HSLC Guru में आपका स्वागत है। इस लेख में हम ASSEB (असम माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) Class 10 Hindi Elective (आलोक भाग-2) के पाठ 2 – “छोटा जादूगर” के सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर प्रस्तुत कर रहे हैं। यह पाठ प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित एक मार्मिक कहानी है जो एक अनाथ-से बालक की मातृभक्ति, आत्मनिर्भरता और साहस की कहानी कहती है। यहाँ आपको पाठ-परिचय, लेखक-परिचय, पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर, अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर, बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) तथा शब्दार्थ सभी एक साथ मिलेंगे। यह सामग्री HSLC परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी है।
पाठ-परिचय (Summary)
“छोटा जादूगर” जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित एक हृदयस्पर्शी कहानी है। इस कहानी का कथानक एक आर्थिक अभाव से ग्रसित परिवार के इर्द-गिर्द बुना गया है। कहानी का केंद्रीय पात्र एक लगभग आठ-दस वर्षीय बालक है जो कार्निवाल के मैदान में चुपचाप बैठकर शरबत पीनेवालों को देख रहा था। उसके गले में फटे कुर्ते के ऊपर से एक मोटी-सी सूत की रस्सी पड़ी थी और जेब में ताश के कुछ पत्ते थे। बालक की आँखों में गरीबी की उदासी होते हुए भी एक अद्भुत दृढ़ता और आत्मविश्वास था।
कहानी का कथावाचक (लेखक) कार्निवाल के मैदान में उस बालक से मिलता है। पूछने पर बालक बताता है कि उसके पिताजी देश के लिए जेल में हैं — यह बात वह बड़े गर्व से कहता है। उसकी माँ बीमार है और वह उनके इलाज के लिए पैसे कमाना चाहता है। वह भिक्षा या दान स्वीकार करने से इनकार करता है और अपने जादू के करतब दिखाकर पैसे कमाना चाहता है। लेखक उसके लिए बारह टिकट खरीद देता है जिससे वह कार्निवाल में खिलौनों पर निशाना लगाता है और पक्का निशानेबाज साबित होते हुए बारह में से बारह खिलौने जीत लेता है। वह अपना परिचय “छोटा जादूगर” के रूप में देता है।
कुछ समय बाद लेखक की मुलाकात कोलकाता के बोटैनिकल गार्डन में उसी बालक से होती है। वहाँ वह बालक अपने जीते हुए खिलौनों को लेकर एक छोटी-सी जादू की दुनिया सजाता है। वह अपनी अद्भुत वाचाल प्रतिभा से खिलौनों को बोलवाता है, गुड़िया का विवाह कराता है, और लोगों का भरपूर मनोरंजन करता है। उपस्थित महिला उसे एक रुपया देती है जिससे वह बहुत प्रसन्न होता है। बालक बताता है कि उसकी माँ अस्पताल के पास एक झोंपड़े में रहती हैं।
कहानी का अंत अत्यंत करुण और भावविभोर करनेवाला है। अंतिम मुलाकात में लेखक देखता है कि वह बालक सड़क के किनारे उदास भाव से करतब दिखा रहा है। पूछने पर वह बताता है कि माँ ने कहा था — “अब मेरी घड़ी समीप है, जल्दी आ जाना।” यह सुनकर लेखक उसे शीघ्र माँ के पास ले जाता है, परंतु तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बालक झोंपड़े में “माँ-माँ” पुकारते हुए दौड़कर घुसता है, किंतु माँ के मुँह से केवल “बे…” निकलकर रह जाता है और उसके दुर्बल हाथ उठकर गिर जाते हैं। बालक माँ से लिपटकर रोने लगता है। यह दृश्य हर पाठक के हृदय को गहराई से छू जाता है।
लेखक-परिचय (About the Author)
जयशंकर प्रसाद (30 जनवरी, 1889 – 15 नवंबर, 1937) हिंदी साहित्य के महान रचनाकार थे। उनका जन्म काशी (वाराणसी) के एक वैश्य परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम देवीप्रसाद था। घर में तंबाकू और सुरती का व्यापार होता था, इसलिए उनके परिवार को “सुँघनी साहु” के नाम से भी जाना जाता था। बचपन में ही माता-पिता का देहांत हो जाने के कारण प्रसाद जी को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। औपचारिक शिक्षा केवल आठवीं कक्षा तक हुई, किंतु स्वाध्याय से उन्होंने संस्कृत, हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी तथा इतिहास और दर्शन का गहन अध्ययन किया।
प्रसाद जी ने अपनी साहित्यिक यात्रा “कलाधर” उपनाम से ब्रज भाषा में कविता लिखकर आरंभ की। बाद में उन्होंने खड़ी बोली हिंदी को अपनाया और हिंदी साहित्य में छायावाद आंदोलन के प्रवर्तक एवं प्रमुख स्तंभ बने। वे हिंदी के चार प्रमुख छायावादी कवियों में से एक हैं — जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा और सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला”। उनकी प्रतिभा बहुआयामी थी — वे कवि, कथाकार, नाटककार और निबंधकार सभी एक साथ थे।
प्रमुख रचनाएँ: उनकी पहली कहानी “ग्राम” (1911) में प्रकाशित हुई थी। उनकी प्रमुख कृतियों में काव्य-संग्रह — झरना (1918), आँसू (1925), लहर (1933), कामायनी (1936); नाटक — चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त, ध्रुवस्वामिनी; उपन्यास — कंकाल, तितली, इरावती; तथा कहानी-संग्रह — छाया, प्रतिध्वनि, आकाशदीप, आँधी आदि प्रमुख हैं। उनका महाकाव्य “कामायनी” हिंदी साहित्य की अमर कृति मानी जाती है। क्षय रोग से पीड़ित होकर मात्र 48 वर्ष की अल्पायु में 15 नवंबर, 1937 को उनका निधन हो गया।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (Textbook Questions and Answers)
बोध एवं विचार
1. सही विकल्प का चयन करो
प्रश्न 1. बाबू जयशंकर प्रसाद का जन्म हुआ था —
उत्तरः (क) काशी में
प्रश्न 2. प्रसाद जी ने अपना साहित्यिक जीवन किस नाम से आरंभ किया था?
उत्तरः (ख) ‘कलाधर’ नाम से
प्रश्न 3. प्रसाद जी का देहवसान हुआ —
उत्तरः (घ) 1937 ई. में
प्रश्न 4. कार्निवाल के मैदान में वह लड़का किन्हें देख रहा था?
उत्तरः (घ) शरबत पीने वालों को
प्रश्न 5. लड़के को जादूगर का कौन-सा खेल अच्छा मालूम हुआ?
उत्तरः (क) खिलौने पर निशाना लगाना
2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो
प्रश्न 1. प्रसाद जी की पहली कहानी का नाम क्या था?
उत्तरः प्रसाद जी की पहली कहानी का नाम “ग्राम” था, जो सन् 1911 में प्रकाशित हुई थी।
प्रश्न 2. प्रसाद जी द्वारा विरचित महाकाव्य कौन-कौन से हैं?
उत्तरः प्रसाद जी द्वारा विरचित प्रमुख महाकाव्य हैं — “लहर” और “कामायनी”।
प्रश्न 3. बालक ने उस जादूगर के बारे में क्या कहा?
उत्तरः बालक ने उस जादूगर के बारे में कहा कि वह निकम्मा है। उसके अनुसार उस जादूगर का खेल उतना अच्छा नहीं था और वह स्वयं उससे बेहतर जादू दिखा सकता है।
प्रश्न 4. श्रीमान ने कितने टिकट खरीदकर लड़के को दिए थे?
उत्तरः श्रीमान (लेखक) ने बारह टिकट खरीदकर लड़के को दिए थे।
प्रश्न 5. लड़के ने हिंडोले से अपना परिचय किस प्रकार दिया था?
उत्तरः लड़के ने हिंडोले (लेखक) से अपना परिचय “छोटा जादूगर” के रूप में दिया था। उसने कहा — “छोटा जादूगर कहिए। यही मेरा नाम है। इसी से मेरी जीविका है।”
3. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में)
प्रश्न 1. बालक (छोटे जादूगर) को किसने बहुत ही शीघ्र चतुर बना दिया था?
उत्तरः बालक को गरीबी और आवश्यकताओं ने बहुत ही शीघ्र चतुर बना दिया था। जीवन की कठिन परिस्थितियों और आर्थिक अभाव ने उसे अपनी उम्र से कहीं अधिक समझदार और व्यावहारिक बना दिया था।
प्रश्न 2. निशानेबाज के रूप में छोटे जादूगर की कार्यकुशलता का वर्णन करो।
उत्तरः निशानेबाज के रूप में छोटा जादूगर एक पक्का और कुशल निशानेबाज साबित हुआ। उसका एक भी गेंद खाली नहीं गया। खिलौने गिराने के खेल में उसने बारह गेंदों में से बारह के बारह खिलौने गिरा दिए और सभी खिलौने बटोर लिए। उसकी यह कुशलता देखकर वहाँ उपस्थित सभी लोग दंग रह गए।
प्रश्न 3. बालक के पिता के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तरः बालक के पिता देश की स्वतंत्रता के लिए जेल में बंद थे। जब लेखक ने उसके पिता के बारे में पूछा, तो बालक ने बड़े गर्व और सीना तानकर बताया कि “बाबूजी देश के लिए जेल में हैं।” पिता की जेल को वह अपमान नहीं, बल्कि गर्व का विषय मानता था। इससे पता चलता है कि उसके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे।
प्रश्न 4. बोटैनिकल गार्डन में बालक ने किस प्रकार अपना खेल दिखाया?
उत्तरः बोटैनिकल गार्डन में बालक ने अपने जीते हुए खिलौनों को सजाकर एक अनोखा खेल दिखाया। उसने अपनी वाचाल प्रतिभा और कल्पनाशक्ति से खिलौनों को जीवंत बना दिया। ताश के पत्ते लाल होते और फिर काले हो जाते थे, गले की सूत की डोर टुकड़े-टुकड़े होकर जुड़ जाती थी, लट्टू अपने आप नाचते थे। उसने गुड़िया का विवाह भी कराया। उसके खेल को देखकर उपस्थित महिला ने उसे एक रुपया दिया।
प्रश्न 5. छोटे जादूगर ने अपनी माँ के बारे में क्या बताया?
उत्तरः छोटे जादूगर ने बताया कि उसकी माँ बहुत बीमार हैं। वे अस्पताल के पास एक झोंपड़े में रहती हैं। वह उनकी दवाई और पथ्य के लिए जादू दिखाकर पैसे कमाता है। अंत में उसने बताया कि माँ ने कहा था कि “मेरी घड़ी समीप है, जल्दी आ जाना।” इससे स्पष्ट होता है कि उसकी माँ की मृत्यु निकट थी और बालक अपनी माँ से बेहद प्रेम करता था।
4. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में)
प्रश्न 1. कहानी के आधार पर छोटे जादूगर की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन करो।
उत्तरः “छोटा जादूगर” कहानी का मुख्य पात्र एक साहसी, आत्मनिर्भर और मातृभक्त बालक है। उसकी प्रमुख चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं —
- आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान: वह अत्यंत निर्धन होने के बावजूद किसी से भिक्षा या दान नहीं माँगता। वह अपने परिश्रम और कौशल से जीविकोपार्जन करता है।
- मातृभक्ति: वह अपनी बीमार माँ की दवाई और देखभाल के लिए दिन-रात परिश्रम करता है। माँ के अंतिम समय में भी वह उनके पास पहुँचने की कोशिश करता है।
- देशभक्ति: पिता के जेल में होने की बात वह गर्व के साथ बताता है, जो उसकी देशभक्तिपूर्ण सोच का परिचय देता है।
- कौशल और प्रतिभा: वह एक कुशल निशानेबाज और बेहतरीन जादूगर है। उसकी वाणी और प्रस्तुति में अद्भुत आकर्षण है।
- परिपक्वता: गरीबी और कठिन परिस्थितियों ने उसे उम्र से पहले ही परिपक्व और चतुर बना दिया है।
उत्तरः कुल मिलाकर, छोटा जादूगर एक ऐसे बालक का प्रतीक है जो विषम परिस्थितियों में भी अपना साहस और आत्मसम्मान नहीं खोता। वह कहानी का नायक ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणापुंज है।
प्रश्न 2. “छोटा जादूगर” कहानी की मूल संवेदना क्या है? स्पष्ट करो।
उत्तरः “छोटा जादूगर” कहानी की मूल संवेदना मातृ-प्रेम, आत्मनिर्भरता और मानवीय करुणा है। इस कहानी में एक छोटे बालक के हृदय में अपनी बीमार माँ के प्रति गहरा प्रेम और कर्तव्यबोध दिखाया गया है। वह बालक न तो भिक्षा माँगता है, न ही किसी का दान स्वीकार करता है। वह अपने जादू के करतब दिखाकर ईमानदारी से पैसे कमाता है और माँ की सेवा करता है। कहानी यह संदेश देती है कि सच्चा प्रेम त्याग और परिश्रम में प्रकट होता है। इसके साथ ही, देशभक्ति और स्वाभिमान का भाव भी कहानी की मूल संवेदना को गहरा करता है। कहानी का करुण अंत — माँ की मृत्यु — पाठक के हृदय को गहराई से छू जाता है और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देता है।
प्रश्न 3. “छोटा जादूगर” कहानी का उद्देश्य क्या है?
उत्तरः “छोटा जादूगर” कहानी का उद्देश्य बालक के मानवीय गुणों — आत्मनिर्भरता, मातृभक्ति, देशभक्ति, स्वाभिमान और परिश्रम — का उद्घाटन करना है। लेखक जयशंकर प्रसाद यह दिखाना चाहते हैं कि विपरीत परिस्थितियाँ मनुष्य को तोड़ती नहीं, बल्कि उसे और मजबूत बनाती हैं। एक बालक जो गरीबी और पारिवारिक कष्टों से घिरा है, वह भी अपने दायित्वों को बखूबी निभाता है। कहानी यह भी सिखाती है कि स्वाभिमान और ईमानदार परिश्रम सबसे बड़ा धन है। इसके साथ ही, कहानी स्वतंत्रता-संग्राम के दौर की पृष्ठभूमि में देशभक्ति के भाव को भी उजागर करती है।
प्रश्न 4. मुहावरों का वाक्य में प्रयोग करो:
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| नौ दो ग्यारह होना | भाग जाना | पुलिस के आते ही चोरों का दल नौ दो ग्यारह हो गया। |
| आँखें बदल जाना | व्यवहार बदल जाना | सफलता मिलते ही उसकी आँखें बदल गईं। |
| घड़ी समीप होना | मृत्यु का समय निकट होना | वृद्ध दादाजी ने कहा — “लगता है अब मेरी घड़ी समीप है।” |
| दंग रह जाना | आश्चर्यचकित हो जाना | छोटे जादूगर के खेल देखकर सब दंग रह गए। |
| श्रीगणेश होना | आरंभ होना | विद्यालय के नए सत्र का श्रीगणेश आज से हुआ। |
अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Additional Important Questions)
लघु-उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
प्रश्न 1. कार्निवाल के मैदान में लड़के का वेश कैसा था?
उत्तरः कार्निवाल के मैदान में लड़के का वेश अत्यंत साधारण और गरीबी को दर्शाने वाला था। उसने एक फटा हुआ कुर्ता पहन रखा था और उसके ऊपर गले में एक मोटी-सी सूत की रस्सी पड़ी थी। उसकी जेब में ताश के कुछ पत्ते थे। उसका वेश भले ही दरिद्र था, परंतु उसकी आँखों में एक अजीब-सी दृढ़ता और आत्मविश्वास चमक रहा था।
प्रश्न 2. बालक ने लेखक से पैसे क्यों नहीं लिए?
उत्तरः बालक बेहद स्वाभिमानी था। जब लेखक ने उसे सीधे पैसे देने की कोशिश की, तो उसने उन्हें लेने से मना कर दिया क्योंकि वह भिक्षा या दान स्वीकार नहीं करना चाहता था। उसका मानना था कि वह जादू के करतब दिखाकर ईमानदारी से पैसे कमाएगा। इसीलिए उसने लेखक से कहा कि वह उसके लिए टिकट खरीद दें ताकि वह खेल दिखाकर खिलौने जीत सके।
प्रश्न 3. छोटे जादूगर की माँ कहाँ रहती थी और उनकी क्या स्थिति थी?
उत्तरः छोटे जादूगर की माँ कोलकाता के एक अस्पताल के निकट एक छोटी-सी झोंपड़ी में रहती थीं। वे अत्यंत बीमार थीं। बालक उनकी दवाई और पथ्य के लिए जादू दिखाकर पैसे कमाता था। कहानी के अंत में जब बालक माँ के पास दौड़कर पहुँचा, तब तक वे अंतिम साँसें ले रही थीं और उनके दुर्बल हाथ उठकर गिर गए — अर्थात् उन्होंने प्राण त्याग दिए।
प्रश्न 4. “छोटा जादूगर” कहानी में देशभक्ति का भाव किस प्रकार व्यक्त हुआ है?
उत्तरः “छोटा जादूगर” कहानी में देशभक्ति का भाव बालक के पिता के माध्यम से व्यक्त हुआ है। जब लेखक ने बालक के पिता के बारे में पूछा, तो बालक ने बड़े गर्व और उत्साह के साथ कहा — “बाबूजी देश के लिए जेल में हैं।” पिता की जेल को वह शर्म का नहीं, बल्कि गर्व का विषय मानता था। इससे पता चलता है कि बालक के परिवार में देशभक्ति की भावना गहरी जड़ें जमाए हुए थी। उसके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे और इस तथ्य को याद करके बालक प्रेरित होता था।
प्रश्न 5. कहानी के किस प्रसंग से पता चलता है कि बालक बहुत चतुर था?
उत्तरः कहानी के कई प्रसंगों से पता चलता है कि बालक बहुत चतुर था। पहला — उसने कार्निवाल में जादूगर के खेल को निकम्मा बताया, जो उसकी समझ और आत्मविश्वास को दिखाता है। दूसरा — उसने लेखक से सीधे पैसे न लेकर टिकट खरीदवाए और खेल दिखाकर खिलौने जीते। तीसरा — बोटैनिकल गार्डन में उसने खिलौनों से अनूठा जादू का खेल प्रस्तुत किया। उसकी वाकपटुता और व्यवहारकुशलता से भी यह स्पष्ट होता है कि गरीबी और आवश्यकता ने उसे बहुत जल्दी चतुर और परिपक्व बना दिया था।
प्रश्न 6. कहानी का वातावरण किस प्रकार का है?
उत्तरः “छोटा जादूगर” कहानी का वातावरण स्वतंत्रता-पूर्व भारत की गरीबी और सामाजिक विषमता को दर्शाता है। कार्निवाल के जगमगाते मैदान और एक फटे कुर्ते में खड़े बालक का विरोधाभास कहानी के वातावरण को और भी मार्मिक बनाता है। कोलकाता का बोटैनिकल गार्डन और अस्पताल के निकट की झोंपड़ी — ये दोनों स्थान मिलकर समाज की खुशहाली और गरीबी के बीच की खाई को उजागर करते हैं। कहानी का समग्र वातावरण करुण, यथार्थवादी और भावनात्मक है।
दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्रश्न 1. “छोटा जादूगर” कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तरः “छोटा जादूगर” जयशंकर प्रसाद की एक हृदयस्पर्शी कहानी है। कहानी का आरंभ एक कार्निवाल के मैदान से होता है जहाँ लेखक एक छोटे बालक को देखता है। बालक फटे कुर्ते और गले में सूत की रस्सी के साथ चुपचाप शरबत पीने वालों को देख रहा था। पूछने पर बालक बताता है कि उसके पिताजी देश के लिए जेल में हैं और माँ बीमार हैं। वह जादू दिखाकर पैसे कमाना चाहता है। लेखक उसके लिए बारह टिकट खरीद देता है और बालक पक्का निशानेबाज साबित होते हुए बारह में से बारह खिलौने जीत लेता है। वह अपना नाम “छोटा जादूगर” बताता है।
कुछ समय बाद कोलकाता के बोटैनिकल गार्डन में लेखक की उसी बालक से दोबारा मुलाकात होती है। वहाँ वह अपने जीते हुए खिलौनों से एक मनोरंजक जादू का खेल दिखाता है। उपस्थित महिला उसे एक रुपया देती है। बालक बताता है कि उसकी माँ अस्पताल के निकट एक झोंपड़े में रहती हैं।
कहानी का अंत अत्यंत करुण है। अंतिम मुलाकात में बालक उदास होकर सड़क के किनारे करतब दिखा रहा होता है। वह बताता है कि माँ ने कहा था — “मेरी घड़ी समीप है, जल्दी आ जाना।” लेखक उसे तत्काल माँ के पास ले जाता है, परंतु वे अंतिम साँसें ले रही होती हैं। बालक “माँ-माँ” पुकारते हुए दौड़कर झोंपड़े में घुसता है, किंतु माँ के मुँह से “बे…” निकलकर रह जाता है और उनके दुर्बल हाथ उठकर गिर जाते हैं। बालक माँ से लिपटकर रोने लगता है। यह दृश्य पाठक के हृदय को गहराई से व्याकुल कर देता है।
प्रश्न 2. छोटे जादूगर और लेखक के बीच कार्निवाल में हुई पहली मुलाकात का वर्णन करो।
उत्तरः कार्निवाल के जगमगाते मैदान में लेखक की पहली मुलाकात छोटे जादूगर से हुई। वह बालक चुपचाप एक किनारे खड़ा होकर शरबत पीने वालों को देख रहा था। उसने फटा कुर्ता पहन रखा था, गले में सूत की रस्सी थी और जेब में ताश के पत्ते। उसकी आँखों में गरीबी की उदासी थी, किंतु चेहरे पर एक अजीब-सी दृढ़ता भी थी।
लेखक ने उसे शरबत पिलाने की पेशकश की, जिसे बालक ने शुरू में संकोच से मना किया, फिर माँगने पर स्वीकार किया। बातचीत में पता चला कि उसके पिता देश के लिए जेल में हैं — यह बात उसने गर्व के साथ कही। माँ बीमार है। वह जादू दिखाकर पैसे कमाना चाहता है, भिक्षा नहीं। लेखक ने उसके लिए बारह टिकट खरीदे। उस बालक ने खिलौनों पर निशाना लगाने के खेल में बारह में से बारह खिलौने जीत लिए। उसकी यह कुशलता देखकर लेखक आश्चर्यचकित हो गया। बालक ने अपना नाम “छोटा जादूगर” बताया और कहा — “यही मेरा नाम है, इसी से मेरी जीविका है।” इस पहली मुलाकात में बालक की आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और प्रतिभा ने लेखक को गहरे प्रभावित किया।
प्रश्न 3. “छोटा जादूगर” कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? विस्तार से लिखिए।
उत्तरः “छोटा जादूगर” कहानी हमें जीवन के अनेक महत्वपूर्ण मूल्यों और शिक्षाओं से परिचित कराती है —
- आत्मनिर्भरता की शिक्षा: छोटा जादूगर अत्यंत गरीब होने के बावजूद किसी के सामने हाथ नहीं फैलाता। वह अपने कौशल और परिश्रम से जीविका कमाता है। यह हमें सिखाता है कि परिश्रम और आत्मनिर्भरता ही जीवन की सच्ची नींव है।
- मातृ-प्रेम और कर्तव्यबोध: बालक अपनी बीमार माँ की देखभाल के लिए अपना सर्वस्व लगा देता है। वह अपनी माँ को खुश देखने के लिए दिन-रात कठोर परिश्रम करता है। यह हमें माता-पिता के प्रति कर्तव्य-पालन का पाठ पढ़ाता है।
- देशभक्ति: उसके पिता देश के लिए जेल में हैं और बालक इस पर गर्व करता है। यह हमें देशप्रेम और राष्ट्रीय भावना की प्रेरणा देता है।
- विपरीत परिस्थितियों में धैर्य: तमाम कठिनाइयों के बावजूद बालक अपना काम करता रहता है और हार नहीं मानता। यह हमें जीवन की विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की सीख देता है।
- स्वाभिमान: वह दान और भिक्षा को अस्वीकार करके अपना स्वाभिमान बनाए रखता है, जो हमें आत्मसम्मान के साथ जीने की प्रेरणा देता है।
इस प्रकार, “छोटा जादूगर” कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, व्यक्ति को अपना साहस, स्वाभिमान और कर्तव्यनिष्ठा नहीं छोड़नी चाहिए।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
| प्रश्न | विकल्प A | विकल्प B | विकल्प C | विकल्प D | उत्तर |
|---|---|---|---|---|---|
| जयशंकर प्रसाद का जन्म कहाँ हुआ था? | इलाहाबाद | काशी (वाराणसी) | लखनऊ | दिल्ली | काशी (वाराणसी) |
| प्रसाद जी ने साहित्यिक जीवन किस उपनाम से आरंभ किया? | निराला | पंत | कलाधर | दिनकर | कलाधर |
| प्रसाद जी का देहावसान किस वर्ष हुआ? | 1920 | 1930 | 1937 | 1945 | 1937 |
| कार्निवाल में लड़का किन्हें देख रहा था? | जादूगर को | खिलौनेवालों को | शरबत पीने वालों को | नर्तकियों को | शरबत पीने वालों को |
| लड़के को जादूगर का कौन-सा खेल पसंद आया? | रस्सी का खेल | खिलौने पर निशाना लगाना | ताश का खेल | आग का खेल | खिलौने पर निशाना लगाना |
| लेखक ने बालक के लिए कितने टिकट खरीदे? | दस | पाँच | बीस | बारह | बारह |
| बालक ने अपना नाम क्या बताया? | नटखट | छोटा जादूगर | बाजीगर | करतबी | छोटा जादूगर |
| बालक के पिता किस कारण जेल में थे? | चोरी के कारण | झगड़े के कारण | देश के लिए | कर्ज के कारण | देश के लिए |
| बोटैनिकल गार्डन में महिला ने बालक को कितने पैसे दिए? | दो रुपए | पचास पैसे | एक रुपया | पाँच रुपए | एक रुपया |
| बालक को शीघ्र चतुर किसने बनाया? | माँ ने | गरीबी और आवश्यकता ने | पिता ने | लेखक ने | गरीबी और आवश्यकता ने |
| कहानी में माँ किसके निकट की झोंपड़ी में रहती थी? | बाजार के | नदी के | अस्पताल के | मंदिर के | अस्पताल के |
| प्रसाद जी की प्रसिद्ध महाकाव्य कृति कौन-सी है? | रामचरितमानस | कामायनी | साकेत | प्रियप्रवास | कामायनी |
शब्दार्थ (Word Meanings)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| कार्निवाल | शहरों में लगने वाला बड़ा मेला / उत्सव |
| विनोद | मनोरंजन, हँसी-मज़ाक |
| कलनाद | मधुर ध्वनि, मनोरम शोर |
| निशानेबाज | सटीक निशाना लगाने वाला |
| करतब | कौशलपूर्ण खेल, जादू के करतब |
| जीविका | आजीविका, जीवन-यापन का साधन |
| पुरुषार्थी | मेहनती, परिश्रमी |
| निकम्मा | बेकार, जो कोई काम न करे |
| पथ्य | रोगी के लिए उचित आहार, दवाई |
| घड़ी समीप होना | मृत्यु का समय निकट आना |
| दुर्बल | कमज़ोर, शक्तिहीन |
| स्वाभिमान | अपने सम्मान की रक्षा, आत्मगौरव |
| आभाव / अभाव | कमी, न होना, गरीबी |
| वाचाल | बातूनी, बहुत बोलने वाला |
| दंग रह जाना | आश्चर्यचकित होना, अवाक् रह जाना |
| श्रीगणेश | शुभ आरंभ, प्रारंभ |
| नौ दो ग्यारह होना | भाग जाना, चले जाना |
| छायावाद | हिंदी साहित्य का एक काव्य-आंदोलन (रहस्यवाद और सौंदर्यवाद) |
| महाकाव्य | बड़ा काव्य ग्रंथ, एपिक पोएम |
| झोंपड़ा / झोंपड़ी | कच्चा घर, गरीबों का घर |
| देहवसान | मृत्यु, निधन |
| आत्मनिर्भरता | स्वयं पर निर्भर रहना, किसी पर आश्रित न रहना |
| दायित्व बोध | जिम्मेदारी का एहसास |
| करुण | दयनीय, दुःखद, भावुक करने वाला |