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लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै – Class 6 Hindi Elective Question Answer | ASSEB | पल्लव भाग-1

यहाँ ASSEB (Assam State Board of Secondary Education) कक्षा 6 के हिंदी (ऐच्छिक/तृतीय भाषा) की पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-1 के पाठ 5 – लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै के सभी प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में दिए गए हैं। यह पाठ एक जीवनी है, जिसमें असम के पहले मुख्यमंत्री लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै के जीवन, शिक्षा, स्वतंत्रता-आंदोलन में योगदान और असम को बचाने के लिए किए गए उनके अनूठे संघर्ष का परिचय कराया गया है। उन्हीं के साहसपूर्ण प्रयत्नों से असम को पाकिस्तान में मिलने से बचाया जा सका, इसी कारण भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से विभूषित किया।


पाठ-परिचय (Summary)

लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै का जन्म 6 जून 1890 ई. को असम के नगाँव जिले के रहा नामक स्थान पर हुआ था। उनके पिता का नाम श्री बुद्धेश्वर बरदलै और माता का नाम श्रीमती प्राणेश्वरी देवी था। बचपन में ही माता का देहांत हो जाने के कारण उनका पालन-पोषण उनकी सौतेली माँ ने किया। वे बचपन से ही बड़े मेधावी, शांत स्वभाव के और परिश्रमी छात्र थे। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गुवाहाटी के काटन कॉलेज में और उच्च शिक्षा कलकत्ता विश्वविद्यालय से प्राप्त की। एम. ए. तथा बी. एल. की परीक्षाएँ पास करने के बाद उन्होंने गुवाहाटी में वकालत आरंभ की।

महात्मा गांधी से प्रभावित होकर बरदलै जी ने 1922 ई. में असहयोग आंदोलन में भाग लिया और वकालत छोड़ दी। वे कांग्रेस के कर्मठ नेता बने और स्वतंत्रता-संग्राम में अनेक बार जेल गए। 1938 ई. में वे असम के प्रथम प्रधानमंत्री (Premier) बने और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1947 ई. में असम के पहले मुख्यमंत्री नियुक्त हुए। देश-विभाजन के समय जब असम को पूर्वी पाकिस्तान में मिलाने की साज़िश रची जा रही थी, तब उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल और महात्मा गांधी के सहयोग से दृढ़तापूर्वक उसका विरोध किया और असम को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखा।

गोपीनाथ बरदलै सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के प्रतीक थे। जनता के प्रति अगाध प्रेम के कारण लोग उन्हें प्यार से ‘लोकप्रिय’ कहकर पुकारते थे। 5 अगस्त 1950 ई. को उनका देहावसान हो गया। सन् 1999 में भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया। आज भी असम की धरती उन्हें अपने महान सपूत के रूप में याद करती है, और गुवाहाटी का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा उन्हीं के नाम पर ‘लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा’ कहलाता है।


शब्दार्थ

शब्दअर्थ
लोकप्रियजो जनता का प्रिय हो, सर्वप्रिय
जीवनीकिसी व्यक्ति के जीवन का वर्णन
मेधावीतीव्र बुद्धि वाला, होशियार
परिश्रमीमेहनती
सौतेली माँपिता की दूसरी पत्नी
देहांतमृत्यु
वकालतवकील का काम
असहयोग आंदोलनअंग्रेज़ी सरकार से सहयोग न करने का आंदोलन
कर्मठपरिश्रमी, कर्म करने वाला
स्वतंत्रता-संग्रामआज़ादी की लड़ाई
प्रधानमंत्री (Premier)प्रांत का मुख्य मंत्री (स्वतंत्रता से पूर्व)
मुख्यमंत्रीराज्य का प्रमुख मंत्री
देश-विभाजन1947 में भारत-पाकिस्तान का बँटवारा
साज़िशषड्यंत्र, गुप्त चाल
अभिन्नजो अलग न किया जा सके
दृढ़तामज़बूती, अटलता
सादगीसरलता, सादा-जीवन
ईमानदारीसत्यनिष्ठा
जनसेवालोगों की सेवा
अगाधबहुत गहरा
देहावसानमृत्यु, प्राण-त्याग
मरणोपरांतमृत्यु के बाद
भारत रत्नभारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान
विभूषितसम्मानित
सपूतयोग्य पुत्र

अभ्यास (Question Answers)

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1: गोपीनाथ बरदलै का जन्म कब हुआ था?
(क) 6 जून 1890 (ख) 15 अगस्त 1890 (ग) 26 जनवरी 1900 (घ) 5 अगस्त 1890

उत्तरः (क) 6 जून 1890।

प्रश्न 2: गोपीनाथ बरदलै का जन्म असम के किस स्थान पर हुआ था?
(क) गुवाहाटी (ख) जोरहाट (ग) रहा (नगाँव) (घ) तेज़पुर

उत्तरः (ग) रहा (नगाँव)।

प्रश्न 3: गोपीनाथ बरदलै के पिता का नाम क्या था?
(क) बुद्धेश्वर बरदलै (ख) प्राणेश्वर बरदलै (ग) रमाकांत बरदलै (घ) हरिनाथ बरदलै

उत्तरः (क) बुद्धेश्वर बरदलै।

प्रश्न 4: गोपीनाथ बरदलै ने उच्च शिक्षा कहाँ से प्राप्त की?
(क) दिल्ली विश्वविद्यालय (ख) कलकत्ता विश्वविद्यालय (ग) गुवाहाटी विश्वविद्यालय (घ) ढाका विश्वविद्यालय

उत्तरः (ख) कलकत्ता विश्वविद्यालय।

प्रश्न 5: गोपीनाथ बरदलै असम के पहले मुख्यमंत्री कब बने?
(क) 1938 ई. (ख) 1942 ई. (ग) 1947 ई. (घ) 1950 ई.

उत्तरः (ग) 1947 ई.।

प्रश्न 6: गोपीनाथ बरदलै को ‘भारत रत्न’ से कब सम्मानित किया गया?
(क) 1990 में (ख) 1995 में (ग) 1999 में (घ) 2001 में

उत्तरः (ग) 1999 में (मरणोपरांत)।

प्रश्न 7: गोपीनाथ बरदलै का देहावसान कब हुआ?
(क) 5 अगस्त 1950 (ख) 6 जून 1950 (ग) 15 अगस्त 1947 (घ) 26 जनवरी 1950

उत्तरः (क) 5 अगस्त 1950।

अति लघु प्रश्नोत्तर (Very Short Answers)

प्रश्न 1: गोपीनाथ बरदलै का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उत्तरः गोपीनाथ बरदलै का जन्म 6 जून 1890 ई. को असम के नगाँव जिले के ‘रहा’ नामक स्थान पर हुआ था।

प्रश्न 2: उनके माता-पिता का नाम क्या था?

उत्तरः उनके पिता का नाम श्री बुद्धेश्वर बरदलै और माता का नाम श्रीमती प्राणेश्वरी देवी था।

प्रश्न 3: गोपीनाथ बरदलै ने अपनी शिक्षा कहाँ-कहाँ से ली?

उत्तरः उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा रहा एवं गुवाहाटी (काटन कॉलेज) में तथा उच्च शिक्षा कलकत्ता विश्वविद्यालय से ली। वहाँ से उन्होंने एम. ए. तथा बी. एल. की परीक्षाएँ पास कीं।

प्रश्न 4: उन्होंने वकालत कहाँ शुरू की?

उत्तरः उन्होंने गुवाहाटी में वकालत शुरू की।

प्रश्न 5: किसके प्रभाव से बरदलै जी ने वकालत छोड़ दी?

उत्तरः महात्मा गांधी के प्रभाव से उन्होंने वकालत छोड़ दी और 1922 ई. के असहयोग आंदोलन में कूद पड़े।

प्रश्न 6: असम के पहले मुख्यमंत्री कौन थे?

उत्तरः असम के पहले मुख्यमंत्री लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै थे।

प्रश्न 7: उन्हें ‘लोकप्रिय’ क्यों कहा जाता है?

उत्तरः जनता के प्रति अगाध प्रेम, सादगी और निःस्वार्थ सेवा के कारण असम की जनता उन्हें प्यार से ‘लोकप्रिय’ कहकर पुकारती थी।

प्रश्न 8: गोपीनाथ बरदलै को ‘भारत रत्न’ कब और किसने प्रदान किया?

उत्तरः सन् 1999 में भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया।

प्रश्न 9: गोपीनाथ बरदलै का देहावसान कब हुआ?

उत्तरः 5 अगस्त 1950 ई. को उनका देहावसान हुआ।

प्रश्न 10: गुवाहाटी का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा किसके नाम पर है?

उत्तरः गुवाहाटी का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा ‘लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा’ के नाम से जाना जाता है।

लघु प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)

प्रश्न 1: गोपीनाथ बरदलै के बचपन की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं?

उत्तरः गोपीनाथ बरदलै बचपन से ही बड़े मेधावी, शांत स्वभाव के और परिश्रमी छात्र थे। बचपन में ही उनकी माता का देहांत हो गया था, फिर भी उन्होंने अपने अध्ययन में कभी कोताही नहीं की। वे सत्यनिष्ठ, अनुशासित और कर्तव्यपरायण थे। यही गुण आगे चलकर उनके जीवन का आधार बने।

प्रश्न 2: गोपीनाथ बरदलै ने स्वतंत्रता-आंदोलन में किस प्रकार भाग लिया?

उत्तरः महात्मा गांधी से प्रेरित होकर बरदलै जी ने 1922 ई. में अपनी फलती-फूलती वकालत छोड़ दी और असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। वे कांग्रेस पार्टी के कर्मठ नेता बने तथा अनेक बार जेल भी गए। उन्होंने असम में स्वतंत्रता-संग्राम का नेतृत्व किया और लोगों में राष्ट्रीय जागरण फैलाया।

प्रश्न 3: देश-विभाजन के समय उन्होंने असम को किस प्रकार बचाया?

उत्तरः 1947 ई. के देश-विभाजन के समय कुछ शक्तियाँ असम को पूर्वी पाकिस्तान में मिलाने का षड्यंत्र रच रही थीं। उस संकट की घड़ी में गोपीनाथ बरदलै ने महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल के सहयोग से दृढ़तापूर्वक इसका विरोध किया। उनके अथक प्रयासों से ही असम को पाकिस्तान में जाने से बचाया गया और वह भारत का अभिन्न अंग बना रहा।

प्रश्न 4: ‘लोकप्रिय’ की उपाधि उन्हें क्यों मिली?

उत्तरः गोपीनाथ बरदलै सादगी, ईमानदारी और जनसेवा की मूर्ति थे। मुख्यमंत्री होते हुए भी वे साधारण जीवन जीते थे और जनता के दुख-दर्द में सदा साथ रहते थे। उनके इसी निःस्वार्थ प्रेम और जनता-हितकारी कार्यों के कारण असम के लोग उन्हें प्यार से ‘लोकप्रिय’ कहकर पुकारने लगे, और यह उपाधि उनके नाम के साथ अमर हो गई।

प्रश्न 5: मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने असम के लिए क्या-क्या कार्य किए?

उत्तरः मुख्यमंत्री बनने के बाद बरदलै जी ने असम के विकास के लिए अनेक कार्य किए — उन्होंने शिक्षा का प्रसार किया, गुवाहाटी विश्वविद्यालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया, कृषि और उद्योगों को प्रोत्साहित किया, शरणार्थियों के पुनर्वास का प्रबंध किया तथा कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया। उनका शासन ईमानदारी और जनकल्याण के लिए विख्यात रहा।

प्रश्न 6: गोपीनाथ बरदलै को कौन-कौन से सम्मान प्राप्त हुए?

उत्तरः सन् 1999 में भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से विभूषित किया। उनके सम्मान में गुवाहाटी के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम ‘लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा’ रखा गया है। असम में उनकी स्मृति में अनेक संस्थान, सड़कें और भवन भी स्थापित किए गए हैं।

दीर्घ प्रश्नोत्तर (Long Answer Questions)

प्रश्न 1: लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै के जीवन-परिचय को अपने शब्दों में लिखो।

उत्तरः लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै का जन्म 6 जून 1890 ई. को असम के नगाँव जिले के ‘रहा’ नामक स्थान पर हुआ था। उनके पिता का नाम श्री बुद्धेश्वर बरदलै तथा माता का नाम श्रीमती प्राणेश्वरी देवी था। बचपन में ही माता के देहांत हो जाने के बाद भी वे बड़े परिश्रम से पढ़ाई करते रहे। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गुवाहाटी के काटन कॉलेज में तथा एम. ए. और बी. एल. की पढ़ाई कलकत्ता विश्वविद्यालय से पूरी की। शिक्षा समाप्त करके उन्होंने गुवाहाटी में वकालत आरंभ की। 1922 ई. में महात्मा गांधी के प्रभाव से उन्होंने वकालत छोड़कर असहयोग आंदोलन में भाग लिया और कई बार जेल गए। 1938 ई. में वे असम के प्रथम प्रधानमंत्री (Premier) बने तथा 1947 ई. में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद असम के पहले मुख्यमंत्री नियुक्त हुए। देश-विभाजन के समय असम को पाकिस्तान में मिलाने की चाल को उन्होंने अपनी दृढ़ता से विफल कर दिया। 5 अगस्त 1950 ई. को उनका निधन हो गया। सन् 1999 में भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया। आज भी असमवासी उन्हें अपने महान सपूत के रूप में स्मरण करते हैं।

प्रश्न 2: गोपीनाथ बरदलै ने असम को पाकिस्तान में मिलने से किस प्रकार बचाया? विस्तार से लिखो।

उत्तरः सन् 1947 ई. में जब भारत-विभाजन की चर्चा चल रही थी, तब मुस्लिम लीग असम को पूर्वी पाकिस्तान में सम्मिलित करवाने के लिए जोरदार प्रयत्न कर रही थी। ‘ग्रुपिंग योजना’ के अंतर्गत असम को बंगाल के साथ जोड़ने का प्रस्ताव लाया गया था, जिससे विभाजन के समय असम स्वतः ही पाकिस्तान का भाग बन जाता। ऐसे संकट की घड़ी में गोपीनाथ बरदलै निडर होकर सामने आए। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल और महात्मा गांधी के पास जाकर पूरी स्थिति बताई और उनसे सहयोग लिया। बरदलै जी ने असम की जनता को एकजुट करके इस योजना का खुला विरोध किया। अंततः उनके अथक प्रयासों से ‘ग्रुपिंग योजना’ विफल हुई और असम को पाकिस्तान में मिलने से बचाया जा सका। यदि उस समय बरदलै जी न होते तो आज असम भारत का हिस्सा नहीं होता। इसी अद्वितीय योगदान के कारण भारत सरकार ने उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया।

प्रश्न 3: गोपीनाथ बरदलै के व्यक्तित्व एवं चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करो।

उत्तरः गोपीनाथ बरदलै का व्यक्तित्व अनेक गुणों से सुशोभित था —

  • सादगी — मुख्यमंत्री होते हुए भी वे साधारण कपड़े पहनते थे और अत्यंत सरल जीवन जीते थे।
  • ईमानदारी — वे अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक दोनों जीवन में पूरी तरह ईमानदार थे।
  • देशभक्ति — देश के लिए उन्होंने वकालत और सुख-सुविधा त्याग दी; अनेक बार जेल गए।
  • दृढ़ निश्चय — असम को पाकिस्तान में जाने से बचाने के लिए उन्होंने अंत तक हार नहीं मानी।
  • जनसेवा का भाव — गरीबों, दलितों और शरणार्थियों की भलाई के लिए वे सदा तत्पर रहते थे।
  • परिश्रम और लगन — माँ की मृत्यु के बाद भी वे परिश्रम से पढ़ाई करते रहे और उच्च शिक्षा प्राप्त की।
  • विनम्रता — पद, यश और सम्मान पाने पर भी उनमें कभी अहंकार नहीं आया।

इन्हीं गुणों के कारण असम की जनता ने उन्हें ‘लोकप्रिय’ की उपाधि दी और भारत सरकार ने ‘भारत रत्न’ से विभूषित किया। उनका जीवन हम सबके लिए एक प्रेरणास्रोत है।


व्याकरण (Grammar)

वचन बदलो

एकवचनबहुवचन
नेतानेताओं
छात्रछात्रों
पुस्तकपुस्तकें
कथाकथाएँ
परीक्षापरीक्षाएँ
मातामाताएँ

विलोम शब्द

शब्दविलोम
स्वतंत्रतापरतंत्रता
ईमानदारीबेईमानी
जन्ममृत्यु
सादगीआडंबर
लोकप्रियअप्रिय
विरोधसमर्थन

रिक्त स्थान भरो

  • गोपीनाथ बरदलै का जन्म 6 जून 1890 को हुआ था।
  • उनका जन्म असम के रहा (नगाँव) नामक स्थान पर हुआ।
  • उन्होंने उच्च शिक्षा कलकत्ता विश्वविद्यालय से ली।
  • वे असम के पहले मुख्यमंत्री थे।
  • सन् 1999 में उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।
  • जनता उन्हें प्यार से ‘लोकप्रिय’ कहकर पुकारती थी।

Summary (English)

Lesson 5 of ASSEB Class 6 Hindi (Elective) Pallav Bhag-1, “लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै” is a biographical sketch of Lokpriya Gopinath Bordoloi, the first Chief Minister of Assam. Born on 6 June 1890 at Raha in Nagaon district to Buddheshwar Bordoloi and Praneswari Devi, he lost his mother in childhood but excelled in his studies through perseverance. After completing his M.A. and B.L. from Calcutta University, he started practising law in Guwahati. Inspired by Mahatma Gandhi, he joined the Non-Cooperation Movement in 1922, gave up his lucrative legal career, became a leading Congress figure in Assam, and went to jail several times during the freedom struggle. He became Premier of Assam in 1938 and the first Chief Minister of independent Assam in 1947. During Partition, he played a historic role in saving Assam from being merged with East Pakistan by firmly opposing the Grouping plan with the support of Mahatma Gandhi and Sardar Vallabhbhai Patel. Known for his simplicity, honesty and selfless service, the people of Assam fondly called him ‘Lokpriya’ (the Beloved). He passed away on 5 August 1950. In 1999, the Government of India honoured him posthumously with the country’s highest civilian award, the Bharat Ratna. Guwahati’s international airport is named after him as a lasting tribute. His life remains a shining example of patriotism, integrity and dedication to public service.

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