ASSEB (असम राज्य माध्यमिक शिक्षा परिषद्) कक्षा 7 हिन्दी ऐच्छिक (Hindi Elective) पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-2 के पाठ 10 — स्वाधीनता संग्राम में पूर्वोत्तर की वीरांगनाएँ (गद्य) का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर एवं पाठ-परिचय यहाँ दिया गया है। यह पाठ भारत के स्वाधीनता संग्राम में पूर्वोत्तर भारत (असम, मणिपुर, नागालैंड आदि) की उन वीर महिलाओं की गाथा प्रस्तुत करता है, जिन्होंने अपने अदम्य साहस, बलिदान और देशभक्ति से अंग्रेज़ी शासन को चुनौती दी। रानी गाइदिन्ल्यू, कनकलता बरुवा, भोगेश्वरी फुकननी, पुष्पलता दास, चन्द्रप्रभा शइकीयानी, मङ्गरी ओराङ आदि वीरांगनाओं के बलिदान से यह पाठ पाठकों को राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देता है।
नीचे दिए गए प्रश्नोत्तर ASSEB पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किए गए हैं और कक्षा 7 के विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी में पूर्ण सहायता प्रदान करते हैं।
पाठ-परिचय (Summary)
“स्वाधीनता संग्राम में पूर्वोत्तर की वीरांगनाएँ” पाठ में लेखक ने भारत की आज़ादी की लड़ाई में पूर्वोत्तर भारत की उन वीर महिलाओं का परिचय दिया है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की स्वतन्त्रता में अमूल्य योगदान दिया। पूर्वोत्तर भारत की महिलाएँ केवल घर की चार-दीवारी तक सीमित नहीं रहीं, वरन् उन्होंने हाथ में तिरंगा लेकर अंग्रेज़ों की गोलियों का सामना किया।
पाठ में सबसे पहले मणिपुर की रानी गाइदिन्ल्यू का उल्लेख है, जिन्होंने मात्र तेरह वर्ष की आयु में अंग्रेज़ों के विरुद्ध ‘हेराका’ आन्दोलन में भाग लिया। केवल सोलह वर्ष की आयु में उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा हुई। पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें ‘नागा रानी’ की उपाधि दी। असम की कनकलता बरुवा ने 1942 के ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ में गोहपुर थाने पर तिरंगा फहराते हुए अंग्रेज़ों की गोली खाकर शहादत दी। उस समय वह केवल सत्रह वर्ष की थीं। भोगेश्वरी फुकननी ने भी बरहमपुर में अंग्रेज़ों के विरुद्ध तिरंगा फहराते हुए अपने प्राण त्यागे।
इसके अतिरिक्त चन्द्रप्रभा शइकीयानी, पुष्पलता दास, मङ्गरी ओराङ, नांगेली आदि वीरांगनाओं ने भी असहयोग आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्दोलन तथा भारत छोड़ो आन्दोलन में सक्रिय भाग लेकर अद्वितीय वीरता का परिचय दिया। यह पाठ हमें सिखाता है कि नारी-शक्ति किसी से कम नहीं है तथा देश के लिए बलिदान देने में पूर्वोत्तर की वीरांगनाओं का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। ये वीरांगनाएँ आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
शब्दार्थ (Vocabulary)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| स्वाधीनता | आज़ादी, स्वतंत्रता |
| संग्राम | युद्ध, लड़ाई |
| वीरांगना | वीर स्त्री, साहसी नारी |
| पूर्वोत्तर | उत्तर-पूर्व दिशा का क्षेत्र |
| बलिदान | अपने प्राणों की आहुति |
| अदम्य | जिसे दबाया न जा सके |
| शहादत | शहीद होने की अवस्था |
| आजीवन | जीवनभर |
| कारावास | जेल की सज़ा |
| तिरंगा | भारत का राष्ट्रीय ध्वज |
| आन्दोलन | संगठित प्रयास, अभियान |
| असहयोग | सहयोग न करना |
| सविनय अवज्ञा | विनयपूर्वक कानून न मानना |
| शोषण | अनुचित लाभ उठाना |
| अत्याचार | अन्याय, ज़ुल्म |
| देशभक्ति | देश के प्रति प्रेम |
| राष्ट्रप्रेम | राष्ट्र के प्रति अनुराग |
| स्मरणीय | याद रखने योग्य |
| आहुति | बलिदान, समर्पण |
| नारी-शक्ति | स्त्रियों की शक्ति |
| उपाधि | पदवी, सम्मान-सूचक नाम |
| प्रेरणा | उत्साह जगाने वाली शक्ति |
| अमूल्य | जिसका मूल्य न आँका जा सके |
| अद्वितीय | जिसके समान दूसरा न हो |
अभ्यास (Question Answers)
पाठ से (Textbook Questions)
प्रश्न 1. इस पाठ का नाम क्या है?
उत्तर: इस पाठ का नाम ‘स्वाधीनता संग्राम में पूर्वोत्तर की वीरांगनाएँ’ है।
प्रश्न 2. इस पाठ में किनके बारे में बताया गया है?
उत्तर: इस पाठ में पूर्वोत्तर भारत की उन वीरांगनाओं के बारे में बताया गया है जिन्होंने भारत के स्वाधीनता संग्राम में बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इनमें रानी गाइदिन्ल्यू, कनकलता बरुवा, भोगेश्वरी फुकननी, चन्द्रप्रभा शइकीयानी, पुष्पलता दास, मङ्गरी ओराङ आदि प्रमुख हैं।
प्रश्न 3. रानी गाइदिन्ल्यू कौन थीं?
उत्तर: रानी गाइदिन्ल्यू मणिपुर की एक वीर नागा महिला थीं। उन्होंने अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध ‘हेराका’ आन्दोलन का नेतृत्व किया और मात्र तेरह वर्ष की आयु में स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़ीं। पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें ‘नागा रानी’ की उपाधि दी थी।
प्रश्न 4. रानी गाइदिन्ल्यू को कितने वर्ष की आयु में आजीवन कारावास की सज़ा हुई थी?
उत्तर: रानी गाइदिन्ल्यू को मात्र सोलह वर्ष की आयु में अंग्रेज़ी सरकार ने आजीवन कारावास की सज़ा दी थी।
प्रश्न 5. रानी गाइदिन्ल्यू को ‘नागा रानी’ की उपाधि किसने दी थी?
उत्तर: रानी गाइदिन्ल्यू को ‘नागा रानी’ की उपाधि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने दी थी।
प्रश्न 6. कनकलता बरुवा कौन थीं?
उत्तर: कनकलता बरुवा असम के गोहपुर की एक वीर बालिका थीं, जिन्होंने 1942 के ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ में भाग लेते हुए गोहपुर थाने पर तिरंगा फहराने का प्रयास किया। अंग्रेज़ी पुलिस ने उन पर गोली चलाई और तिरंगा थामे हुए ही वे शहीद हो गईं। उस समय उनकी आयु केवल सत्रह वर्ष थी।
प्रश्न 7. कनकलता बरुवा कब और कहाँ शहीद हुई थीं?
उत्तर: कनकलता बरुवा 20 सितम्बर 1942 को असम के गोहपुर थाने के सामने तिरंगा फहराते हुए अंग्रेज़ी पुलिस की गोली से शहीद हुई थीं।
प्रश्न 8. भोगेश्वरी फुकननी कौन थीं?
उत्तर: भोगेश्वरी फुकननी असम की एक वीर महिला थीं, जिन्होंने भारत छोड़ो आन्दोलन में सक्रिय भाग लिया। नगाँव ज़िले के बरहमपुर में अंग्रेज़ों के विरुद्ध तिरंगा फहराते हुए वे गोली खाकर शहीद हो गईं।
प्रश्न 9. चन्द्रप्रभा शइकीयानी का स्वाधीनता संग्राम में क्या योगदान था?
उत्तर: चन्द्रप्रभा शइकीयानी असम की प्रसिद्ध समाज-सुधारक एवं स्वाधीनता-सेनानी थीं। उन्होंने महिलाओं को संगठित कर असहयोग आन्दोलन एवं सविनय अवज्ञा आन्दोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया तथा ‘असम प्रदेशिक महिला समिति’ की स्थापना की। उन्होंने नारी-शिक्षा एवं नारी-जागरण के क्षेत्र में भी महान कार्य किया।
प्रश्न 10. पुष्पलता दास के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर: पुष्पलता दास असम की एक प्रमुख स्वाधीनता-सेनानी थीं। उन्होंने ‘मृत्युबाहिनी’ (Death Squad) नामक संगठन का नेतृत्व किया तथा भारत छोड़ो आन्दोलन में सक्रिय भाग लिया। उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। स्वतंत्रता के बाद वे राज्यसभा की सदस्य भी बनीं और ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित हुईं।
प्रश्न 11. मङ्गरी ओराङ कौन थीं?
उत्तर: मङ्गरी ओराङ असम के चाय-बागान की एक वीर आदिवासी महिला थीं। उन्होंने अंग्रेज़ों के अत्याचार एवं चाय-बागान मज़दूरों के शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाई और अंग्रेज़ी पुलिस की गोली खाकर शहीद हो गईं। उन्हें ‘मलती मेम’ के नाम से भी जाना जाता है।
प्रश्न 12. पूर्वोत्तर की वीरांगनाओं ने स्वाधीनता संग्राम में किन-किन आन्दोलनों में भाग लिया?
उत्तर: पूर्वोत्तर की वीरांगनाओं ने मुख्य रूप से इन आन्दोलनों में सक्रिय भाग लिया —
- असहयोग आन्दोलन (1920-22)
- सविनय अवज्ञा आन्दोलन (1930-34)
- भारत छोड़ो आन्दोलन (1942)
- हेराका आन्दोलन (नागा-क्षेत्र)
- चाय-बागान मज़दूर आन्दोलन
प्रश्न 13. इस पाठ से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर: इस पाठ से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि देश के लिए बलिदान देने में नारी किसी से कम नहीं है। पूर्वोत्तर की वीरांगनाओं ने अपने अदम्य साहस, त्याग और देशभक्ति से सिद्ध कर दिया कि नारी-शक्ति राष्ट्र-निर्माण की आधारशिला है। हमें भी अपने देश से प्रेम करना चाहिए तथा इन वीरांगनाओं के आदर्शों पर चलते हुए देश की एकता एवं अखण्डता की रक्षा करनी चाहिए।
रिक्त-स्थान पूर्ति (Fill in the Blanks)
प्रश्न 14. निम्नलिखित रिक्त-स्थानों की पूर्ति कीजिए:
- रानी गाइदिन्ल्यू को ‘नागा रानी’ की उपाधि पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने दी थी।
- कनकलता बरुवा गोहपुर थाने पर तिरंगा फहराते हुए शहीद हुई थीं।
- भोगेश्वरी फुकननी बरहमपुर में अंग्रेज़ों की गोली से शहीद हुईं।
- ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ सन् 1942 ई. में आरम्भ हुआ था।
- पुष्पलता दास ने मृत्युबाहिनी नामक संगठन का नेतृत्व किया।
- रानी गाइदिन्ल्यू ने हेराका आन्दोलन का नेतृत्व किया।
सत्य/असत्य (True or False)
प्रश्न 15. निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य, लिखिए:
- कनकलता बरुवा असम की वीरांगना थीं। — सत्य
- रानी गाइदिन्ल्यू नागालैंड की रानी थीं। — असत्य (वे मणिपुर की नागा वीरांगना थीं)
- भोगेश्वरी फुकननी बरहमपुर में शहीद हुईं। — सत्य
- पुष्पलता दास को ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया गया। — सत्य
- मङ्गरी ओराङ चाय-बागान की मज़दूर थीं। — सत्य
संक्षिप्त उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
प्रश्न 16. कनकलता बरुवा का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर: कनकलता बरुवा का जन्म असम के शोणितपुर ज़िले के बरङाबाड़ी गाँव में 22 दिसम्बर 1924 को हुआ था।
प्रश्न 17. कनकलता बरुवा शहीद होते समय किस संगठन से जुड़ी थीं?
उत्तर: कनकलता बरुवा शहीद होते समय ‘मृत्युबाहिनी’ (Death Squad) नामक क्रांतिकारी संगठन की सदस्या थीं, जिसका गठन गोहपुर क्षेत्र में भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान किया गया था।
प्रश्न 18. रानी गाइदिन्ल्यू को कब रिहा किया गया?
उत्तर: रानी गाइदिन्ल्यू को 14 वर्ष जेल में रहने के बाद सन् 1947 में भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् रिहा किया गया।
प्रश्न 19. ‘हेराका’ आन्दोलन क्या था?
उत्तर: ‘हेराका’ आन्दोलन नागा क्षेत्रों में चलाया गया एक सामाजिक-धार्मिक एवं राजनीतिक आन्दोलन था, जिसका नेतृत्व जादोनांग और बाद में रानी गाइदिन्ल्यू ने किया। इसका उद्देश्य अंग्रेज़ी शासन को समाप्त कर नागा-संस्कृति की रक्षा एवं स्वशासन की स्थापना करना था।
प्रश्न 20. पाठ में वर्णित किस वीरांगना ने नारी-शिक्षा के क्षेत्र में भी कार्य किया?
उत्तर: चन्द्रप्रभा शइकीयानी ने स्वाधीनता संग्राम के साथ-साथ नारी-शिक्षा एवं नारी-जागरण के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण कार्य किया तथा ‘असम प्रदेशिक महिला समिति’ की स्थापना की।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्रश्न 21. कनकलता बरुवा की शहादत का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर: 20 सितम्बर 1942 को असम के गोहपुर थाने पर तिरंगा फहराने के लिए ‘मृत्युबाहिनी’ के सदस्यों ने जुलूस निकाला। इस जुलूस का नेतृत्व कनकलता बरुवा कर रही थीं। उन्होंने हाथ में तिरंगा थामे थाने की ओर बढ़ते हुए “वन्दे मातरम्” का उद्घोष किया। अंग्रेज़ी पुलिस ने उन्हें रुकने का आदेश दिया, परन्तु उन्होंने आगे बढ़ना बन्द नहीं किया। तब पुलिस ने उन पर गोली चला दी और कनकलता तिरंगा थामे हुए ही धरती पर गिर पड़ीं। उनके बाद मुकुन्द काकती ने तिरंगा उठाया, वे भी शहीद हुए। इस प्रकार सत्रह वर्ष की कनकलता ने देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर अमरत्व प्राप्त किया।
प्रश्न 22. रानी गाइदिन्ल्यू के जीवन एवं संघर्ष पर एक संक्षिप्त निबन्ध लिखिए।
उत्तर: रानी गाइदिन्ल्यू का जन्म 26 जनवरी 1915 को मणिपुर के तामेङलोङ ज़िले के नुङकाओ गाँव में हुआ था। तेरह वर्ष की आयु में वे अपने चचेरे भाई जादोनांग के नेतृत्व वाले ‘हेराका’ आन्दोलन से जुड़ीं। जादोनांग की फाँसी के बाद आन्दोलन का नेतृत्व उन्होंने स्वयं संभाला। उन्होंने नागा लोगों को अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध संगठित किया तथा कर देने से इनकार करने का आह्वान किया। 1932 में उन्हें गिरफ्तार किया गया और 1933 में सोलह वर्ष की आयु में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई। पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें ‘नागा रानी’ की उपाधि दी। 1947 में देश की स्वतंत्रता के बाद उन्हें रिहा किया गया। भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्मभूषण’ एवं ‘विवेकानन्द सेवा सम्मान’ से सम्मानित किया।
प्रश्न 23. पूर्वोत्तर की वीरांगनाओं के योगदान का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर: पूर्वोत्तर भारत की वीरांगनाओं ने भारत के स्वाधीनता संग्राम में अद्वितीय योगदान दिया। चाहे वह मणिपुर की रानी गाइदिन्ल्यू हों या असम की कनकलता बरुवा, भोगेश्वरी फुकननी, चन्द्रप्रभा शइकीयानी, पुष्पलता दास या चाय-बागान की मज़दूर मङ्गरी ओराङ — प्रत्येक ने अपने-अपने स्तर पर अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया। इन्होंने न केवल अपने प्राणों की आहुति दी, अपितु महिलाओं को भी संगठित कर उन्हें राष्ट्र-निर्माण की धारा से जोड़ा। इनका त्याग, साहस एवं देशभक्ति आज भी हमारे लिए प्रेरणा-स्रोत है। यदि इन वीरांगनाओं का योगदान न होता तो स्वाधीनता-संग्राम का इतिहास अधूरा रह जाता।
भाषा-अध्ययन (Grammar / Language Study)
प्रश्न 24. निम्नलिखित शब्दों के विलोम (विपरीतार्थक) शब्द लिखिए:
| शब्द | विलोम |
|---|---|
| स्वाधीनता | पराधीनता |
| वीर | कायर |
| जय | पराजय |
| न्याय | अन्याय |
| शोषण | पोषण |
| स्मरणीय | विस्मरणीय |
प्रश्न 25. निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखिए:
| शब्द | पर्यायवाची |
|---|---|
| वीरांगना | वीर नारी, साहसी स्त्री, बहादुर महिला |
| संग्राम | युद्ध, लड़ाई, समर |
| तिरंगा | राष्ट्रध्वज, ध्वज, झंडा |
| देश | राष्ट्र, मुल्क, वतन |
| आहुति | बलिदान, समर्पण, त्याग |
| प्रेरणा | उत्साह, स्फूर्ति, प्रोत्साहन |
प्रश्न 26. निम्नलिखित शब्दों से वाक्य बनाइए:
- स्वाधीनता — भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वाधीनता मिली।
- वीरांगना — कनकलता बरुवा असम की वीरांगना थीं।
- तिरंगा — हमें अपने तिरंगे का सम्मान करना चाहिए।
- बलिदान — देश के लिए बलिदान देने वाले सदा अमर रहते हैं।
- प्रेरणा — महान व्यक्तियों के जीवन से हमें प्रेरणा मिलती है।
Summary (English)
This ASSEB Class 7 Hindi Elective (पल्लव भाग-2) Lesson 10, “Swadhinata Sangram Mein Purvottar Ki Veeranganaen” (Women Heroes of Northeast India in the Freedom Struggle), introduces students to the brave women of Northeast India who sacrificed their lives for India’s independence. Among them, Rani Gaidinliu of Manipur led the Heraka Movement against the British and was sentenced to life imprisonment at the age of sixteen; Pandit Jawaharlal Nehru honoured her with the title “Nagaa Rani”. Kanaklata Baruah of Assam was martyred at seventeen while hoisting the tricolour at Gohpur police station during the 1942 Quit India Movement. Bhogeswari Phukanani embraced martyrdom at Berhampur, while Chandraprabha Saikiani, Pushpalata Das and Mangri Orang each contributed through movements like Non-Cooperation, Civil Disobedience, Quit India and the tea-garden labour struggles. The lesson celebrates these heroines as eternal symbols of courage, patriotism and women’s power, inspiring readers to love and serve the nation.