ASSEB (असम राज्य माध्यमिक शिक्षा परिषद्) द्वारा निर्धारित Class 7 Hindi (Elective) पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-2 के पाठ 5 – जीना-जिलाना मत भूलना की पूर्ण प्रश्नोत्तर मार्गदर्शिका यहाँ दी गयी है। यह रचना डॉ. अच्युत शर्मा द्वारा रचित है, जिसमें कवि ने प्रकृति के विभिन्न उपादानों — सूर्य, चाँद, पेड़, पक्षी, फूल, भौंरे, नदियाँ और हवा — के माध्यम से मानव को जीने और दूसरों को जिलाने का संदेश दिया है। नीचे पाठ-परिचय (Summary), शब्दार्थ तथा पाठ्यपुस्तक के सम्पूर्ण अभ्यास प्रश्नों के उत्तर सरल हिन्दी में प्रस्तुत हैं, जो ASSEB Class 7 परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।
पाठ-परिचय (Summary)
‘जीना-जिलाना मत भूलना’ डॉ. अच्युत शर्मा द्वारा रचित एक प्रेरणादायक रचना है जिसमें कवि ने प्रकृति को शिक्षक के रूप में प्रस्तुत किया है। कवि कहते हैं कि सवेरे उगकर सूर्य हमें यह सीख देता है कि हम चारों ओर ज्ञान और आशा का प्रकाश फैलाएँ। रात के आकाश में चमकता चाँद हमें चाँदनी अर्थात् शीतलता और सेवा का भाव बाँटना सिखाता है। हरे-भरे पेड़-पौधे थके हुए राहगीरों को छाँव देकर परोपकार का पाठ पढ़ाते हैं।
कवि आगे कहते हैं कि तरह-तरह के पक्षी अपनी मधुर बोली से हमें यह संदेश देते हैं कि हम आपस में मीठी-मीठी बातें करें। रंग-बिरंगे फूल हमें प्रेम बाँटने की प्रेरणा देते हैं और भौंरे यह बताते हैं कि हमें एक-दूसरे से गले मिलकर मिलजुल कर रहना चाहिए। बहती नदियाँ हमें निरंतर आगे बढ़ते रहने का उपदेश देती हैं तथा बहती हवा सबको जीवन देने का संदेश देती है।
कविता का केन्द्रीय भाव यह है कि चाहे जीवन में कितनी भी विपत्तियाँ क्यों न आएँ — गोलियाँ चलें या गोले फटें — हमें हँसना-हँसाना और जीना-जिलाना नहीं भूलना चाहिए। संकट के समय में भी मनुष्य को आशा, प्रेम, सहयोग और परोपकार का भाव बनाये रखना चाहिए, यही इस रचना का मूल संदेश है।
शब्दार्थ (Word Meanings)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जिलाना | दूसरे को जीने की प्रेरणा देना |
| उगकर | उदित होकर |
| सूरज | सूर्य |
| रोशनी | प्रकाश, उजियाला |
| छाँव | छाया |
| बढ़ती-बढ़ती | लगातार आगे बढ़ती हुई |
| बहती-बहती | निरंतर बहती हुई |
| विपत्ति | आपदा, कठिनाई |
| गोले | बम, गोला-बारूद |
| निरंतर | लगातार, बिना रुके |
| संकट | आपदा, परेशानी |
| उपकरण | साधन, उपादान |
| भौंरा | भ्रमर, मधुप |
| पक्षी | पंछी, चिड़िया |
| हवा | पवन, वायु |
अभ्यास (Question Answers)
1. सस्वर वाचन
प्रश्न: ‘जीना-जिलाना मत भूलना’ पाठ का उचित हाव-भाव के साथ सस्वर वाचन कीजिए।
उत्तरः विद्यार्थी इस रचना को उचित स्वर, लय एवं हाव-भाव के साथ कक्षा में स्वयं वाचन करें। शिक्षक के मार्गदर्शन में अभ्यास करें।
2. पूरे वाक्य में उत्तर दीजिए
(क) तरह-तरह के पक्षी हमसे क्या कहते हैं?
उत्तरः तरह-तरह के पक्षी हमसे आपस में मीठी-मीठी बातें करने को कहते हैं।
(ख) रंग-बिरंगे फूल हमें क्या बताते हैं?
उत्तरः रंग-बिरंगे फूल हमें यह बताते हैं कि सबको प्यार बाँटना मत भूलना।
(ग) हमारे लिए भौंरों का संदेश क्या है?
उत्तरः भौंरों का संदेश यह है कि हमें एक-दूसरे को गले लगाकर मिल-जुलकर रहना चाहिए।
(घ) बढ़ती हुई नदियाँ हमें कौन-सा उपदेश देती हैं?
उत्तरः बढ़ती हुई नदियाँ हमें यह उपदेश देती हैं कि हमें जीवन में निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए, कभी रुकना नहीं चाहिए।
(ङ) ‘जीना-जिलाना मत भूलना’ नामक रचना के रचयिता कौन हैं?
उत्तरः ‘जीना-जिलाना मत भूलना’ नामक रचना के रचयिता डॉ. अच्युत शर्मा हैं।
3. सोचकर संक्षेप में उत्तर दीजिए
(क) पूर्व दिशा में उगकर सूरज हमें क्या सिखाता है?
उत्तरः पूर्व दिशा में उगकर सूरज हमें यह सिखाता है कि चारों ओर रोशनी अर्थात् ज्ञान और आशा का प्रकाश फैलाना मत भूलना। जिस प्रकार सूर्य पूरे संसार को अपनी किरणों से प्रकाशमान करता है, उसी प्रकार हमें भी अपने ज्ञान और सद्गुणों से समाज को आलोकित करना चाहिए।
(ख) रात के आकाश में चमकता चाँद हमें किस कर्तव्य की याद दिलाता है?
उत्तरः रात के आकाश में चमकता हुआ चाँद हमें यह कर्तव्य याद दिलाता है कि हम चाँदनी अर्थात् शीतलता, स्नेह और सेवा का भाव सबमें बाँटें। जैसे चाँद अंधकार में भी शीतल प्रकाश देता है, वैसे ही हमें दूसरों को सुख-शान्ति प्रदान करनी चाहिए।
(ग) हरे-भरे पेड़-पौधे हमें क्या संदेश देते हैं?
उत्तरः हरे-भरे पेड़-पौधे हमें यह संदेश देते हैं कि हम भी पेड़ की तरह दूसरों को छाँव देना मत भूलें। अर्थात् हम परोपकार करें, थके हुए और कष्ट में पड़े लोगों को आश्रय एवं सहारा प्रदान करें।
(घ) बहती हवा हमें क्या करने को कहती है?
उत्तरः बहती हुई हवा हमें यह करने को कहती है कि हम भी हवा की तरह सबको जीवन देना मत भूलें। हवा बिना भेदभाव के सभी को प्राण-वायु प्रदान करती है, इसी प्रकार हमें भी सबकी सहायता करनी चाहिए।
4. पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए
“कहती प्रकृति आए विपत्ति / हँसना-हँसाना मत भूलना। / चलें गोलियाँ, फटें गोले / जीना-जिलाना मत भूलना।”
उत्तरः इन पंक्तियों में कवि डॉ. अच्युत शर्मा ने प्रकृति के माध्यम से मनुष्य को यह संदेश दिया है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ और विपत्तियाँ क्यों न आएँ, हमें हँसना और दूसरों को हँसाना नहीं भूलना चाहिए। चाहे चारों ओर युद्ध जैसी स्थिति हो, गोलियाँ चलें या गोले फटें, हमें स्वयं जीना और दूसरों को भी जीने की प्रेरणा देना नहीं भूलना चाहिए। तात्पर्य यह है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी हमें आशा, साहस और परोपकार का भाव नहीं छोड़ना चाहिए।
5. कविता का केन्द्रीय भाव
प्रश्न: ‘जीना-जिलाना मत भूलना’ पाठ का केन्द्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तरः इस रचना का केन्द्रीय भाव यह है कि प्रकृति का हर उपादान — सूर्य, चाँद, पेड़, पक्षी, फूल, भौंरा, नदी और हवा — मनुष्य को कोई-न-कोई सत्कर्म करने का संदेश देता है। सूर्य प्रकाश, चाँद चाँदनी, पेड़ छाँव, पक्षी मधुर वाणी, फूल प्रेम, भौंरा मेल-मिलाप, नदी निरंतर प्रगति और हवा जीवनदायी संदेश देती है। कवि कहते हैं कि चाहे जीवन में कितनी भी विपत्तियाँ क्यों न आएँ, हमें हँसना-हँसाना और जीना-जिलाना नहीं भूलना चाहिए। मनुष्य को सदैव परोपकार, प्रेम, सहयोग एवं आशा का भाव बनाये रखना चाहिए — यही इस रचना का केन्द्रीय भाव है।
6. भाषा-अध्ययन
(क) निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए —
| शब्द | पर्यायवाची शब्द |
|---|---|
| सवेरा | सुबह, प्रभात, भोर |
| सूरज | सूर्य, दिनकर, भास्कर |
| चाँद | चन्द्र, चन्द्रमा, शशि |
| पेड़ | तरु, वृक्ष, द्रुम |
| पक्षी | पंछी, चिड़िया, खग |
| फूल | पुष्प, कुसुम, सुमन |
| भौंरा | भ्रमर, मधुप, अलि |
| नदी | सरिता, तटिनी, तरंगिणी |
| हवा | पवन, वायु, समीर |
(ख) ‘भूलना’ क्रिया का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य बनाइए।
उत्तरः
- हमें अपने माता-पिता का आशीर्वाद लेना मत भूलना।
- विद्यार्थी प्रतिदिन पढ़ाई करना मत भूलें।
- मैं अपना गृहकार्य पूरा करना नहीं भूला।
- हमें दीन-दुखियों की सहायता करना नहीं भूलना चाहिए।
- संकट के समय में भी मुस्कुराना मत भूलना।
(ग) निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए —
| शब्द | विलोम |
|---|---|
| सवेरा | शाम |
| दिन | रात |
| हँसना | रोना |
| जीना | मरना |
| विपत्ति | सम्पत्ति |
| आगे | पीछे |
| प्रकाश | अंधकार |
7. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
(i) ‘जीना-जिलाना मत भूलना’ रचना के रचयिता कौन हैं?
(क) रामधारी सिंह दिनकर (ख) डॉ. अच्युत शर्मा (ग) महादेवी वर्मा (घ) कबीरदास
उत्तरः (ख) डॉ. अच्युत शर्मा।
(ii) सवेरे उगकर कौन प्रकाश फैलाता है?
(क) चाँद (ख) तारे (ग) सूरज (घ) हवा
उत्तरः (ग) सूरज।
(iii) पेड़-पौधे हमें क्या देने का संदेश देते हैं?
(क) फल (ख) फूल (ग) छाँव (घ) लकड़ी
उत्तरः (ग) छाँव।
(iv) रंग-बिरंगे फूल हमें क्या बाँटने को कहते हैं?
(क) धन (ख) प्यार (ग) मिठाई (घ) पुस्तकें
उत्तरः (ख) प्यार।
(v) नदियाँ हमें क्या उपदेश देती हैं?
(क) रुक जाने का (ख) निरंतर आगे बढ़ने का (ग) पीछे लौटने का (घ) सोने का
उत्तरः (ख) निरंतर आगे बढ़ने का।
(vi) तरह-तरह के पक्षी हमें कैसी बातें करने को कहते हैं?
(क) कड़वी (ख) तीखी (ग) मीठी-मीठी (घ) झूठी
उत्तरः (ग) मीठी-मीठी।
Summary (English)
‘Jeena-Jilana Mat Bhoolna’ is an inspirational composition by Dr. Achyut Sharma included in ASSEB Class 7 Hindi textbook Pallav Bhag-2 (Chapter 5). Through different elements of nature — the rising sun, the shining moon, green trees, sweet-singing birds, colourful flowers, bees, flowing rivers and the wind — the poet teaches us never to forget our duties towards humanity. The sun reminds us to spread the light of knowledge and hope, the moon to share affection and service, trees to give shade through selfless help, birds to speak sweet words, flowers to share love, bees to live in unity, rivers to keep moving forward, and the wind to give life to all. The central message is that even when life is filled with hardships — when bullets fly and bombs explode — we must never forget to laugh, make others laugh, live, and help others live. The chapter inspires students to keep alive the values of love, courage, cooperation and compassion in every situation.