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तुम कब जाओगे, अतिथि – Class 7 Hindi Elective Question Answer | ASSEB | पल्लव भाग-2

ASSEB (असम राज्य माध्यमिक शिक्षा परिषद) के अंतर्गत Class 7 Hindi Elective की पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-2 के पाठ 15 — तुम कब जाओगे, अतिथि के प्रश्नोत्तर यहाँ दिए गए हैं। यह पाठ प्रसिद्ध व्यंग्यकार शरद जोशी द्वारा लिखित एक मार्मिक व्यंग्य रचना है, जिसमें लेखक ने भारतीय समाज की ‘अतिथि देवो भवः’ परंपरा पर हास्य-व्यंग्य के माध्यम से टिप्पणी की है। पाठ में लेखक के घर पर चार दिन से ठहरे हुए अतिथि के कारण उत्पन्न मानसिक उहापोह और सत्कार की ऊष्मा के क्रमशः समाप्त होने का सजीव चित्रण किया गया है।

पाठ-परिचय (Summary)

‘तुम कब जाओगे, अतिथि’ शरद जोशी द्वारा रचित एक व्यंग्य निबंध है। इसमें लेखक ने एक ऐसे अतिथि की कथा कही है जो उनके घर चार दिन पहले आया था और जाने का नाम नहीं ले रहा। पहले दिन लेखक ने अतिथि का स्वागत स्नेह भरी मुस्कुराहट से और पत्नी ने सादर नमस्ते करके किया। दोपहर के भोजन को ‘लंच’ की गरिमा दी गई और रात के भोजन को ‘डिनर’ का स्वरूप दिया गया। दूसरे दिन उसके मनोरंजन के लिए सिनेमा दिखाया गया तथा बाहर के होटल में भोजन कराया गया।

परंतु तीसरा दिन आते-आते सत्कार की ऊष्मा कम होने लगी। डिनर अब साधारण खिचड़ी पर आ पहुँचा। चौथे दिन लेखक ने अतिथि के सामने कैलेंडर की तारीखें पलटनी शुरू कीं ताकि अतिथि समझ जाए कि उसे अब लौट जाना चाहिए। तीसरे दिन अतिथि ने जब धोबी को कपड़े देने की बात कही तो लेखक के मन में आशंका जाग उठी कि अब यह जल्दी नहीं जाएगा। लेखक के मन में बार-बार यही प्रश्न घुमड़ने लगा — “तुम कब जाओगे, अतिथि?”

लेखक का कथन है कि अतिथि देवता भी होता है और राक्षस भी। दो-तीन दिन तक रुकने वाला अतिथि देवता समान होता है, परंतु चौथे दिन के बाद वह राक्षस बन जाता है। शरद जोशी इस व्यंग्य के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि अतिथि को भी अपने मेज़बान की सुविधा-असुविधा का ध्यान रखना चाहिए और निश्चित समय पर लौट जाना चाहिए, अन्यथा सौहार्द्र शीघ्र ही बोरियत में बदल जाता है।


शब्दार्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
अतिथिमेहमान, घर पर आने वाला व्यक्ति
सत्कारआदर, स्वागत
ऊष्मागर्माहट, गर्मजोशी
सततलगातार, निरंतर
सामीप्यनिकटता, पास होने का भाव
मार्मिकमर्मस्पर्शी, हृदय को छूने वाला
सौहार्द्रमित्रता, सरल हृदय का भाव
गरिमागौरव, प्रतिष्ठा
आघातचोट, धक्का
अप्रत्याशितजिसकी आशा न हो
स्नेहप्रेम, ममता
संशयसंदेह
बोरियतऊब, मन उचाटना
हाईटाइमउचित समय, अंतिम घड़ी
देवतापूजनीय, पूज्य
राक्षसदैत्य, भार-स्वरूप
घुमड़नाबार-बार मन में आना
लंचदोपहर का भोजन
डिनररात का भोजन
खिचड़ीदाल-चावल मिलाकर बना सादा भोजन

अभ्यास (Question Answers)

पाठ से (पूर्ण वाक्य में उत्तर दीजिए)

प्रश्न 1। लेखक अतिथि को दिखाकर कैलेंडर की तारीखें क्यों बदल रहे थे?

उत्तरः लेखक अतिथि को दिखाकर कैलेंडर की तारीखें इसलिए बदल रहे थे ताकि अतिथि को यह संकेत मिल सके कि उसे इस घर में आए हुए चार दिन हो चुके हैं। लेखक चाहते थे कि अतिथि इस बात को समझे और अपने घर वापस लौट जाए।

प्रश्न 2। लेखक तथा उनकी पत्नी ने मेहमान का स्वागत कैसे किया था?

उत्तरः लेखक ने अपने मेहमान का स्वागत स्नेह भरी मुस्कुराहट के साथ किया तथा उनकी पत्नी ने सादर नमस्ते कहकर मेहमान का सम्मान किया। दोनों ने मिलकर अतिथि का अत्यंत आदरपूर्ण ढंग से स्वागत किया।

प्रश्न 3। मेहमान के स्वागत में दोपहर के भोजन को कौन-सी गरिमा प्रदान की गई थी?

उत्तरः मेहमान के स्वागत में दोपहर के साधारण भोजन को ‘लंच’ की गरिमा प्रदान की गई थी। उसी प्रकार रात के भोजन को ‘डिनर’ का गौरवपूर्ण रूप दिया गया था ताकि अतिथि को विशेष महसूस हो।

प्रश्न 4। दूसरे दिन लेखक ने अतिथि के मनोरंजन के लिए क्या प्रबंध किया?

उत्तरः दूसरे दिन लेखक ने अतिथि के मनोरंजन के लिए उन्हें सिनेमा दिखाया और रात का खाना घर के बाहर किसी होटल में खिलाया। यह सब इसलिए किया गया ताकि मेहमान को अच्छा लगे और स्वागत में किसी प्रकार की कमी न रह जाए।

प्रश्न 5। तीसरे दिन सुबह अतिथि ने क्या कहा?

उत्तरः तीसरे दिन सुबह अतिथि ने लेखक से कहा कि वह अपने कपड़े धोबी को धुलवाने के लिए देना चाहता है। यह सुनकर लेखक के मन में आशंका हो गई कि अब अतिथि शीघ्र जाने वाला नहीं है और उसने अधिक दिन ठहरने का मन बना लिया है।

प्रश्न 6। सत्कार की ऊष्मा समाप्त हो जाने पर क्या हुआ?

उत्तरः सत्कार की ऊष्मा समाप्त हो जाने पर भोजन का स्तर लगातार गिरने लगा। पहले डिनर में जो विशेष व्यंजन परोसे जाते थे, वे अब सादे होते गए और अंत में डिनर साधारण खिचड़ी पर आ पहुँचा। इसी से प्रकट होता है कि स्वागत की गर्माहट ठंडी पड़ चुकी है।

प्रश्न 7। ‘तुम कब जाओगे, अतिथि’ — यह प्रश्न लेखक के मन में कब घुमड़ने लगा?

उत्तरः जब अतिथि को आए हुए चार दिन हो गए और वह जाने का कोई संकेत नहीं दे रहा था, तब लेखक के मन में बार-बार यह प्रश्न घुमड़ने लगा — “तुम कब जाओगे, अतिथि?” लेखक का धैर्य अब टूट चुका था और वह मन ही मन अतिथि के लौटने की प्रतीक्षा करने लगा।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 8। मेहमान के आते ही लेखक के मन में कौन-सी प्रतिक्रिया हुई?

उत्तरः जब लेखक ने अपने मेहमान को देखा तो वे बाहर से तो प्रसन्न हुए परन्तु अंदर ही अंदर सोचने लगे कि अब उन्हें अतिथि के सत्कार के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ेंगे। उनके मन में आर्थिक चिंता और मानसिक उहापोह की मिश्रित भावना उत्पन्न हो गई।

प्रश्न 9। सौहार्द्र किस प्रकार बोरियत में परिवर्तित हो गया?

उत्तरः अतिथि के अधिक दिन रुक जाने के कारण लेखक और उसकी पत्नी का प्रारंभिक उत्साह तथा प्रेमभरा सौहार्द्र धीरे-धीरे बोरियत में बदल गया। जो स्वागत पहले हृदय से किया जा रहा था, अब वह बोझ-सा प्रतीत होने लगा। बातचीत में रस नहीं रहा और घर का वातावरण ऊब से भर गया।

प्रश्न 10। अतिथि कब देवता और कब राक्षस बन जाता है?

उत्तरः लेखक के अनुसार दो-तीन दिन तक घर पर रुकने वाला अतिथि देवता समान होता है, क्योंकि उसका आगमन घर में प्रसन्नता लाता है। परंतु जब वही अतिथि चार दिन से अधिक रुक जाता है तो वह राक्षस के समान बन जाता है, क्योंकि अब उसका रुकना मेज़बान के लिए भार बन जाता है।

प्रश्न 11। लेखक को कौन-सा अप्रत्याशित आघात लगा?

उत्तरः जब तीसरे दिन सुबह अतिथि ने धोबी को कपड़े धुलवाने के लिए देने की बात कही, तब लेखक को अप्रत्याशित आघात लगा। उन्हें यह आशा थी कि अतिथि शीघ्र ही लौट जाएगा, परंतु धोबी को कपड़े देने का अर्थ था कि वह कई दिन और ठहरने वाला है। यह बात लेखक के लिए बहुत बड़ा झटका थी।

प्रश्न 12। चौथे दिन लेखक का व्यवहार किस प्रकार बदल गया?

उत्तरः चौथे दिन लेखक का स्नेह और मुस्कुराहट विदा हो चुकी थी। वे अतिथि के सामने कैलेंडर की तारीखें पलटने लगे, बातचीत में रुखाई आ गई और भोजन में भी विशेष ध्यान नहीं दिया गया। उनके चेहरे पर वह आत्मीयता नहीं रही जो पहले दिन थी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 13। ‘तुम कब जाओगे, अतिथि’ पाठ का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तरः ‘तुम कब जाओगे, अतिथि’ पाठ शरद जोशी द्वारा रचित एक व्यंग्यात्मक निबंध है। इसका मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि अतिथि को किसी के घर अधिक समय तक नहीं रुकना चाहिए। हमारी भारतीय परंपरा ‘अतिथि देवो भवः’ की रही है, परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि अतिथि अनिश्चित काल तक मेज़बान के घर पर डेरा जमा ले। लेखक यह संदेश देना चाहते हैं कि यदि हम भी किसी के घर जाएँ तो उनकी सुविधा का ध्यान रखें और अधिक समय तक रहकर उन्हें कष्ट न दें। साथ ही पाठ इस सत्य की ओर भी इशारा करता है कि सत्कार की ऊष्मा भी एक सीमा के बाद समाप्त हो जाती है और सौहार्द्र बोरियत में बदल जाता है।

प्रश्न 14। लेखक ने कैलेंडर के माध्यम से अतिथि को कौन-सा संदेश देना चाहा?

उत्तरः लेखक ने कैलेंडर की तारीखें अतिथि के सामने पलट-पलट कर यह मूक संदेश देना चाहा कि उसे आए हुए चार दिन हो चुके हैं और अब उसके लौटने का ‘हाईटाइम’ आ गया है। चूँकि लेखक स्पष्ट रूप से अतिथि से जाने को नहीं कह सकते थे, अतः उन्होंने कैलेंडर के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से यह बताने का प्रयास किया कि समय बीत चुका है और अब अतिथि को अपने घर लौट जाना चाहिए।

प्रश्न 15। पाठ के आधार पर बताइए कि लेखक के घर में अतिथि के स्वागत का स्तर कैसे क्रमशः गिरता गया?

उत्तरः पहले दिन लेखक और उनकी पत्नी ने अतिथि का अत्यंत स्नेहपूर्ण स्वागत किया। दोपहर का भोजन ‘लंच’ और रात का भोजन ‘डिनर’ की गरिमा से सजाया गया। दूसरे दिन उन्हें सिनेमा दिखाया गया और होटल में भोजन कराया गया। तीसरे दिन से सत्कार की ऊष्मा कम होने लगी और भोजन में विशेष व्यंजन हटने लगे। चौथे दिन डिनर खिचड़ी पर आ पहुँचा और लेखक की मुस्कुराहट गायब हो गई। इस प्रकार स्वागत का स्तर क्रमशः गिरता गया।

प्रश्न 16। शरद जोशी की व्यंग्य शैली पर प्रकाश डालिए।

उत्तरः शरद जोशी हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं। उनकी शैली सरल, सहज और अत्यंत प्रभावशाली है। वे साधारण जीवन की घटनाओं में से ऐसे प्रसंग चुनते हैं जो हास्य के साथ-साथ गहरा सामाजिक संदेश भी देते हैं। ‘तुम कब जाओगे, अतिथि’ में उन्होंने अतिथि सत्कार जैसे गंभीर विषय को व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत किया है। उनकी भाषा बोलचाल की है, परन्तु उसमें मार्मिकता और तीक्ष्ण व्यंग्य भी है। पाठ पढ़ते समय पाठक हँसता भी है और सोचने पर भी मजबूर होता है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 17। ‘तुम कब जाओगे, अतिथि’ पाठ के लेखक कौन हैं?

उत्तरः इस पाठ के लेखक प्रसिद्ध व्यंग्यकार शरद जोशी हैं।

प्रश्न 18। पाठ की विधा क्या है?

उत्तरः इस पाठ की विधा व्यंग्य निबंध है।

प्रश्न 19। अतिथि लेखक के घर कितने दिन रुका?

उत्तरः अतिथि लेखक के घर चार दिनों से अधिक समय तक रुका रहा।

प्रश्न 20। पहले दिन लेखक की पत्नी ने मेहमान का स्वागत किस प्रकार किया?

उत्तरः पहले दिन लेखक की पत्नी ने मेहमान का स्वागत सादर नमस्ते करके किया।

प्रश्न 21। चौथे दिन डिनर में क्या परोसा गया?

उत्तरः चौथे दिन डिनर अब साधारण खिचड़ी पर आ पहुँचा था।

प्रश्न 22। दूसरे दिन लेखक ने अतिथि को कौन-सा मनोरंजन कराया?

उत्तरः दूसरे दिन लेखक ने अतिथि को सिनेमा दिखाया।


Summary: ASSEB Class 7 Hindi Elective (Pallav Bhag-2) Chapter 15 ‘तुम कब जाओगे, अतिथि’ is a satirical essay by Sharad Joshi. The story narrates how the warm welcome a host extends to a guest gradually fades as the guest overstays beyond four days. From an enthusiastic ‘lunch’ and ‘dinner’ on day one, the meals decline to plain khichdi by the fourth day. The author flips calendar dates in front of the guest to silently signal that it is high time to leave, and concludes that a guest is godly for two-three days but becomes a burden thereafter.

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