HSLC Guru

भगतिन मौसी – Class 7 Hindi Elective Question Answer | ASSEB | पल्लव भाग-2

ASSEB (असम राज्य माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) कक्षा 7 हिन्दी (ऐच्छिक) पल्लव भाग-2 के पाठ 13 “भगतिन मौसी” का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर यहाँ दिया गया है। यह पाठ एक नीतिपरक काव्य-कथा (पद्य रूप में लिखी कहानी) है जिसमें एक धूर्त बिल्ली स्वयं को भगतिन (साधु-संत) के रूप में प्रस्तुत करके भोले-भाले चूहों को धोखा देने का प्रयास करती है, परंतु एक बूढ़ा समझदार चूहा उसकी चाल को पहचान लेता है। यह पाठ हमें सिखाता है कि बाहरी वेशभूषा या मीठे शब्दों से धोखेबाज़ की पहचान नहीं होती – सतर्क रहना और सच्ची-झूठी बात में अंतर करना ही बुद्धिमानी है।

नीचे पाठ का परिचय (सारांश), शब्दार्थ तथा पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यास-प्रश्नों के विस्तृत उत्तर ASSEB पाठ्यक्रम के अनुसार दिए गए हैं, जो कक्षा 7 के विद्यार्थियों की परीक्षा-तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।


पाठ-परिचय (Summary)

“भगतिन मौसी” एक पद्यात्मक नीति-कथा है जिसमें कवि ने पशु-पात्रों के माध्यम से ढोंगियों और कपटी लोगों से बचने की शिक्षा दी है। कथा का मुख्य पात्र एक बिल्ली है, जो आजीवन सैकड़ों चूहों का शिकार करती आई है। एक दिन वह अपनी कुटिल योजना के तहत स्वयं को साधु-संन्यासिनी (भगतिन) के रूप में प्रस्तुत करती है। वह “राम नाम” लिखी चादर ओढ़ लेती है, माथे पर तिलक लगा लेती है, गले में तुलसी की माला पहन लेती है और मुख से राम-नाम का जाप करती है, ताकि चूहे उस पर विश्वास कर लें कि अब वह हिंसा छोड़ चुकी है।

बिल्ली बिलों के पास जाकर चूहों को मीठे स्वर में पुकारती है और कहती है कि वह अब “भगतिन मौसी” बन गई है, अब किसी का बुरा नहीं करेगी, सबसे प्रेमपूर्वक मिलेगी। कुछ छोटे चूहे उसकी चिकनी-चुपड़ी बातों में आ ही जाते कि तभी एक बूढ़ा अनुभवी चूहा बाहर निकलता है। वह बिल्ली के ढोंग को तुरंत पहचान लेता है और चूहों को सावधान करता है कि “जिसने आज तक हमारे सैकड़ों भाई-बहनों को खाया है, वह एक रात में संत कैसे बन गई?” वह कहता है कि शत्रु चाहे कितना ही धर्मात्मा क्यों न दिखे, उसका स्वभाव नहीं बदलता।

बिल्ली की सारी चाल उल्टी पड़ जाती है – चूहे बिल से बाहर ही नहीं निकलते। निराश और भूखी बिल्ली वहाँ से चली जाती है। पाठ का संदेश स्पष्ट है – ढोंगी, कपटी और शत्रु पर कभी विश्वास मत करो; उनके बाहरी वेश और मीठे शब्दों से नहीं, उनके पुराने कर्मों से उन्हें पहचानो। अनुभव और बुद्धिमानी ही जीवन में सच्चा बचाव है।


शब्दार्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
भगतिनसाधु-संन्यासिनी, भक्त स्त्री
मौसीमाँ की बहन
चालचालाकी, युक्ति, धोखा
ढोंगदिखावा, पाखंड
कपटछल, धोखा
तिलकमाथे पर लगाया जाने वाला धार्मिक चिह्न
तुलसी की मालातुलसी के मनकों से बनी माला
चादरओढ़ने का वस्त्र
राम नामभगवान राम का नाम
जापनाम-स्मरण, मंत्र दोहराना
बिलचूहों का घर, गड्ढा
शत्रुदुश्मन
धूर्तचालाक, कपटी
बूढ़ावृद्ध, अनुभवी
अनुभवीतजुर्बेकार, जानकार
सावधानसतर्क, होशियार
स्वभावआदत, प्रकृति
हिंसामारना, चोट पहुँचाना
संतसाधु, महात्मा
निराशहताश, दुखी
भूखीजिसने भोजन न किया हो
उल्टी पड़नाविफल होना
पहचान लेनाजान लेना
चिकनी-चुपड़ी बातेंमीठी और झूठी बातें
विश्वासभरोसा
पाखंडीढोंगी
शिकारआखेट, मारना
कुटिलटेढ़ी, धोखेबाज़
योजनाउपाय, युक्ति
आजीवनजीवन भर

अभ्यास (Question Answers)

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1। बिल्ली ने भगतिन का वेश क्यों बनाया?

उत्तरः बिल्ली ने भगतिन का वेश इसलिए बनाया क्योंकि वह चूहों को धोखा देकर आसानी से अपना शिकार बनाना चाहती थी। चूहे उससे डरकर बिल से बाहर नहीं निकलते थे, इसलिए उसने सोचा कि यदि वह स्वयं को साधु-संत के रूप में दिखाएगी और राम-नाम का जाप करेगी, तो चूहे उस पर विश्वास कर लेंगे और बेधड़क बाहर आ जाएँगे। तब वह उन्हें आसानी से पकड़कर खा सकेगी। यह उसकी कुटिल चाल थी।

प्रश्न 2। बिल्ली ने अपना रूप कैसे बदला?

उत्तरः बिल्ली ने अपना रूप इस प्रकार बदला – उसने “राम नाम” लिखी हुई चादर ओढ़ ली, माथे पर तिलक लगाया, गले में तुलसी की माला पहन ली और मुख से राम-नाम का जाप करने लगी। इस तरह उसने स्वयं को एक भक्त साधु-स्त्री (भगतिन) के समान दिखाने का प्रयास किया, ताकि कोई उसे हिंसक बिल्ली न समझे।

प्रश्न 3। बिल्ली चूहों के बिल के पास जाकर क्या कहती है?

उत्तरः बिल्ली चूहों के बिल के पास जाकर बहुत मीठे और प्रेमभरे स्वर में कहती है कि अब वह बदल गई है, अब वह “भगतिन मौसी” बन गई है। उसने हिंसा छोड़ दी है, अब वह राम-नाम जपती है। वह कहती है कि चूहे डरें नहीं, बाहर आकर उससे मिलें, क्योंकि अब वह उनकी मौसी है और किसी का बुरा नहीं करेगी।

प्रश्न 4। बूढ़े चूहे ने बिल्ली की बातों पर विश्वास क्यों नहीं किया?

उत्तरः बूढ़े चूहे ने बिल्ली की बातों पर विश्वास इसलिए नहीं किया क्योंकि वह अनुभवी और समझदार था। वह जानता था कि यह बिल्ली आजीवन सैकड़ों चूहों को खा चुकी है, उनकी जान की दुश्मन रही है। एक रात में किसी का स्वभाव नहीं बदलता। उसने समझ लिया कि यह केवल बिल्ली का ढोंग है, अंदर से वह अब भी हिंसक और कपटी है। इसलिए उसने अन्य चूहों को भी सावधान किया कि बाहर न निकलें।

प्रश्न 5। बूढ़े चूहे ने अन्य चूहों को क्या समझाया?

उत्तरः बूढ़े चूहे ने अन्य चूहों को समझाया कि यह बिल्ली हमारी पुरानी शत्रु है। इसने हमारे कई भाई-बहनों को खाया है। आज इसका साधु-वेश और मीठे वचन सब झूठ हैं – यह केवल हमें फँसाने के लिए नाटक कर रही है। शत्रु चाहे कितने भी अच्छे रूप में सामने आए, उसका असली स्वभाव कभी नहीं बदलता। इसलिए हमें इसकी बातों में नहीं आना चाहिए और बिल से बाहर नहीं निकलना चाहिए।

प्रश्न 6। अंत में बिल्ली का क्या हुआ?

उत्तरः अंत में बिल्ली की चाल पूरी तरह उल्टी पड़ गई। बूढ़े चूहे की चेतावनी के कारण कोई भी चूहा बिल से बाहर नहीं निकला। बहुत देर तक प्रतीक्षा करने के बाद भी जब उसे कोई शिकार नहीं मिला, तो वह निराश और भूखी होकर वहाँ से चली गई। इस प्रकार उसका ढोंग और छल असफल हो गया।

प्रश्न 7। इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तरः इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि –

  • शत्रु पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए, चाहे वह कितने ही अच्छे रूप में सामने आए।
  • ढोंगी और कपटी लोगों के मीठे वचनों में नहीं फँसना चाहिए।
  • बाहरी वेशभूषा देखकर किसी का चरित्र नहीं आँकना चाहिए।
  • अनुभव और बुद्धि से हर बात की परीक्षा करनी चाहिए।
  • बड़े-बूढ़ों की सलाह सुननी चाहिए, क्योंकि उनके पास जीवन का अनुभव होता है।
  • सतर्क रहना ही जीवन में सच्ची सुरक्षा है।

प्रश्न 8। “चली न उसकी चाल” – इस पंक्ति का क्या अर्थ है?

उत्तरः “चली न उसकी चाल” का अर्थ है – उसकी योजना/चालाकी सफल नहीं हुई। यहाँ “उसकी” से तात्पर्य बिल्ली से है। बिल्ली ने भगतिन का वेश बनाकर चूहों को धोखा देने की जो योजना बनाई थी, वह बूढ़े चूहे की समझदारी के कारण विफल हो गई। इसलिए कहा गया है कि उसकी चाल नहीं चली अर्थात उसका दाँव नहीं लगा।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 9। पाठ का शीर्षक “भगतिन मौसी” क्यों रखा गया है?

उत्तरः पाठ का शीर्षक “भगतिन मौसी” इसलिए रखा गया है क्योंकि बिल्ली स्वयं को चूहों के सामने “भगतिन मौसी” कहकर प्रस्तुत करती है। वह उन्हें यह विश्वास दिलाने का प्रयास करती है कि वह उनकी प्यारी मौसी है, जो अब साधु-संत बन चुकी है। इसी भगतिन मौसी के ढोंग के चारों ओर पूरी कथा घूमती है, इसलिए यही शीर्षक उपयुक्त है।

प्रश्न 10। बिल्ली को “धूर्त” क्यों कहा गया है?

उत्तरः बिल्ली को “धूर्त” इसलिए कहा गया है क्योंकि वह बहुत चालाक और कपटी है। वह सीधे चूहों का शिकार न करके धर्म और भक्ति का सहारा लेकर उन्हें धोखा देना चाहती है। साधु-वेश बनाकर मीठी बातें करना और भीतर से शिकार की योजना रखना – यह दोहरापन ही उसके धूर्त स्वभाव को दर्शाता है।

प्रश्न 11। बूढ़े चूहे के चरित्र की दो विशेषताएँ बताइए।

उत्तरः बूढ़े चूहे के चरित्र की दो प्रमुख विशेषताएँ ये हैं –

  1. अनुभवी और बुद्धिमान – उसने जीवन में बहुत कुछ देखा था, इसलिए वह बिल्ली के ढोंग को तुरंत पहचान गया।
  2. उत्तरदायी और सावधान – उसने केवल अपनी ही जान नहीं बचाई, बल्कि अन्य चूहों को भी समय पर सावधान करके उनकी रक्षा की।

प्रश्न 12। तुलसी की माला, तिलक और राम-नाम लिखी चादर का प्रयोग बिल्ली ने क्यों किया?

उत्तरः ये सब वस्तुएँ धार्मिक भक्तों और साधुओं की पहचान मानी जाती हैं। बिल्ली ने इन वस्तुओं का प्रयोग इसलिए किया ताकि वह सच्ची भगतिन (भक्त स्त्री) दिखाई दे और चूहे उसे पवित्र समझकर उस पर विश्वास कर लें। उसका उद्देश्य धर्म नहीं, बल्कि चूहों को धोखा देकर शिकार करना था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 13। “भगतिन मौसी” पाठ की कथा अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरः एक बिल्ली थी जो जीवन भर चूहों को मार-मारकर खाती आई थी। एक दिन उसने सोचा कि चूहे अब उसे देखकर बिल से बाहर नहीं निकलते, इसलिए कोई नई युक्ति निकालनी होगी। उसने स्वयं को साधु-संन्यासिनी (भगतिन) के रूप में सजाया – “राम नाम” लिखी चादर ओढ़ी, माथे पर तिलक लगाया, गले में तुलसी की माला पहनी और मुख से राम-नाम जपने लगी। फिर वह चूहों के बिल के पास जाकर बहुत मीठे स्वर में बोली – “बच्चो, मैं अब भगतिन मौसी बन गई हूँ। मैंने हिंसा छोड़ दी है। बाहर आओ, मुझसे मिलो।”

कुछ छोटे चूहे उसकी मीठी बातों में आने ही वाले थे कि एक बूढ़ा अनुभवी चूहा बाहर आया। उसने सबको रोककर कहा – “यह बिल्ली है, हमारी पुरानी शत्रु। इसने हमारे सैकड़ों भाई-बहनों को खाया है। एक रात में कोई संत नहीं बन जाता। यह सब इसका ढोंग है।” बूढ़े चूहे की बात सुनकर सभी चूहे बिल में ही रहे, कोई बाहर नहीं आया। बिल्ली बहुत देर तक प्रतीक्षा करती रही, परंतु जब उसकी चाल नहीं चली, तो वह भूखी और निराश होकर लौट गई। इस प्रकार बूढ़े चूहे की समझदारी से सभी चूहों की जान बच गई।

प्रश्न 14। इस पाठ से हमें ढोंगियों को पहचानने की क्या-क्या कसौटियाँ मिलती हैं?

उत्तरः इस पाठ से हमें ढोंगियों को पहचानने की कई कसौटियाँ मिलती हैं –

  • पुराने कर्मों को देखें – जिसने आज तक केवल बुरे काम किए हैं, उसका अचानक “बदल जाना” संदेहास्पद है।
  • शब्दों और कार्यों में अंतर देखें – ढोंगी मीठा बोलता है, परंतु उसका इरादा कुटिल होता है।
  • बाहरी वेशभूषा पर मत जाइए – तिलक, माला, धार्मिक वस्त्र किसी को भीतर से अच्छा नहीं बनाते।
  • बड़ों और अनुभवी लोगों की सलाह लें – उन्होंने जीवन में बहुत कुछ देखा होता है।
  • अति-मीठे शब्दों से सावधान रहें – अकारण की मीठी बातें अक्सर स्वार्थ छिपाती हैं।
  • शत्रु से दोस्ती में हमेशा सतर्क रहें – स्वभाव आसानी से नहीं बदलता।

व्याकरण-आधारित प्रश्न

प्रश्न 15। निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए –

शब्दविलोम
शत्रुमित्र
सत्यअसत्य
हिंसाअहिंसा
विश्वासअविश्वास
बूढ़ाजवान
अंदरबाहर
मीठाकड़वा
निराशआशान्वित
भूखातृप्त
सावधानअसावधान

प्रश्न 16। निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखिए –

शब्दपर्यायवाची
बिल्लीमार्जारी, बिडाल
चूहामूषक, मूस
शत्रुदुश्मन, रिपु, वैरी
धूर्तकपटी, चालाक, छली
संतसाधु, महात्मा, ऋषि
रामरघुपति, रघुनाथ, राघव
मालाहार, मणिमाल
हिंसाक्रूरता, अत्याचार

प्रश्न 17। निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखिए –

मुहावराअर्थ
चाल न चलनायोजना सफल न होना
ढोंग रचनादिखावा करना
आँख में धूल झोंकनाधोखा देना
चिकनी-चुपड़ी बातें करनामीठी झूठी बातें करना
बिल में दुबकनाडर के मारे छिपना
उल्टा पड़नाविफल होना

प्रश्न 18। निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थान भरिए –

  1. बिल्ली ने स्वयं को ________ के रूप में प्रस्तुत किया। (भगतिन)
  2. उसने माथे पर ________ लगाया। (तिलक)
  3. गले में ________ की माला पहनी। (तुलसी)
  4. ________ चूहा अनुभवी और बुद्धिमान था। (बूढ़ा)
  5. अंत में बिल्ली ________ और भूखी होकर लौट गई। (निराश)

प्रश्न 19। निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर चुनिए (बहुविकल्पीय प्रश्न) –

(क) बिल्ली ने स्वयं को क्या बताया?
(i) रानी   (ii) भगतिन मौसी   (iii) शिक्षिका   (iv) माली
उत्तरः (ii) भगतिन मौसी

(ख) बिल्ली ने माथे पर क्या लगाया?
(i) सिंदूर   (ii) काजल   (iii) तिलक   (iv) मेहँदी
उत्तरः (iii) तिलक

(ग) बिल्ली के ढोंग को किसने पहचाना?
(i) नन्हें चूहे ने   (ii) बूढ़े चूहे ने   (iii) चिड़िया ने   (iv) कुत्ते ने
उत्तरः (ii) बूढ़े चूहे ने

(घ) अंत में बिल्ली कैसी होकर लौटी?
(i) तृप्त   (ii) प्रसन्न   (iii) निराश और भूखी   (iv) क्रोधित
उत्तरः (iii) निराश और भूखी

(ङ) पाठ से क्या शिक्षा मिलती है?
(i) धोखेबाज़ पर विश्वास करो   (ii) ढोंगियों से सावधान रहो   (iii) बाहर मत निकलो   (iv) मीठी बातें सुनो
उत्तरः (ii) ढोंगियों से सावधान रहो

अतिरिक्त प्रश्न

प्रश्न 20। चूहे बिल से बाहर क्यों नहीं निकले?

उत्तरः चूहे बिल से बाहर इसलिए नहीं निकले क्योंकि बूढ़े चूहे ने उन्हें समय पर सावधान कर दिया था। उसने बताया कि बाहर खड़ी बिल्ली ही है, जो साधु-वेश में उन्हें फँसाने आई है। बूढ़े की समझदारी पर भरोसा करके सभी चूहे बिल के अंदर ही सुरक्षित रहे।

प्रश्न 21। यदि बूढ़ा चूहा वहाँ न होता तो क्या होता?

उत्तरः यदि बूढ़ा चूहा वहाँ न होता, तो बिल्ली की मीठी-मीठी बातों में आकर छोटे और भोले चूहे बिल से बाहर निकल आते। तब बिल्ली अपनी कुटिल योजना में सफल हो जाती और एक-एक करके सभी चूहों को मार डालती। बूढ़े चूहे के अनुभव ने ही सबकी जान बचाई।

प्रश्न 22। पाठ का मूल संदेश एक वाक्य में लिखिए।

उत्तरः पाठ का मूल संदेश यह है कि ढोंगी और कपटी शत्रु पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए – अनुभव और बुद्धिमानी से ही उनके छल को पहचाना और उससे बचा जा सकता है।

प्रश्न 23। बिल्ली और चूहे के बीच के संबंध पर पाँच पंक्तियाँ लिखिए।

उत्तरः बिल्ली और चूहा प्रकृति में एक-दूसरे के परम शत्रु हैं। बिल्ली चूहे का शिकार करके खाती है, इसलिए चूहा सदा बिल्ली से डरता है और बिल में छिपकर रहता है। यह संबंध हमेशा शिकारी और शिकार का होता है। बिल्ली चाहे कितना भी प्यार दिखाए, चूहे का स्वाभाविक डर उसके लिए जीवन-रक्षक होता है। इसलिए दोनों के बीच मित्रता संभव नहीं है।

प्रश्न 24। “स्वभाव कभी नहीं बदलता” – इस कथन की पाठ के आधार पर पुष्टि कीजिए।

उत्तरः पाठ में बिल्ली ने ऊपर से तो साधु-वेश धारण कर लिया, राम-नाम जपने लगी और मीठी बातें भी करने लगी, परंतु भीतर से वह वही हिंसक और स्वार्थी बिल्ली थी, जो चूहों को मारकर खाना चाहती थी। उसका उद्देश्य ही चूहों को धोखे से पकड़ना था। इससे यह स्पष्ट होता है कि किसी का मूल स्वभाव बाहरी वेश या कुछ शब्दों से नहीं बदलता। यही कारण है कि बूढ़े चूहे ने उस पर विश्वास नहीं किया और सभी चूहों की जान बच गई। अतः यह कथन पूर्णतः सही सिद्ध होता है।


Summary

“Bhagatin Mausi” is a moral verse-fable from ASSEB Class 7 Hindi Pallav Bhag-2 (Lesson 13) that teaches students to beware of hypocrites and disguised enemies. A cunning cat, who has hunted hundreds of mice all her life, dresses up as a religious devotee — wrapping a “Ram Naam” shawl, applying a tilak, wearing a tulsi garland, and chanting Ram’s name — to trick the mice into trusting her. She calls herself their “Bhagatin Mausi” (devout aunt) and invites them out of their burrow with sweet words. While some young mice are about to fall for her trap, a wise old mouse recognises her deception and warns the others that an enemy who has eaten so many of their kin cannot become a saint overnight; an outward show of piety cannot change one’s true nature. The mice stay safely inside, and the cat is forced to leave hungry and disappointed. The lesson teaches that one must never trust a deceiver based on appearances, that the advice of experienced elders is invaluable, and that wisdom and alertness are the best protection against hypocrisy and danger.

Leave a Comment