यहाँ ASSEB (Assam State Board of Secondary Education) कक्षा 6 के हिंदी (ऐच्छिक/तृतीय भाषा) की पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-1 के पाठ 4 – धरती माता का पत्र के सभी प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में दिए गए हैं। यह पाठ पत्र-रूप में लिखी गई एक रचना है, जिसमें धरती माता अपने प्यारे बच्चों — अर्थात् हम सभी मनुष्यों — को संबोधित करते हुए एक प्रेम-भरा, किंतु पीड़ा-भरा पत्र लिखती हैं। पत्र के माध्यम से धरती माता मनुष्य को उसके स्वार्थ, लोभ और प्रकृति के साथ किए जा रहे अन्याय की याद दिलाती हैं और बच्चों से प्रार्थना करती हैं कि वे पेड़, नदी, पर्वत, वायु तथा जीव-जंतुओं की रक्षा करें, ताकि सब मिलकर सुख से रह सकें।
पाठ-परिचय (Summary)
‘धरती माता का पत्र’ एक पत्रात्मक रचना है। इसमें धरती माता ने अपने बच्चों — अर्थात् सभी मनुष्यों — के नाम एक पत्र लिखा है। पत्र के आरंभ में वे प्यार से अपने बच्चों को संबोधित करती हैं और बताती हैं कि वे ही उन्हें अन्न, जल, फल-फूल, पेड़-पौधे, नदी-पर्वत और सुंदर पर्यावरण देती आ रही हैं। उनके आँचल में हर प्राणी को आश्रय, भोजन और आनंद मिलता है। माता का हृदय अपने बच्चों के लिए सदा वात्सल्य से भरा रहता है।
परंतु आगे पत्र में धरती माता अपनी पीड़ा भी प्रकट करती हैं। वे कहती हैं कि आज मनुष्य अपने स्वार्थ और लोभ में अंधा होकर पेड़ काट रहा है, नदियों को गंदा कर रहा है, वायु में धुआँ और ज़हर भर रहा है, जंगली पशु-पक्षियों का शिकार कर रहा है तथा पहाड़ों को तोड़ रहा है। इस सब से धरती का संतुलन बिगड़ता जा रहा है — कहीं सूखा, कहीं बाढ़, कहीं भूकंप, तो कहीं रोग फैल रहे हैं। माता को अपने बच्चों की यह दशा देखकर बहुत दुख होता है।
अंत में धरती माता अपने बच्चों से प्रार्थना करती हैं कि वे पेड़ लगाएँ, जल बचाएँ, वायु को शुद्ध रखें, जीव-जंतुओं पर दया करें और प्रकृति से प्रेम करें। यदि बच्चे इतना कर सकें तो धरती फिर से हरी-भरी, सुंदर और सुखद हो जाएगी। पत्र का मुख्य संदेश है — “प्रकृति की रक्षा ही जीवन की रक्षा है।” यह पाठ बच्चों के मन में पर्यावरण-प्रेम और मातृभूमि के प्रति आदर का भाव जगाता है।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| धरती | पृथ्वी, ज़मीन |
| माता | माँ, जननी |
| पत्र | चिट्ठी, खत |
| संतान | बच्चे, औलाद |
| आँचल | साड़ी का छोर; गोद, आश्रय |
| वात्सल्य | माँ का बच्चों के प्रति प्रेम |
| अन्न | अनाज, खाद्य पदार्थ |
| आश्रय | शरण, ठिकाना |
| स्वार्थ | केवल अपना ही लाभ देखना |
| लोभ | लालच |
| अंधा | देख न पाने वाला; यहाँ — विवेकहीन |
| शिकार | जानवर/पक्षी पकड़ना या मारना |
| प्रदूषण | वायु, जल आदि का गंदा होना |
| संतुलन | बराबरी, ठीक स्थिति |
| सूखा | वर्षा का अभाव, अकाल |
| बाढ़ | नदियों का जल बढ़कर भूमि पर फैल जाना |
| भूकंप | धरती का काँपना |
| दशा | हाल, स्थिति |
| प्रार्थना | विनती, निवेदन |
| शुद्ध | साफ़, पवित्र |
| दया | करुणा, सहानुभूति |
| हरा-भरा | हरियाली से भरा |
| संदेश | उपदेश, समाचार |
| पर्यावरण | हमारे चारों ओर का वातावरण |
| मातृभूमि | जन्मभूमि, जिस देश में जन्म हुआ |
अभ्यास (Question Answers)
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
प्रश्न 1: यह पाठ किस रूप में लिखा गया है?
(क) कहानी (ख) कविता (ग) पत्र (घ) नाटक
उत्तरः (ग) पत्र।
प्रश्न 2: पत्र किसने लिखा है?
(क) नदी ने (ख) धरती माता ने (ग) पेड़ ने (घ) सूरज ने
उत्तरः (ख) धरती माता ने।
प्रश्न 3: पत्र किसके नाम है?
(क) देवताओं के (ख) पशु-पक्षियों के (ग) अपने बच्चों (मनुष्यों) के (घ) सरकार के
उत्तरः (ग) अपने बच्चों (मनुष्यों) के।
प्रश्न 4: धरती माता हमें क्या-क्या देती हैं?
(क) केवल पानी (ख) केवल अन्न (ग) अन्न, जल, फल-फूल, आश्रय आदि सब कुछ (घ) कुछ नहीं
उत्तरः (ग) अन्न, जल, फल-फूल, आश्रय आदि सब कुछ।
प्रश्न 5: मनुष्य किस कारण पेड़ काट रहा है, नदी गंदी कर रहा है?
(क) प्रेम के कारण (ख) स्वार्थ और लोभ के कारण (ग) मजबूरी से (घ) देवताओं की आज्ञा से
उत्तरः (ख) स्वार्थ और लोभ के कारण।
प्रश्न 6: धरती के संतुलन के बिगड़ने से क्या-क्या होता है?
(क) सूखा, बाढ़, भूकंप, रोग (ख) त्योहार (ग) मेले (घ) उत्सव
उत्तरः (क) सूखा, बाढ़, भूकंप, रोग।
प्रश्न 7: पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
(क) प्रकृति की रक्षा ही जीवन की रक्षा है (ख) पेड़ काटो (ग) नदी सुखाओ (घ) पशु मारो
उत्तरः (क) प्रकृति की रक्षा ही जीवन की रक्षा है।
अति लघु प्रश्नोत्तर (Very Short Answers)
प्रश्न 1: यह पत्र किसने, किसे लिखा है?
उत्तरः यह पत्र धरती माता ने अपने प्यारे बच्चों को, अर्थात् सभी मनुष्यों को लिखा है।
प्रश्न 2: धरती माता को ‘माता’ क्यों कहा गया है?
उत्तरः क्योंकि वे माँ की तरह हमें अन्न, जल, फल-फूल, आश्रय और सब कुछ देती हैं और सदा हमारी रक्षा करती हैं, इसलिए उन्हें ‘माता’ कहा गया है।
प्रश्न 3: धरती माता हमें क्या-क्या देती हैं?
उत्तरः धरती माता हमें अन्न, जल, फल-फूल, पेड़-पौधे, नदी-पर्वत, वायु, खनिज, आश्रय और जीवन के लिए आवश्यक सब कुछ देती हैं।
प्रश्न 4: मनुष्य धरती के साथ कैसा व्यवहार कर रहा है?
उत्तरः मनुष्य अपने स्वार्थ और लोभ में पेड़ काट रहा है, नदियों को गंदा कर रहा है, वायु में धुआँ और ज़हर फैला रहा है, पशु-पक्षियों का शिकार कर रहा है तथा पहाड़ तोड़ रहा है।
प्रश्न 5: धरती का संतुलन बिगड़ने से क्या होता है?
उत्तरः धरती का संतुलन बिगड़ने से कहीं सूखा, कहीं बाढ़, कहीं भूकंप और कहीं नए-नए रोग फैलते हैं, जिससे सभी प्राणियों को कष्ट होता है।
प्रश्न 6: धरती माता को किस बात का दुख है?
उत्तरः धरती माता को इस बात का दुख है कि उनके अपने ही बच्चे (मनुष्य) उनकी हरियाली, जल, वायु और जीव-जंतुओं को नष्ट कर रहे हैं और स्वयं भी मुसीबत में पड़ रहे हैं।
प्रश्न 7: धरती माता ने अंत में क्या प्रार्थना की है?
उत्तरः धरती माता ने प्रार्थना की है कि उनके बच्चे पेड़ लगाएँ, जल बचाएँ, वायु को शुद्ध रखें, जीव-जंतुओं पर दया करें और प्रकृति से प्रेम करें।
प्रश्न 8: पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तरः पाठ का मुख्य संदेश है — “प्रकृति की रक्षा ही जीवन की रक्षा है।” हमें धरती माता और पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए।
रिक्त स्थान भरो
- यह पत्र धरती माता ने अपने बच्चों को लिखा है।
- धरती माता हमें अन्न, जल, फल-फूल और आश्रय देती हैं।
- मनुष्य अपने स्वार्थ और लोभ के कारण प्रकृति को नष्ट कर रहा है।
- पेड़ काटने और प्रदूषण से धरती का संतुलन बिगड़ रहा है।
- हमें पेड़ लगाने चाहिए और जल को बचाना चाहिए।
- प्रकृति की रक्षा ही जीवन की रक्षा है।
सही/ग़लत बताओ
- यह पाठ कहानी के रूप में लिखा गया है। — ग़लत (पत्र के रूप में)
- धरती माता ने पत्र अपने बच्चों को लिखा है। — सही
- मनुष्य प्रकृति की रक्षा कर रहा है। — ग़लत
- पेड़ काटने से धरती को कोई हानि नहीं होती। — ग़लत
- नदियों को गंदा करना मनुष्य के लिए ही हानिकारक है। — सही
- पाठ का संदेश है कि प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए। — सही
लघु प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)
प्रश्न 1: धरती माता अपने बच्चों से क्या-क्या शिकायत करती हैं?
उत्तरः धरती माता शिकायत करती हैं कि उनके बच्चे (मनुष्य) उन्हें ही हानि पहुँचा रहे हैं — पेड़ काट रहे हैं, जिससे जंगल नष्ट हो रहे हैं; नदियों में कूड़ा-करकट और गंदा पानी डाल रहे हैं; कारखानों और वाहनों के धुएँ से वायु को ज़हरीला बना रहे हैं; पशु-पक्षियों का शिकार कर रहे हैं और पहाड़ों को तोड़कर खनिज निकाल रहे हैं। इन सबसे धरती का संतुलन बिगड़ रहा है और स्वयं मनुष्य ही दुखी हो रहा है।
प्रश्न 2: पेड़ काटने से क्या-क्या हानि होती है?
उत्तरः पेड़ काटने से अनेक हानियाँ होती हैं — वर्षा कम होती है, मिट्टी बहकर नष्ट हो जाती है, वायु में ऑक्सीजन घट जाती है और प्रदूषण बढ़ता है, पशु-पक्षियों का आश्रय छिन जाता है तथा भूमि बंजर हो जाती है। फलस्वरूप सूखा और बाढ़ जैसी आपदाएँ बढ़ जाती हैं।
प्रश्न 3: जल और वायु को शुद्ध रखना क्यों आवश्यक है?
उत्तरः जल और वायु जीवन के लिए सबसे आवश्यक तत्त्व हैं। यदि जल गंदा हो तो उसे पीने से अनेक रोग फैलते हैं और यदि वायु प्रदूषित हो तो साँस लेने में कठिनाई होती है, फेफड़ों के रोग बढ़ते हैं। इसलिए जीवन को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए जल और वायु को शुद्ध रखना अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न 4: धरती माता ने पत्र के अंत में क्या प्रार्थना की है?
उत्तरः धरती माता ने पत्र के अंत में अपने बच्चों से प्रार्थना की है कि वे अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ, नदियों को गंदा न करें, वायु को शुद्ध रखें, पशु-पक्षियों पर दया करें और प्रकृति से प्रेम करें। यदि बच्चे ऐसा करेंगे तो धरती फिर से हरी-भरी, सुंदर और सबके लिए सुखद हो जाएगी।
प्रश्न 5: हम धरती माता की रक्षा के लिए क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तरः हम धरती माता की रक्षा के लिए ये काम कर सकते हैं —
- अधिक से अधिक पेड़ लगाना और उनकी देखभाल करना।
- नदी-तालाब को साफ़ रखना और जल को व्यर्थ नष्ट न करना।
- कूड़ा-करकट निश्चित स्थान पर डालना।
- वाहन और कारखानों के धुएँ को कम करना, स्वच्छ ईंधन का प्रयोग करना।
- पशु-पक्षियों का शिकार न करना, उनसे प्रेम करना।
- बिजली और कागज़ का सोच-समझकर प्रयोग करना।
दीर्घ प्रश्नोत्तर (Long Answer Questions)
प्रश्न 1: ‘धरती माता का पत्र’ पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखो।
उत्तरः ‘धरती माता का पत्र’ पत्र-शैली में लिखी गई एक मार्मिक रचना है। इसमें धरती माता अपने प्यारे बच्चों — अर्थात् हम सभी मनुष्यों — के नाम पत्र लिखती हैं। पत्र के आरंभ में वे प्रेम से याद दिलाती हैं कि वे ही हमें अन्न, जल, फल-फूल, पेड़-पौधे, नदी-पर्वत, वायु, खनिज और आश्रय देती आ रही हैं। उनके आँचल में हर प्राणी सुखी रहता है। फिर वे पीड़ा से बताती हैं कि आज मनुष्य अपने स्वार्थ और लोभ में अंधा होकर पेड़ काट रहा है, नदियों को गंदा कर रहा है, वायु को प्रदूषित कर रहा है, पशु-पक्षियों का शिकार कर रहा है और पहाड़ों को तोड़ रहा है। इस कारण कहीं सूखा, कहीं बाढ़, कहीं भूकंप तो कहीं नए-नए रोग फैल रहे हैं। माता का हृदय अपने बच्चों के दुख से दुखी है। अंत में वे प्रार्थना करती हैं कि बच्चे पेड़ लगाएँ, जल बचाएँ, वायु को शुद्ध रखें, जीव-जंतुओं पर दया करें और प्रकृति से प्रेम करें — तभी धरती फिर से हरी-भरी और सुखद होगी। पाठ का मुख्य संदेश है कि प्रकृति की रक्षा ही जीवन की रक्षा है।
प्रश्न 2: इस पाठ से हमें क्या-क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तरः इस पाठ से हमें कई महत्वपूर्ण शिक्षाएँ मिलती हैं —
- धरती हमारी माँ है — वह हमें अन्न, जल और जीवन की हर वस्तु देती है, इसलिए हमें उसका सम्मान करना चाहिए।
- प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए — पेड़, नदी, पहाड़, वायु और जीव-जंतु सब हमारे लिए आवश्यक हैं।
- स्वार्थ और लोभ से बचो — अंधाधुंध विकास और लालच के कारण ही पर्यावरण नष्ट हो रहा है।
- पेड़ अधिक लगाओ, पेड़ मत काटो — पेड़ ही वर्षा, छाया, ऑक्सीजन और जीवन के आधार हैं।
- जल और वायु को शुद्ध रखो — ये जीवन के मूल तत्त्व हैं।
- पशु-पक्षियों पर दया करो — वे भी इसी धरती के बच्चे हैं।
- प्रकृति की रक्षा ही जीवन की रक्षा है — यह सबसे बड़ी सीख है।
प्रश्न 3: यदि तुम्हें धरती माता के पत्र का उत्तर लिखना हो तो तुम क्या लिखोगे?
उत्तरः यदि मुझे धरती माता के पत्र का उत्तर लिखना हो तो मैं इस प्रकार लिखूँगा/लिखूँगी —
“प्यारी धरती माता, आपका पत्र पढ़कर मेरा हृदय भर आया। मुझे क्षमा कीजिए कि हम आपके बच्चे होकर भी आपको इतना दुख दे रहे हैं। मैं आज ही प्रण करता/करती हूँ कि अपने आँगन और विद्यालय में पेड़ लगाऊँगा/लगाऊँगी, जल को व्यर्थ नहीं बहाऊँगा/बहाऊँगी, कूड़ा-करकट को सही जगह पर डालूँगा/डालूँगी, पशु-पक्षियों पर दया करूँगा/करूँगी और अपने मित्रों को भी पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रेरित करूँगा/करूँगी। आप पुनः हरी-भरी और प्रसन्न होंगी, यही मेरी प्रार्थना है। आपका प्यारा बच्चा/बच्ची।”
व्याकरण (Grammar)
वचन बदलो
| एकवचन | बहुवचन |
|---|---|
| बच्चा | बच्चे |
| पेड़ | पेड़ों |
| नदी | नदियाँ |
| पहाड़ | पहाड़ों |
| पत्र | पत्रों |
| माता | माताएँ |
विलोम शब्द
| शब्द | विलोम |
|---|---|
| शुद्ध | अशुद्ध |
| सुख | दुख |
| हरा-भरा | सूखा |
| स्वार्थ | परमार्थ |
| दया | निर्दयता |
| जीवन | मृत्यु |
| प्रेम | घृणा |
पर्यायवाची शब्द
| शब्द | पर्यायवाची |
|---|---|
| धरती | पृथ्वी, भूमि, ज़मीन, वसुधा |
| माता | माँ, जननी, अंबा |
| पत्र | चिट्ठी, खत, लेख |
| जल | पानी, नीर, वारि |
| वायु | हवा, पवन, समीर |
| पेड़ | वृक्ष, तरु, द्रुम |
वाक्य-रचना
- धरती — धरती हमारी माता है।
- पेड़ — हमें अधिक पेड़ लगाने चाहिए।
- प्रदूषण — प्रदूषण से अनेक रोग होते हैं।
- प्रार्थना — माँ ने बच्चों से प्रार्थना की।
- पर्यावरण — पर्यावरण की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
Summary (English)
Lesson 4 of ASSEB Class 6 Hindi (Elective) Pallav Bhag-1, “धरती माता का पत्र” (A Letter from Mother Earth), is written in the form of a heartfelt letter from Mother Earth to all her children — that is, to every human being. In the opening, she lovingly reminds her children that she is the source of their food, water, fruits, trees, rivers, mountains, air and shelter, and that every creature lives happily in her lap. She then expresses her deep pain at how human beings, blinded by selfishness and greed, are cutting down forests, polluting rivers, fouling the air with smoke and poison, hunting innocent animals and birds, and breaking apart mountains. Because of this, the balance of the Earth has been disturbed — somewhere there is drought, somewhere floods, somewhere earthquakes, and new diseases keep spreading. Mother Earth’s heart aches to see her own children suffering as a result. At the end she pleads with them to plant more trees, save water, keep the air clean, show kindness to animals and birds, and love nature. If they do this, she will once again be green, beautiful and joyful for everyone. The central message of the lesson is that protecting nature is protecting life itself, and the letter awakens in young readers a deep love for the environment and respect for their motherland.