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खेल और सेहत – Class 6 Hindi Elective Question Answer | ASSEB | पल्लव भाग-1

यहाँ ASSEB (Assam State Board of Secondary Education) कक्षा 6 के हिंदी (ऐच्छिक/तृतीय भाषा) की पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-1 के पाठ 16 – खेल और सेहत के सभी प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में दिए गए हैं। यह पाठ खेल और स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध पर आधारित है। इसमें बताया गया है कि खेल केवल मनोरंजन का साधन ही नहीं, बल्कि शरीर को स्वस्थ, मन को प्रसन्न और चरित्र को मज़बूत बनाने का सबसे अच्छा साधन भी है। नियमित खेलकूद से हमारा शरीर निरोग रहता है, मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं, बुद्धि तेज़ होती है तथा अनुशासन, सहयोग और खेल-भावना जैसे गुण विकसित होते हैं।


पाठ-परिचय (Summary)

‘खेल और सेहत’ पाठ में लेखक ने यह समझाया है कि अच्छी सेहत मनुष्य की सबसे बड़ी पूँजी है और इसे बनाए रखने का सबसे सरल उपाय है — नियमित खेलकूद। पढ़ाई के साथ-साथ खेलना उतना ही ज़रूरी है जितना भोजन करना और सोना। दिन भर केवल किताबों में डूबे रहने वाले विद्यार्थी प्रायः कमज़ोर, चिड़चिड़े और शीघ्र थकने वाले हो जाते हैं, जबकि खेलने वाले बच्चे फुर्तीले, हँसमुख और स्वस्थ रहते हैं।

खेल अनेक प्रकार के होते हैं — कुछ मैदान में खेले जाते हैं, जैसे फुटबॉल, क्रिकेट, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, दौड़ आदि; और कुछ घर के भीतर, जैसे कैरम, शतरंज, लूडो आदि। मैदानी खेलों से शरीर का व्यायाम होता है, खुली हवा और धूप मिलती है, रक्त-संचार बढ़ता है तथा फेफड़े मज़बूत बनते हैं। भीतरी खेल बुद्धि और एकाग्रता को तेज़ करते हैं। दोनों प्रकार के खेल अपने-अपने ढंग से उपयोगी हैं।

खेलों से केवल शरीर ही नहीं, चरित्र भी बनता है। टीम के साथ खेलते समय बच्चा अनुशासन, सहयोग, नेतृत्व, धैर्य, हार-जीत को समान भाव से लेने की भावना तथा खेल-भावना (sportsmanship) सीखता है। इसीलिए कहा गया है — ‘स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है‘ (A sound mind lives in a sound body)। हर विद्यार्थी को प्रतिदिन कुछ समय अवश्य खेलना चाहिए, ताकि उसका शरीर निरोग, मन प्रसन्न और जीवन सफल बने।


शब्दार्थ

शब्दअर्थ
सेहतस्वास्थ्य, तंदुरुस्ती
निरोगरोगरहित, स्वस्थ
तंदुरुस्तहृष्ट-पुष्ट, स्वस्थ
व्यायामशरीर को मज़बूत करने वाला अभ्यास, कसरत
मांसपेशीशरीर का माँस वाला भाग जो हिलाने-डुलाने में काम आता है
रक्त-संचारशरीर में खून का दौड़ना
फेफड़ासाँस लेने का अंग
एकाग्रतामन का एक जगह पर लगना
फुर्तीलातेज़, चुस्त
चिड़चिड़ाबात-बात पर ग़ुस्सा करने वाला
अनुशासननियम के अनुसार चलना
सहयोगमिलकर काम करना
नेतृत्वआगे बढ़कर सबको साथ लेकर चलना
खेल-भावनाहार-जीत को समान भाव से स्वीकार करने की भावना
मनोरंजनमन को बहलाना, ख़ुशी देना
मैदानी खेलखुले मैदान में खेले जाने वाले खेल
भीतरी खेलघर के अंदर खेले जाने वाले खेल
पूँजीधन, सबसे बड़ी संपत्ति
थकानथकावट
प्रसन्नख़ुश

अभ्यास (Question Answers)

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1: मनुष्य की सबसे बड़ी पूँजी क्या है?
(क) धन (ख) अच्छी सेहत (ग) ज्ञान (घ) समय

उत्तरः (ख) अच्छी सेहत।

प्रश्न 2: अच्छी सेहत बनाए रखने का सबसे सरल उपाय क्या है?
(क) दवा खाना (ख) सोते रहना (ग) नियमित खेलकूद (घ) टीवी देखना

उत्तरः (ग) नियमित खेलकूद।

प्रश्न 3: निम्नलिखित में से कौन-सा मैदानी खेल है?
(क) शतरंज (ख) कैरम (ग) फुटबॉल (घ) लूडो

उत्तरः (ग) फुटबॉल।

प्रश्न 4: निम्नलिखित में से कौन-सा भीतरी खेल है?
(क) कबड्डी (ख) हॉकी (ग) खो-खो (घ) शतरंज

उत्तरः (घ) शतरंज।

प्रश्न 5: मैदानी खेलों से सबसे अधिक लाभ किसे होता है?
(क) केवल मन को (ख) केवल आँखों को (ग) पूरे शरीर को (घ) किसी को नहीं

उत्तरः (ग) पूरे शरीर को।

प्रश्न 6: ‘स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है’ — यह कथन क्या बताता है?
(क) मन और शरीर अलग हैं (ख) शरीर का स्वास्थ्य ज़रूरी नहीं (ग) स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है (घ) केवल पढ़ाई ज़रूरी है

उत्तरः (ग) स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है।

अति लघु प्रश्नोत्तर (Very Short Answers)

प्रश्न 1: ‘सेहत’ शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तरः ‘सेहत’ का अर्थ है — स्वास्थ्य या तंदुरुस्ती।

प्रश्न 2: मनुष्य की सबसे बड़ी पूँजी क्या है?

उत्तरः मनुष्य की सबसे बड़ी पूँजी अच्छी सेहत है।

प्रश्न 3: खेल कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तरः खेल मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं — मैदानी खेल और भीतरी खेल।

प्रश्न 4: कोई चार मैदानी खेलों के नाम लिखो।

उत्तरः फुटबॉल, क्रिकेट, हॉकी, कबड्डी, खो-खो और दौड़ — मैदानी खेल हैं।

प्रश्न 5: कोई तीन भीतरी खेलों के नाम लिखो।

उत्तरः कैरम, शतरंज और लूडो — भीतरी खेल हैं।

प्रश्न 6: मैदानी खेलों से शरीर के किस अंग को सबसे अधिक लाभ होता है?

उत्तरः मैदानी खेलों से मांसपेशियों, हृदय और फेफड़ों को सबसे अधिक लाभ होता है।

प्रश्न 7: भीतरी खेलों से कौन-सा गुण विकसित होता है?

उत्तरः भीतरी खेलों से बुद्धि तेज़ होती है और एकाग्रता बढ़ती है।

प्रश्न 8: ‘खेल-भावना’ का क्या अर्थ है?

उत्तरः खेल-भावना का अर्थ है — हार और जीत दोनों को समान भाव से स्वीकार करना तथा खेल को नियमों के अनुसार ईमानदारी से खेलना।

रिक्त स्थान भरो

  • अच्छी सेहत मनुष्य की सबसे बड़ी पूँजी है।
  • नियमित खेलकूद से शरीर निरोग रहता है।
  • फुटबॉल और हॉकी मैदानी खेल हैं।
  • शतरंज और कैरम भीतरी खेल हैं।
  • स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है।
  • खेल से अनुशासन और सहयोग की भावना का विकास होता है।

लघु प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)

प्रश्न 1: खेल और सेहत का आपस में क्या संबंध है?

उत्तरः खेल और सेहत का बहुत गहरा संबंध है। नियमित रूप से खेलने वाला व्यक्ति शारीरिक रूप से मज़बूत, फुर्तीला और निरोग रहता है। खेल से शरीर का व्यायाम होता है, मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं, रक्त-संचार ठीक रहता है और मन भी प्रसन्न रहता है। इसीलिए कहा जाता है कि अच्छी सेहत के लिए खेलना उतना ही ज़रूरी है जितना खाना और सोना।

प्रश्न 2: मैदानी खेलों से क्या-क्या लाभ होते हैं?

उत्तरः मैदानी खेलों से शरीर का अच्छा व्यायाम होता है। खुली हवा और धूप मिलने से शरीर मज़बूत बनता है। रक्त-संचार बढ़ता है, फेफड़े स्वच्छ हवा से भरते हैं, मांसपेशियाँ पुष्ट होती हैं और भूख खुलकर लगती है। इसके अलावा साथी खिलाड़ियों के साथ खेलने से मित्रता, सहयोग और टीम-भावना का विकास भी होता है।

प्रश्न 3: भीतरी खेलों से क्या लाभ होते हैं?

उत्तरः भीतरी खेल जैसे शतरंज, कैरम और लूडो से मुख्यतः बुद्धि और एकाग्रता का विकास होता है। ये खेल हमें सोच-विचार कर निर्णय लेना, धैर्य रखना और चालाकी से योजना बनाना सिखाते हैं। बारिश, धूप या रात के समय जब बाहर खेलना संभव नहीं होता, तब ये खेल मनोरंजन का अच्छा साधन भी बनते हैं।

प्रश्न 4: खेल से कौन-कौन से चारित्रिक गुण विकसित होते हैं?

उत्तरः खेल से अनेक चारित्रिक गुण विकसित होते हैं — अनुशासन, सहयोग, धैर्य, साहस, ईमानदारी, नेतृत्व-शक्ति और खेल-भावना। टीम के साथ खेलने पर बच्चा हार और जीत दोनों को समान भाव से स्वीकार करना सीखता है तथा अपने साथियों के साथ मिल-जुलकर रहना सीखता है।

प्रश्न 5: ‘स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है’ — इस कथन का क्या तात्पर्य है?

उत्तरः इस कथन का तात्पर्य है कि यदि हमारा शरीर रोगी, कमज़ोर और थका हुआ हो तो हमारा मन भी ठीक से काम नहीं करता। केवल स्वस्थ और निरोग शरीर में ही प्रसन्न, शांत और एकाग्र मन रह सकता है। इसलिए मानसिक विकास के लिए शारीरिक स्वास्थ्य का होना आवश्यक है, और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नियमित खेलकूद आवश्यक है।

प्रश्न 6: केवल पढ़ाई करते रहने वाले विद्यार्थी की क्या दशा होती है?

उत्तरः जो विद्यार्थी दिन भर केवल किताबों में डूबे रहते हैं और खेल-कूद से दूर रहते हैं, वे प्रायः कमज़ोर, चिड़चिड़े, सुस्त और शीघ्र थकने वाले हो जाते हैं। उन्हें भूख कम लगती है, नींद ठीक से नहीं आती और उनका स्वास्थ्य धीरे-धीरे ख़राब हो जाता है। ऐसे विद्यार्थी पढ़ाई में भी ध्यान नहीं लगा पाते।

दीर्घ प्रश्नोत्तर (Long Answer Questions)

प्रश्न 1: ‘खेल और सेहत’ पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखो।

उत्तरः इस पाठ में लेखक ने यह समझाया है कि अच्छी सेहत मनुष्य की सबसे बड़ी पूँजी है और इसे बनाए रखने का सबसे सरल उपाय है — नियमित खेलकूद। पढ़ाई जितनी ज़रूरी है, खेलना भी उतना ही ज़रूरी है। खेल दो प्रकार के होते हैं — मैदानी और भीतरी। मैदानी खेलों जैसे फुटबॉल, क्रिकेट, हॉकी, कबड्डी और खो-खो से शरीर का व्यायाम होता है, खुली हवा और धूप मिलती है, रक्त-संचार बढ़ता है तथा फेफड़े और मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं। भीतरी खेलों जैसे शतरंज, कैरम और लूडो से बुद्धि और एकाग्रता का विकास होता है। खेल केवल शरीर ही नहीं, चरित्र भी बनाता है — इससे अनुशासन, सहयोग, धैर्य, नेतृत्व और खेल-भावना जैसे गुण विकसित होते हैं। इसीलिए कहा गया है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है। हर विद्यार्थी को प्रतिदिन कुछ समय अवश्य खेलना चाहिए।

प्रश्न 2: खेलों से होने वाले लाभों का विस्तार से वर्णन करो।

उत्तरः खेलों से अनेक लाभ होते हैं —

  • शारीरिक लाभ — शरीर मज़बूत और निरोग रहता है, मांसपेशियाँ पुष्ट होती हैं, रक्त-संचार बढ़ता है, फेफड़े स्वस्थ रहते हैं और भूख खुलकर लगती है।
  • मानसिक लाभ — मन प्रसन्न और तरोताज़ा रहता है, थकान दूर होती है, बुद्धि तेज़ होती है तथा एकाग्रता बढ़ती है।
  • चारित्रिक लाभ — खेल से अनुशासन, सहयोग, धैर्य, साहस, नेतृत्व और खेल-भावना जैसे गुण विकसित होते हैं।
  • सामाजिक लाभ — साथी खिलाड़ियों के साथ खेलने से मित्रता बढ़ती है और मिल-जुलकर रहने की आदत पड़ती है।
  • मनोरंजक लाभ — खेल पढ़ाई की थकान को दूर करते हैं और जीवन में आनंद भरते हैं।

प्रश्न 3: मैदानी खेलों और भीतरी खेलों में क्या अंतर है? उदाहरण सहित समझाओ।

उत्तरः मैदानी और भीतरी खेलों में मुख्य अंतर इस प्रकार है —

आधारमैदानी खेलभीतरी खेल
स्थानखुले मैदान में खेले जाते हैंघर के भीतर खेले जाते हैं
उदाहरणफुटबॉल, क्रिकेट, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, दौड़शतरंज, कैरम, लूडो, ताश
मुख्य लाभशारीरिक — व्यायाम, स्फूर्ति, मांसपेशियों की मज़बूतीमानसिक — बुद्धि और एकाग्रता का विकास
हवा-धूपखुली हवा और धूप मिलती हैहवा-धूप नहीं मिलती
खिलाड़ियों की संख्याप्रायः अधिक खिलाड़ियों के साथ टीम में खेले जाते हैंदो या कुछ खिलाड़ियों के बीच खेले जाते हैं

दोनों प्रकार के खेल अपने-अपने ढंग से उपयोगी हैं। मैदानी खेल शरीर को और भीतरी खेल मन-बुद्धि को मज़बूत करते हैं। इसलिए विद्यार्थी को दोनों प्रकार के खेल खेलने चाहिए।


व्याकरण (Grammar)

वचन बदलो

एकवचनबहुवचन
खेलखेल
लड़कालड़के
लड़कीलड़कियाँ
मांसपेशीमांसपेशियाँ
किताबकिताबें
खिलाड़ीखिलाड़ी

विलोम शब्द

शब्दविलोम
स्वस्थअस्वस्थ
हारजीत
सुखदुख
निरोगरोगी
प्रसन्नउदास
लाभहानि

पर्यायवाची शब्द

शब्दपर्यायवाची
सेहतस्वास्थ्य, तंदुरुस्ती
शरीरदेह, तन, काया
खेलक्रीड़ा, खेल-कूद
मनहृदय, चित्त
निरोगस्वस्थ, तंदुरुस्त

Summary (English)

Lesson 16 of ASSEB Class 6 Hindi (Elective) Pallav Bhag-1, “खेल और सेहत” (Games and Health), explains the close relationship between regular play and good health. Good health is described as a person’s greatest wealth, and the simplest way to maintain it is regular sports and games. The lesson divides games into two kinds — outdoor games such as football, cricket, hockey, kabaddi, kho-kho and running, which exercise the body, strengthen muscles, improve blood circulation and keep the lungs healthy; and indoor games such as chess, carrom and ludo, which sharpen intelligence and concentration. Games not only build the body but also develop important character traits like discipline, cooperation, patience, leadership and sportsmanship — the spirit of accepting victory and defeat with the same calm. Students who only study and never play often grow weak, dull and irritable, while those who play regularly remain cheerful, energetic and alert. The lesson reminds us of the saying “a sound mind lives in a sound body” and concludes that every student must spend some time playing every day so that the body stays healthy, the mind stays happy and life becomes truly successful.

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