ASSEB (असम राज्य माध्यमिक शिक्षा परिषद) की कक्षा 7 हिंदी ऐच्छिक पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-2 के पाठ 7 “हार की जीत” का प्रश्नोत्तर एवं सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री यहाँ दी गई है। यह कहानी प्रसिद्ध कथाकार सुदर्शन द्वारा लिखी गई एक मार्मिक कहानी है, जो प्रेम, करुणा, सहानुभूति और मानवीय मूल्यों की महत्ता को दर्शाती है। बाबा भारती और उनके प्यारे घोड़े “सुलतान” तथा डाकू खड्गसिंह के माध्यम से लेखक ने यह संदेश दिया है कि सच्ची मानवता और सद्भावना के सामने बुराई को भी झुकना पड़ता है।
पाठ-परिचय (Summary)
“हार की जीत” सुदर्शन जी की एक प्रसिद्ध कहानी है। इस कहानी के मुख्य पात्र हैं बाबा भारती, जो एक सच्चे साधु एवं संत हैं। बाबा भारती को अपने घोड़े “सुलतान” से अत्यधिक प्रेम था। वे उसकी सेवा अपने बच्चे की तरह करते थे। सुलतान बहुत ही सुन्दर, बलवान और तेज दौड़ने वाला घोड़ा था। बाबा भारती जहाँ भी जाते, सुलतान की प्रशंसा करते थकते नहीं थे।
उस इलाके में खड्गसिंह नाम का एक प्रसिद्ध डाकू रहता था। उसने जब सुलतान की प्रशंसा सुनी, तो वह घोड़े को देखने बाबा भारती के पास आया। घोड़े को देखकर वह उस पर मोहित हो गया और उसे प्राप्त करने की योजना बनाने लगा। उसने बाबा भारती से घोड़ा माँगा, परंतु बाबा ने इनकार कर दिया। तब खड्गसिंह ने छल से घोड़े को हड़पने का निश्चय किया। एक दिन जब बाबा भारती घोड़े पर सवार होकर जा रहे थे, तब खड्गसिंह अपाहिज (लंगड़े) का वेश बनाकर रास्ते के किनारे बैठ गया और दया की भीख माँगने लगा।
दयालु बाबा भारती ने उसे अपने घोड़े पर पास के गाँव तक पहुँचाने के लिए बैठाया। मौका पाते ही खड्गसिंह घोड़े को लेकर भाग गया। बाबा भारती को घोड़े के खोने का दुःख तो था, परंतु उन्हें इस बात की अधिक चिंता थी कि अब लोग किसी दीन-दुखी की सहायता करना बंद कर देंगे। उन्होंने पीछे से आवाज देकर खड्गसिंह से कहा कि वह यह बात किसी को न बताए, अन्यथा लोग दीनों पर विश्वास करना छोड़ देंगे। बाबा भारती के इन शब्दों ने खड्गसिंह के हृदय को गहराई से छू लिया। रात भर वह सो न सका। अंत में उसके मन में पश्चाताप जागा और वह आधी रात को घोड़े को बाबा भारती के अस्तबल में चुपचाप बाँधकर चला गया। इस प्रकार बाबा भारती की मानवता ने डाकू खड्गसिंह के हृदय को बदल दिया — यही उनकी “हार की जीत” है।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि प्रेम, करुणा और सद्भावना से बड़े-से-बड़े दुष्ट का हृदय भी बदला जा सकता है। सच्ची मानवता ही सबसे बड़ी विजय है।
शब्दार्थ (Word Meanings)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| साधु | संत, महात्मा |
| अस्तबल | घोड़ा रखने का स्थान |
| सुलतान | घोड़े का नाम (बादशाह) |
| डाकू | लूटपाट करने वाला |
| अपाहिज | लंगड़ा, विकलांग |
| दीन | गरीब, असहाय |
| मोहित | आकर्षित होना |
| छल | धोखा, कपट |
| पश्चाताप | अपने किए पर दुख |
| हड़पना | छीन लेना |
| करुणा | दया |
| सद्भावना | अच्छी भावना |
| मानवता | इंसानियत |
| विश्वास | भरोसा |
| प्रसिद्ध | मशहूर |
| दया | तरस, करुणा |
| सहायता | मदद |
| हृदय | दिल, मन |
| सवार | घोड़े पर बैठा हुआ |
| आधी रात | मध्यरात्रि |
अभ्यास (Question Answers)
लेखक-परिचय सम्बन्धी प्रश्न
प्रश्न 1। “हार की जीत” कहानी के लेखक कौन हैं?
उत्तरः “हार की जीत” कहानी के लेखक प्रसिद्ध हिंदी कथाकार सुदर्शन (पंडित बदरीनाथ भट्ट) हैं। वे हिंदी कहानी के क्षेत्र में मुंशी प्रेमचंद के समकालीन माने जाते हैं।
प्रश्न 2। सुदर्शन जी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तरः सुदर्शन जी का जन्म सन् 1896 ई. में सियालकोट (अब पाकिस्तान में) हुआ था। उनका वास्तविक नाम पंडित बदरीनाथ भट्ट था।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
प्रश्न 1। बाबा भारती कौन थे?
उत्तरः बाबा भारती एक सच्चे साधु एवं संत थे। वे संसार के मोह-माया से दूर एक मंदिर में रहते थे और भगवान की भक्ति में अपना जीवन बिताते थे। उनके पास “सुलतान” नामक एक सुन्दर घोड़ा था, जिसे वे अपनी जान से भी अधिक प्यार करते थे।
प्रश्न 2। सुलतान कौन था? बाबा भारती को उससे कितना प्रेम था?
उत्तरः सुलतान बाबा भारती का प्यारा घोड़ा था। वह बहुत ही सुन्दर, बलवान, चंचल और तेज दौड़ने वाला घोड़ा था। बाबा भारती उससे अपनी संतान के समान प्रेम करते थे। वे उसे अपने हाथों से दाना खिलाते, स्वयं उसकी देखभाल करते और उसकी प्रशंसा करते नहीं थकते थे। उन्होंने अपनी सारी सम्पत्ति का त्याग किया था, परंतु सुलतान को वे कभी भी अलग नहीं कर सकते थे।
प्रश्न 3। खड्गसिंह कौन था? उसने सुलतान को हथियाने के लिए क्या योजना बनाई?
उत्तरः खड्गसिंह उस इलाके का प्रसिद्ध एवं कुख्यात डाकू था। उसका नाम सुनते ही लोग काँप जाते थे। जब उसने बाबा भारती के घोड़े सुलतान की प्रशंसा सुनी, तो वह उसे पाने के लिए लालायित हो उठा। पहले उसने बाबा भारती से घोड़ा माँगा, परंतु जब उन्होंने इनकार किया तो उसने छल से उसे प्राप्त करने की योजना बनाई। एक दिन वह अपाहिज (लंगड़े) का वेश बनाकर रास्ते के किनारे बैठ गया और बाबा भारती से दया की भीख माँगने लगा।
प्रश्न 4। खड्गसिंह ने बाबा भारती को कैसे धोखा दिया?
उत्तरः खड्गसिंह ने अपाहिज का वेश बनाकर रास्ते के किनारे बैठकर पास के गाँव तक पहुँचाने की प्रार्थना की। दयालु बाबा भारती ने उस पर तरस खाकर उसे अपने घोड़े पर बैठा लिया। घोड़े पर बैठते ही खड्गसिंह ने मौके का लाभ उठाकर एड़ लगाई और घोड़ा लेकर तेज़ी से भाग गया। इस प्रकार उसने बाबा भारती के विश्वास का गलत फायदा उठाकर उन्हें धोखा दिया।
प्रश्न 5। बाबा भारती ने खड्गसिंह से क्या प्रार्थना की और क्यों?
उत्तरः बाबा भारती ने पीछे से दौड़ते-दौड़ते खड्गसिंह से प्रार्थना की कि वह यह घटना किसी से न कहे। उन्होंने कहा — “खड्गसिंह! ठहर जा, घोड़ा अब तेरा हो गया, परंतु एक बात मेरी सुनता जा। यह बात किसी को मत बताना, नहीं तो लोग दीन-दुखियों पर विश्वास करना छोड़ देंगे और कोई किसी असहाय की सहायता नहीं करेगा।” बाबा भारती को घोड़े के खोने का इतना दुःख नहीं था, जितना इस बात का था कि कहीं उनकी इस घटना से लोगों का दीनों पर से विश्वास न उठ जाए।
प्रश्न 6। बाबा भारती के शब्दों का खड्गसिंह पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तरः बाबा भारती के इन सच्चे और मानवीय शब्दों ने खड्गसिंह के पाषाण-हृदय को भी पिघला दिया। उसके मन में अपराधबोध और पश्चाताप की भावना जाग उठी। वह रातभर सो न सका। बाबा भारती के शब्द उसके कानों में बार-बार गूँजते रहे। अंत में उसके हृदय में सच्चाई जाग उठी और उसने घोड़ा वापस लौटाने का निश्चय किया।
प्रश्न 7। खड्गसिंह ने अंत में क्या किया?
उत्तरः खड्गसिंह आधी रात को चुपचाप बाबा भारती के अस्तबल में पहुँचा और सुलतान को वहीं बाँधकर चुपके से लौट गया। सुबह जब बाबा भारती ने अस्तबल में अपने प्यारे सुलतान को देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने ईश्वर को धन्यवाद दिया कि लोगों का दीनों पर से विश्वास नहीं उठा।
प्रश्न 8। कहानी का शीर्षक “हार की जीत” क्यों रखा गया है?
उत्तरः कहानी का शीर्षक “हार की जीत” अत्यंत सार्थक है। बाबा भारती ने अपना प्यारा घोड़ा खो दिया — यह उनकी बाहरी हार थी, परंतु अपनी मानवता, करुणा एवं सद्भावना के बल पर उन्होंने एक खूँखार डाकू के हृदय को बदल दिया और अंत में अपना घोड़ा भी वापस पा लिया — यही उनकी असली जीत है। इसलिए लेखक ने इस कहानी का शीर्षक “हार की जीत” रखा है, जो हमें यह संदेश देता है कि अच्छाई की हार में भी जीत छिपी होती है।
प्रश्न 9। इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तरः इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि —
- प्रेम, करुणा और सद्भावना से बड़े-से-बड़े दुष्ट का हृदय भी बदला जा सकता है।
- हमें कभी भी निर्बल, दीन-दुखियों एवं असहाय लोगों की सहायता करना नहीं छोड़ना चाहिए।
- सच्ची मानवता ही सबसे बड़ी विजय है।
- बुराई पर अच्छाई की जीत हमेशा होती है।
- दूसरों पर विश्वास करना मानवीय गुण है, जिसे बनाए रखना चाहिए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्रश्न 1। बाबा भारती के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।
उत्तरः बाबा भारती एक आदर्श साधु एवं महान चरित्र के व्यक्ति थे। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं —
- दयालु एवं सहृदय — वे दीन-दुखियों पर तुरंत दया करते थे। एक अपाहिज को देखकर उन्होंने तुरंत उसे अपने घोड़े पर बैठाया।
- प्रेमी एवं भावुक — सुलतान घोड़े से उनका लगाव असीम था। वे उसे संतान के समान प्रेम करते थे।
- त्यागी एवं संतोषी — उन्होंने सांसारिक भोग-विलास का त्याग कर भगवद्-भक्ति में जीवन समर्पित किया था।
- सच्चे मानवतावादी — घोड़ा खोने के बाद भी उन्हें इस बात की चिंता थी कि कहीं लोगों का दीनों पर से विश्वास न उठ जाए।
- आदर्शवादी — उनके लिए मानवीय मूल्य सबसे ऊपर थे।
- विश्वास के प्रतीक — वे दूसरों पर सहज विश्वास करते थे।
प्रश्न 2। खड्गसिंह के चरित्र पर प्रकाश डालिए।
उत्तरः खड्गसिंह कहानी का एक महत्वपूर्ण पात्र है। प्रारंभ में वह एक प्रसिद्ध एवं कुख्यात डाकू है, परंतु कहानी के अंत तक उसके चरित्र में अद्भुत परिवर्तन आता है —
- लोभी एवं छली — सुलतान घोड़े को पाने के लिए उसने छल का सहारा लिया।
- साहसी एवं चतुर — उसने अपाहिज का वेश धारण कर बाबा भारती को धोखा दिया।
- संवेदनशील हृदय — बाबा भारती के शब्दों से उसका हृदय द्रवित हो गया।
- पश्चातापी — अपनी गलती का अहसास होते ही उसने पश्चाताप किया।
- सच्चाई की ओर लौटने वाला — आधी रात को घोड़ा वापस लौटाकर उसने यह सिद्ध किया कि उसके भीतर भी मानवता जीवित थी।
प्रश्न 3। “हार की जीत” कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तरः “हार की जीत” सुदर्शन जी द्वारा लिखी एक मार्मिक कहानी है। बाबा भारती एक साधु थे जिनके पास “सुलतान” नामक एक सुन्दर घोड़ा था। उन्हें घोड़े से अत्यधिक प्रेम था। प्रसिद्ध डाकू खड्गसिंह घोड़े को पाने के लिए लालायित था। उसने अपाहिज का वेश बनाकर बाबा भारती से सहायता माँगी और मौका पाते ही घोड़ा लेकर भाग गया। बाबा भारती को घोड़े के खोने का दुःख कम था, अधिक चिंता इस बात की थी कि लोगों का दीनों पर से विश्वास न उठ जाए। उन्होंने पीछे से खड्गसिंह से प्रार्थना की कि वह यह बात किसी को न बताए। बाबा भारती के इन शब्दों ने खड्गसिंह के हृदय को बदल दिया और वह आधी रात को घोड़ा वापस छोड़ गया। इस प्रकार बाबा भारती की मानवता ने एक डाकू को सज्जन बना दिया।
प्रश्न 4। बाबा भारती को घोड़े के खो जाने का इतना दुःख क्यों नहीं था जितना इस बात का था कि लोगों का दीनों पर से विश्वास उठ जाएगा?
उत्तरः बाबा भारती एक सच्चे संत और मानवतावादी व्यक्ति थे। उनके लिए व्यक्तिगत वस्तु से अधिक मूल्यवान सामाजिक मानवीय मूल्य थे। उन्होंने सोचा कि यदि यह घटना लोगों को मालूम हो गई तो आगे से कोई भी व्यक्ति किसी अपाहिज, गरीब या दीन-दुखी की सहायता करने से कतराएगा। समाज में अविश्वास बढ़ जाएगा और मानवता मर जाएगी। इसलिए उन्हें घोड़े के खोने का इतना दुःख नहीं था, जितना समाज में अविश्वास फैलने की चिंता थी। यही उनकी महानता और सच्ची मानवता का प्रमाण है।
प्रश्न 5। बाबा भारती ने सुलतान घोड़े के बारे में क्या-क्या कहा था?
उत्तरः बाबा भारती सुलतान की प्रशंसा करते नहीं थकते थे। वे कहते थे कि सुलतान जैसा सुन्दर, बलवान और चंचल घोड़ा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। उसकी चाल इतनी तेज थी कि हवा भी उसके साथ नहीं चल सकती थी। वे उसे अपने प्राणों से भी अधिक प्यार करते थे। उन्होंने कहा था — “यह घोड़ा संसार में अनूठा है। मैंने अपनी सारी सम्पत्ति का त्याग कर दिया है, परंतु इसे कभी अलग नहीं कर सकता।”
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)
प्रश्न 1। “हार की जीत” कहानी के लेखक का नाम क्या है?
उत्तरः सुदर्शन।
प्रश्न 2। बाबा भारती के घोड़े का नाम क्या था?
उत्तरः सुलतान।
प्रश्न 3। डाकू का नाम क्या था?
उत्तरः खड्गसिंह।
प्रश्न 4। खड्गसिंह ने किसका वेश धारण किया?
उत्तरः अपाहिज (लंगड़े) का।
प्रश्न 5। खड्गसिंह ने घोड़ा कब लौटाया?
उत्तरः आधी रात को चुपचाप अस्तबल में बाँधकर।
प्रश्न 6। बाबा भारती को घोड़ा खोने का क्या दुःख था?
उत्तरः उन्हें यह दुःख था कि अब लोग दीन-दुखियों पर विश्वास करना छोड़ देंगे।
भाषा एवं व्याकरण सम्बन्धी प्रश्न
प्रश्न 1। निम्नलिखित शब्दों के विलोम लिखिए।
| शब्द | विलोम |
|---|---|
| हार | जीत |
| दया | निर्दयता |
| विश्वास | अविश्वास |
| सच | झूठ |
| सुन्दर | कुरूप |
| दिन | रात |
| पाप | पुण्य |
| दीन | धनी |
प्रश्न 2। निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखिए।
| शब्द | पर्यायवाची |
|---|---|
| घोड़ा | अश्व, तुरंग, हय |
| साधु | संत, महात्मा, सन्यासी |
| हृदय | दिल, मन, अंतःकरण |
| दया | करुणा, कृपा, अनुकम्पा |
| रात | निशा, रजनी, यामिनी |
| पृथ्वी | धरती, भूमि, वसुधा |
प्रश्न 3। निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए।
- हृदय द्रवित होना — मन का पिघल जाना। (बाबा भारती के शब्दों से खड्गसिंह का हृदय द्रवित हो गया।)
- आँख का तारा होना — बहुत प्रिय होना। (सुलतान बाबा भारती की आँख का तारा था।)
- पाषाण-हृदय — पत्थर जैसा कठोर मन। (खड्गसिंह पाषाण-हृदय डाकू था।)
- एड़ लगाना — घोड़े को दौड़ाना। (खड्गसिंह ने एड़ लगाकर घोड़ा दौड़ा दिया।)
प्रश्न 4। निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थान भरिए।
- बाबा भारती के घोड़े का नाम सुलतान था।
- खड्गसिंह उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू था।
- खड्गसिंह ने अपाहिज का वेश धारण किया।
- बाबा भारती को सबसे अधिक चिंता दीनों पर विश्वास उठ जाने की थी।
- खड्गसिंह ने आधी रात को घोड़ा लौटाया।
निष्कर्ष (Conclusion)
“हार की जीत” कहानी हमें यह अमर संदेश देती है कि सच्ची मानवता, करुणा और प्रेम के सामने बुराई को भी झुकना पड़ता है। बाबा भारती की हार वास्तव में उनकी जीत थी, क्योंकि उन्होंने अपने मानवीय गुणों से एक डाकू के हृदय को बदल दिया। यह कहानी ASSEB कक्षा 7 हिंदी ऐच्छिक पल्लव भाग-2 का एक महत्वपूर्ण पाठ है, जो विद्यार्थियों को नैतिक एवं मानवीय मूल्यों की शिक्षा देती है।