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सड़क की बात – Class 10 Hindi Elective Question Answer | ASSEB | आलोक भाग-2

HSLC Guru में आपका स्वागत है। इस लेख में हम ASSEB (असम माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) कक्षा 10 वैकल्पिक हिंदी के पाठ्यपुस्तक आलोक भाग-2 के पाठ 5 – सड़क की बात के सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर प्रस्तुत कर रहे हैं। यह पाठ विश्वकवि रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित एक अत्यंत भावपूर्ण गद्य-निबंध है जिसमें सड़क स्वयं अपनी व्यथा-कथा सुनाती है। यहाँ आपको पाठ-परिचय, लेखक-परिचय, पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्नोत्तर, अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न, बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) तथा शब्दार्थ मिलेंगे जो आपकी HSLC परीक्षा की तैयारी में अत्यंत सहायक होंगे।


पाठ-परिचय (Summary)

‘सड़क की बात’ रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा मूलतः बांग्ला भाषा में लिखित एक दार्शनिक निबंध है, जिसका हिंदी अनुवाद आलोक भाग-2 में सम्मिलित किया गया है। इस अनूठे निबंध में सड़क को एक सजीव पात्र के रूप में चित्रित किया गया है। सड़क स्वयं अपनी बात कहती है — अपने अस्तित्व की, अपनी पीड़ा की, अपने अनुभवों की और उस शाप की जो उसे युगों से जड़ता की अवस्था में पड़े रहने पर विवश किए हुए है। सड़क एक विशाल अजगर की भाँति वनों, जंगलों और पहाड़ों को पार करती हुई जड़निद्रा में पड़ी है और शाप की अंतिम घड़ी का इंतजार कर रही है।

सड़क की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह अपनी जड़निद्रा में भी लाखों पाँवों के स्पर्श से सब कुछ महसूस करती है — ठीक उसी तरह जैसे एक अंधा व्यक्ति स्पर्श मात्र से सब कुछ जान लेता है। उसके ऊपर से गुजरने वाले यात्रियों के पाँवों की चाल से वह जान लेती है कि कौन घर जा रहा है, कौन परदेश जा रहा है, कौन उत्सव में जा रहा है और कौन श्मशान की ओर। जिसके घर हैं उनके पाँव में एक अलग आनंद होता है, और जो निर्गृही हैं उनके पाँव भटकते-भटकते थके होते हैं। सड़क सबकी कहानी सुनती है, पर किसी की कहानी पूरी नहीं सुन पाती — क्योंकि एक के पाँव की बात पूरी होने से पहले दूसरे पाँव आ जाते हैं और पहले के निशान मिट जाते हैं।

सड़क की सबसे गहरी पीड़ा यह है कि वह किसी का लक्ष्य नहीं है — वह केवल साधन है। लोग उसका उपयोग करते हैं अपने-अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए, पर सड़क स्वयं कभी किसी की मंजिल नहीं बनती। जिनके घर दूर हैं वे सड़क को कोसते हैं, जिनके घर पास हैं वे उसे भूल जाते हैं। छोटे-छोटे बच्चे जब उसकी धूल में खेलते हैं, तो सड़क को घर का आनंद मिलता है — क्योंकि बच्चों के निर्मल हृदय से जो स्नेह और प्यार की धाराएँ बहती हैं, वे सड़क की धूल को भी पवित्र कर देती हैं। यह पाठ सेवा, निःस्वार्थता, मानवीय संवेदना और जीवन के दर्शन को बेहद कोमल और मार्मिक ढंग से व्यक्त करता है।

इस निबंध का केंद्रीय संदेश यह है कि जो व्यक्ति या वस्तु निःस्वार्थ भाव से सबकी सेवा करती है, उसे समाज अक्सर भुला देता है या उसका अपमान करता है। सड़क का जीवन इस सत्य का प्रतीक है। रवींद्रनाथ ने इस पाठ के माध्यम से पाठकों में मानवीय संवेदना जागृत करने का प्रयास किया है — कि हमें उन लोगों और साधनों के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए जो हमारे जीवन को सुगम बनाते हैं, भले ही वे मूक रहकर यह कार्य करते हों।


लेखक-परिचय (About the Author)

रवींद्रनाथ ठाकुर (1861–1941) भारतीय साहित्य और संस्कृति के एक अद्वितीय स्तंभ हैं। उनका जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता के जोड़ासाँको में एक प्रतिष्ठित एवं सुसंस्कृत बंगाली परिवार में हुआ था। उनके पिता देवेंद्रनाथ ठाकुर एक प्रसिद्ध दार्शनिक और ब्रह्म समाज के प्रमुख नेता थे। रवींद्रनाथ अपने माता-पिता की तेरहवीं संतान थे।

रवींद्रनाथ की प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता के सेंट जेवियर स्कूल में हुई। बैरिस्टर बनने की इच्छा से वे 1878 में इंग्लैंड गए और लंदन विश्वविद्यालय में कानून का अध्ययन किया, परंतु 1880 में बिना डिग्री प्राप्त किए स्वदेश लौट आए। बाल्यकाल से ही उनमें काव्य-प्रतिभा के असाधारण लक्षण दिखाई देने लगे थे। उन्होंने कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध, संगीत और चित्रकला — साहित्य एवं कला के लगभग सभी क्षेत्रों में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

सन् 1901 में रवींद्रनाथ ने पश्चिम बंगाल के बोलपुर में शांतिनिकेतन की स्थापना की, जो आगे चलकर विश्व-भारती विश्वविद्यालय बन गया। यहाँ उन्होंने शिक्षा के एक नवीन एवं प्रकृति-केंद्रित प्रतिमान को विकसित किया जो भारतीय और पाश्चात्य परंपराओं का समन्वय था। उनकी काव्य-रचना गीतांजलि के अंग्रेजी अनुवाद पर उन्हें सन् 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया — यह सम्मान पाने वाले वे पहले एशियाई थे। इसी उपलब्धि के बाद उन्हें ‘विश्वकवि’ की उपाधि से विभूषित किया गया।

रवींद्रनाथ को ‘गुरुदेव’ के नाम से भी जाना जाता है। महात्मा गांधी को ‘महात्मा’ की उपाधि देने का श्रेय भी रवींद्रनाथ को जाता है। उनकी रचना ‘जन-गण-मन’ भारत का राष्ट्रगान है, तथा ‘आमार सोणार बांग्ला’ बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान है। उनकी प्रमुख कृतियों में गीतांजलि, गोरा, घरे-बाइरे, काबुलीवाला, रबीन्द्र-संगीत आदि सम्मिलित हैं। 7 अगस्त, 1941 को कोलकाता में उनका निधन हुआ। उनकी रचनाएँ आज भी भारत और विश्व साहित्य में अत्यंत आदर के साथ पढ़ी जाती हैं।


पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (Textbook Questions and Answers)

बोध एवं विचार

1. एक शब्द या एक वाक्यांश में उत्तर दीजिए:

(क) ‘सड़क की बात’ निबंध के निबंधकार कौन हैं?

उत्तरः रवींद्रनाथ ठाकुर।

(ख) गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर किस आख्या (उपाधि) से विभूषित हैं?

उत्तरः विश्वकवि।

(ग) रवींद्रनाथ ठाकुर के पिता का नाम क्या था?

उत्तरः देवेंद्रनाथ ठाकुर।

(घ) रवींद्रनाथ ठाकुर की कीर्ति का आधार-स्तंभ कौन-सा काव्य-ग्रंथ है?

उत्तरः गीतांजलि।

(ङ) सड़क किसकी आखिरी घड़ियों का इंतजार कर रही है?

उत्तरः शाप की आखिरी घड़ियों का।

2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दीजिए:

(क) कवि-गुरु रवींद्रनाथ ठाकुर का जन्म कहाँ हुआ था?

उत्तरः कवि-गुरु रवींद्रनाथ ठाकुर का जन्म कोलकाता के जोड़ासाँको में हुआ था।

(ख) रवींद्रनाथ ठाकुर को नोबेल पुरस्कार किस कृति पर मिला?

उत्तरः रवींद्रनाथ ठाकुर को उनकी काव्य-रचना ‘गीतांजलि’ के अंग्रेजी अनुवाद पर सन् 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।

(ग) शांतिनिकेतन की स्थापना किसने और कब की?

उत्तरः शांतिनिकेतन की स्थापना रवींद्रनाथ ठाकुर ने सन् 1901 में पश्चिम बंगाल के बोलपुर में की, जो आगे चलकर विश्व-भारती विश्वविद्यालय बन गया।

(घ) सड़क क्या चाहती है जो वह कर नहीं पाती?

उत्तरः सड़क चाहती है कि वह करवट ले सके, अपनी कड़ी और सूखी सेज पर मुलायम हरी घास बिछा सके और अपने सिरहाने के पास नीले रंग का वन-फूल खिला सके — पर शाप के कारण वह यह कुछ भी नहीं कर पाती।

(ङ) सड़क किसकी तरह सब कुछ महसूस कर सकती है?

उत्तरः सड़क एक अंधे व्यक्ति की तरह स्पर्श मात्र से सब कुछ महसूस कर सकती है। जिस प्रकार अंधा व्यक्ति आँखों के बिना भी स्पर्श और ध्वनि से सब कुछ पहचान लेता है, उसी प्रकार सड़क लाखों पाँवों के स्पर्श से यात्रियों के मन की बात जान लेती है।

3. अति संक्षिप्त उत्तर दीजिए (लगभग 25 शब्दों में):

(क) रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रतिभा का परिचय किन-किन क्षेत्रों में मिलता है?

उत्तरः रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रतिभा कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध, संगीत, चित्रकला तथा शिक्षा आदि अनेक क्षेत्रों में प्रकट होती है। उनकी ‘गीतांजलि’ पर उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला और ‘काबुलीवाला’ कहानी विश्वप्रसिद्ध है।

(ख) शांतिनिकेतन का क्या महत्व है?

उत्तरः शांतिनिकेतन रवींद्रनाथ द्वारा स्थापित एक शैक्षणिक-सांस्कृतिक केंद्र है जहाँ प्रकृति के सान्निध्य में शिक्षा दी जाती है। यह आगे चलकर विश्व-भारती विश्वविद्यालय बना जहाँ कला, संगीत और नृत्य की शिक्षा दी जाती है।

(ग) सड़क शाप-मुक्ति की कामना क्यों करती है?

उत्तरः सड़क शाप के कारण युगों से जड़ निद्रा में पड़ी है। वह करवट लेना चाहती है, अपनी सूखी सेज पर कोमल घास बिछाना चाहती है और वन-फूलों का आनंद लेना चाहती है — इसीलिए वह शाप-मुक्ति की कामना करती है।

(घ) सुखी व्यक्ति के पाँवों की चाल का सड़क पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तरः सुखी और घर वाले व्यक्ति के पाँव में एक विशेष प्रकार की उत्साहमयी चाल होती है। उनके कदमों में आनंद और आशा का भाव झलकता है जिससे सड़क भी एक सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करती है।

(ङ) निर्गृही (बेघर) व्यक्ति के पाँव सड़क को क्या बताते हैं?

उत्तरः निर्गृही व्यक्ति के पाँव में दिशाहीनता, थकान और निराशा होती है। उनके कदम बिना किसी लक्ष्य के भटकते रहते हैं और उनमें न आशा होती है, न कोई उद्देश्य — यही निराशा और बेचैनी सड़क महसूस करती है।

(च) सड़क संसार की कोई भी कहानी पूरी क्यों नहीं सुन पाती?

उत्तरः सड़क पर प्रतिपल अनगिनत पाँव गुजरते रहते हैं, प्रत्येक अपनी अलग कहानी लेकर। जब सड़क किसी एक के पाँव की कहानी सुनने की कोशिश करती है, तभी दूसरे पाँव आकर पहले के निशान को मिटा देते हैं। इसीलिए सड़क कोई भी कहानी पूरी नहीं सुन पाती।

4. संक्षिप्त उत्तर दीजिए (लगभग 50 शब्दों में):

(क) यात्रियों के पाँवों की चाल से सड़क क्या-क्या जान लेती है?

उत्तरः सड़क लाखों-करोड़ों पाँवों के स्पर्श से उनके मन की बात जान लेती है — कौन घर जा रहा है, कौन परदेश निकल पड़ा है, कौन विवाह-उत्सव में जा रहा है और कौन श्मशान की ओर। घर वाले के पाँव में आनंद, बेघर के पाँव में भटकाव, थके हुए मजदूर के पाँव में थकान और बच्चों के पाँव में निर्मल प्रेम — सब कुछ सड़क स्पर्श मात्र से पहचान लेती है। वह एक अंधे व्यक्ति की भाँति केवल स्पर्श से सारी दुनिया को समझ लेती है।

(ख) सड़क घर का आनंद कैसे महसूस करती है?

उत्तरः जब छोटे-छोटे बच्चे हँसते-खिलखिलाते हुए सड़क की धूल में खेलते हैं, तो सड़क घर का आनंद महसूस करती है। बच्चों के पाँव में पिता का आशीर्वाद और माता का स्नेह होता है। उनके निर्मल हृदय से जो प्रेम की धाराएँ बहती हैं, वे सड़क की धूल में भी छू जाती हैं। बच्चे सड़क की धूल से खेलते हुए उससे बातें करते हैं, जिससे सड़क को क्षण भर के लिए घर का-सा सुकून मिलता है।

(ग) “मैं किसी का भी लक्ष्य नहीं हूँ, सबका उपाय मात्र हूँ” — इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तरः सड़क के इस कथन का आशय यह है कि सड़क कभी किसी की मंजिल नहीं होती — वह केवल साधन है। लोग उसका उपयोग अपने घर, अपने काम, अपने उत्सव या अपने अंतिम संस्कार तक पहुँचने के लिए करते हैं। पर कोई भी सड़क पर रुककर उसका आनंद लेने या उसे धन्यवाद देने की नहीं सोचता। जिनके घर दूर होते हैं वे सड़क को कोसते हैं, और जिनके घर पास होते हैं वे उसे भुला देते हैं। यह कथन उन निःस्वार्थ सेवकों की व्यथा को भी दर्शाता है जो समाज के लिए सब कुछ करते हैं पर उन्हें पहचान नहीं मिलती।

(घ) सड़क नित्य आने-जाने वाले यात्रियों को कैसे पहचानती है?

उत्तरः सड़क प्रतिदिन एक ही समय आने-जाने वाले यात्रियों के पाँव की परिचित चाल से उन्हें पहचान लेती है। काम पर जाते समय उनके कदम तेज और उत्साहपूर्ण होते हैं, पर लौटते समय थके और भारी। शाम को जब वे खाली नजरों से घर की ओर लौटते हैं, तब सड़क उनकी थकान और उदासी को पाँवों की भाषा में पढ़ लेती है और मन-ही-मन उनके घर पहुँचने की कामना करती है।

5. दीर्घ उत्तर दीजिए (लगभग 100 शब्दों में):

(क) ‘सड़क की बात’ पाठ में आपको सबसे अधिक कौन-सा प्रसंग मार्मिक लगा और क्यों?

उत्तरः ‘सड़क की बात’ पाठ में मुझे सबसे अधिक मार्मिक प्रसंग वह लगा जिसमें सड़क छोटे बच्चों के पाँव के स्पर्श से घर का आनंद महसूस करती है। सड़क युगों से जड़निद्रा में पड़ी है — वह करवट नहीं ले सकती, मुलायम घास नहीं बिछा सकती, और न ही किसी के प्रेम का प्रत्युत्तर दे सकती है। ऐसे में जब मासूम बच्चे उसकी धूल में खेलते हैं, हँसते हैं, और उससे बातें करते हैं — तब सड़क को पहली बार किसी के साथ एक आत्मीय संबंध का अनुभव होता है। बच्चों के पाँव में उनके माता-पिता का स्नेह होता है, उनमें निर्मलता और निःस्वार्थता होती है। सड़क जानती है कि वह उनके उस प्रेम का उत्तर नहीं दे सकती — पर उस स्पर्श से उसे एक क्षणिक सुकून मिलता है। रवींद्रनाथ ने इस प्रसंग के माध्यम से यह भाव व्यक्त किया है कि निःस्वार्थ सेवक को सबसे अधिक सुख उस निर्मल प्रेम से मिलता है जिसमें कोई स्वार्थ नहीं होता।

(ख) ‘सड़क की बात’ पाठ के माध्यम से रवींद्रनाथ ठाकुर क्या संदेश देना चाहते हैं?

उत्तरः ‘सड़क की बात’ पाठ के माध्यम से रवींद्रनाथ ठाकुर कई गहरे संदेश देना चाहते हैं। प्रथमतः, इस पाठ में सड़क एक निःस्वार्थ सेवक का प्रतीक है — जो युगों से सबकी सेवा करती है, पर बदले में अपमान और उपेक्षा पाती है। रवींद्रनाथ यह बताना चाहते हैं कि समाज में ऐसे अनेक व्यक्ति या साधन होते हैं जो मूक रहकर सबकी मदद करते हैं, पर उनके योगदान को कोई नहीं पहचानता। द्वितीयतः, सड़क का यह कहना कि “मैं किसी का लक्ष्य नहीं, सबका उपाय मात्र हूँ” — यह जीवन दर्शन है कि निःस्वार्थ सेवा ही श्रेष्ठ जीवन है, भले ही उसे पहचान न मिले। तृतीयतः, पाठ यह भी बताता है कि मानव जीवन क्षणभंगुर है — पाँव आते हैं और निशान मिट जाते हैं, पर सड़क अटल रहती है। अंत में, रवींद्रनाथ हमें उन साधनों और लोगों के प्रति कृतज्ञ होने की प्रेरणा देते हैं जो हमारे जीवन को सुगम बनाते हैं।

(ग) सड़क के जीवन का वर्णन करते हुए बताइए कि वह मानव-जीवन के बारे में क्या सच्चाइयाँ उजागर करती है?

उत्तरः सड़क अपने जड़ अस्तित्व के माध्यम से मानव-जीवन की कई महत्वपूर्ण सच्चाइयाँ उजागर करती है। पहली सच्चाई यह है कि मानव-जीवन क्षणभंगुर है — लाखों पाँव सड़क पर से गुजरते हैं, पर किसी के निशान स्थायी नहीं रहते; दूसरों के आने से पहले के निशान मिट जाते हैं। यह जीवन की नश्वरता का प्रतीक है। दूसरी सच्चाई यह है कि धन-सम्पत्ति और गृहस्थी वाले सुखी होते हैं, जबकि बेघर और निर्धन दुखी — यह सामाजिक असमानता की वास्तविकता है। तीसरी सच्चाई यह है कि मानव स्वभाव कृतघ्न है — जो सड़क उन्हें उनके गंतव्य तक पहुँचाती है, उसी को वे कोसते हैं। चौथी और सबसे गहरी सच्चाई यह है कि जीवन में असली सुख निःस्वार्थ सेवा और शुद्ध प्रेम में निहित है, जैसे बच्चों का स्नेह सड़क को क्षण भर की शांति देता है।

6. सप्रसंग व्याख्या कीजिए:

(क) “मैं शायद किसी के शाप से चिरनिद्रित सुदीर्घ अजगर की भाँति वन-जंगल और पहाड़ों से गुजरती हुई बहुत दिनों से बेहोशी की नींद सो रही हूँ।”

उत्तरः प्रसंग: यह अवतरण ‘सड़क की बात’ पाठ से लिया गया है जिसके रचनाकार रवींद्रनाथ ठाकुर हैं। इसमें सड़क अपना आत्म-परिचय देते हुए अपनी विवशता का वर्णन कर रही है।

व्याख्या: सड़क कहती है कि वह मानो किसी के शाप के कारण एक चिर-निद्रित विशाल अजगर की भाँति वन, जंगल और पहाड़ों को पार करती हुई जड़निद्रा में पड़ी है। इस उपमा के माध्यम से रवींद्रनाथ ने सड़क की दीर्घता और उसकी जड़ता का अत्यंत सटीक चित्रण किया है। जिस प्रकार एक अजगर कहीं बेसुध पड़ा रहता है — वह हिल नहीं सकता, जाग नहीं सकता — उसी प्रकार सड़क भी युगों से एक ही स्थान पर पड़ी है। यह शाप उसकी अगतिशीलता का प्रतीक है। इस पंक्ति से सड़क की व्यथा और उसकी मुक्ति की चाहत का मार्मिक चित्र उभरता है।

(ख) “मैं किसी का भी लक्ष्य नहीं हूँ। सबका उपाय मात्र हूँ।”

उत्तरः प्रसंग: यह कथन सड़क द्वारा अपनी स्थिति का सार प्रस्तुत करते हुए कहा गया है। यह ‘सड़क की बात’ पाठ का एक केंद्रीय भाव है।

व्याख्या: सड़क इस कथन में अपनी सबसे बड़ी पीड़ा व्यक्त करती है। वह कहती है कि वह कभी किसी का गंतव्य नहीं बनती — कोई भी उस पर रुकने या उसे देखने नहीं आता। सभी उसका उपयोग केवल साधन के रूप में करते हैं। यह कथन समाज के उन व्यक्तियों की व्यथा का प्रतीक है जो जीवन भर दूसरों की सेवा करते हैं पर उन्हें न पहचान मिलती है, न कृतज्ञता। रवींद्रनाथ यहाँ निःस्वार्थ सेवा के दर्शन को व्यक्त करते हैं — कि सच्ची सेवा वही है जो बिना किसी अपेक्षा के की जाए।

(ग) “मैं अपनी जड़ निद्रा में लाखों पाँवों के स्पर्श से उनके ह्रदय की बात पढ़ती रहती हूँ।”

उत्तरः प्रसंग: यह वाक्य ‘सड़क की बात’ पाठ से लिया गया है। इसमें सड़क अपनी अनूठी संवेदनशीलता का वर्णन कर रही है।

व्याख्या: सड़क का यह कथन अत्यंत गहरा है। वह कहती है कि भले ही वह जड़निद्रा में है और देख नहीं सकती, पर लाखों पाँवों के स्पर्श से वह यात्रियों के हृदय की बात पढ़ लेती है। यह उपमा एक अंधे व्यक्ति की असाधारण स्पर्श-शक्ति से मेल खाती है। इस पंक्ति का गहरा अर्थ यह है कि जो व्यक्ति संवेदनशील होता है, वह बाहरी दिखावे के बिना भी दूसरों की पीड़ा और सुख को महसूस कर सकता है। रवींद्रनाथ यहाँ सड़क की माध्यम से मानवीय संवेदना की शक्ति का बखान करते हैं।

7. भाषा-अध्ययन

(क) निम्नलिखित शब्दों का समास-विग्रह कीजिए और समास का नाम बताइए:

समस्त पद विग्रह समास का नाम
दिन-रात दिन और रात द्वंद्व समास
जड़निद्रा जड़ (की सी) निद्रा कर्मधारय समास
चौराहा चार राहों का समाहार द्विगु समास
प्रतिदिन प्रत्येक दिन अव्ययीभाव समास
वन-जंगल वन और जंगल द्वंद्व समास

(ख) निम्नलिखित शब्दों में उपसर्ग लगाकर नए शब्द बनाइए:

उपसर्ग मूल शब्द नया शब्द
परा जय पराजय
अप मान अपमान
सु गम सुगम
नि गृह निर्गृही
वि शेष विशेष

(ग) निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखिए:

शब्द पर्यायवाची
सड़क पथ, राह, मार्ग, रास्ता
आनंद हर्ष, प्रसन्नता, सुख, उल्लास
पाँव पैर, चरण, पद, पग
घर गृह, आवास, निवास, भवन
शाप अभिशाप, बद्दुआ, कोप

(घ) निम्नलिखित शब्दों के विपरीतार्थक शब्द लिखिए:

शब्द विपरीतार्थक
शाप वरदान
आशा निराशा
जन्म मृत्यु
सुख दुख
लक्ष्य अलक्ष्य / भटकाव
निर्गृही सगृही / घर वाला

(ङ) निम्नलिखित की संधि-विच्छेद कीजिए:

शब्द संधि-विच्छेद संधि का नाम
सर्वदा सर्व + दा स्वर संधि
विद्यालय विद्या + आलय दीर्घ संधि
देवेंद्र देव + इंद्र गुण संधि
निर्गृही निर् + गृही विसर्ग संधि

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Additional Important Questions)

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 1. सड़क अपनी तुलना किससे करती है और क्यों?

उत्तरः सड़क अपनी तुलना एक अंधे व्यक्ति से करती है। जिस प्रकार एक अंधा व्यक्ति आँखों की रोशनी न होते हुए भी स्पर्श, ध्वनि और अनुभव से सब कुछ पहचान लेता है, उसी प्रकार सड़क भी जड़निद्रा में होने के बावजूद लाखों पाँवों के स्पर्श से यात्रियों के मन और हृदय की बात जान लेती है। यह उपमा सड़क की असाधारण संवेदनशीलता को व्यक्त करती है।

प्रश्न 2. सड़क किनके पाँव से सबसे अधिक व्यथित होती है और क्यों?

उत्तरः सड़क उन लोगों के पाँव से सबसे अधिक व्यथित होती है जो उसे कोसते हैं — जिनके घर दूर हैं और जो सोचते हैं कि सड़क लंबी और दुर्गम है। ऐसे लोग सड़क की सेवा का कोई आदर नहीं करते। इसके अलावा, निर्गृही (बेघर) लोगों के भटकते पाँव भी सड़क को दुखी करते हैं क्योंकि उनके कदमों में दिशाहीनता और निराशा होती है।

प्रश्न 3. ‘सड़क की बात’ पाठ में मानवीकरण (Personification) का प्रयोग कैसे किया गया है?

उत्तरः इस पाठ में सड़क को एक सजीव इंसान की तरह प्रस्तुत किया गया है — वह सोती है, स्वप्न देखती है, महसूस करती है, व्यथित होती है, आनंद लेती है और अपनी इच्छाएँ व्यक्त करती है। यह मानवीकरण का सर्वोत्तम उदाहरण है। सड़क की आकांक्षाएँ, पीड़ाएँ और अनुभूतियाँ किसी मनुष्य की तरह ही अभिव्यक्त की गई हैं, जिससे पाठक सड़क के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाता है।

प्रश्न 4. रवींद्रनाथ ठाकुर ने किस भाषा में मूलतः ‘सड़क की बात’ लिखा था?

उत्तरः रवींद्रनाथ ठाकुर ने ‘सड़क की बात’ मूलतः बांग्ला भाषा में लिखा था। इसका हिंदी अनुवाद किया गया और इसे ASSEB (असम माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) के कक्षा 10 वैकल्पिक हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘आलोक भाग-2’ में सम्मिलित किया गया है।

प्रश्न 5. ‘सड़क की बात’ पाठ में श्मशान जाने वालों के पाँव का वर्णन किस प्रकार किया गया है?

उत्तरः सड़क बताती है कि श्मशान जाने वालों के पाँव में एक भारीपन, उदासी और शोक होता है। उनके कदम धीरे और बोझिल होते हैं। जीवन की इस अंतिम यात्रा में लोग मौन और गमगीन रहते हैं। सड़क उनके इस दुख को स्पर्श-मात्र से समझ लेती है। यह वर्णन जीवन की नश्वरता और मृत्यु की अनिवार्यता को रेखांकित करता है।

प्रश्न 6. सड़क अपनी कड़ी सेज को मुलायम क्यों बनाना चाहती है?

उत्तरः सड़क की सतह कठोर, सूखी और कठिन है। उस पर न कोमल घास उग सकती है, न फूल खिल सकते हैं। शाप के कारण वह करवट भी नहीं ले सकती। इसीलिए वह चाहती है कि काश वह अपनी सूखी सेज पर मुलायम हरी घास बिछा पाती और अपने पास नीले वन-फूल खिला पाती। यह उसकी सौंदर्य-आकांक्षा और एक सामान्य जीवन जीने की इच्छा का प्रतीक है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 1. ‘सड़क की बात’ पाठ में सड़क की किन-किन विशेषताओं का वर्णन किया गया है? विस्तार से लिखिए।

उत्तरः ‘सड़क की बात’ पाठ में सड़क की कई विशेषताओं का वर्णन किया गया है:

  • जड़ता और शाप: सड़क एक विशाल अजगर की भाँति जड़निद्रा में पड़ी है। वह चाहकर भी करवट नहीं ले सकती, अपनी स्थिति नहीं बदल सकती।
  • असाधारण संवेदनशीलता: वह अंधे की तरह लाखों पाँवों के स्पर्श मात्र से यात्रियों के मन की बात जान लेती है — कौन खुश है, कौन दुखी, कौन घर जा रहा है, कौन श्मशान।
  • निःस्वार्थ सेवा: सड़क सबकी सेवा करती है — गरीब-अमीर, खुशी-गम — सभी के लिए एक समान। वह किसी के साथ भेदभाव नहीं करती।
  • कृतज्ञता की चाह नहीं: सड़क जानती है कि वह किसी का लक्ष्य नहीं, केवल साधन है। फिर भी वह अपना कर्तव्य निभाती रहती है।
  • बच्चों के प्रति विशेष प्रेम: बच्चों के निर्मल स्पर्श से सड़क को सबसे अधिक सुकून मिलता है — यह उसकी भावनात्मक पहचान है।
  • शाप-मुक्ति की कामना: वह शाप की आखिरी घड़ियों का इंतजार करती है ताकि एक दिन वह स्वतंत्र हो सके और प्रकृति का आनंद ले सके।

इन विशेषताओं के माध्यम से रवींद्रनाथ ने सड़क को एक ऐसे पात्र के रूप में प्रस्तुत किया है जो समाज के निःस्वार्थ सेवकों का प्रतिनिधित्व करती है।

प्रश्न 2. रवींद्रनाथ ठाकुर का साहित्यिक योगदान किस प्रकार विश्व-साहित्य में अद्वितीय है? ‘सड़क की बात’ के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।

उत्तरः रवींद्रनाथ ठाकुर का साहित्यिक योगदान विश्व-साहित्य में अद्वितीय इसलिए है क्योंकि उन्होंने कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध, संगीत और चित्रकला — सभी विधाओं में मौलिक और कालजयी रचनाएँ कीं। उनकी ‘गीतांजलि’ पर 1913 में नोबेल पुरस्कार मिला, जो किसी एशियाई को मिला पहला नोबेल पुरस्कार था। ‘काबुलीवाला’, ‘गोरा’, ‘घरे-बाइरे’ जैसी कृतियाँ आज भी विश्वभर में पढ़ी जाती हैं। उनके लगभग 2,230 गीत जो ‘रवीन्द्र-संगीत’ के नाम से प्रसिद्ध हैं, बांग्ला संस्कृति का अभिन्न अंग बन गए हैं।

‘सड़क की बात’ के संदर्भ में देखें तो यह पाठ उनकी दार्शनिक दृष्टि का प्रमाण है। एक जड़ वस्तु — सड़क — को वे इतनी भावमयता और दर्शन से भर देते हैं कि पाठक उसकी व्यथा को अपनी व्यथा महसूस करने लगता है। यही रवींद्रनाथ की साहित्यिक महानता है — वे सामान्य में असामान्य को, और जड़ में चेतन को देखते हैं।

प्रश्न 3. ‘सड़क की बात’ पाठ में निहित सामाजिक संदेश को अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

उत्तरः ‘सड़क की बात’ का सामाजिक संदेश अत्यंत गहरा और प्रासंगिक है। इस पाठ में सड़क समाज के उन सभी निःस्वार्थ सेवकों का प्रतिनिधित्व करती है जो जीवन भर दूसरों की सेवा करते हैं पर बदले में केवल उपेक्षा और अपमान पाते हैं। किसान जो अनाज उगाता है, मजदूर जो भवन बनाता है, शिक्षक जो ज्ञान देता है — ये सभी समाज के ‘सड़क’ हैं।

पाठ का यह संदेश है कि हमें अपने आसपास के उन साधनों और व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए जो मूक रहकर हमारी मदद करते हैं। साथ ही यह भी कि निःस्वार्थ सेवा ही जीवन का सर्वोच्च आदर्श है। सड़क कभी यह नहीं कहती कि उसे पुरस्कार दो — वह बस अपना कर्तव्य निभाती रहती है और शाप-मुक्ति की प्रतीक्षा करती रहती है। रवींद्रनाथ हमें यह सिखाना चाहते हैं कि सेवा का भाव ही मानवता की सबसे बड़ी शक्ति है।


बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

प्रश्न विकल्प A विकल्प B विकल्प C विकल्प D उत्तर
1. ‘सड़क की बात’ के लेखक कौन हैं? प्रेमचंद रवींद्रनाथ ठाकुर हजारीप्रसाद द्विवेदी महादेवी वर्मा B
2. रवींद्रनाथ ठाकुर को किस उपाधि से जाना जाता है? महाकवि राष्ट्रकवि विश्वकवि जनकवि C
3. रवींद्रनाथ ठाकुर का जन्म कहाँ हुआ था? दिल्ली मुम्बई कोलकाता के जोड़ासाँको में वाराणसी C
4. रवींद्रनाथ ठाकुर के पिता का नाम क्या था? विवेकानंद ठाकुर देवेंद्रनाथ ठाकुर द्वारकानाथ ठाकुर राजेंद्रनाथ ठाकुर B
5. रवींद्रनाथ ठाकुर को नोबेल पुरस्कार किस वर्ष मिला? 1910 1911 1912 1913 D
6. सड़क किसकी आखिरी घड़ियों का इंतजार करती है? रात की वर्षा की शाप की यात्री की C
7. सड़क अपनी तुलना किससे करती है? नदी से अंधे व्यक्ति से पेड़ से पहाड़ से B
8. सड़क को किनके पाँव से सबसे अधिक आनंद मिलता है? बड़े-बुजुर्गों से व्यापारियों से छोटे बच्चों से सैनिकों से C
9. सड़क स्वयं को किसका लक्ष्य मानती है? सबका लक्ष्य किसी का नहीं केवल अमीरों का केवल गरीबों का B
10. रवींद्रनाथ ने किसकी स्थापना की? नालंदा विश्वविद्यालय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय शांतिनिकेतन अलीगढ़ विश्वविद्यालय C
11. सड़क किसकी भाँति जड़निद्रा में पड़ी है? शेर की भाँति अजगर की भाँति हाथी की भाँति कछुए की भाँति B
12. रवींद्रनाथ की कीर्ति का आधार-स्तंभ कौन-सा ग्रंथ है? गोरा काबुलीवाला गीतांजलि घरे-बाइरे C
13. बांग्लादेश का राष्ट्रीय गान किसने रचा? नजरुल इस्लाम रवींद्रनाथ ठाकुर बंकिमचंद्र शरतचंद्र B
14. सड़क कब पूरी कहानी नहीं सुन पाती? वर्षा होने पर एक के जाने के पहले दूसरे के आ जाने पर रात होने पर कोई न आने पर B
15. रवींद्रनाथ ठाकुर का निधन कब हुआ? 1940 1941 1942 1943 B

शब्दार्थ (Word Meanings)

शब्द अर्थ
जड़निद्रा गहरी और निश्चल नींद, जिसमें हिलना-डुलना संभव न हो
चिरनिद्रित बहुत लंबे समय से सोया हुआ
सुदीर्घ बहुत लंबा
अजगर एक विशाल और सुस्त साँप; यहाँ सड़क की तुलना में प्रयुक्त
शाप अभिशाप, श्राप, बद्दुआ
शाप-मुक्ति शाप से छुटकारा पाना
निर्गृही घर रहित, बेघर
सेज बिस्तर, शय्या
वन-फूल जंगल में खिलने वाला फूल
आख्या उपाधि, पदवी, नाम
विभूषित सम्मानित, अलंकृत
आधार-स्तंभ मजबूत आधार, मुख्य सहारा
लक्ष्य उद्देश्य, गंतव्य, मंजिल
उपाय साधन, माध्यम, रास्ता
धूल मिट्टी, रज
स्पर्श छूना, महसूस करना
मार्मिक हृदयस्पर्शी, दिल को छू जाने वाला
भटकना दिशाहीन होकर इधर-उधर घूमना
कृतज्ञता आभार, उपकार मानना
कोसना बुरा-भला कहना, शाप देना
निःस्वार्थ बिना किसी स्वार्थ के, परोपकारी
श्मशान मृत शरीर को जलाने का स्थान
सान्निध्य निकटता, समीपता
नश्वर नाशवान, जो एक दिन नष्ट हो जाए
मानवीकरण जड़ या निर्जीव वस्तु को सजीव मानव के समान प्रस्तुत करना

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