीचा) संसार/देश को कहा गया है। कवि ने रूपक अलंकार के द्वारा संसार के सभी मनुष्यों को एक उपवन के विभिन्न फूलों के समान बताया है, जो मिलकर इस संसार रूपी उपवन की शोभा बढ़ाते हैं।

प्रश्न (ख): फूलों की कलियाँ किससे खिलती हैं?

उत्तरः फूलों की कलियाँ सूरज की किरणों से खिलती हैं। कवि कहते हैं — “सूरज एक हमारा, जिसकी किरणें उसकी कली खिलातीं।”

प्रश्न (ग): भ्रमरों के गुंजन कैसे लगते हैं?

उत्तरः भ्रमरों के गुंजन मीठे लगते हैं। कविता में कहा गया है — “मिले एक से स्वर हमको हैं, भ्रमरों के मीठे गुंजन के।” अर्थात् सभी फूलों को (मनुष्यों को) भ्रमरों की मधुर गूँज एक समान सुनाई देती है।

प्रश्न (घ): कवि के अनुसार हमारा माली कौन है?

उत्तरः कवि के अनुसार हमारा माली एक है — भगवान (परमेश्वर/ईश्वर)। जैसे एक माली बगीचे के सभी पौधों की देखभाल समान रूप से करता है, वैसे ही ईश्वर इस संसार रूपी उपवन में सभी मनुष्यों का पालन-पोषण समान भाव से करता है।

प्रश्न (ङ): चाँदनी किसको नहलाती है?

उत्तरः चाँदनी हम सब (सभी मनुष्यों/फूलों) को नहलाती है। एक ही चाँद की चाँदनी सबके ऊपर समान रूप से बरसती है — यह कवि के “अनेकता में एकता” के संदेश को और गहरा करती है।

अभ्यास-माला 2: विस्तृत उत्तर दो

प्रश्न (क): कवि ने उपवन के फूलों को एक समान क्यों कहा है?

उत्तरः कवि ने उपवन के फूलों को एक समान इसलिए कहा है क्योंकि भले ही उपवन में अनेक प्रकार के और भिन्न-भिन्न रंगों के फूल खिलते हैं, परंतु वे सब एक ही धरती में जन्म लेते हैं, एक ही धूप, एक ही जल और एक ही पवन से पलते-बढ़ते हैं। उनका माली भी एक ही है तथा वे सब एक ही गगन के नीचे रहते हैं। सूरज की किरणें सबकी कलियाँ खिलाती हैं और चाँदनी सबको समान रूप से नहलाती है। फूलों की सुगंध भी सबके लिए समान होती है — चाहे धनी हो या निर्धन। इन सब समानताओं के कारण कवि ने सभी फूलों को एक समान बताया है। यही बात मनुष्यों पर भी लागू होती है — हम सब अलग-अलग जाति, धर्म, भाषा और रूप के होते हुए भी मूल रूप से एक ही हैं।

प्रश्न (ख): कविता में किस प्रकार की एकता का वर्णन किया गया है?

उत्तरः कविता में “अनेकता में एकता” का वर्णन किया गया है। भारत एक ऐसा देश है जहाँ अनेक जाति, धर्म, भाषा, संस्कृति और रहन-सहन के लोग रहते हैं — फिर भी सब भारतवासी एक हैं। जिस प्रकार एक उपवन में विभिन्न रंगों और प्रकारों के फूल खिलते हैं और मिलकर उपवन की शोभा बढ़ाते हैं, उसी प्रकार विभिन्न समुदायों के लोग मिलकर देश की शोभा बढ़ाते हैं। यही राष्ट्रीय एकता और भाईचारे की भावना कविता का मूल संदेश है।

प्रश्न (ग): “एक सूत्र में बँधकर हमने हार गले का बनना सीखा” — पंक्ति का भाव स्पष्ट करो।

उत्तरः इस पंक्ति का भाव यह है कि जिस प्रकार अलग-अलग रंग और सुगंध के अनेक फूल एक धागे (सूत्र) में पिरोकर एक सुंदर माला बन जाते हैं और गले का शृंगार बनते हैं, उसी प्रकार विभिन्न जाति, धर्म, भाषा और संस्कृति के लोग एकता के सूत्र में बँधकर एक सुंदर राष्ट्र का निर्माण करते हैं। एकता ही हमें शोभायमान और सम्मानित बनाती है। कवि यहाँ “एकता में बल” तथा “मिलकर रहने” का गहरा संदेश देते हैं।

प्रश्न (घ): “सबके लिए सुगंध हमारी, हम शृंगार धनी निर्धन के” — का आशय लिखो।

उत्तरः इस पंक्ति का आशय यह है कि फूल कभी अमीर-गरीब का भेद नहीं करते। उनकी सुगंध धनी और निर्धन — दोनों के लिए समान होती है। फूल चाहे किसी भी व्यक्ति के गले का हार बनें, वे सबके लिए शृंगार और शोभा का साधन होते हैं। यही गुण मनुष्य को भी सीखना चाहिए — हमें भी जाति, धर्म, धन या वर्ग के आधार पर भेदभाव नहीं करना चाहिए, अपितु सबके साथ समान भाव और प्रेम से व्यवहार करना चाहिए।

अभ्यास-माला 3: रिक्त स्थानों की पूर्ति करो

प्रश्न (क): एक हमारी ________ सबकी।

उत्तरः एक हमारी धरती सबकी।

प्रश्न (ख): मिली एक ही ________ हमें है।

उत्तरः मिली एक ही धूप हमें है।

प्रश्न (ग): एक हमारा ________, हम सब रहते नीचे एक गगन के।

उत्तरः एक हमारा माली, हम सब रहते नीचे एक गगन के।

प्रश्न (घ): भ्रमरों के ________ गुंजन के।

उत्तरः भ्रमरों के मीठे गुंजन के।

प्रश्न (ङ): हम ________ धनी निर्धन के।

उत्तरः हम शृंगार धनी निर्धन के।

अभ्यास-माला 4: पर्यायवाची शब्द लिखो

शब्दपर्यायवाची
सुमनफूल, पुष्प, कुसुम, प्रसून
उपवनबाग, बगीचा, वाटिका, उद्यान
धरतीपृथ्वी, धरा, भूमि, वसुधा
सूरजसूर्य, दिनकर, भास्कर, रवि
चाँदचंद्र, शशि, राकेश, हिमांशु
पवनहवा, वायु, समीर, अनिल
गगनआकाश, आसमान, अंबर, नभ
भ्रमरभौंरा, अलि, मधुकर, मधुप

अभ्यास-माला 5: विपरीतार्थक शब्द लिखो

शब्दविपरीतार्थक (विलोम)
धनीनिर्धन
एकअनेक
मीठाकड़वा
सुगंधदुर्गंध
दिनरात
सूरजचाँद
जन्ममृत्यु

अभ्यास-माला 6: कविता पर आधारित अन्य प्रश्न

प्रश्न 1: इस कविता के कवि कौन हैं?

उत्तरः इस कविता के कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी हैं। वे हिंदी के सुप्रसिद्ध बाल-कवि और साहित्यकार थे।

प्रश्न 2: कविता का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तरः कविता का मुख्य संदेश “अनेकता में एकता” है। कवि बच्चों को सिखाते हैं कि भले ही हमारे रंग, रूप, जाति, धर्म और भाषा अलग-अलग हों, परंतु हम सब एक ही धरती की संतान हैं और एक ही गगन के नीचे रहते हैं। हमें मिल-जुलकर प्रेम और भाईचारे से रहना चाहिए।

प्रश्न 3: हम सब किस प्रकार से एक हैं? कविता के आधार पर लिखो।

उत्तरः कविता के अनुसार हम सब अनेक प्रकार से एक हैं —

  • हम सब एक ही धरती की मिट्टी में जन्मे हैं।
  • हम पर एक ही धूप पड़ती है।
  • हम सब एक ही जल से सींचे गए हैं।
  • हम सब एक ही पवन के पलनों में पले-बढ़े हैं।
  • हमारा माली (ईश्वर) एक ही है।
  • हम सब एक ही गगन के नीचे रहते हैं।
  • एक ही सूरज हमारी कलियाँ खिलाता है।
  • एक ही चाँद की चाँदनी हम सबको नहलाती है।
  • हमें भ्रमरों के गुंजन एक से सुनाई देते हैं।
  • हमारी सुगंध सबके लिए समान है।

प्रश्न 4: “काँटों में मिलकर हम सबने हँस-हँस कर है जीना सीखा” — इस पंक्ति से क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तरः इस पंक्ति से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में दुख-दर्द (काँटों) के बीच भी हमें हँसते-मुस्कुराते हुए जीना सीखना चाहिए। कठिनाइयाँ जीवन का अभिन्न अंग हैं, परंतु यदि हम मिलकर और सकारात्मक भाव से उनका सामना करें तो जीवन सुखमय बन जाता है। फूल काँटों के बीच रहकर भी अपनी सुगंध और सुंदरता बिखेरते रहते हैं — यही हमें भी सीखना चाहिए।

प्रश्न 5: इस कविता से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?

उत्तरः इस कविता से हमें राष्ट्रीय एकता, भाईचारे, सहिष्णुता और सद्भाव की प्रेरणा मिलती है। हम जाति, धर्म और भाषा के भेदभाव को भुलाकर एक राष्ट्र के सच्चे नागरिक बनें और मिलकर देश रूपी उपवन को सुंदर बनाएँ — यही कविता का प्रेरक संदेश है।


Summary (English)

“Suman Ek Upvan Ke” (We Are All Flowers of One Garden) is a famous children’s poem by Dwarika Prasad Maheshwari, included as Poem 9 in the ASSEB Class 7 Hindi Pallav Bhag-2 textbook. The poem beautifully conveys the message of “unity in diversity” through the metaphor of a garden and its flowers. The poet compares all human beings to flowers (suman) and the world or nation to a garden (upvan). Though the flowers may differ in colour, shape, and bed (kyari), they are all born of the same soil, nourished by the same sunlight, water, and air. They share one gardener — God — and live under one sky. The same sun makes their buds bloom, the same moonlight bathes them, and the same humming of bees reaches their ears. Even amidst thorns, they have learnt to live happily; bound in one thread, they have learnt to become a beautiful garland adorning rich and poor alike. The poem inspires children to rise above caste, creed, language, and class to celebrate national unity, brotherhood and harmony — for we are all flowers of one garden.

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