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अशोक का शस्त्र-त्याग – Class 7 Hindi Elective Question Answer | ASSEB | पल्लव भाग-2

ASSEB (Assam State Board of Secondary Education) कक्षा 7 हिंदी ऐच्छिक (Hindi Elective) की पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-2 के पाठ 12 “अशोक का शस्त्र-त्याग” का संपूर्ण प्रश्न-उत्तर समाधान यहाँ प्रस्तुत किया गया है। यह पाठ एक एकांकी (नाटक) के रूप में लिखा गया है, जिसमें मगध सम्राट अशोक के कलिंग युद्ध तथा उसके बाद के हृदय-परिवर्तन की मार्मिक कथा कही गई है। ASSEB SCERT पाठ्यक्रम के अनुसार सभी प्रश्नों के सरल भाषा में उत्तर, शब्दार्थ, अतिरिक्त प्रश्न तथा बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) नीचे दिए गए हैं।


पाठ-परिचय (Summary)

“अशोक का शस्त्र-त्याग” एक ऐतिहासिक एकांकी है जो मगध सम्राट अशोक के जीवन की उस महत्वपूर्ण घटना पर आधारित है, जिसने भारतीय इतिहास की दिशा बदल दी। मगध और कलिंग के बीच चार वर्षों से भयानक युद्ध चल रहा था। दोनों ओर के लाखों सैनिक मारे गए और लाखों घायल हुए, फिर भी मगध सम्राट अशोक कलिंग पर विजय प्राप्त नहीं कर सका था। अशोक इस लम्बे युद्ध और जन-हानि से बहुत चिंतित थे, परंतु अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार वे कलिंग को जीते बिना मगध लौटना नहीं चाहते थे।

कलिंग के महाराज ने युद्धभूमि में वीरगति प्राप्त की, परंतु इसके बाद भी कलिंग ने आत्मसमर्पण नहीं किया। महाराज की पुत्री राजकुमारी पद्मा ने युद्ध का भार अपने कंधों पर उठाया और अपनी जन्मभूमि की रक्षा के लिए स्वयं युद्धभूमि में उतर पड़ी। उसने अपनी सेना से प्रण लेने को कहा कि वे अपनी जननी जन्मभूमि को पराधीन होते देखने से पहले सदा के लिए आँखें बंद कर लेंगी। पुरुष भेष में पद्मा के नेतृत्व में स्त्रियों की एक विशाल शस्त्र-सज्जित सेना दुर्ग के फाटक से बाहर निकलकर अशोक की सेना के सामने आ खड़ी हुई।

पद्मा को साक्षात दुर्गा के रूप में युद्धभूमि में देखकर अशोक स्तब्ध रह गए। उन्होंने सोचा कि विजय के लिए वह स्त्रियों का वध नहीं कर सकते। तत्क्षण उन्होंने अपनी तलवार धरती पर फेंक दी और शस्त्र-त्याग की घोषणा कर दी। इसके पश्चात अशोक ने एक बौद्ध भिक्षु से अहिंसा की दीक्षा ली और बौद्ध धर्म स्वीकार किया। आगे चलकर उन्होंने अहिंसा, करुणा और शांति का संदेश देश-विदेश में फैलाया। यह पाठ हमें यह संदेश देता है कि सच्ची विजय शस्त्र से नहीं, बल्कि करुणा, अहिंसा और प्रेम से प्राप्त होती है।


शब्दार्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
शस्त्र-त्यागहथियार छोड़ देना
सम्राटबड़ा राजा, महाराजा
चिंतापरेशानी, सोच-विचार
युद्धभूमिलड़ाई का मैदान
वीरगतियुद्ध में मरना, शहीद होना
दुर्गकिला
फाटकबड़ा दरवाजा
सहसाएकाएक, अचानक
शस्त्र-सज्जितहथियारों से सजी हुई
विशालबहुत बड़ी
वीरांगनावीर स्त्री, बहादुर महिला
पुरुष भेषआदमी का वेश/पहनावा
चकितहैरान, आश्चर्यचकित
संचालननेतृत्व, परिचालन
फहरानालहराना, ऊँचा उठाना
पताकाझंडा, ध्वज
प्रणप्रतिज्ञा, वचन
जननी जन्मभूमिजन्म देने वाली मातृभूमि
पराधीनदूसरों के अधीन, गुलाम
अहिंसाहिंसा न करना, किसी को न मारना
दीक्षाउपदेश ग्रहण करना, गुरु से शिक्षा लेना
बौद्ध भिक्षुबुद्ध धर्म के साधु
लोहा लेनामुकाबला करना
वारआक्रमण, हमला
सदाव्रतनिरंतर दान, प्रसाद वितरण
साक्षातप्रत्यक्ष, सामने
तलवारएक प्रकार का धारदार शस्त्र
प्रतिज्ञादृढ़ संकल्प, वचन
हृदय-परिवर्तनमन का बदल जाना
करुणादया, सहानुभूति

अभ्यास (Question Answers)

1. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो

(क) मगध और कलिंग के बीच कितने सालों से युद्ध हो रहा था?

उत्तरः मगध और कलिंग के बीच चार सालों से युद्ध हो रहा था। इस लंबे युद्ध में दोनों ओर के लाखों सैनिक मारे गए और लाखों घायल हुए, परंतु तब भी मगध सम्राट अशोक कलिंग पर विजय प्राप्त नहीं कर पाए थे।

(ख) कलिंग के महाराज को युद्धभूमि में वीरगति प्राप्त होने के पश्चात युद्ध का भार किसने संभाला?

उत्तरः कलिंग के महाराज को युद्धभूमि में वीरगति प्राप्त होने के पश्चात उनकी पुत्री राजकुमारी पद्मा ने युद्ध का भार अपने कंधों पर संभाला। उसने पुरुष भेष धारण कर अपनी सेना का नेतृत्व किया।

(ग) राजकुमारी पद्मा ने अपनी सेना से कौन-सा प्रण करने को कहा?

उत्तरः राजकुमारी पद्मा ने अपनी सेना से यह प्रण करने को कहा कि वे अपनी जननी जन्मभूमि को पराधीन होते देखने से पहले अपनी आँखें सदा के लिए बंद कर लेंगी, अर्थात मातृभूमि की रक्षा के लिए वे अपने प्राणों का बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटेंगी।

(घ) राजा अशोक ने किससे अहिंसा की दीक्षा ली?

उत्तरः राजा अशोक ने एक बौद्ध भिक्षु से अहिंसा की दीक्षा ली। शस्त्र-त्याग के पश्चात उन्होंने बौद्ध धर्म स्वीकार किया और जीवनभर अहिंसा, करुणा तथा शांति के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

2. लघु उत्तरीय प्रश्न

(क) सम्राट अशोक की चिंता का मूल कारण क्या था?

उत्तरः सम्राट अशोक की चिंता का मूल कारण यह था कि चार साल से मगध और कलिंग के बीच भीषण युद्ध हो रहा था। इस युद्ध में दोनों ओर के लाखों लोग मारे जा चुके थे और लाखों घायल हो चुके थे, फिर भी मगध की सेना कलिंग को जीत नहीं पा रही थी। इतनी जन-हानि के बाद भी विजय न मिलने से अशोक का हृदय व्याकुल था।

(ख) दुर्ग के फाटक खुलने पर अशोक और उसकी सेना के चकित होने का क्या कारण था?

उत्तरः दुर्ग के फाटक खुलने पर अशोक और उसकी सेना ने देखा कि फाटक के बाहर से शस्त्र-सज्जित स्त्रियों की एक विशाल सेना उनकी ओर बढ़ती चली आ रही है। उस सेना के सबसे आगे पुरुष भेष में राजकुमारी पद्मा एक वीरांगना के रूप में चल रही थी। स्त्रियों की इतनी बड़ी सेना और उनकी वीरता देखकर अशोक तथा उनकी सेना चकित रह गई।

(ग) अशोक ने शस्त्र क्यों त्याग दिए?

उत्तरः युद्धभूमि में राजकुमारी पद्मा को अपनी विशाल स्त्री-सेना के साथ वीरांगना के रूप में सामने देखकर अशोक को ऐसा प्रतीत हुआ मानो साक्षात दुर्गा कलिंग की रक्षा करने के लिए स्वयं युद्धभूमि में उतर आई हों। अशोक ने सोचा कि विजय प्राप्त करने के लिए वे किसी स्त्री का वध नहीं कर सकते। यह सोचकर उन्होंने युद्ध करना अनुचित समझा और अपनी तलवार नीचे फेंककर शस्त्र-त्याग की घोषणा कर दी।

(घ) शस्त्र-त्याग के बाद अशोक के जीवन में क्या परिवर्तन हुआ?

उत्तरः शस्त्र-त्याग के पश्चात अशोक के जीवन में पूर्ण हृदय-परिवर्तन हुआ। उन्होंने एक बौद्ध भिक्षु से अहिंसा की दीक्षा ली और बौद्ध धर्म ग्रहण किया। इसके बाद उन्होंने हिंसा, युद्ध और रक्तपात का सदा के लिए त्याग कर दिया तथा प्रजा के हित, अहिंसा, करुणा और शांति के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए देश-विदेश में दूत भेजे।

(ङ) पद्मा का चरित्र-चित्रण अपने शब्दों में करो।

उत्तरः पद्मा कलिंग के महाराज की पुत्री थी। वह एक वीर, साहसी, देशभक्त और कर्तव्यपरायण स्त्री थी। पिता की वीरगति के बाद उसने स्वयं युद्ध का भार अपने कंधों पर उठाया। उसने पुरुष भेष धारण कर शस्त्र-सज्जित स्त्रियों की सेना का नेतृत्व किया। मातृभूमि की रक्षा के लिए वह प्राण देने को भी तैयार थी। उसका साहस और देशप्रेम देखकर अशोक जैसे महान सम्राट को भी शस्त्र त्यागने पर विवश होना पड़ा। पद्मा एक आदर्श वीरांगना का प्रतीक है।

3. रिक्त स्थान भरो

(क) अशोक ने ____________ की प्रतिज्ञा ली।

उत्तरः अहिंसा

(ख) कलिंग के दुर्ग के फाटक ____________ थे।

उत्तरः बंद

(ग) पद्मा ने अपने पिता की ____________ का बदला लेना चाहा।

उत्तरः वीरगति

(घ) बौद्ध भिक्षु ने अशोक को ____________ का पथ दिखाया।

उत्तरः अहिंसा

(ङ) मगध और कलिंग के बीच ____________ सालों से युद्ध चल रहा था।

उत्तरः चार

4. सत्य/असत्य कथन

(क) अशोक ने स्त्रियों पर हाथ उठाने की अनुमति दी। (सत्य/असत्य)

उत्तरः असत्य — अशोक स्त्रियों पर शस्त्र चलाना उचित नहीं समझते थे, इसी कारण उन्होंने शस्त्र-त्याग कर दिया।

(ख) अशोक का शस्त्र-त्याग कलिंग युद्ध के समय हुआ। (सत्य/असत्य)

उत्तरः सत्य — अशोक का शस्त्र-त्याग कलिंग युद्ध के दौरान, पद्मा की स्त्री-सेना को देखकर हुआ।

(ग) कलिंग के महाराज ने आत्मसमर्पण कर दिया था। (सत्य/असत्य)

उत्तरः असत्य — कलिंग के महाराज ने आत्मसमर्पण नहीं किया, बल्कि वीरतापूर्वक लड़ते हुए युद्धभूमि में वीरगति प्राप्त की।

(घ) अशोक ने बौद्ध भिक्षु से अहिंसा की दीक्षा ली। (सत्य/असत्य)

उत्तरः सत्य — शस्त्र-त्याग के बाद अशोक ने बौद्ध भिक्षु से अहिंसा की दीक्षा ली और बौद्ध धर्म स्वीकार किया।

5. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

(क) मगध और कलिंग के बीच कितने वर्षों से युद्ध हो रहा था?
(i) दो वर्ष    (ii) तीन वर्ष    (iii) चार वर्ष    (iv) पाँच वर्ष

उत्तरः (iii) चार वर्ष

(ख) कलिंग के महाराज की पुत्री का नाम क्या था?
(i) पद्मा    (ii) कमला    (iii) चित्रा    (iv) माया

उत्तरः (i) पद्मा

(ग) पद्मा ने युद्धभूमि में किस भेष में प्रवेश किया?
(i) स्त्री भेष    (ii) पुरुष भेष    (iii) साधु भेष    (iv) भिखारी भेष

उत्तरः (ii) पुरुष भेष

(घ) अशोक ने पद्मा को किसके रूप में देखा?
(i) सरस्वती    (ii) लक्ष्मी    (iii) दुर्गा    (iv) काली

उत्तरः (iii) दुर्गा

(ङ) अशोक ने किस धर्म को स्वीकार किया?
(i) हिंदू    (ii) जैन    (iii) बौद्ध    (iv) सिख

उत्तरः (iii) बौद्ध

(च) अशोक ने अंत में क्या त्याग किया?
(i) राज्य    (ii) शस्त्र    (iii) सिंहासन    (iv) परिवार

उत्तरः (ii) शस्त्र

(छ) अशोक किस वंश के सम्राट थे?
(i) गुप्त    (ii) मौर्य    (iii) मुगल    (iv) चोल

उत्तरः (ii) मौर्य

(ज) पद्मा ने अपनी सेना से कौन-सा प्रण लेने को कहा?
(i) कभी हार न मानने का    (ii) मातृभूमि की रक्षा हेतु प्राण देने का    (iii) शत्रु को क्षमा करने का    (iv) धन कमाने का

उत्तरः (ii) मातृभूमि की रक्षा हेतु प्राण देने का

6. अतिरिक्त प्रश्न (Additional Questions)

(क) “अशोक का शस्त्र-त्याग” पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तरः इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची विजय शस्त्र, हिंसा या रक्तपात से नहीं, बल्कि अहिंसा, करुणा, प्रेम और दया से प्राप्त होती है। युद्ध केवल विनाश ही लाता है, मानव-कल्याण नहीं। इसी कारण महान सम्राट अशोक ने भी शस्त्र-त्याग करके अहिंसा का मार्ग अपनाया। पाठ यह भी बताता है कि स्त्री-शक्ति किसी भी बड़ी से बड़ी शक्ति को झुका सकती है।

(ख) कलिंग युद्ध का अशोक के मन पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तरः कलिंग युद्ध में हुए भीषण रक्तपात, लाखों लोगों की मृत्यु तथा पद्मा के साहस ने अशोक के मन पर गहरा प्रभाव डाला। उन्हें युद्ध की निरर्थकता का बोध हुआ। उनके मन में करुणा और पश्चाताप का भाव जागृत हुआ, जिसके फलस्वरूप उन्होंने सदा के लिए शस्त्र त्याग दिए और अहिंसा का मार्ग अपनाया।

(ग) पद्मा को साक्षात दुर्गा कहना क्यों उचित है?

उत्तरः जिस प्रकार दुर्गा माँ ने अधर्म और अत्याचार के विरुद्ध शस्त्र उठाकर असुरों का संहार किया था, उसी प्रकार पद्मा ने भी अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए शस्त्र उठाए और स्त्रियों की सेना का नेतृत्व किया। उसके भीतर दुर्गा जैसा साहस, शक्ति और देशप्रेम था। इसी कारण अशोक को वह साक्षात दुर्गा के समान प्रतीत हुई।

(घ) इस एकांकी का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तरः इस एकांकी का मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि अहिंसा, प्रेम और करुणा शस्त्र से अधिक शक्तिशाली होते हैं। साथ ही यह स्त्री-शक्ति, देशप्रेम तथा बलिदान की भावना का संदेश देता है। यह पाठ बच्चों के मन में अहिंसा, साहस और मातृभूमि के प्रति प्रेम का भाव जगाता है।


Summary (English)

“Ashok ka Shastra-Tyag” (Ashoka’s Renunciation of Weapons) is Lesson 12 from the ASSEB Class 7 Hindi Elective textbook Pallav Bhag-2. The one-act play depicts the famous Kalinga war between Emperor Ashoka of Magadha and the kingdom of Kalinga. After four long years of war and the death of millions on both sides, Ashoka was still unable to defeat Kalinga. When the king of Kalinga died fighting on the battlefield, his brave daughter Princess Padma took up the responsibility of leading the army. Disguised as a man, she led a vast army of armed women out of the fort gates. Seeing Padma like the goddess Durga personified, defending her motherland, Ashoka was deeply moved. He realised he could not slay women for the sake of victory and threw down his sword, renouncing weapons forever. He then took initiation in non-violence (ahimsa) from a Buddhist monk and embraced Buddhism, devoting his life to peace, compassion and the welfare of his people. The lesson teaches students that true victory lies in love, compassion and non-violence rather than in war and bloodshed, and also celebrates the courage and patriotism of women.

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