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चाय: असम की एक पहचान – Class 7 Hindi Elective Question Answer | ASSEB | पल्लव भाग-2

असम बोर्ड (ASSEB) की कक्षा 7 की हिंदी ऐच्छिक पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-2 का छठा पाठ “चाय: असम की एक पहचान” एक ज्ञानवर्धक गद्य पाठ है। इस पाठ में असम की चाय की उत्पत्ति, उसकी खोज, खेती की शुरुआत, चाय बनाने की प्रक्रिया, चाय बगानों का विस्तार, चाय बागान समुदाय की संस्कृति तथा असम की पहचान के रूप में चाय के महत्व का सरल और सजीव वर्णन किया गया है। यहाँ इस पाठ के पाठ-परिचय, शब्दार्थ तथा पाठ्यपुस्तक के सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर दिए गए हैं।


पाठ-परिचय (Summary)

“चाय: असम की एक पहचान” पाठ में लेखक ने असम राज्य की विश्वप्रसिद्ध पहचान — चाय — के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। चाय की खेती की शुरुआत सबसे पहले चीन देश में हुई थी। असम में चाय के पौधे की खोज सर्वप्रथम सन् 1823 ई. में अंग्रेज़ अधिकारी राॅबत ब्रुस (Robert Bruce) ने की थी। सिंगफो जनजाति के लोग चाय को ‘फिनाप’ अथवा ‘फालाप’ के नाम से जानते थे। राॅबत ब्रुस की मृत्यु के बाद उनके भाई चार्ल्स ब्रुस ने चाय के पौधों को कलकत्ता के बोटैनिकल गार्डन को भेजा, जहाँ यह सिद्ध हुआ कि असम की चाय भी चीन की चाय की एक प्रकार ही है।

सन् 1839 ई. में ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ ने असम में चाय की खेती की व्यापारिक रूप से शुरुआत की। असम का पहला चाय बगीचा ‘चाबुवा चाय बगीचा’ (डिब्रूगढ़ ज़िला) माना जाता है। असम के प्रथम चाय कृषक मणिराम देवान थे, जिन्होंने ‘चिनामारा’ और ‘चेलेंग’ नामक दो चाय बगान स्थापित किए। आज असम के अलावा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, सिक्किम आदि राज्यों में भी चाय के बगान फैले हुए हैं। जोरहाट जिला में स्थित ‘टोकलाई चाय अनुसंधान केंद्र’ एशिया का सबसे बड़ा चाय अनुसंधान केंद्र है।

चाय बनाने की प्रक्रिया में बागान से कोमल हरी पत्तियाँ तोड़ी जाती हैं और फिर उन्हें सी.टी.सी. (CTC) मशीनों के द्वारा संसाधित कर के पीने योग्य चाय की पत्ती तैयार की जाती है। लोग चाय इसलिए पीते हैं कि इससे शरीर एवं मन को ताजगी मिलती है तथा थकान दूर होती है। आधुनिक शोधों से ज्ञात हुआ है कि चाय के सेवन से कुछ रोगों जैसे फेफड़ों के रोग, कैंसर तथा संक्रमण से बचाव में सहायता मिल सकती है। चाय बागानों में रहने वाले लोगों का सामूहिक नृत्य ‘झुमुर’ असम की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का एक अनुपम उदाहरण है। इस प्रकार चाय आज असम की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और पहचान का एक अभिन्न अंग बन चुकी है।


शब्दार्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
निरालाअलग, भिन्न, विशेष
पहचानपरिचय, पहचानने का साधन
चौराहाचार राहों का समूह, चौक
रवाना होनाचल देना, प्रस्थान करना
शुरुआतआरंभ, प्रारंभ
कईअनेक, बहुत सारे
मददसहायता
श्रीगणेश होनाआरंभ करना, प्रारम्भ होना
संग्रामयुद्ध, लड़ाई
मशहूरविख्यात, प्रसिद्ध
ताजगीनयापन, स्फूर्ति
वजहकारण
आयात करनादूसरे देश से लाया जाना
लगभगप्रायः, करीब-करीब
आँकड़ातथ्य, संख्या-सूचक विवरण
उछल पड़नाकूद पड़ना
हाथ बँटानामदद करना
खो जानामग्न हो जाना, ध्यान-निमग्न होना

अभ्यास (Question Answers)

1. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो

(क) चाय की खेती की शुरुआत सबसे पहले कहाँ हुई थी?

उत्तरः चाय की खेती की शुरुआत सबसे पहले चीन देश में हुई थी।

(ख) सिंगफो लोग चाय को किस नाम से जानते हैं?

उत्तरः सिंगफो लोग चाय को ‘फिनाप’ अथवा ‘फालाप’ के नाम से जानते हैं।

(ग) असम में चाय की खोज सबसे पहले किसने की?

उत्तरः असम में चाय की खोज सबसे पहले अंग्रेज़ अधिकारी ‘राॅबत ब्रुस’ ने की थी।

(घ) असम में किसने और कब चाय की खेती की शुरुआत की थी?

उत्तरः असम में सन् 1839 ई. में ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ ने पहली बार व्यापारिक रूप से चाय की खेती की शुरुआत की थी।

(ङ) असम के प्रथम चाय कृषक कौन थे?

उत्तरः असम के प्रथम चाय कृषक मणिराम देवान थे।

(च) असम का पहला चाय बगीचा कौन-सा है?

उत्तरः असम का पहला चाय बगीचा ‘चाबुवा चाय बगीचा’ है, जो डिब्रूगढ़ ज़िले में स्थित है।

(छ) मणिराम देवान ने कौन से दो चाय बगीचे स्थापित किए थे?

उत्तरः मणिराम देवान ने ‘चिनामारा चाय बगीचा’ और ‘चेलेंग चाय बगीचा’ — ये दो चाय बगीचे स्थापित किए थे।

(ज) एशिया का सबसे बड़ा चाय अनुसंधान केंद्र कहाँ स्थित है?

उत्तरः एशिया का सबसे बड़ा चाय अनुसंधान केंद्र ‘टोकलाई चाय अनुसंधान केंद्र’ है, जो असम के जोरहाट जिले में स्थित है।

2. संक्षेप में उत्तर दो

(क) हरी-हरी पत्तियों से चाय कैसे बनती है?

उत्तरः चाय बगानों में लगे चाय के पौधों से कोमल हरी-हरी पत्तियाँ तोड़ी जाती हैं। इन पत्तियों को कारखाने में ले जाकर सी.टी.सी. (CTC) मशीनों के द्वारा संसाधित किया जाता है। मशीनों में पत्तियाँ कुचलकर, मसलकर और सुखाकर अंत में पीने योग्य चाय की पत्ती के रूप में तैयार की जाती हैं। फिर इन्हें पैकेटों में भरकर बाज़ारों में भेजा जाता है।

(ख) लोग चाय क्यों पीते हैं?

उत्तरः लोग चाय इसलिए पीते हैं कि चाय पीने से शरीर एवं मन को ताजगी मिलती है तथा थकान दूर होती है। चाय एक उत्तेजक पेय है जो आलस्य को दूर करके स्फूर्ति प्रदान करती है। साथ ही, अनेक वैज्ञानिक शोधों से यह भी ज्ञात हुआ है कि चाय का सेवन कुछ रोगों — जैसे फेफड़े की बीमारी, कैंसर तथा संक्रमण — से बचाव में सहायक हो सकता है।

(ग) पीने के लिए चाय कैसे तैयार की जाती है?

उत्तरः पीने के लिए चाय तैयार करने हेतु पानी को बर्तन में गर्म किया जाता है। उसमें चाय की पत्ती, चीनी और दूध मिलाया जाता है। मिश्रण को कुछ देर तक उबाला जाता है तथा उसके बाद उसे छानकर कप में डालकर परोस दिया जाता है। इस प्रकार सुगंधित और स्वादिष्ट पेय चाय तैयार हो जाती है।

(घ) भारतवर्ष के किन-किन राज्यों में चाय के बगीचे हैं?

उत्तरः भारतवर्ष में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और सिक्किम जैसे राज्यों में चाय के बगीचे हैं। इनमें से असम भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है।

(ङ) झुमुर नृत्य क्या है?

उत्तरः झुमुर असम के चाय बगानों में रहने वाले चाय जनजाति समुदाय का एक प्रसिद्ध सामूहिक लोक नृत्य है। इस नृत्य में युवक-युवतियाँ ढोल, बाँसुरी और ताल जैसे पारम्परिक वाद्य यंत्रों की संगत में मिलकर गाते-नाचते हैं। यह नृत्य असम की सांस्कृतिक विविधता और चाय बगान संस्कृति का एक अनूठा परिचय देता है।

3. रेखा खींचकर मिलाओ

नीचे दिए गए मुहावरों/शब्दों को उनके सही अर्थ से मिलाइए —

मुहावरा / शब्दअर्थ
उछल पड़नाकूद पड़ना
श्रीगणेश करनाआरंभ करना
हाथ बँटानामदद करना
खो जानामग्न हो जाना

4. भाषा-अध्ययन (व्याकरण)

संज्ञा (Noun) : किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, प्राणी, गुण, भाव या क्रिया के नाम को संज्ञा कहते हैं। जैसे — असम, चाय, मणिराम, ताजगी, खुशबू आदि।

संज्ञा के तीन भेद होते हैं —

  • व्यक्तिवाचक संज्ञा : किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का बोध कराने वाला नाम। जैसे — मणिराम देवान, राॅबत ब्रुस, असम, जोरहाट, चाबुवा।
  • जातिवाचक संज्ञा : किसी जाति या वर्ग के सभी प्राणियों या वस्तुओं का बोध कराने वाला शब्द। जैसे — चाय, बगीचा, लड़का, गाय, फूल।
  • भाववाचक संज्ञा : किसी भाव, गुण, दशा या क्रिया के नाम को बताने वाला शब्द। जैसे — ताजगी, मिठास, थकान, खुशबू, बचपन।

(क) निम्न वाक्यों में से व्यक्तिवाचक, जातिवाचक तथा भाववाचक संज्ञाओं को छाँटिए —

  • असम चाय के लिए मशहूर है। — व्यक्तिवाचक : असम; जातिवाचक : चाय।
  • मणिराम देवान असम के प्रथम चाय कृषक थे। — व्यक्तिवाचक : मणिराम देवान, असम; जातिवाचक : चाय कृषक।
  • चाय पीने से ताजगी मिलती है। — जातिवाचक : चाय; भाववाचक : ताजगी।
  • टोकलाई एशिया का सबसे बड़ा चाय अनुसंधान केंद्र है। — व्यक्तिवाचक : टोकलाई, एशिया; जातिवाचक : चाय, अनुसंधान केंद्र।

5. अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न (Additional Important Questions)

(क) राॅबत ब्रुस ने असम में चाय के पौधे की खोज कब की थी?

उत्तरः राॅबत ब्रुस ने सन् 1823 ई. में असम में चाय के पौधे की खोज की थी।

(ख) चाय का पौधा सबसे पहले राॅबत ब्रुस को किसने दिखाया था?

उत्तरः सिंगफो जनजाति के प्रधान बीसा गाँव ने राॅबत ब्रुस को सबसे पहले चाय का पौधा दिखाया था।

(ग) असम की चाय की पहचान विश्व-स्तर पर क्यों मानी जाती है?

उत्तरः असम की चाय अपनी विशेष सुगंध, गहरे रंग और तेज़ स्वाद के कारण विश्व-प्रसिद्ध है। असम भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है, और यहाँ की चाय अनेक देशों को निर्यात की जाती है। इसी कारण असम को ‘चाय की भूमि’ कहा जाता है और चाय असम की एक प्रमुख पहचान बन चुकी है।

(घ) चाय बगानों में किन-किन समुदायों के लोग रहते हैं?

उत्तरः चाय बगानों में देश के विभिन्न क्षेत्रों — झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल आदि — से आए हुए विभिन्न जनजातीय एवं भाषाई समुदाय के लोग रहते हैं। इन्हें सामूहिक रूप से ‘चाय जनजाति’ कहा जाता है। इनकी अपनी विशेष भाषा, संस्कृति, गीत, नृत्य (जैसे झुमुर) और रीति-रिवाज़ हैं।

(ङ) चाय का असम की अर्थव्यवस्था में क्या योगदान है?

उत्तरः चाय असम की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है। असम के अधिकांश ज़िलों में फैले हजारों चाय बगान लाखों लोगों को रोज़गार देते हैं। चाय के निर्यात से राज्य और देश दोनों को अच्छी विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। इस प्रकार चाय असम की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ उसकी सांस्कृतिक पहचान भी बन गई है।


Summary: “Chai: Asam ki ek Pehchan” (Tea: An Identity of Assam) is the sixth lesson of the ASSEB Class 7 Hindi Elective textbook Pallav Bhag-2. The chapter explains how tea cultivation, which originated in China, came to Assam. Robert Bruce first discovered tea plants in Assam in 1823 with the help of the Singpho tribe, who knew tea as ‘Phinap’ or ‘Phalap’. The East India Company began commercial tea cultivation in 1839, and Maniram Dewan became Assam’s first tea planter, establishing the Chinamara and Cheleng tea gardens. Chabua, in Dibrugarh district, holds the distinction of being Assam’s first tea garden, while the Tocklai Tea Research Centre in Jorhat is the largest of its kind in Asia. The chapter further describes how tea leaves are processed in CTC machines, why people drink tea (for refreshment and possible health benefits), and how the tea-garden community keeps the rich cultural tradition of the Jhumur dance alive. Today, tea is an inseparable part of Assam’s economy, culture, and global identity.

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