यहाँ ASSEB (Assam State Board of Secondary Education) कक्षा 6 के हिंदी (ऐच्छिक/तृतीय भाषा) की पाठ्यपुस्तक पल्लव भाग-1 के पाठ 10 – बाघ और बटोही के सभी प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में दिए गए हैं। यह पाठ एक प्रसिद्ध लोक-कथा पर आधारित है, जिसमें एक बूढ़ा बाघ सोने का कंगन दिखाकर एक लालची बटोही (राहगीर) को अपने जाल में फँसाता है। यह कहानी हमें यह शिक्षा देती है कि लालच बुरी बला है तथा शत्रु की मीठी बातों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।
पाठ-परिचय (Summary)
एक घने जंगल में एक बूढ़ा बाघ रहता था। बुढ़ापे के कारण उसके दाँत और पंजे कमज़ोर हो गए थे, इसलिए वह तेज़ दौड़कर शिकार नहीं पकड़ सकता था। एक दिन उसने एक चालाक तरकीब सोची। उसने अपने पंजे में सोने का एक चमकीला कंगन लिया और तालाब के किनारे बैठकर ज़ोर-ज़ोर से पुकारने लगा — “अरे भाई! कोई है? यह सोने का कंगन ले लो, मैं इसे दान में देना चाहता हूँ।”
उसी समय उधर से एक बटोही (राहगीर) गुज़र रहा था। बाघ की आवाज़ सुनकर वह रुक गया। सोने के कंगन का लालच उसके मन में जाग उठा। उसने सोचा — “बाघ बूढ़ा है, मैं चालाकी से कंगन ले लूँगा।” बाघ ने उसे विश्वास दिलाने के लिए कहा कि अब वह माँस नहीं खाता, तीर्थ-यात्रा कर चुका है और दान-धर्म में विश्वास रखता है। उसने बटोही से कहा कि वह तालाब में स्नान करके आए और फिर कंगन ले जाए। बटोही लालच में आकर तालाब में उतर पड़ा।
तालाब में उतरते ही बटोही गहरी दलदल में फँस गया। वह जितना बाहर निकलने की कोशिश करता, उतना ही धँसता जाता। तभी बाघ धीरे-धीरे उसके पास पहुँचा और बोला — “अब तुम कहाँ जाओगे?” बटोही बहुत पछताया, परंतु अब कुछ नहीं हो सकता था। बाघ ने उसे मार डाला। इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि लालच बुरी बला है और शत्रु की मीठी-मीठी बातों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। साथ ही यह भी कि बिना सोचे-समझे किसी काम में हाथ डालना विनाश का कारण बनता है।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| बटोही | राहगीर, यात्री, बाटोह |
| कंगन | हाथ में पहनने का गहना |
| बूढ़ा | वृद्ध, बुज़ुर्ग |
| पंजा | हाथ या पैर का सामने का हिस्सा |
| दान | बिना कुछ लिए कुछ देना |
| तीर्थ-यात्रा | पवित्र स्थानों की यात्रा |
| लालच | लोभ, अधिक पाने की इच्छा |
| लालची | लोभी, अधिक पाने की इच्छा रखने वाला |
| दलदल | कीचड़ भरी ज़मीन जिसमें पैर धँस जाए |
| धँसना | नीचे की ओर जाना, फँस जाना |
| तालाब | पोखर, छोटा जलाशय |
| स्नान | नहाना |
| शिकार | पकड़ा गया जानवर, आखेट |
| चालाक | चतुर, धूर्त |
| तरकीब | उपाय, युक्ति |
| विश्वास | भरोसा, यकीन |
| शत्रु | दुश्मन, बैरी |
| पछताना | अफ़सोस करना |
| घना | बहुत पेड़ों वाला, बहुत अधिक |
| चमकीला | चमकता हुआ |
अभ्यास (Question Answers)
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
प्रश्न 1: बाघ कहाँ रहता था?
(क) पहाड़ पर (ख) घने जंगल में (ग) गाँव में (घ) नदी के किनारे
उत्तरः (ख) घने जंगल में।
प्रश्न 2: बाघ अपने पंजे में क्या लिए बैठा था?
(क) चाँदी का कंगन (ख) सोने का कंगन (ग) हीरे की अँगूठी (घ) मोतियों की माला
उत्तरः (ख) सोने का कंगन।
प्रश्न 3: बाघ कंगन का क्या करना चाहता था?
(क) बेचना (ख) पहनना (ग) दान में देना (घ) छिपाना
उत्तरः (ग) दान में देना (यही उसने कहा था)।
प्रश्न 4: बटोही किस कारण बाघ की बातों में आ गया?
(क) डर के कारण (ख) दया के कारण (ग) लालच के कारण (घ) मित्रता के कारण
उत्तरः (ग) लालच के कारण।
प्रश्न 5: बाघ ने बटोही को कहाँ जाकर स्नान करने को कहा?
(क) नदी में (ख) तालाब में (ग) कुएँ में (घ) झरने में
उत्तरः (ख) तालाब में।
प्रश्न 6: बटोही तालाब में उतरते ही किसमें फँस गया?
(क) मछली के जाल में (ख) दलदल में (ग) पत्थरों में (घ) काँटों में
उत्तरः (ख) दलदल में।
प्रश्न 7: इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?
(क) मेहनत करनी चाहिए (ख) लालच बुरी बला है (ग) सच बोलना चाहिए (घ) दान देना चाहिए
उत्तरः (ख) लालच बुरी बला है।
अति लघु प्रश्नोत्तर (Very Short Answers)
प्रश्न 1: ‘बटोही’ किसे कहते हैं?
उत्तरः रास्ते से गुज़रने वाले यात्री या राहगीर को बटोही कहते हैं।
प्रश्न 2: बाघ बूढ़ा क्यों हो गया था?
उत्तरः बहुत वर्ष बीत जाने के कारण बाघ बूढ़ा हो गया था और उसके दाँत तथा पंजे कमज़ोर पड़ गए थे।
प्रश्न 3: बाघ ने अपने पंजे में क्या ले रखा था?
उत्तरः बाघ ने अपने पंजे में सोने का एक चमकीला कंगन ले रखा था।
प्रश्न 4: बाघ ने बटोही से क्या कहा?
उत्तरः बाघ ने बटोही से कहा कि वह सोने का कंगन उसे दान में देना चाहता है, इसलिए वह तालाब में स्नान करके आए और कंगन ले जाए।
प्रश्न 5: बटोही तालाब में क्यों उतरा?
उत्तरः बटोही सोने के कंगन के लालच में आकर बाघ की बात मानकर स्नान करने के लिए तालाब में उतरा।
प्रश्न 6: तालाब में उतरते ही बटोही के साथ क्या हुआ?
उत्तरः तालाब में उतरते ही बटोही गहरी दलदल में फँस गया और बाहर नहीं निकल सका।
प्रश्न 7: अंत में बटोही का क्या हुआ?
उत्तरः अंत में बाघ ने दलदल में फँसे बटोही को मार डाला।
प्रश्न 8: इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तरः इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि लालच बुरी बला है तथा शत्रु की मीठी बातों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।
रिक्त स्थान भरो
- एक घने जंगल में एक बूढ़ा बाघ रहता था।
- बाघ के पंजे में सोने का कंगन था।
- बाघ ने कहा कि वह कंगन दान में देना चाहता है।
- बटोही लालच में आकर तालाब में उतरा।
- बटोही तालाब के दलदल में फँस गया।
- अंत में बाघ ने बटोही को मार डाला।
- लालच बुरी बला है।
सही/ग़लत बताओ
- बाघ जवान और शक्तिशाली था। — ग़लत
- बाघ के पंजे में सोने का कंगन था। — सही
- बटोही ने बाघ की बात पर विश्वास नहीं किया। — ग़लत
- बटोही तालाब में स्नान करने उतरा। — सही
- बटोही दलदल में फँस गया। — सही
- अंत में बटोही कंगन लेकर सकुशल लौट आया। — ग़लत
किसने किससे कहा?
(क) “अरे भाई! यह सोने का कंगन ले लो, मैं इसे दान में देना चाहता हूँ।”
उत्तरः यह बूढ़े बाघ ने बटोही (राहगीर) से कहा।
(ख) “मैं अब माँस नहीं खाता, तीर्थ-यात्रा कर चुका हूँ, दान-धर्म में विश्वास रखता हूँ।”
उत्तरः यह बाघ ने बटोही से कहा ताकि उस पर विश्वास हो जाए।
(ग) “पहले तालाब में स्नान कर लो, फिर आकर कंगन ले जाना।”
उत्तरः यह बाघ ने बटोही से कहा।
(घ) “अब तुम कहाँ जाओगे?”
उत्तरः यह बाघ ने दलदल में फँसे बटोही से कहा।
लघु प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)
प्रश्न 1: बाघ ने सोने का कंगन दिखाकर क्यों बैठा था?
उत्तरः बाघ बूढ़ा हो गया था और उसके दाँत तथा पंजे कमज़ोर पड़ गए थे, इसलिए वह दौड़कर शिकार नहीं कर सकता था। उसने सोने का कंगन दिखाकर लोगों को लालच में फँसाने की चालाक तरकीब सोची, ताकि कोई लालची व्यक्ति उसके पास आए और वह उसे आसानी से अपना शिकार बना सके।
प्रश्न 2: बटोही ने बाघ की बातों पर विश्वास क्यों कर लिया?
उत्तरः बटोही बहुत लालची था। बाघ ने मीठी-मीठी बातें कीं — कहा कि वह अब माँस नहीं खाता, तीर्थ-यात्रा कर चुका है और दान-धर्म में विश्वास रखता है। सोने के कंगन के लालच ने बटोही की बुद्धि पर पर्दा डाल दिया, इसीलिए उसने बाघ की बातों पर विश्वास कर लिया।
प्रश्न 3: तालाब में उतरने पर बटोही के साथ क्या-क्या हुआ?
उत्तरः जैसे ही बटोही स्नान करने के लिए तालाब में उतरा, वह गहरी दलदल में फँस गया। वह जितना बाहर निकलने की कोशिश करता, उतना ही नीचे धँसता जाता। तभी बूढ़ा बाघ धीरे-धीरे उसके पास पहुँचा और अंत में उसने बटोही को मार डाला।
प्रश्न 4: बाघ की चालाकी का वर्णन करो।
उत्तरः बाघ ने पहले सोने का चमकीला कंगन उठाकर पुकार लगाई ताकि कोई आकर्षित हो। फिर उसने धर्म-कर्म और तीर्थ-यात्रा की मीठी बातें करके बटोही का विश्वास जीता। अंत में स्नान का बहाना बनाकर उसने बटोही को तालाब के दलदल में उतारा, जहाँ बटोही फँस गया और बाघ ने आसानी से उसका शिकार कर लिया। इस प्रकार बाघ ने अपनी कमज़ोरी को चालाकी से ढक लिया।
प्रश्न 5: बटोही ने अंत में क्यों पछताया?
उत्तरः जब बटोही दलदल में फँस गया और कितनी भी कोशिश करने पर बाहर नहीं निकल सका, तब उसे समझ में आया कि बाघ की मीठी बातों में आना उसकी सबसे बड़ी भूल थी। सोने के कंगन के लालच ने उसकी जान ले ली। इसलिए उसने पछताया, परंतु अब समय हाथ से निकल चुका था।
दीर्घ प्रश्नोत्तर (Long Answer Questions)
प्रश्न 1: ‘बाघ और बटोही’ कहानी को अपने शब्दों में लिखो।
उत्तरः एक घने जंगल में एक बूढ़ा बाघ रहता था। बुढ़ापे के कारण उसके दाँत और पंजे कमज़ोर हो गए थे, इसलिए वह दौड़कर शिकार नहीं कर सकता था। एक दिन उसने एक चालाक तरकीब सोची। उसने अपने पंजे में सोने का चमकीला कंगन लिया और तालाब के किनारे बैठकर पुकारने लगा कि वह यह कंगन दान में देना चाहता है। उसी समय वहाँ से एक बटोही गुज़र रहा था। सोने के कंगन को देखकर उसके मन में लालच जाग गया। बाघ ने मीठी-मीठी बातें कीं — कहा कि वह अब माँस नहीं खाता, तीर्थ-यात्रा कर चुका है, दान-धर्म में विश्वास रखता है, और बटोही से कहा कि पहले तालाब में स्नान कर ले फिर कंगन ले जाए। बटोही लालच में आकर तालाब में उतरा, परंतु वहाँ की गहरी दलदल में फँस गया। वह जितना निकलने की कोशिश करता, उतना ही धँसता जाता। बाघ धीरे-धीरे उसके पास पहुँचा और बोला — “अब तुम कहाँ जाओगे?” बटोही बहुत पछताया, परंतु अब कुछ भी नहीं हो सकता था। बाघ ने उसे मार डाला। इस प्रकार लालच के कारण बटोही ने अपनी जान गँवा दी।
प्रश्न 2: इस कहानी से हमें क्या-क्या शिक्षाएँ मिलती हैं?
उत्तरः इस कहानी से हमें कई महत्वपूर्ण शिक्षाएँ मिलती हैं —
- लालच बुरी बला है — लालच के कारण मनुष्य अपनी बुद्धि खो बैठता है और अंत में पछताना पड़ता है।
- शत्रु की मीठी बातों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए — जैसे बाघ ने धर्म-कर्म की बातें करके बटोही को धोखा दिया।
- बिना सोचे-समझे कोई काम नहीं करना चाहिए — किसी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति की बात पर तुरंत भरोसा करना ख़तरनाक है।
- मुफ़्त की चीज़ के पीछे भागना घातक हो सकता है — जो वस्तु बहुत आसानी से मिल रही हो, उसके पीछे कोई-न-कोई धोखा छिपा हो सकता है।
- विवेक से काम लेना चाहिए — हर परिस्थिति में बुद्धि और सावधानी से निर्णय लेना चाहिए।
प्रश्न 3: बूढ़े बाघ और बटोही के स्वभाव की तुलना करो।
उत्तरः बाघ बूढ़ा होने पर भी बहुत चालाक और धूर्त था। शारीरिक रूप से कमज़ोर होने के बाद भी उसने अपनी बुद्धि से शिकार करने का उपाय निकाला। उसने धर्म और दान का बहाना बनाकर बटोही को धोखा दिया। दूसरी ओर, बटोही अत्यंत लालची और मूर्ख था। उसने थोड़ी-सी चमक देखकर बाघ की बातों पर विश्वास कर लिया और सोच-विचार किए बिना तालाब में उतर गया। बाघ की चालाकी और बटोही के लालच — दोनों ने मिलकर बटोही के विनाश का कारण बने। इस प्रकार कहानी यह बताती है कि चालाक शत्रु से सावधान रहना और अपने मन के लालच पर नियंत्रण रखना ही बुद्धिमानी है।
प्रश्न 4: यदि बटोही के स्थान पर तुम होते तो क्या करते?
उत्तरः यदि मैं बटोही के स्थान पर होता तो बाघ की मीठी बातों पर बिल्कुल विश्वास नहीं करता। मैं समझ जाता कि बाघ हमारा स्वाभाविक शत्रु है, और कोई हिंसक जानवर अचानक धर्मात्मा कैसे बन सकता है। मैं सोने के कंगन के लालच में नहीं फँसता, क्योंकि लालच में पड़ना मूर्खता है। मैं अपनी जान बचाना सबसे ज़्यादा ज़रूरी समझता और तुरंत उस जगह से दूर चला जाता या आसपास के लोगों को सूचना देता। मेहनत से कमाई हुई थोड़ी-सी चीज़ ही सबसे क़ीमती होती है — मुफ़्त के लालच में जान गँवाना सबसे बड़ी मूर्खता है।
व्याकरण (Grammar)
वचन बदलो
| एकवचन | बहुवचन |
|---|---|
| बाघ | बाघ |
| बटोही | बटोही |
| कंगन | कंगन |
| तालाब | तालाबों |
| पंजा | पंजे |
| दाँत | दाँतों |
| बात | बातें |
विलोम शब्द
| शब्द | विलोम |
|---|---|
| बूढ़ा | जवान |
| लालच | संतोष |
| शत्रु | मित्र |
| विश्वास | अविश्वास |
| दान | ग्रहण |
| सच | झूठ |
| जीवन | मृत्यु |
| चालाक | भोला |
पर्यायवाची शब्द
| शब्द | पर्यायवाची |
|---|---|
| बाघ | व्याघ्र, शार्दूल |
| बटोही | राहगीर, यात्री, पथिक |
| जंगल | वन, अरण्य, कानन |
| तालाब | पोखर, सरोवर, जलाशय |
| सोना | स्वर्ण, कनक, हेम |
| शत्रु | दुश्मन, बैरी, अरि |
मुहावरे
| मुहावरा | अर्थ |
|---|---|
| लालच बुरी बला है | लालच विनाश का कारण बनता है |
| हाथ मलना | पछताना |
| जाल में फँसना | धोखे या चाल में आ जाना |
| आँखों में धूल झोंकना | धोखा देना |
| मीठी-मीठी बातें करना | चिकनी-चुपड़ी बातों से बहलाना |
Summary (English)
Lesson 10 of ASSEB Class 6 Hindi (Elective) Pallav Bhag-1, “बाघ और बटोही” (The Tiger and the Traveller), is a classic Indian folktale about an old tiger who has lost the strength of his teeth and claws and can no longer hunt. To trap a victim, he sits beside a pond holding a shining gold bracelet and calls out that he wants to give it away in charity. A passing traveller (बटोही) hears him and is overcome by greed for the bracelet. The tiger sweet-talks him, saying he no longer eats meat, has been on pilgrimages and now believes only in charity, and asks the traveller to bathe in the pond first before taking the bracelet. The greedy traveller wades into the pond and gets stuck fast in deep mud. The more he struggles, the deeper he sinks. The tiger walks up to him and kills him. The story leaves a powerful moral — greed is a deadly evil, and one must never trust the sweet words of an enemy. Hasty decisions made under the pull of greed almost always end in disaster, so wisdom and self-control are the true safeguards in life.