यहाँ ASSEB (Assam State Board of Secondary Education) कक्षा 6 के हिंदी (ऐच्छिक/तृतीय भाषा) की पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-1 के पाठ 13 – मन के जीते जीत के सभी प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में दिए गए हैं। यह पाठ प्रसिद्ध कहावत “मन के जीते जीत, मन के हारे हार” पर आधारित एक प्रेरक निबंधनुमा गद्य है। इसमें बताया गया है कि किसी भी काम में सफलता या असफलता का सबसे बड़ा कारण हमारा अपना मन ही है। यदि मन में दृढ़ संकल्प (इच्छा-शक्ति) हो तो कठिन से कठिन काम भी सरल हो जाता है, और यदि मन हार मान ले तो आसान-सा काम भी असंभव लगने लगता है।
पाठ-परिचय (Summary)
“मन के जीते जीत” पाठ में लेखक ने यह समझाया है कि मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ा शत्रु और सबसे बड़ा मित्र दोनों उसका अपना मन है। यदि मन हार जाए तो छोटी-सी कठिनाई भी पहाड़ जैसी लगने लगती है, और यदि मन में जीतने का दृढ़ निश्चय हो तो बड़ी-से-बड़ी विपत्ति भी आसान हो जाती है। इसलिए कहा गया है — “मन के जीते जीत, मन के हारे हार।”
लेखक उदाहरण देकर बताते हैं कि संसार में जितने भी महान् व्यक्ति हुए हैं — महात्मा गांधी, नेपोलियन, अब्राहम लिंकन, हेलेन केलर आदि — सबने अपने मन की शक्ति से ही असंभव को संभव कर दिखाया। उनके सामने अनेक कठिनाइयाँ आईं, परंतु उन्होंने मन से हार नहीं मानी और निरंतर परिश्रम करते रहे। यही कारण है कि वे इतिहास में अमर हो गए। इसके विपरीत, जो लोग पहले से ही “यह मुझसे नहीं होगा” कहकर बैठ जाते हैं, वे जीवन में कुछ भी प्राप्त नहीं कर पाते।
पाठ का संदेश यह है कि विद्यार्थी को कभी भी अपने मन को कमज़ोर नहीं करना चाहिए। पढ़ाई हो, खेल हो या जीवन का कोई भी क्षेत्र — सफलता का मूल मंत्र है आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास। मन में यदि उत्साह और साहस हो, तो सफलता निश्चित रूप से कदम चूमती है। इसलिए हमें सदा सकारात्मक सोच रखकर मन को विजयी बनाना चाहिए।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| मन | हृदय, चित्त, अंतःकरण |
| जीत | विजय, सफलता |
| हार | पराजय, असफलता |
| दृढ़ | मज़बूत, पक्का |
| संकल्प | दृढ़ निश्चय, ठान लेना |
| इच्छा-शक्ति | मन की मज़बूती, willpower |
| परिश्रम | मेहनत |
| आत्मविश्वास | अपने ऊपर भरोसा |
| उत्साह | जोश, उमंग |
| साहस | हिम्मत, बहादुरी |
| विपत्ति | संकट, मुसीबत |
| कठिनाई | मुश्किल |
| असंभव | जो संभव न हो |
| संभव | हो सकने वाला |
| निरंतर | लगातार, बिना रुके |
| महान् | बहुत बड़ा, श्रेष्ठ |
| अमर | जो कभी न मरे, सदा याद रखा जाए |
| शत्रु | दुश्मन |
| मित्र | दोस्त |
| सकारात्मक | अच्छी सोच वाला, positive |
| नकारात्मक | बुरी सोच वाला, negative |
| विजयी | जीतने वाला |
| कमज़ोर | दुर्बल |
| प्रेरणा | उत्साह देने वाली बात |
अभ्यास (Question Answers)
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
प्रश्न 1: “मन के जीते जीत, मन के हारे ___।” रिक्त स्थान भरो —
(क) जीत (ख) हार (ग) खेल (घ) काम
उत्तरः (ख) हार।
प्रश्न 2: मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु और सबसे बड़ा मित्र कौन है?
(क) उसका भाई (ख) उसका धन (ग) उसका मन (घ) उसका शरीर
उत्तरः (ग) उसका मन।
प्रश्न 3: जीवन में सफलता का मूल मंत्र क्या है?
(क) आलस्य (ख) निराशा (ग) दृढ़ संकल्प और परिश्रम (घ) भाग्य
उत्तरः (ग) दृढ़ संकल्प और परिश्रम।
प्रश्न 4: निम्न में से कौन-सा महान् व्यक्ति इच्छा-शक्ति का उदाहरण है?
(क) महात्मा गांधी (ख) हेलेन केलर (ग) अब्राहम लिंकन (घ) उपर्युक्त सभी
उत्तरः (घ) उपर्युक्त सभी।
प्रश्न 5: जो व्यक्ति “यह मुझसे नहीं होगा” कहकर बैठ जाता है, वह जीवन में —
(क) सफल होता है (ख) कुछ भी प्राप्त नहीं कर पाता (ग) धनी बनता है (घ) महान् बनता है
उत्तरः (ख) कुछ भी प्राप्त नहीं कर पाता।
प्रश्न 6: ‘इच्छा-शक्ति’ का अर्थ है —
(क) शरीर का बल (ख) धन की शक्ति (ग) मन की दृढ़ता (घ) मित्रों की सहायता
उत्तरः (ग) मन की दृढ़ता।
अति लघु प्रश्नोत्तर (Very Short Answers)
प्रश्न 1: इस पाठ का शीर्षक क्या है?
उत्तरः इस पाठ का शीर्षक है — “मन के जीते जीत”।
प्रश्न 2: पूरी कहावत क्या है?
उत्तरः पूरी कहावत है — “मन के जीते जीत, मन के हारे हार।”
प्रश्न 3: इस कहावत का क्या अर्थ है?
उत्तरः इसका अर्थ है — यदि मन ने जीतने का निश्चय कर लिया तो जीत निश्चित है, और यदि मन हार मान ले तो हार निश्चित है। अर्थात् सफलता और असफलता मन पर ही निर्भर करती है।
प्रश्न 4: मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु कौन है?
उत्तरः मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका अपना कमज़ोर मन है।
प्रश्न 5: मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र कौन है?
उत्तरः मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र उसका अपना दृढ़ और सकारात्मक मन है।
प्रश्न 6: ‘इच्छा-शक्ति’ किसे कहते हैं?
उत्तरः मन की उस दृढ़ता को ‘इच्छा-शक्ति’ कहते हैं, जिसके बल पर मनुष्य कठिन-से-कठिन काम कर लेता है।
प्रश्न 7: पाठ में किन-किन महान् व्यक्तियों के उदाहरण दिए गए हैं?
उत्तरः पाठ में महात्मा गांधी, नेपोलियन, अब्राहम लिंकन और हेलेन केलर जैसे महान् व्यक्तियों के उदाहरण दिए गए हैं।
प्रश्न 8: सफलता का मूल मंत्र क्या है?
उत्तरः सफलता का मूल मंत्र है — आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और निरंतर परिश्रम।
लघु प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)
प्रश्न 1: “मन के जीते जीत, मन के हारे हार” का भाव अपने शब्दों में लिखो।
उत्तरः इस कहावत का भाव यह है कि किसी भी काम में जीत-हार का असली कारण हमारा मन है। यदि हम मन से ठान लें कि हम यह काम कर के रहेंगे, तो कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ, हम सफल हो जाते हैं। परंतु यदि शुरू में ही मन हार मान ले — “यह मुझसे नहीं होगा” — तो आसान काम भी असंभव लगने लगता है। इसलिए जीवन में सच्ची विजय वही है जो मन की विजय हो।
प्रश्न 2: हार मान लेने वाले व्यक्ति का जीवन कैसा होता है?
उत्तरः हार मान लेने वाले व्यक्ति का जीवन निराशा और असफलता से भरा होता है। ऐसा व्यक्ति किसी काम में हाथ डालने से पहले ही “मुझसे नहीं होगा” कहकर बैठ जाता है। उसका आत्मविश्वास टूट जाता है, उत्साह समाप्त हो जाता है और वह जीवन में कोई बड़ी सफलता प्राप्त नहीं कर पाता। ऐसे लोग दूसरों पर भार बन जाते हैं।
प्रश्न 3: दृढ़ इच्छा-शक्ति वाले व्यक्ति किस प्रकार सफल होते हैं?
उत्तरः दृढ़ इच्छा-शक्ति वाले व्यक्ति हर कठिनाई का सामना साहस से करते हैं। वे विपत्ति में भी हिम्मत नहीं हारते, बल्कि निरंतर परिश्रम करते रहते हैं। उनके मन में यह विश्वास होता है कि “मैं यह काम कर सकता हूँ”। इसी आत्मविश्वास और मेहनत के कारण असंभव लगने वाले कार्य भी संभव हो जाते हैं और वे जीवन में महान् सफलता पाते हैं।
प्रश्न 4: महात्मा गांधी का उदाहरण देकर समझाओ कि मन की शक्ति कितनी बड़ी होती है।
उत्तरः महात्मा गांधी एक दुबले-पतले व्यक्ति थे, परंतु उनके मन में दृढ़ संकल्प था कि वे भारत को अंग्रेज़ों की दासता से मुक्त कराएँगे। उन्होंने बिना हथियार उठाए, सत्य और अहिंसा के बल पर एक विशाल साम्राज्य को हिला दिया। यह केवल उनकी अद्भुत मन-शक्ति का प्रमाण है। यदि उनका मन कमज़ोर होता तो वे इतना बड़ा कार्य कभी न कर पाते।
प्रश्न 5: हेलेन केलर का उदाहरण इस पाठ में क्यों दिया गया है?
उत्तरः हेलेन केलर बचपन से ही अंधी, बहरी और गूँगी थीं — फिर भी उन्होंने अपने दृढ़ मनोबल और अथक परिश्रम से उच्च शिक्षा प्राप्त की और संसार-प्रसिद्ध लेखिका बनीं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि शरीर की कमज़ोरी कभी आड़े नहीं आती, यदि मन मज़बूत हो। इसी कारण लेखक ने उन्हें इच्छा-शक्ति के आदर्श उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है।
प्रश्न 6: विद्यार्थियों के लिए इस पाठ में क्या संदेश है?
उत्तरः विद्यार्थियों के लिए इस पाठ का संदेश है कि वे कभी भी अपने मन को कमज़ोर न होने दें। पढ़ाई कठिन लगे या परीक्षा का डर हो, “मुझसे नहीं होगा” कभी न सोचें। मन में दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और लगातार मेहनत हो तो हर विषय में सफलता मिल सकती है। मन को विजयी बनाओ — सफलता स्वयं आपके पास आएगी।
दीर्घ प्रश्नोत्तर (Long Answer Questions)
प्रश्न 1: “मन के जीते जीत, मन के हारे हार” — इस कहावत पर अपने शब्दों में एक छोटा निबंध लिखो।
उत्तरः मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी शक्ति उसका मन है। शरीर भले ही दुर्बल हो, परंतु यदि मन में जीतने का दृढ़ संकल्प हो, तो असंभव भी संभव हो जाता है। इसी सत्य को बताने वाली प्रसिद्ध कहावत है — “मन के जीते जीत, मन के हारे हार।” इसका अर्थ है कि जीत और हार बाहरी कारणों से नहीं, बल्कि हमारे अपने मन से तय होती है। जो मन हार मान बैठा, उसके लिए छोटा-सा काम भी पहाड़ बन जाता है; और जिसका मन विजय की भावना से भरा है, उसके लिए बड़ी-से-बड़ी विपत्ति भी आसान हो जाती है। इतिहास में महात्मा गांधी, नेपोलियन, अब्राहम लिंकन, हेलेन केलर — सभी इसी मन-शक्ति के प्रतीक हैं। उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, परंतु उन्होंने मन से हार नहीं मानी। इसलिए हम सबको चाहिए कि हम अपने मन को सकारात्मक, साहसी और दृढ़ बनाएँ। जब मन जीतेगा, तभी असली जीत होगी।
प्रश्न 2: पाठ से हमें क्या-क्या शिक्षाएँ मिलती हैं?
उत्तरः इस पाठ से हमें कई महत्त्वपूर्ण शिक्षाएँ मिलती हैं —
- मन ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है — शरीर से अधिक मन की मज़बूती मायने रखती है।
- हार-जीत का कारण मन है — बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, हमारी सोच ही जीत और हार तय करती है।
- आत्मविश्वास रखो — “मैं कर सकता हूँ” यह भाव मन में रखना चाहिए।
- निराशा से दूर रहो — कभी “मुझसे नहीं होगा” मत कहो।
- निरंतर परिश्रम करो — प्रयास करते रहने से कठिन काम भी संभव हो जाते हैं।
- महापुरुषों से प्रेरणा लो — गांधी, लिंकन, हेलेन केलर जैसे लोगों के जीवन से सीख लेकर हमें भी आगे बढ़ना चाहिए।
- सकारात्मक सोच रखो — सकारात्मक मन ही सफलता का मार्ग खोलता है।
प्रश्न 3: किसी ऐसे व्यक्ति का उदाहरण दो जिसने अपने मन की शक्ति से बड़ा काम कर दिखाया।
उत्तरः इसका सबसे सुंदर उदाहरण हेलेन केलर हैं। डेढ़ वर्ष की आयु में ही एक भयंकर बीमारी के कारण वे देख नहीं सकती थीं, सुन नहीं सकती थीं और बोल भी नहीं सकती थीं। ऐसी अवस्था में किसी का भी मन हार जाए — परंतु हेलेन ने हार नहीं मानी। अपनी शिक्षिका सुश्री एनी सुलिवन की सहायता से उन्होंने स्पर्श और संकेतों के द्वारा भाषा सीखी, फिर पढ़ना-लिखना सीखा। आगे चलकर उन्होंने विश्वविद्यालय की डिग्री प्राप्त की, अनेक पुस्तकें लिखीं और संसार भर के विकलांग बच्चों के लिए कार्य किया। यदि उनका मन कमज़ोर होता तो वे एक साधारण-सी ज़िंदगी भी न जी पातीं; परंतु उनके दृढ़ मन ने उन्हें संसार-प्रसिद्ध बना दिया। यही “मन के जीते जीत” का सच्चा प्रमाण है।
व्याकरण (Grammar)
विलोम शब्द
| शब्द | विलोम |
|---|---|
| जीत | हार |
| मित्र | शत्रु |
| सफलता | असफलता |
| संभव | असंभव |
| सकारात्मक | नकारात्मक |
| साहस | कायरता |
| उत्साह | निराशा |
| दृढ़ | कमज़ोर |
वचन बदलो
| एकवचन | बहुवचन |
|---|---|
| मन | मन |
| मित्र | मित्रों |
| व्यक्ति | व्यक्तियों |
| कठिनाई | कठिनाइयाँ |
| शक्ति | शक्तियाँ |
| बात | बातें |
रिक्त स्थान भरो
- मन के जीते जीत, मन के हारे हार।
- मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका अपना मन है।
- सफलता का मूल मंत्र दृढ़ संकल्प और परिश्रम है।
- हेलेन केलर ने अपनी इच्छा-शक्ति से असंभव को संभव कर दिखाया।
- हमें कभी भी “मुझसे नहीं होगा” नहीं कहना चाहिए।
- मन को सदा सकारात्मक रखना चाहिए।
Summary (English)
Lesson 13 of ASSEB Class 6 Hindi (Elective) Pallav Bhag-1, “मन के जीते जीत” (Victory Belongs to a Determined Mind), is a motivational prose piece based on the famous Hindi proverb “मन के जीते जीत, मन के हारे हार” — meaning, if your mind wins, you win; if your mind gives up, you lose. The lesson explains that the biggest friend and the biggest enemy of a human being is his own mind. With a strong, confident and determined mind even the most difficult tasks become easy, but with a weak and negative mind even simple tasks feel impossible. The author cites great personalities like Mahatma Gandhi, Napoleon, Abraham Lincoln and Helen Keller, who achieved historic success purely through the strength of their willpower despite countless hardships. The central message for students is clear — never tell yourself “I cannot do this.” With self-confidence, firm resolve and continuous hard work, success is certain. Therefore, every student should keep the mind positive, courageous and determined, because true victory in life is the victory of the mind.