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मैं सबसे छोटी होऊँ – Class 6 Hindi Elective Question Answer | ASSEB | पल्लव भाग-1

ASSEB Class 6 Hindi (Elective) पल्लव भाग-1 का पद्य 14 “मैं सबसे छोटी होऊँ” छायावाद के प्रमुख कवि सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित एक मधुर बाल-कविता है। इस कविता में एक छोटी बालिका अपनी माँ के प्रति अपनी अटूट ममता, स्नेह और निर्भरता को व्यक्त करती है। वह सदा अपनी माँ के साथ रहना चाहती है — माँ का आँचल पकड़े-पकड़े फूल चुनना, माँ की गोद में सिर रखकर कहानियाँ सुनना और माँ के हाथों से ही खाना चाहती है। बालिका को बड़ा होने की कोई चाह नहीं है क्योंकि वह जानती है कि बड़े होने पर माँ का यह अनमोल साथ छूट जाएगा। यह कविता माँ-बेटी के पवित्र रिश्ते और बचपन की मासूमियत का सुंदर चित्रण है।


कविता (Poem Text)

मैं सबसे छोटी होऊँ,
तेरी गोदी में सोऊँ,
तेरा अंचल पकड़-पकड़कर
फिरूँ सदा माँ! तेरे साथ,
कभी न छोड़ूँ तेरा हाथ।

बढ़ूँ इतनी ही माँ! मैं
दिन भर चूमूँ तुझे, गालों पर,
हाथों से बस तुझको थामे,
आँख मूँद कर तेरे आगे
घुटनों के बल बैठी जाऊँ,
तेरे ही पल्ले में
मुँह को छिपा-छिपाकर
मीठी-मीठी बातें कर लूँ,
हँस-हँसकर लोटूँ धरती पर।

तू मुझको चूमे ले-लेकर,
तेरी कोमल बाँहों में
हँस-हँसकर खाऊँ कौर तेरे हाथों से,
उठा-उठाकर एक एक कौर,
निज हाथों से माँ! मुझको खिला,
मेरे मुँह में तू कौर डाल,
मेरे माथे पर हाथ फेर,
मेरे प्यारे नाम पुकार,
लेकर मुझको गोद, मातृ!
हाँ, ले-ले मेरी बलैयाँ।

हाँ, माँ! बड़ी न होऊँ मैं,
बड़े बनेंगे काम बड़े,
तब माँ तुझसे कौन कहेगा —
“माँ, मेरे जूड़े में फूल गूँथ दे,
माँ, मेरे माथे पर बेंदी सजा दे,
माँ, मेरे हाथों में मेहँदी रचा दे।”

नहीं चाहती बढ़ना मैं,
नहीं चाहती पढ़ना मैं,
तेरे पास रहूँ, माँ!
मैं सबसे छोटी होऊँ,
तेरी गोदी में सोऊँ।


पाठ-परिचय (Summary)

“मैं सबसे छोटी होऊँ” छायावाद के प्रमुख कवि सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित एक हृदयस्पर्शी बाल-कविता है। इस कविता में एक नन्हीं बालिका अपनी माँ से यह कामना करती है कि वह सदा अपने परिवार की सबसे छोटी सदस्य बनी रहे। वह चाहती है कि वह सदैव माँ की गोद में सोए, माँ का आँचल पकड़कर उसके साथ-साथ घूमे और कभी भी माँ का हाथ न छोड़े। बालिका के लिए माँ के साथ बिताए हर पल — गोद में बैठना, गालों पर चुम्बन लेना, माँ के हाथों से खाना खाना, माँ की कहानियाँ सुनना — संसार का सबसे बड़ा सुख है। वह अपनी माँ के पल्लू में मुँह छिपाकर मीठी-मीठी बातें करना और हँस-हँसकर धरती पर लोटना चाहती है।

बालिका बड़ी होना नहीं चाहती क्योंकि वह जानती है कि बड़े होने पर बड़े-बड़े दायित्व आ जाएँगे और माँ का यह स्नेहपूर्ण साथ धीरे-धीरे छूटता चला जाएगा। बड़ी होने पर वह अपनी माँ से यह नहीं कह पाएगी कि — “माँ, मेरे जूड़े में फूल गूँथ दे; माँ, मेरे माथे पर बेंदी सजा दे; माँ, मेरे हाथों में मेहँदी रचा दे।” यही कारण है कि वह न बड़ी होना चाहती है, न पढ़ना चाहती है — वह तो बस माँ के पास, माँ की गोद में, सदा छोटी बनी रहना चाहती है। यह कविता माँ-संतान के पावन रिश्ते, बचपन की मासूमियत और मातृ-स्नेह की अद्भुत भावनाओं का सुंदर चित्रण है।


कवि-परिचय (About the Poet)

सुमित्रानंदन पंत (20 मई 1900 – 28 दिसंबर 1977) हिंदी साहित्य के छायावाद युग के चार प्रमुख कवियों — जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, महादेवी वर्मा और सुमित्रानंदन पंत — में से एक हैं। उनका जन्म उत्तराखंड के कौसानी (अल्मोड़ा) नामक रमणीक पर्वतीय स्थल पर हुआ। प्रकृति-सौंदर्य के अद्वितीय चित्रण के कारण उन्हें “प्रकृति का सुकुमार कवि” कहा जाता है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं — वीणा, पल्लव, गुंजन, ग्राम्या, युगांत, चिदंबरा, लोकायतन आदि। ‘चिदंबरा’ काव्य-संग्रह के लिए उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला, ‘कला और बूढ़ा चाँद’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार और भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया था।


शब्दार्थ

शब्दअर्थ
छोटीआयु में छोटी, नन्हीं (Little, youngest)
गोदीगोद, अंक (Lap)
अंचल / पल्लासाड़ी का छोर (End of saree, hem)
सदाहमेशा (Always)
दिन भरपूरा दिन (All day long)
कौरनिवाला, ग्रास (Morsel of food)
निजअपना (One’s own)
थामेपकड़े हुए (Holding)
घुटनों के बलघुटने टेककर (On knees)
बलैयाँ लेनान्योछावर होना, स्नेह में आरती उतारना (To express affection)
मातृमाता, माँ (Mother)
कोमलनरम, मुलायम (Soft, tender)
बाँहभुजा, हाथ (Arm)
लोटनाज़मीन पर हँसते-खेलते बार-बार पलटना (To roll)
जूड़ास्त्रियों का बालों का जूड़ा (Hair bun)
गूँथनापिरोना, जूड़े में लगाना (To weave/braid)
बेंदी / बिंदीमाथे पर लगाने वाली टिकली (Forehead mark, bindi)
मेहँदीहाथों पर लगाने वाली लाल लाली देने वाली बूटी (Henna)
रचानालगाना, सजाना (To apply/decorate)
पुकारनाबुलाना, नाम लेना (To call)
माथाललाट (Forehead)
फेरना (हाथ)प्यार से सहलाना (To caress)
मूँदनाबंद करना (To close)
पल्ला / पल्लेआँचल का छोर (End of garment)
छिपानालुकाना, ढकना (To hide)

अभ्यास (Question Answers)

अभ्यास-माला : पाठ से प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1: कविता की बालिका सबसे छोटी क्यों होना चाहती है?

उत्तरः कविता की बालिका सबसे छोटी इसलिए होना चाहती है क्योंकि छोटे रहने पर ही माँ का अधिक स्नेह, दुलार और साथ मिलता है। छोटे रहने पर ही वह माँ की गोद में सो सकती है, माँ का आँचल पकड़कर उसके साथ-साथ घूम सकती है, माँ के हाथों से खाना खा सकती है तथा माँ से अपनी प्यारी-प्यारी ज़िदें मनवा सकती है। बड़ी हो जाने पर बड़े-बड़े दायित्व आ जाते हैं और माँ का यह अनमोल साथ छूट जाता है। इसी कारण बालिका सदा सबसे छोटी बनी रहना चाहती है।

प्रश्न 2: बालिका माँ के साथ क्या-क्या करना चाहती है?

उत्तरः बालिका माँ के साथ निम्नलिखित कार्य करना चाहती है —

  • वह सदा माँ की गोद में सोना चाहती है।
  • माँ का आँचल पकड़कर सदा उसके साथ-साथ चलना-फिरना चाहती है।
  • दिनभर माँ के गालों पर चुम्बन लेना चाहती है।
  • माँ की कोमल बाँहों में बैठकर उसके हाथों से कौर खाना चाहती है।
  • माँ के पल्ले में मुँह छिपाकर मीठी-मीठी बातें करना चाहती है।
  • हँस-हँसकर धरती पर लोटना चाहती है।
  • माँ से जूड़े में फूल गुँथवाना, माथे पर बिंदी सजवाना और हाथों पर मेहँदी रचवाना चाहती है।
  • माँ से अपना नाम सुनना और माथे पर माँ का स्नेहिल हाथ फिराना चाहती है।

प्रश्न 3: बालिका बड़ी क्यों नहीं होना चाहती?

उत्तरः बालिका बड़ी इसलिए नहीं होना चाहती क्योंकि बड़े होने पर बड़े-बड़े काम और दायित्व आ जाएँगे। बड़े होने पर माँ का स्नेहपूर्ण साथ धीरे-धीरे छूट जाता है। बड़ी होने पर वह अपनी माँ से यह नहीं कह पाएगी कि — “माँ, मेरे जूड़े में फूल गूँथ दे; माँ, मेरे माथे पर बेंदी सजा दे; माँ, मेरे हाथों में मेहँदी रचा दे।” इन्हीं बाल-सुलभ इच्छाओं को बनाए रखने के लिए वह सदा छोटी बनी रहना चाहती है।

प्रश्न 4: “बड़े बनेंगे काम बड़े” — इस पंक्ति का क्या अर्थ है?

उत्तरः इस पंक्ति का अर्थ है कि बड़े होने पर मनुष्य को बड़े-बड़े काम-काज और जिम्मेदारियाँ निभानी पड़ती हैं। बड़े होकर पढ़ाई-लिखाई, घर-गृहस्थी, नौकरी आदि अनेक उत्तरदायित्व सिर पर आ जाते हैं। इन कारणों से वह बच्चों जैसी मासूम इच्छाएँ माँ से नहीं कर पाती। बालिका इसी कारण बड़ी नहीं होना चाहती क्योंकि बड़े कामों के बोझ में माँ का साथ और बचपन की मीठी ज़िदें सब छूट जाती हैं।

प्रश्न 5: कविता में बालिका माँ से कौन-कौन से शृंगार करवाना चाहती है?

उत्तरः कविता में बालिका अपनी माँ से तीन प्रकार के शृंगार करवाना चाहती है —

  • माँ उसके जूड़े में फूल गूँथ दे।
  • माँ उसके माथे पर बेंदी (बिंदी) सजा दे।
  • माँ उसके हाथों में मेहँदी रचा दे।

ये तीनों ही पारंपरिक भारतीय शृंगार हैं जो माँ के स्नेहपूर्ण हाथों से करवाने में बच्चों को विशेष आनंद आता है।

प्रश्न 6: “नहीं चाहती बढ़ना मैं, नहीं चाहती पढ़ना मैं” — बालिका ऐसा क्यों कहती है?

उत्तरः बालिका ऐसा इसलिए कहती है क्योंकि वह जानती है कि बड़े होने और पढ़ने-लिखने के बाद उसका माँ से दूर रहना तय है। पढ़ाई-लिखाई के लिए स्कूल जाना पड़ता है, बड़े होने पर घर-गृहस्थी सँभालनी पड़ती है, और इन कारणों से माँ का साथ छूट जाता है। बालिका को माँ का साथ इतना प्यारा है कि वह उसके लिए बढ़ना और पढ़ना दोनों छोड़ने को तैयार है। यह उसके बाल-मन की मासूमियत और माँ के प्रति अटूट प्रेम को व्यक्त करता है।

प्रश्न 7: इस कविता में माँ-बेटी के किस संबंध का चित्रण है?

उत्तरः इस कविता में माँ-बेटी के अत्यंत पवित्र, स्नेहपूर्ण और भावुक संबंध का चित्रण है। बेटी के लिए माँ ही उसका सम्पूर्ण संसार है — वह माँ की गोद में सुख पाती है, माँ के हाथों से खाने में आनंद पाती है, माँ के स्पर्श में संरक्षण अनुभव करती है। बेटी अपनी माँ से एक पल भी अलग नहीं होना चाहती। यह कविता माँ-संतान के अटूट प्रेम, ममता, निर्भरता और बचपन की कोमल भावनाओं का अद्भुत चित्र प्रस्तुत करती है।

प्रश्न 8: इस कविता के कवि कौन हैं? उनका संक्षिप्त परिचय दो।

उत्तरः इस कविता के कवि सुमित्रानंदन पंत हैं। उनका जन्म 20 मई 1900 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के कौसानी नामक पर्वतीय गाँव में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के छायावाद-युग के चार प्रमुख कवियों में से एक हैं। उन्हें “प्रकृति का सुकुमार कवि” कहा जाता है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं — वीणा, पल्लव, गुंजन, ग्राम्या, युगांत, लोकायतन और चिदंबरा। ‘चिदंबरा’ काव्य-संग्रह पर उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार और ‘कला और बूढ़ा चाँद’ पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से भी सम्मानित किया था। उनकी मृत्यु 28 दिसंबर 1977 को हुई।


रिक्त स्थान भरो (Fill in the blanks)

प्रश्न: निम्नलिखित वाक्यों के रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए —

  • मैं सबसे ______ होऊँ। (छोटी)
  • तेरी ______ में सोऊँ। (गोदी)
  • तेरा ______ पकड़-पकड़कर। (अंचल)
  • कभी न छोड़ूँ तेरा ______। (हाथ)
  • तू मुझको ______ ले-लेकर। (चूमे)
  • हँस-हँसकर खाऊँ ______ तेरे हाथों से। (कौर)
  • माँ, मेरे ______ में फूल गूँथ दे। (जूड़े)
  • माँ, मेरे माथे पर ______ सजा दे। (बेंदी)
  • माँ, मेरे हाथों में ______ रचा दे। (मेहँदी)
  • नहीं चाहती ______ मैं। (बढ़ना)

पाठ के आस-पास

प्रश्न 1: तुम अपनी माँ के साथ क्या-क्या करना पसंद करते हो? लिखो।

उत्तरः मैं अपनी माँ के साथ निम्नलिखित कार्य करना पसंद करता/करती हूँ —

  • माँ की गोद में बैठकर कहानियाँ सुनना।
  • माँ के साथ रसोई में सहायता करना — सब्ज़ी छीलना, आटा गूँथना आदि।
  • माँ के हाथों से बना खाना खाना।
  • माँ के साथ बाज़ार जाना।
  • माँ के साथ बैठकर खेल खेलना और टेलीविज़न देखना।
  • माँ के साथ पूजा करना और त्यौहार मनाना।
  • माँ से अपनी पढ़ाई में सहायता लेना।
  • रात को माँ के पास सोते समय उनकी कहानियाँ सुनना।

प्रश्न 2: माँ के स्नेह का तुम्हारे जीवन में क्या महत्व है?

उत्तरः माँ का स्नेह हमारे जीवन का सबसे अनमोल धन है। माँ ही हमारी पहली शिक्षिका है — वह हमें बोलना, चलना, खाना और जीवन के अच्छे संस्कार सिखाती है। बीमारी, दुख और कठिनाई के समय माँ का प्यार ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति बनता है। माँ के स्पर्श में अद्भुत आनंद और शांति होती है। उसके आँचल की छाया हमें संसार के सब दुखों से बचाती है। इसीलिए कहा गया है — “माँ का प्यार ईश्वर के बाद सबसे महान वरदान है।”

प्रश्न 3: बच्चे बड़े होकर भी माँ का स्नेह नहीं भुला पाते — क्यों?

उत्तरः बच्चे बड़े होकर भी माँ का स्नेह इसलिए नहीं भुला पाते क्योंकि माँ का प्रेम सबसे निःस्वार्थ और शुद्ध होता है। माँ ने उन्हें जन्म दिया है, अपने हाथों से पाला-पोसा है, हर सुख-दुख में उनका साथ दिया है। माँ के लोरी, स्पर्श और गोद की मधुर स्मृतियाँ बच्चों के मन में सदा बसी रहती हैं। संसार के सब रिश्ते स्वार्थ से बँधे होते हैं किंतु माँ का प्रेम बिना किसी अपेक्षा के होता है। इसी कारण बच्चे बड़े होकर भी माँ की ममता को कभी नहीं भुला पाते।

प्रश्न 4: हमें अपनी माँ का सम्मान कैसे करना चाहिए?

उत्तरः हमें अपनी माँ का सम्मान निम्नलिखित प्रकार से करना चाहिए —

  • माँ की हर बात सुननी और मानना चाहिए।
  • उनसे कभी ऊँची आवाज़ में बात नहीं करनी चाहिए।
  • माँ के काम में हाथ बँटाना चाहिए।
  • पढ़ाई और अनुशासन में मेहनत करके माँ के सपनों को सच करना चाहिए।
  • बूढ़ी होने पर माँ की सेवा करनी चाहिए।
  • माँ को कभी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।
  • माँ के हर त्याग और परिश्रम के लिए कृतज्ञ रहना चाहिए।

भाषा-अध्ययन (Grammar)

प्रश्न 1: निम्नलिखित शब्दों के विलोम (विपरीत अर्थवाले) शब्द लिखो।

शब्दविलोम
छोटीबड़ी
सोनाजागना
हँसनारोना
आनाजाना
मीठाकड़वा / खट्टा
कोमलकठोर
पकड़नाछोड़ना
दिनरात
अपनापराया
बैठनाउठना

प्रश्न 2: निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची (समान अर्थ वाले) शब्द लिखो।

शब्दपर्यायवाची
माँमाता, जननी, अम्मा, मातृ
हाथकर, बाहु, भुजा
धरतीपृथ्वी, भूमि, ज़मीन
आँखनेत्र, चक्षु, लोचन
फूलपुष्प, सुमन, कुसुम
मुखमुँह, आनन, वदन
कोमलनरम, मृदु, सुकुमार
दिनदिवस, वार

प्रश्न 3: निम्नलिखित शब्दों का वाक्य में प्रयोग करो — गोदी, अंचल, कौर, मेहँदी, कोमल।

  • गोदी — माँ ने नन्हें बच्चे को अपनी गोदी में सुला दिया।
  • अंचल — बालक माँ का अंचल पकड़कर मेले में चलता रहा।
  • कौर — माँ ने बच्चे के मुँह में प्यार से एक कौर खाना डाला।
  • मेहँदी — त्यौहार पर बहनों ने अपने हाथों में लाल मेहँदी रचाई।
  • कोमल — माँ की बाँहें बहुत कोमल और स्नेहभरी होती हैं।

प्रश्न 4: कविता में आए तुक मिलने वाले (अनुप्रासिक) शब्द छाँटकर लिखो।

  • होऊँ — सोऊँ
  • साथ — हाथ
  • बढ़ना — पढ़ना
  • बड़े — खड़े
  • गूँथ दे — सजा दे — रचा दे

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

1. कविता “मैं सबसे छोटी होऊँ” के कवि कौन हैं?
(क) महादेवी वर्मा   (ख) सुमित्रानंदन पंत   (ग) जयशंकर प्रसाद   (घ) रामधारी सिंह दिनकर
उत्तरः (ख) सुमित्रानंदन पंत

2. बालिका सबसे क्या होना चाहती है?
(क) सबसे बड़ी   (ख) सबसे छोटी   (ग) सबसे चतुर   (घ) सबसे सुंदर
उत्तरः (ख) सबसे छोटी

3. बालिका कहाँ सोना चाहती है?
(क) पलंग पर   (ख) माँ की गोदी में   (ग) भाई के पास   (घ) पालने में
उत्तरः (ख) माँ की गोदी में

4. “तेरा अंचल पकड़-पकड़कर” — अंचल का अर्थ क्या है?
(क) हाथ   (ख) पैर   (ग) साड़ी का छोर   (घ) सिर
उत्तरः (ग) साड़ी का छोर

5. बालिका माँ के किस अंग को चूमना चाहती है?
(क) हाथ   (ख) माथा   (ग) गाल   (घ) पैर
उत्तरः (ग) गाल

6. बालिका किसके हाथों से कौर खाना चाहती है?
(क) पिता के   (ख) माँ के   (ग) दादी के   (घ) बहन के
उत्तरः (ख) माँ के

7. “कौर” शब्द का अर्थ क्या है?
(क) कोना   (ख) निवाला   (ग) बच्चा   (घ) कमरा
उत्तरः (ख) निवाला

8. “बड़े बनेंगे काम बड़े” — पंक्ति का भाव क्या है?
(क) बड़ों के काम भी बड़े होते हैं   (ख) बड़ा होने पर सब अच्छा होगा   (ग) बड़े लोग आलसी होते हैं   (घ) बच्चे बड़ा काम कर सकते हैं
उत्तरः (क) बड़ों के काम भी बड़े होते हैं

9. बालिका माँ से अपने जूड़े में क्या गुँथवाना चाहती है?
(क) रिबन   (ख) फूल   (ग) क्लिप   (घ) मोती
उत्तरः (ख) फूल

10. बालिका माँ से अपने माथे पर क्या सजवाना चाहती है?
(क) तिलक   (ख) मेहँदी   (ग) बेंदी (बिंदी)   (घ) काजल
उत्तरः (ग) बेंदी (बिंदी)

11. बालिका माँ से अपने हाथों में क्या रचवाना चाहती है?
(क) चूड़ी   (ख) मेहँदी   (ग) पायल   (घ) अंगूठी
उत्तरः (ख) मेहँदी

12. “नहीं चाहती ______ मैं, नहीं चाहती ______ मैं।” — रिक्त स्थान भरो।
(क) सोना — खाना   (ख) बढ़ना — पढ़ना   (ग) चलना — दौड़ना   (घ) रोना — हँसना
उत्तरः (ख) बढ़ना — पढ़ना

13. सुमित्रानंदन पंत हिंदी साहित्य के किस युग के कवि हैं?
(क) भक्ति-काल   (ख) रीति-काल   (ग) छायावाद   (घ) प्रगतिवाद
उत्तरः (ग) छायावाद

14. सुमित्रानंदन पंत को किस उपाधि से जाना जाता है?
(क) राष्ट्रकवि   (ख) प्रकृति का सुकुमार कवि   (ग) महाकवि   (घ) क्रांति-कवि
उत्तरः (ख) प्रकृति का सुकुमार कवि

15. सुमित्रानंदन पंत को किस काव्य-संग्रह पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला?
(क) पल्लव   (ख) वीणा   (ग) चिदंबरा   (घ) ग्राम्या
उत्तरः (ग) चिदंबरा


अतिरिक्त प्रश्नोत्तर (Additional Questions and Answers)

प्रश्न 1: “मैं सबसे छोटी होऊँ” कविता का मुख्य भाव क्या है?

उत्तरः इस कविता का मुख्य भाव माँ-बेटी के अटूट स्नेह और बचपन की मासूम भावनाओं का चित्रण है। नन्हीं बालिका माँ के निरंतर साथ की कामना करती है। वह सदा माँ की गोद में रहना, माँ के हाथों से खाना और माँ से अपनी प्यारी ज़िदें मनवाना चाहती है। बड़े होने पर बड़े-बड़े काम और जिम्मेदारियाँ आ जाती हैं जिनसे माँ का साथ छूट जाता है। इसी कारण बालिका सदा छोटी ही बनी रहना चाहती है। यह कविता बच्चों के सरल हृदय और मातृ-प्रेम की पवित्र भावना का अद्भुत चित्र है।

प्रश्न 2: “तेरी गोदी में सोऊँ” — इस पंक्ति में किस सुख की कल्पना है?

उत्तरः इस पंक्ति में बालिका माँ की गोद में सोने के सुख की कल्पना करती है। माँ की गोद संसार का सबसे सुरक्षित, कोमल और स्नेहपूर्ण स्थान है। माँ की गोद में सोने से बालिका को अद्भुत शांति और आनंद की अनुभूति होती है। यह सुख किसी भी अन्य सुख से बढ़कर है। इस पंक्ति में माँ-बेटी के गहरे प्यार और संरक्षण-भाव का सुंदर चित्रण है।

प्रश्न 3: “तेरा अंचल पकड़-पकड़कर, फिरूँ सदा माँ! तेरे साथ” — इन पंक्तियों का अर्थ बताओ।

उत्तरः इन पंक्तियों का अर्थ है कि बालिका सदा अपनी माँ की साड़ी का छोर (अंचल) पकड़कर माँ के साथ-साथ हर जगह घूमना चाहती है। वह माँ से एक पल के लिए भी अलग नहीं होना चाहती। माँ का अंचल उसके लिए सुरक्षा का प्रतीक है। यह पंक्ति बालिका की माँ के प्रति निर्भरता और अटूट प्रेम को दर्शाती है।

प्रश्न 4: “हँस-हँसकर खाऊँ कौर तेरे हाथों से” — इस पंक्ति का भाव स्पष्ट करो।

उत्तरः इस पंक्ति का भाव है कि बालिका माँ के हाथों से ही खाना खाना चाहती है। माँ के स्नेह से भरे हाथों से जो कौर मिलता है वह स्वाद से भी अधिक प्रेम-रस से सराबोर होता है। माँ के हाथों से खाने में बच्चों को अपूर्व आनंद आता है। बालिका हँसते-हँसते माँ के हाथों का कौर खाना चाहती है — यह उसके बाल-सुलभ आनंद और मातृ-स्नेह की पराकाष्ठा है।

प्रश्न 5: कविता में बालिका माँ से अपने प्यार का इज़हार किस-किस प्रकार करती है?

उत्तरः बालिका माँ से अपने प्यार का इज़हार अनेक प्रकार से करती है — वह माँ की गोद में सोना, माँ का अंचल पकड़कर सदा साथ चलना, दिनभर माँ के गाल चूमना, माँ के हाथों से खाना खाना, माँ के पल्ले में मुँह छिपाना, माँ की कोमल बाँहों में बैठना, हँस-हँसकर धरती पर लोटना, माँ के हाथों से जूड़े में फूल गुँथवाना, माथे पर बेंदी सजवाना, हाथों पर मेहँदी रचवाना — इन सब कार्यों के माध्यम से बालिका अपने हृदय का अटूट स्नेह माँ के प्रति प्रकट करती है।

प्रश्न 6: “बड़े बनेंगे काम बड़े, तब माँ तुझसे कौन कहेगा?” — इस पंक्ति में बालिका की कौन-सी चिंता व्यक्त हुई है?

उत्तरः इस पंक्ति में बालिका की यह चिंता व्यक्त हुई है कि बड़े होने पर बड़े-बड़े काम और दायित्व आ जाएँगे, उन कामों के बोझ से वह माँ के साथ बचपन वाली प्यारी-प्यारी बातें नहीं कर पाएगी। बड़े होने पर वह माँ से जूड़े में फूल गुँथवाने, माथे पर बिंदी सजवाने और हाथों पर मेहँदी रचवाने जैसी मासूम ज़िदें नहीं कर पाएगी। बालिका को डर है कि बड़ा होने पर माँ का यह स्नेहपूर्ण साथ छूट जाएगा। इसीलिए वह सदा छोटी रहना चाहती है।

प्रश्न 7: इस कविता का संदेश क्या है?

उत्तरः इस कविता का संदेश है कि बचपन और मातृ-स्नेह जीवन के सबसे अनमोल उपहार हैं। माँ का प्रेम संसार में सबसे पवित्र और निःस्वार्थ होता है। हमें बचपन के इन प्यारे क्षणों को भरपूर जीना चाहिए, माँ के साथ बिताए हर पल को अमूल्य समझना चाहिए और बड़े होकर भी माँ के स्नेह को कभी नहीं भुलाना चाहिए। यह कविता हमें सिखाती है कि माँ का स्नेह जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है।

प्रश्न 8: “मैं सबसे छोटी होऊँ” — कविता का यह शीर्षक कितना उपयुक्त है? अपने विचार लिखो।

उत्तरः कविता का शीर्षक “मैं सबसे छोटी होऊँ” अत्यंत उपयुक्त है। यह शीर्षक कविता के मूल भाव को पूर्ण रूप से प्रकट करता है। कविता का प्रारंभ और अंत दोनों इन्हीं शब्दों से होता है, जिससे बालिका की मूल कामना — सदा छोटी रहने और माँ के स्नेह में रहने की इच्छा — पूरी कविता में बार-बार प्रतिध्वनित होती है। शीर्षक से ही पाठक यह समझ जाता है कि कविता बच्चे की माँ के प्रति अटूट निर्भरता और प्रेम पर आधारित है। अतः शीर्षक पूर्णतया सटीक और उपयुक्त है।

प्रश्न 9: इस कविता में किस रस की प्रधानता है?

उत्तरः इस कविता में वात्सल्य रस की प्रधानता है। वात्सल्य रस माँ-संतान के प्रेम और स्नेह से जुड़ा रस है। पूरी कविता में बालिका के माँ के प्रति प्रेम, ममता और निर्भरता का अद्भुत चित्रण है। माँ की गोद, माँ का अंचल, माँ के हाथों का कौर, माँ का स्पर्श — ये सब वात्सल्य रस के अनुपम उदाहरण हैं। साथ ही कहीं-कहीं श्रृंगार रस की भी हल्की-सी झलक है (जूड़े में फूल, बिंदी, मेहँदी)।

प्रश्न 10: इस कविता को पढ़कर तुम्हें क्या सीख मिलती है?

उत्तरः इस कविता को पढ़कर हमें निम्नलिखित सीख मिलती है —

  • माँ का प्रेम संसार में सबसे पवित्र और अनमोल होता है।
  • बचपन का समय जीवन का सबसे प्यारा समय होता है — इसे भरपूर आनंद से बिताना चाहिए।
  • हमें अपनी माँ का सदा सम्मान और सेवा करनी चाहिए।
  • बड़े होकर भी हमें माँ के स्नेह को नहीं भूलना चाहिए।
  • परिवार के साथ बिताए हर पल को अमूल्य समझना चाहिए।
  • माँ की हर बात में छिपा प्रेम और शिक्षा जीवन भर हमारा मार्गदर्शन करती है।

Summary (English)

“Main Sabse Chhoti Hooun” (“Let me be the youngest of all”) is poem 14 in ASSEB Class 6 Hindi (Elective) Pallav Bhag-1. Composed by Sumitranandan Pant (1900–1977), one of the four major poets of the Chhayavaad movement of Hindi literature and famously called “the tender poet of nature” (Prakriti ka Sukumar Kavi), the poem captures the innocent voice of a little girl pleading with her mother to let her remain the youngest child forever. She wishes to sleep in her mother’s lap, to walk everywhere clutching the end of her mother’s saree, never to let go of her hand, to kiss her cheeks all day long, to eat morsels lovingly placed in her mouth by her mother’s own hands, to hide her face in her mother’s pallu and whisper sweet things, and to roll on the ground laughing. She does not wish to grow up, because growing up brings big responsibilities and she would no longer be able to ask her mother to weave flowers into her bun, place a bindi on her forehead, or apply henna on her hands. The poem is a beautiful depiction of vatsalya rasa — the pure, selfless bond between a mother and her child — and reminds readers that the love and lap of one’s mother are life’s most priceless gifts. Pant received the Jnanpith Award (for Chidambara), the Sahitya Akademi Award (for Kala aur Boodha Chand) and the Padma Bhushan from the Government of India.

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