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आओ, स्कूल चलें – Class 7 Hindi Elective Question Answer | ASSEB | पल्लव भाग-2

ASSEB (Assam State Board of Secondary Education) Class 7 Hindi (ऐच्छिक) पल्लव भाग-2 के पाठ 14 ‘आओ, स्कूल चलें’ का संपूर्ण प्रश्नोत्तर इस लेख में दिया गया है। यह पाठ एक गाँव की कहानी है जहाँ पंचायत के सक्रिय प्रयासों और एक नुक्कड़ नाटक के द्वारा गाँव वालों में शिक्षा के प्रति जागरूकता उत्पन्न होती है। पाठ शिक्षा का अधिकार कानून (RTE), लड़कियों की शिक्षा, बाल मजदूरी की समस्या और सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बताता है। नीचे पाठ-परिचय (Summary), शब्दार्थ और सभी अभ्यास प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं जो ASSEB Class 7 की वार्षिक परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे।


पाठ-परिचय (Summary)

‘आओ, स्कूल चलें’ पाठ एक छोटे से गाँव की कहानी पर आधारित है जहाँ पहले कोई स्कूल नहीं था। पंचायत की कोशिश से गाँव में एक स्कूल खुलता है, परंतु बहुत से माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते थे। कोई बच्चा घर के काम में लगा होता, कोई खेतों में काम करता, तो कोई बिटवा की तरह मोटर गैरेज में मेहनत करता था। पंचायत इस बात को लेकर चिंतित थी कि गाँव के बच्चे शिक्षा से वंचित रह रहे हैं।

लोगों में जागरूकता लाने के लिए पंचायत ने एक नाटक का आयोजन करने का निर्णय लिया। पीपल के पेड़ के नीचे यह योजना बनी और रविवार के दिन – जब बाजार लगता था और बहुत भीड़ रहती थी – नाटक मंडली ने स्कूल के पास खुले मैदान में नुक्कड़ नाटक किया। टोली के सब लोग गाने लगे और नाटक के माध्यम से बताया कि “पढ़ाई ही बेटी का असली गहना है”, “बच्चों को स्कूल भेजना चाहिए”, “शिक्षा का अधिकार सभी को है।” आजकल स्कूल में बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया जाता है, मुफ्त किताबें, वर्दी और मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) दिया जाता है।

नाटक का गहरा असर गाँव वालों पर पड़ा। एक आदमी ने उसी समय कहा – “हाँ, मैं कल से ही बबुआ को फिर स्कूल भेज दूँगा।” इस तरह सरकार के ‘शिक्षा का अधिकार कानून’ (6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा) के बारे में लोग जागरूक हुए और स्कूल खुलने के बाद गाँव वाले बहुत खुश हुए। यह पाठ हमें सिखाता है कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और परिवार, समाज तथा सरकार – तीनों को मिलकर इसे सच करना चाहिए।


शब्दार्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
पंचायतगाँव की प्रशासनिक समिति
जागरूकसचेत, सजग
इम्तहानपरीक्षा
किस्मतभाग्य
तरक्कीउन्नति, प्रगति
परवरिशपालन-पोषण
ब्रेल लिपिनेत्रहीन (अंधे) लोगों के पढ़ने-लिखने की लिपि
मुफ्तनि:शुल्क, बिना दाम
अनिवार्यजो जरूरी हो
नुक्कड़ नाटकसड़क/चौराहे पर खुले में किया जाने वाला नाटक
टोलीदल, समूह
बबुआबच्चा (प्यार से कहना)
बिटवालड़का (एक पात्र का नाम)
गैरेजगाड़ी मरम्मत की जगह
गहनाआभूषण, जेवर
वर्दीस्कूल की पोशाक
असरप्रभाव
भीड़बहुत सारे लोगों का जमावड़ा

अभ्यास (Question Answers)

1. सही विकल्प चुनकर लिखो (बहुविकल्पीय प्रश्न / MCQs)

(क) पीपल के पेड़ के नीचे क्या बैठी थी?

उत्तरः पंचायत।

(ख) पहले गाँव में क्या नहीं था?

उत्तरः स्कूल।

(ग) किसकी कोशिश के बाद गाँव में स्कूल हो गया?

उत्तरः पंचायत की कोशिश से।

(घ) सरकार ने शिक्षा के अधिकार कानून के अनुसार कितने साल से कितने साल तक के बच्चों के लिए मुफ्त तथा अनिवार्य पढ़ाई की व्यवस्था की है?

उत्तरः 6 साल से 14 साल तक।

(ङ) पढ़ने का अधिकार किसको है?

उत्तरः सबको।

(च) बाजार किस दिन लगती है?

उत्तरः रविवार के दिन।

(छ) कहाँ पर भीड़ थी?

उत्तरः स्कूल के पास/स्कूल में।

(ज) ‘जागरूक’ शब्द का अर्थ क्या है?

उत्तरः सचेत।

(झ) ‘इम्तहान’ शब्द का अर्थ क्या है?

उत्तरः परीक्षा।

(ञ) ‘किस्मत’ शब्द का अर्थ क्या है?

उत्तरः भाग्य।

(ट) स्कूल खुलने के बाद गाँव के लोग कैसे थे?

उत्तरः खुश थे।

(ठ) पंचायत किस बात को लेकर चिंतित थी?

उत्तरः बच्चे स्कूल नहीं जाते।

(ड) लोगों में जागरूकता लाने के लिए पंचायत ने क्या किया?

उत्तरः नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया।

(ढ) टोली के सब लोग क्या करने लगे?

उत्तरः गाने लगे।

(ण) बिटवा क्या करता था?

उत्तरः वह मोटर गैरेज में रहकर काम करता था।

(त) बच्चों को कहाँ भेजना चाहिए?

उत्तरः स्कूल में।

(थ) “हाँ, मैं कल से ही बबुआ को फिर स्कूल भेज दूँगा” – यह वाक्य किसने कहा?

उत्तरः एक आदमी ने।

(द) पढ़ाई ही बेटी का असली क्या है?

उत्तरः गहना।

(ध) आजकल स्कूल में बच्चों को कैसे पढ़ाया जाता है?

उत्तरः खेल-खेल में (खेल-खेल के माध्यम से)।

(न) पंचायत ने जो नाटक किया, उसका गाँव वालों पर असर पड़ा या नहीं?

उत्तरः हाँ, गहरा असर पड़ा।

2. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 1. पंचायत कहाँ बैठी थी और क्या सोच रही थी?

उत्तरः पंचायत गाँव के पीपल के पेड़ के नीचे बैठी थी। वह इस बात को लेकर चिंतित थी कि गाँव में स्कूल खुलने के बाद भी बहुत से बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। पंचायत यह सोच रही थी कि गाँव वालों को शिक्षा के महत्व के बारे में कैसे जागरूक किया जाए।

प्रश्न 2. पहले गाँव में क्या नहीं था और बाद में क्या हुआ?

उत्तरः पहले गाँव में स्कूल नहीं था। बच्चे पढ़ाई से वंचित थे। पंचायत की लगातार कोशिश के बाद गाँव में सरकारी स्कूल खुल गया और गाँव वाले बहुत खुश हुए।

प्रश्न 3. ‘शिक्षा का अधिकार’ कानून क्या है?

उत्तरः ‘शिक्षा का अधिकार’ (Right to Education) कानून के अनुसार सरकार ने 6 साल से 14 साल तक के सभी बच्चों के लिए मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था की है। इस कानून के तहत हर बच्चे को – चाहे लड़का हो या लड़की, अमीर हो या गरीब – पढ़ाई का समान अधिकार प्राप्त है।

प्रश्न 4. पंचायत ने लोगों में जागरूकता लाने के लिए क्या उपाय किया?

उत्तरः पंचायत ने लोगों में जागरूकता लाने के लिए नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया। एक टोली बनाई गई, जिसने रविवार के दिन – जब बाजार लगता था और भीड़ रहती थी – स्कूल के पास खुले मैदान में नाटक किया। नाटक के द्वारा गाने और संवाद से शिक्षा का महत्व समझाया गया।

प्रश्न 5. नाटक मंडली ने रविवार का दिन ही क्यों चुना?

उत्तरः रविवार को गाँव में बाजार लगती थी और दूर-दूर से लोग आते थे, इसलिए उस दिन भीड़ बहुत होती थी। ज्यादा लोगों तक संदेश पहुँचाने के लिए नाटक मंडली ने रविवार का दिन ही चुना।

प्रश्न 6. बिटवा कौन था और क्या करता था?

उत्तरः बिटवा गाँव का एक लड़का था जिसे उसके माता-पिता ने पढ़ाई के लिए स्कूल नहीं भेजा था। वह मोटर गैरेज में रहकर मजदूरी करता था। नाटक के माध्यम से उसके जैसे बच्चों के बारे में संदेश दिया गया कि बच्चों से काम करवाने के बजाय उन्हें स्कूल भेजा जाए।

प्रश्न 7. आजकल स्कूलों में बच्चों को कैसे पढ़ाया जाता है?

उत्तरः आजकल स्कूलों में बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया जाता है। इसके अलावा बच्चों को मुफ्त किताबें, वर्दी, मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) तथा अन्य कई सुविधाएँ भी दी जाती हैं, ताकि पढ़ाई बोझ न लगे और बच्चों का मन स्कूल में लगे।

प्रश्न 8. नाटक का गाँव वालों पर क्या असर पड़ा?

उत्तरः नाटक का गाँव वालों पर बहुत गहरा असर पड़ा। बहुत से लोगों ने तय किया कि वे अपने बच्चों को – चाहे बेटा हो या बेटी – स्कूल भेजेंगे। एक आदमी ने तो वहीं कहा – “हाँ, मैं कल से ही बबुआ को फिर स्कूल भेज दूँगा।” इससे साफ है कि नाटक ने लोगों के मन में शिक्षा के प्रति लगाव पैदा कर दिया।

प्रश्न 9. “पढ़ाई ही बेटी का असली गहना है” – इस वाक्य का क्या आशय है?

उत्तरः इस वाक्य का आशय यह है कि बेटी का असली आभूषण सोना-चाँदी या जेवर नहीं, बल्कि शिक्षा है। शिक्षित लड़की अपना तथा अपने परिवार का जीवन सँवार सकती है, समाज में आत्मनिर्भर बन सकती है। इसलिए माता-पिता को बेटी की शादी पर गहने जुटाने से अधिक महत्वपूर्ण काम है – उसे पढ़ाना।

प्रश्न 10. ब्रेल लिपि क्या है?

उत्तरः ब्रेल लिपि वह विशेष लिपि है जिसके द्वारा नेत्रहीन (अंधे) लोग छूकर पढ़-लिख सकते हैं। इसमें कागज पर उभरे हुए बिंदुओं द्वारा अक्षर बनाए जाते हैं। इस लिपि का आविष्कार लुई ब्रेल ने किया था।

3. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 1. ‘आओ, स्कूल चलें’ पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखो।

उत्तरः ‘आओ, स्कूल चलें’ पाठ एक गाँव की कहानी है। पहले उस गाँव में स्कूल नहीं था। पंचायत के प्रयासों से गाँव में सरकारी स्कूल खुला, परंतु बहुत से माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते थे। कुछ बच्चे घर के काम करते, कुछ मजदूरी करते थे। पंचायत ने इस समस्या के समाधान के लिए नुक्कड़ नाटक का सहारा लिया। पीपल के पेड़ के नीचे योजना बनी और रविवार बाजार के दिन स्कूल के पास खुले मैदान में नाटक हुआ। नाटक में ‘शिक्षा का अधिकार’ (6 से 14 वर्ष), लड़कियों की शिक्षा, बाल मजदूरी की समस्या और सरकारी स्कूल की सुविधाओं – मुफ्त किताबें, वर्दी, मिड-डे मील, खेल-खेल में पढ़ाई – का संदेश दिया गया। नाटक का असर इतना गहरा हुआ कि एक आदमी ने वहीं संकल्प लिया कि वह अगले दिन से ही अपने बच्चे को स्कूल भेज देगा। पाठ का संदेश है कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और परिवार-समाज सबको मिलकर इसे साकार करना चाहिए।

प्रश्न 2. इस पाठ से हमें क्या शिक्षा/संदेश मिलता है?

उत्तरः इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है –

  • शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है।
  • लड़का-लड़की में भेदभाव किए बिना सबको पढ़ाई का समान अवसर दिया जाना चाहिए।
  • बच्चों से मजदूरी करवाने के बजाय उन्हें स्कूल भेजना चाहिए।
  • समाज को शिक्षित करने के लिए सिर्फ कानून ही नहीं, बल्कि लोक-नाटक जैसी रचनात्मक गतिविधियाँ भी कारगर हैं।
  • एकजुट होकर पंचायत और गाँव वाले हर समस्या का समाधान कर सकते हैं।

प्रश्न 3. सरकारी स्कूलों में बच्चों को कौन-कौन सी सुविधाएँ मिलती हैं?

उत्तरः सरकारी स्कूलों में बच्चों को निम्नलिखित सुविधाएँ मिलती हैं –

  • मुफ्त शिक्षा (6 से 14 वर्ष तक)।
  • मुफ्त पाठ्यपुस्तकें (किताबें)।
  • मुफ्त स्कूल वर्दी।
  • मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील)।
  • खेल-खेल में पढ़ाई की आधुनिक विधि।
  • लड़कियों के लिए साइकिल, छात्रवृत्ति आदि।
  • विशेष बच्चों के लिए ब्रेल लिपि की किताबें।

प्रश्न 4. नुक्कड़ नाटक क्या है? उसकी क्या उपयोगिता है?

उत्तरः नुक्कड़ नाटक वह नाटक है जो किसी मंच पर नहीं, बल्कि सड़क-चौराहे, बाजार या मैदान में खुले में किया जाता है। इसमें कम कलाकार, कम सामग्री से बहुत बड़े संदेश दिए जाते हैं। इसकी उपयोगिता यह है कि –

  • यह आम लोगों तक सीधे पहुँचता है।
  • इसमें कोई टिकट नहीं लगता।
  • संगीत, गीत और संवाद से लोग आसानी से समझते हैं।
  • सामाजिक बुराइयों जैसे बाल-मजदूरी, अशिक्षा, दहेज प्रथा आदि के विरुद्ध जागरूकता फैलाने में सहायक है।

4. भाषा-अध्ययन (Language Study)

प्रश्न 1. नीचे दिए गए क्रियाओं के तीनों कालों (भूतकाल, वर्तमान काल, भविष्यत् काल) में रूप लिखो –

क्रियाभूतकालवर्तमान कालभविष्यत् काल
पढ़नाराम ने पढ़ा।राम पढ़ता है।राम पढ़ेगा।
जानावह स्कूल गया।वह स्कूल जाता है।वह स्कूल जाएगा।
खेलनाबच्चे खेले।बच्चे खेलते हैं।बच्चे खेलेंगे।
लिखनासीता ने लिखा।सीता लिखती है।सीता लिखेगी।
गानाटोली ने गाया।टोली गाती है।टोली गाएगी।

प्रश्न 2. नीचे दिए गए वाक्यों को शुद्ध करके लिखो –

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्य
मैंने स्कूल जाता हूँ।मैं स्कूल जाता हूँ।
लड़की पढ़ता है।लड़की पढ़ती है।
बच्चे को स्कूल भेजना चाहिए।बच्चों को स्कूल भेजना चाहिए।
मैं कल आऊँगा था।मैं कल आऊँगा।
वह बहुत अच्छी पढ़ाई करता है।वह बहुत अच्छी तरह पढ़ाई करता है।

प्रश्न 3. नीचे दिए गए मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्य प्रयोग करो –

मुहावराअर्थवाक्य प्रयोग
आग बबूला होनाबहुत क्रोधित होनाबेटे की शरारत सुनकर पिता आग बबूला हो गए।
ईद का चाँद होनाबहुत दिनों बाद दिखाई देनातुम तो आजकल ईद के चाँद हो गए हो, मिलते ही नहीं।
आँखें खुलनासच्चाई का पता चलनानाटक देखकर गाँव वालों की आँखें खुल गईं।
कमर कसनातैयार हो जानापंचायत ने स्कूल खुलवाने के लिए कमर कस ली।
हाथ बँटानासहायता करनाहमें घर के काम में माँ का हाथ बँटाना चाहिए।

प्रश्न 4. नीचे दिए गए शब्दों के विलोम (विपरीत अर्थ वाले शब्द) लिखो –

शब्दविलोम
शिक्षितअशिक्षित
जागरूकउदासीन
मुफ्तसशुल्क
खुशदुखी
अनिवार्यऐच्छिक
तरक्कीअवनति

5. अतिरिक्त प्रश्न (Additional Questions)

प्रश्न 1. नाटक मंडली ने स्कूल के पास का खुला मैदान ही क्यों चुना?

उत्तरः नाटक मंडली ने स्कूल के पास का खुला मैदान चुना क्योंकि वहाँ रविवार को बाजार लगती थी और बहुत भीड़ रहती थी। साथ ही स्कूल के पास नाटक करने से सीधा संदेश यह जाता था कि बच्चों को इसी स्कूल में पढ़ने भेजा जाए।

प्रश्न 2. पंचायत किसे कहते हैं?

उत्तरः पंचायत गाँव की चुनी हुई समिति होती है, जो गाँव के विकास, समस्याओं और झगड़ों के निपटारे का काम करती है। पंचायत के मुखिया को सरपंच/प्रधान कहते हैं।

प्रश्न 3. लड़कियों की शिक्षा क्यों जरूरी है?

उत्तरः लड़कियों की शिक्षा बहुत जरूरी है क्योंकि एक शिक्षित लड़की पूरे परिवार को शिक्षित कर सकती है। वह आत्मनिर्भर बनती है, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती है, बच्चों का सही पालन-पोषण कर सकती है तथा समाज और देश की तरक्की में योगदान देती है। इसीलिए कहा गया है – “पढ़ाई ही बेटी का असली गहना है।”

प्रश्न 4. बाल-मजदूरी के क्या नुकसान हैं?

उत्तरः बाल-मजदूरी के नुकसान हैं –

  • बच्चा शिक्षा से वंचित रह जाता है।
  • उसका शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है।
  • वह पूरी जिंदगी मजदूरी में फँस जाता है।
  • उसका बचपन छिन जाता है।
  • देश और समाज को शिक्षित नागरिक नहीं मिलते।

प्रश्न 5. आप अपने पड़ोस के बच्चों को स्कूल भेजने के लिए क्या करोगे?

उत्तरः मैं अपने पड़ोस के बच्चों को स्कूल भेजने के लिए –

  • उनके माता-पिता से मिलकर शिक्षा का महत्व समझाऊँगा।
  • ‘शिक्षा का अधिकार’ कानून के बारे में बताऊँगा।
  • उन्हें सरकार द्वारा मिलने वाली सुविधाओं – मुफ्त किताबें, वर्दी, मिड-डे मील की जानकारी दूँगा।
  • अपने स्कूल ले जाकर शिक्षक से उनका दाखिला करवाऊँगा।
  • जरूरत पड़ने पर उन्हें खुद पढ़ाने में मदद करूँगा।

Summary (English)

‘Aao, School Chalein’ (Come, Let’s Go to School) is a heart-warming story about a village where the panchayat works hard to spread awareness about education. Although a government school had finally been opened in the village after the panchayat’s efforts, many parents were still not sending their children to school – some kept their kids at home for chores, others sent them to work in motor garages or fields. Worried, the panchayat met under the peepal tree and decided to organise a ‘nukkad natak’ (street play). On Sunday, the village market day, when the maximum crowd gathered, the troupe performed a song-and-drama act in the open ground beside the school. Through their performance they spread the message of the Right to Education Act (free and compulsory schooling for all children aged 6 to 14), the importance of girls’ education (“padhai hi beti ka asli gehna hai” – education is a girl’s true ornament), the dangers of child labour and the modern, play-based learning methods used in today’s schools – along with the free books, uniforms and mid-day meals provided by the government. The play moved the villagers deeply; one man even declared on the spot, “Yes, from tomorrow itself I will send Babua back to school.” The lesson teaches us that education is every child’s right, and family, society and the government must work together to make this right a reality.

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